World Bank Poverty Report: विश्व बैंक की “इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ” रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले 12 साल में करीब 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। सटीक आंकड़ा 49.6 करोड़ बताया गया है, और अब देश की सिर्फ 2.6% आबादी अत्यधिक गरीबी में बची है।
इस रिपोर्ट पर भारत में खूब चर्चा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे प्रगति के सबूत की तरह पेश कर रही है। उसका कहना है कि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक संसद का “मॉक” कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर रैलियां निकाल रहे हैं।
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‘$3 और $4.2 की दो रेखाएं: आंकड़े एक नज़र में’
रिपोर्ट में दो पैमाने इस्तेमाल हुए हैं। रोज $3 से कम कमाने वाला व्यक्ति अत्यधिक गरीबी में गिना जाता है। $3 से $4.2 के बीच कमाने वाला निम्न-मध्यम आय वाली गरीबी में आता है।
| पैमाना | 2011-12 | अब |
|---|---|---|
| अत्यधिक गरीबी ($3 से कम) | 27.1% | 2.6% |
| $4.2 से नीचे वाली गरीबी | 57.7% | 16.1% |
| अत्यधिक गरीबी में बचे लोग | : | करीब 3.5 करोड़ |
| $4.2 से नीचे के लोग | : | करीब 23.2 करोड़ |
अगर गौर करें तो $8.3 के पैमाने पर भी गिरावट आई है, लेकिन उतनी तेज नहीं जितनी $3 और $4.2 पर दिखी।
‘क्या $3 सच में रोज के ₹290 जैसा है? PPP का गणित’
यहां एक बात समझनी जरूरी है। $3 को सीधे डॉलर के भाव से रुपये में बदलकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि अलग-अलग देशों में एक ही सामान की कीमत अलग होती है। इसीलिए आंकड़े PPP (क्रय शक्ति समानता) के हिसाब से निकाले जाते हैं।
2021 की कीमतों के हिसाब से PPP में $3 करीब ₹58 रोज के बराबर बैठता है। यानी यह रेखा आम धारणा से काफी नीची है। साथ ही विश्व बैंक समय-समय पर अपनी रेखाएं बदलता रहता है। 2025 में इन्हें इस तरह बढ़ाया गया।
| श्रेणी | पुरानी रेखा | नई रेखा |
|---|---|---|
| अत्यधिक गरीबी | $2.15 | $3 |
| निम्न-मध्यम आय | $3.65 | $4.2 |
| उच्च-मध्यम आय | $6.85 | करीब $8.3 |
‘गरीबी घटने की तीन वजहें’
रिपोर्ट तीन बड़े कारण गिनाती है। पहला, घरेलू खपत तेजी से बढ़ी है, और खपत तब बढ़ती है जब लोगों की आमदनी बढ़ती है।
दूसरा, रोजगार का विस्तार। 2017 से 2023 के बीच 13.4 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, जो कामकाजी उम्र में नए आने वाले लोगों की संख्या से दोगुना है। इसमें महिलाओं की बढ़ी हिस्सेदारी का खास जिक्र है।
तीसरा, सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं। विश्व बैंक ने खास तौर पर सामाजिक हस्तांतरण और खाद्य सब्सिडी की सराहना की है।
| योजना | क्या फर्क पड़ा |
|---|---|
| पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना | पात्र लोगों को मुफ्त अनाज, खाने पर खर्च बचा |
| मनरेगा | ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का गारंटीड रोजगार |
| उज्ज्वला योजना | LPG कनेक्शन, साफ ईंधन |
| आयुष्मान भारत | ₹5 लाख तक का इलाज कवर, बचत बचती है |
| प्रधानमंत्री आवास योजना | पात्र परिवारों को पक्का घर |
| जल जीवन मिशन | घर पर नल का पानी |
‘गांव बनाम शहर: असली दर्द कहां है’
| पैमाना | ग्रामीण | शहरी |
|---|---|---|
| अत्यधिक गरीबी ($3) | 3.1% | 1.4% |
| $4.2 से नीचे | 19.3% | 8.6% |
ग्रामीण इलाकों में गरीबी ज्यादा होने की वजहें हैं: खेती पर ज्यादा निर्भरता और अचानक बारिश से फसल खराब होने का खतरा, स्थायी और फॉर्मल नौकरियों की कमी, ग्रामीण पेशों में कम उत्पादकता, और स्वास्थ्य-शिक्षा की कमजोर गुणवत्ता।
‘रोजगार की क्वालिटी पर सवाल’
दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट खुद संकेत देती है कि अब रोजगार की गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है। 13.4 करोड़ में बड़ी संख्या अनौपचारिक या कैजुअल काम की हो सकती है। इनमें स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) जैसी नई कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर भी आते हैं, जिनकी कमाई जरूरी नहीं कि बहुत ज्यादा हो।
‘सिर्फ पैसा नहीं, बहुआयामी गरीबी’
गरीबी सिर्फ कमाई से नहीं नापी जाती। बहुआयामी गरीबी में 10 संकेतक होते हैं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा (स्कूली वर्ष, उपस्थिति) और जीवन स्तर (खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता) को देखते हैं।
| दौर | बहुआयामी गरीबी दर |
|---|---|
| शुरुआती आंकड़ा | 53.8% |
| 2019 से 2021 के बीच | 16.4% |
| 2022-23 | 15.5% |
‘आंकड़ों के आगे का सच: गरीबी घटी है, खत्म नहीं हुई’
देखा जाए तो सबसे बड़ी गलती यह होगी कि अत्यधिक गरीबी घटने को गरीबी खत्म होना मान लिया जाए। करीब 3.5 करोड़ लोग अब भी $3 से नीचे और करीब 23 करोड़ लोग $4.2 से नीचे हैं। यह आबादी कई देशों की कुल जनसंख्या से भी बड़ी है।
समझने वाली बात है कि इस गिरावट के पीछे मुफ्त अनाज और सब्सिडी जैसी योजनाएं हैं, जो सीधे खर्च बचाती हैं। इसलिए आगे की चुनौती यह है कि लोग इन योजनाओं के सहारे नहीं, अपनी बेहतर आमदनी के बल पर ऊपर रहें। आम आदमी के लिए इसका मतलब है कि अगला दौर नौकरी की क्वालिटी और गांव की कमाई का होगा।
विश्व बैंक का अनुमान है कि $4.2 वाली गरीबी 14.2% से घटकर 2028 तक 12% हो सकती है। पर यह पक्की भविष्यवाणी नहीं है। जलवायु परिवर्तन, खेती का संकट, खाने-ऊर्जा की कीमतें और महंगाई जैसे जोखिम तस्वीर बदल सकते हैं।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
विश्व बैंक ने 2025 में अपनी गरीबी रेखाएं बढ़ाईं और नई रेखाओं के हिसाब से 2011-12 और बाद के आंकड़ों की तुलना की। उसी आधार पर यह रिपोर्ट आई, जिसने भारत की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- विश्व बैंक के मुताबिक 12 साल में करीब 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए, अब सिर्फ 2.6% आबादी इसमें है।
- गिरावट के तीन कारण बताए गए: खपत में बढ़ोतरी, रोजगार (खासकर महिलाओं में) और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं।
- गांवों में गरीबी अब भी ज्यादा है: $4.2 से नीचे ग्रामीण 19.3% और शहरी 8.6%।
- गरीबी घटी है, खत्म नहीं हुई: करीब 3.5 करोड़ लोग अब भी अत्यधिक गरीबी में हैं।













