Lp(a) Test: साल 2026 में फरीदाबाद के एक अस्पताल की इमरजेंसी में रात करीब 1:30 बजे 20 साल का एक लड़का सीने के तेज दर्द के साथ पहुंचा। जांच में हार्ट अटैक निकला, और डॉक्टरों ने एक घंटे के भीतर एंजियोप्लास्टी करके उसकी जान बचा ली।
इसके बाद अस्पताल के चेयरमैन ने कहा कि 20 साल की उम्र में हार्ट अटैक पूरे समाज के लिए बड़ी चेतावनी है। उन्होंने खास तौर पर उन लोगों को एक ब्लड टेस्ट की सलाह दी, जिनके परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी रही है। यह टेस्ट है लाइपोप्रोटीन ए (Lp(a))।
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‘रात 1:30 बजे इमरजेंसी में क्या हुआ’
लड़के का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और पूरा शरीर पसीने से भीगा था। डॉक्टरों ने ECG किया, फिर एंजियोग्राम। जो निकला, वह किसी भी 20 साल के लड़के के लिए बड़ा झटका था।
दिल की सबसे बड़ी धमनी, जिसे डॉक्टर “विडोमेकर” कहते हैं, पूरी तरह बंद थी। दिल की पंपिंग क्षमता गिरकर करीब 40% रह गई थी। स्टेंट डाला गया, और लड़का समय पर इलाज मिलने से ठीक होकर घर लौट गया।
‘Lp(a) आखिर है क्या: LDL पर चढ़ी चिपचिपी जैकेट’
इसे 1963 में नॉर्वे के वैज्ञानिक केयर बर्ग ने खोजा था। यानी 60 साल से ज्यादा हो गए, फिर भी ज्यादातर लोगों ने इसका नाम तक नहीं सुना।
आसान भाषा में समझें तो Lp(a) एक तरह का LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) कण है, जिस पर एक अतिरिक्त प्रोटीन चिपका होता है। यही चिपचिपी जैकेट असली समस्या है। यह खून के थक्के घोलने वाले प्रोटीन जैसा दिखता है, इसलिए थक्के घुलने के काम में रुकावट डाल सकता है।
इसका मतलब है कि Lp(a) तीन तरफ से वार करता है: धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमाना, सूजन (इनफ्लेमेशन) बढ़ाना और थक्का बनने का खतरा बढ़ाना। यूरोपियन एथेरोस्क्लेरोसिस सोसाइटी की 2022 की सहमति के मुताबिक यह दिल के एऑर्टिक वाल्व में कैल्शियम जमाने का खतरा भी बढ़ा सकता है।
‘भारतीयों में ज्यादा क्यों: आंकड़ों की तस्वीर’
कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक करीब 25% भारतीयों यानी हर चार में से एक में Lp(a) बढ़ा हुआ हो सकता है।
| बिंदु | आंकड़ा |
|---|---|
| भारतीयों में हाई Lp(a) | करीब 25% |
| पश्चिमी देशों में | करीब 15 से 20% |
| भारत में दिल की बीमारी के मरीजों में हाई Lp(a) (एक बड़े कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक) | करीब 34% |
| दक्षिण एशिया में पहला हार्ट अटैक (इंटरहार्ट स्टडी) | औसतन 53 साल |
| बाकी देशों में पहला हार्ट अटैक | औसतन 59 साल |
| एशिया पैसिफिक और मिडिल ईस्ट में जिन्होंने टेस्ट का नाम सुना | 22% |
| जिन्होंने टेस्ट करवाया | 7% |
दिलचस्प बात यह है कि Lp(a) का 90% से ज्यादा हिस्सा जीन से तय होता है। यानी एक इंसान रोज दौड़े, साफ खाए और पतला भी हो, फिर भी माता-पिता से हाई Lp(a) वाला जीन पाकर ज्यादा जोखिम में हो सकता है।
भारत में इसके अलावा डायबिटीज, हाई बीपी, पेट का मोटापा और स्मोकिंग भी ज्यादा हैं। Lp(a) अकेला काम नहीं करता, बाकी जोखिमों के साथ मिलकर खतरा कई गुना कर देता है।
‘कितना Lp(a) हाई माना जाता है’
रिपोर्ट दो यूनिट में आ सकती है: mg/dL या nmol/L। दोनों को सीधे बदलना आसान नहीं है, क्योंकि कणों का आकार हर इंसान में अलग होता है।
| पैमाना | क्या माना जाता है |
|---|---|
| 50 mg/dL से ऊपर | दिल की बीमारी से जुड़ा हो सकता है (कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया) |
| करीब 105 से 125 nmol/L से ऊपर | ज्यादातर गाइडलाइंस में हाई |
| करीब 100 mg/dL | यूरोपियन सहमति के मुताबिक दिल की बीमारी का जोखिम लगभग दोगुना |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह जोखिम है, फैसला नहीं। हाई Lp(a) वाले हर इंसान को अटैक नहीं आएगा, और नॉर्मल वाला हर इंसान सुरक्षित भी नहीं है।
‘तीन बड़े भ्रम और उनकी सच्चाई’
| भ्रम | सच्चाई |
|---|---|
| कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल है तो दिल सेफ है | रूटीन लिपिड प्रोफाइल में Lp(a) का नंबर नहीं दिखता |
| खास डाइट या सप्लीमेंट से Lp(a) घट जाएगा | Lp(a) ज्यादातर जीन से तय होता है, कोई डाइट या सप्लीमेंट इसे सबूत के साथ कम नहीं करता |
| यह टेस्ट हर साल करवाना चाहिए | Lp(a) जिंदगी भर लगभग एक जैसा रहता है, ज्यादातर लोगों को सिर्फ एक बार जांच चाहिए |
प्रेगनेंसी, किडनी की कुछ बीमारियों या डायलिसिस में स्तर थोड़ा बढ़ सकता है। ऐसे में दोबारा टेस्ट डॉक्टर तय करेगा, आप खुद नहीं। और कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली स्टैटिन दवाएं Lp(a) को कम नहीं करतीं। कुछ लोगों में यह थोड़ा बढ़ भी सकता है।
‘दुनिया की गाइडलाइंस क्या कहती हैं’
| संस्था | सिफारिश |
|---|---|
| यूरोपियन एथेरोस्क्लेरोसिस सोसाइटी (2022) | हर वयस्क को जिंदगी में कम से कम एक बार टेस्ट |
| अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (मार्च 2026) | हर वयस्क में कम से कम एक बार माप |
| कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया | जीवन में कम से कम एक बार टेस्ट |
‘सितंबर 2026 का ट्रायल: जिस दवा का इंतजार था, उसका क्या हुआ’
अब तक दुनिया में कोई ऐसी दवा मंजूर नहीं हुई है जो खास तौर पर Lp(a) घटाने के लिए बनी हो। सबसे आगे नोवार्टिस की दवा पेलाकारसेन थी। इसका बड़ा ट्रायल “Lp(a) होराइजन” चला, जिसमें 8,300 से ज्यादा ऐसे मरीज थे जिन्हें दिल की बीमारी थी और Lp(a) हाई था।
4 सितंबर 2026 को नतीजे आए और वे उम्मीद के मुताबिक नहीं थे। दवा ने Lp(a) घटाया, लेकिन हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल से मौत के संयुक्त जोखिम को प्लेसिबो के मुकाबले कम नहीं कर पाई। ट्रायल अपना मुख्य लक्ष्य चूक गया।
वैज्ञानिकों में बहस अभी जारी है। कुछ का कहना है कि Lp(a) की भूमिका शायद उतनी बड़ी नहीं जितनी मानी गई। कुछ का तर्क है कि ट्रायल के मरीजों का LDL पहले से काबू में था, औसतन करीब 66 mg/dL। ओलपासिरान, लेपोडिसिरान और ज़ेरलासिरान जैसी दूसरी दवाओं के नतीजे अलग हो सकते हैं। जेनेटिक्स की स्टडीज अब भी कहती हैं कि जन्म से हाई Lp(a) वालों में दिल की बीमारी ज्यादा होती है।
‘दवा फेल, फिर भी टेस्ट क्यों जरूरी: नंबर नहीं, फैसले बदलते हैं’
देखा जाए तो इस टेस्ट का असली फायदा दवा में नहीं, आपके फैसलों में है। Lp(a) बदला नहीं जा सकता, पर उसे जानने के बाद जो बदला जा सकता है, वह बदलना आसान हो जाता है। LDL का लक्ष्य और नीचे रखा जा सकता है, बीपी-शुगर पर नजर कड़ी हो सकती है और स्मोकिंग छोड़ने की जरूरत और बढ़ जाती है। 2026 की अमेरिकी गाइडलाइंस भी यही कहती हैं।
समझने वाली बात है कि ट्रायल का नतीजा टेस्ट को बेमतलब नहीं बनाता। इसने बस इतना साफ किया कि सिर्फ नंबर घटा देना हार्ट अटैक रुकने की गारंटी नहीं है। एक आम परिवार के लिए इसका मतलब है कि करीब ₹1000 का एक टेस्ट पूरे परिवार के जोखिम की तस्वीर दे सकता है।
‘आम इंसान क्या करे: चार सीधे कदम’
पहला: डॉक्टर से Lp(a) टेस्ट के बारे में पूछें। खासकर तब, जब परिवार में किसी पुरुष को 55 साल से पहले या महिला को 65 साल से पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक हुआ हो, या आपको खुद कम उम्र में दिल की बीमारी हुई हो। यह साधारण ब्लड टेस्ट है, ऑनलाइन लैब प्लेटफॉर्म पर इसकी कीमत लगभग ₹1000 दिखती है और अलग-अलग लैब में थोड़ी अलग हो सकती है।
दूसरा: रिपोर्ट हाई आए तो घबराएं नहीं। यह सिर्फ जोखिम का संकेत है। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा शुरू या बंद न करें।
तीसरा: परिवार को बताएं। जीन से आने के कारण भाई-बहनों और बच्चों में भी इसके हाई होने की संभावना है।
चौथा: जो आपके हाथ में है, उसे कड़ाई से संभालें। स्मोकिंग और वेपिंग बंद करें, रोज कम से कम 30 मिनट चलें या एक्सरसाइज करें और पेट की चर्बी घटाएं। बीपी-शुगर की नियमित जांच कराएं और भारतीय गाइडलाइंस के मुताबिक लिपिड प्रोफाइल 18 साल की उम्र से शुरू करें।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
Lp(a) 1963 में खोजा गया, पर आज भी रूटीन कोलेस्ट्रॉल जांच का हिस्सा नहीं है। 2022 में यूरोप, मार्च 2026 में अमेरिका और भारत की गाइडलाइंस ने जिंदगी में एक बार इसकी जांच की सलाह दी। सितंबर 2026 में पेलाकारसेन ट्रायल के नतीजों ने दवा के सवाल पर बहस और तेज कर दी।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- Lp(a) एक जीन से तय होने वाला जोखिम है जो रूटीन लिपिड प्रोफाइल में नहीं दिखता, और करीब 25% भारतीयों में बढ़ा हो सकता है।
- भारत, यूरोप और अमेरिका की गाइडलाइंस जिंदगी में कम से कम एक बार जांच की सलाह देती हैं।
- 4 सितंबर 2026 को पेलाकारसेन ट्रायल में दवा ने Lp(a) घटाया, पर अटैक-स्ट्रोक का संयुक्त जोखिम कम नहीं हुआ।
- हाई Lp(a) निकलने पर LDL, बीपी, शुगर और लाइफस्टाइल को ज्यादा सख्ती से संभालना ही असली बचाव है।













