Punjab Congress Infighting इस वक्त दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक सुर्खियों में है। बुधवार को पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पंजाब इकाई की अंदरूनी कलह पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट AICC के जनरल सेक्रेटरी (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल को सौंप दी। बघेल ने साफ कहा कि पार्टी की लीडरशिप को लेकर कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि गहन विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
देखा जाए तो यह रिपोर्ट उस वक्त सामने आई है जब 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव में सिर्फ डेढ़ साल बचा है। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी।
🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Congress: चन्नी गुट कर रहा है राहुल गांधी से मुलाकात करने की कोशिश, भूपेश बघेल की रिपोर्ट से पहले काउंटर अटैक
‘छह दिन, 92 नेता और एक रिपोर्ट’
बघेल ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले उन्होंने पंजाब में छह दिन तक व्यापक सलाह-मशवरा किया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने पूरे सूबे के नेताओं से मुलाकात की: पंजाब कांग्रेस कमेटी दफ्तर में भी और एक-एक करके भी। उन्हीं चर्चाओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है।”
समझने वाली बात यह है कि इन बैठकों में करीब 92 नेता शामिल हुए। इनमें मौजूदा विधायक भी थे और पूर्व विधायक भी। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर नेताओं ने साफ शब्दों में कहा: उन्हें प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। लेकिन उन्हें भरोसा नहीं कि वड़िंग 2027 में कांग्रेस को दोबारा सत्ता में ला पाएंगे।
🔍 यह भी पढ़ें- 7000 की रिश्वत लेते Punjab Police ASI रंगे हाथों गिरफ्तार, Vigilance Bureau Action
‘वड़िंग का इस्तीफा नहीं, पर सवाल बरकरार’
लीडरशिप बदलाव की अटकलों के बीच बघेल ने एक बात साफ कर दी। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने अब तक कोई इस्तीफा नहीं दिया है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बघेल ने जल्दबाजी वाले फैसलों की अटकलों को भी खारिज किया।
उन्होंने कहा कि लीडरशिप में बदलाव “कठपुतलियों या गुड़ियों का खेल” नहीं है। इसका सीधा मतलब है: हाईकमान नेताओं से मिले फीडबैक की गहराई से जांच करने के बाद ही कोई सोचा-समझा फैसला लेगा।
💡 यह भी पढ़ें- Ration Card Online राशन कार्ड के लिए अब नहीं काटेंगे चक्कर, घर बैठे ‘Ration Card’ बनाएं
‘बाजवा भी पहुंचे वेणुगोपाल के घर’
इसी बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा भी वेणुगोपाल के आवास पर पहुंचे। यह मुलाकात इसलिए अहम है क्योंकि कांग्रेस लीडरशिप पंजाब इकाई के संकट पर लगातार सलाह-मशवरा कर रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह घटनाक्रम एक दिन बाद हुआ जब सीनियर कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वेणुगोपाल के साथ पंजाब की गुटबाजी पर बैठक की थी।
’11 जुलाई की वो बैठक जिसने माहौल बदल दिया’
पूरी लीडरशिप कवायद बघेल की 11 जुलाई की उन बैठकों के बाद तेज हुई, जहां कई सीनियर नेताओं ने खुलकर वड़िंग की लीडरशिप पर सवाल उठाए। बघेल से मिलने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, राणा गुरजीत सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, संगत सिंह गिलजियां, अरुणा चौधरी, ओ.पी. सोनी, परगट सिंह, त्रिप्त राजिंदर सिंह बाजवा और भारत भूषण आशू जैसे दिग्गज शामिल थे।
‘2027 चुनाव पर टिकी हैं निगाहें’
अब कांग्रेस हाईकमान से उम्मीद है कि वह पंजाब में संगठनात्मक मुद्दों पर अंतिम फैसला लेने से पहले बघेल की रिपोर्ट की गहराई से जांच करेगा। सवाल उठता है: क्या 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल होगा? या फिर वड़िंग को ही मौका मिलेगा? यह दर्शाता है कि पार्टी के लिए यह वक्त बेहद नाजुक है।
‘जानें पूरा मामला’
पंजाब कांग्रेस पिछले काफी समय से अंदरूनी कलह से जूझ रही है। 2022 विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी संभल नहीं पाई है। सीनियर नेताओं की नाराजगी, गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर सवाल: ये सब मिलकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। हाईकमान अब हालात को संभालने की कोशिश में है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर रिपोर्ट के.सी. वेणुगोपाल को सौंपी।
- 92 नेताओं से मुलाकात के आधार पर रिपोर्ट तैयार, कई ने वड़िंग की लीडरशिप पर सवाल उठाए।
- राजा वड़िंग ने फिलहाल कोई इस्तीफा नहीं दिया है।
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हाईकमान बड़ा फैसला लेने की तैयारी में।













