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The News Air - Breaking News - Petrol Price Hike: ₹100 के पार पेट्रोल, PNG-CNG की सब्सिडी खत्म, मिडिल क्लास की जेब पर डबल अटैक

Petrol Price Hike: ₹100 के पार पेट्रोल, PNG-CNG की सब्सिडी खत्म, मिडिल क्लास की जेब पर डबल अटैक

महानगर गैस ने चुपके से खत्म की सब्सिडी स्कीम, 11 दिनों में चार बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, मिडिल ईस्ट का तनाव बना भारतीय रसोई का दुश्मन

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 29 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, काम की बातें, राष्ट्रीय
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Petrol Price Hike
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Petrol Price Hike – आज सुबह अखबार खोलते ही या मोबाइल में नोटिफिकेशन देखकर आपकी चाय का स्वाद जरूर खराब हो गया होगा। पेट्रोल की कीमतें कई शहरों में ₹100 प्रति लीटर के पार निकल चुकी हैं। लेकिन असली झटका तो अब लगने वाला है। जो लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बचने के लिए PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) और CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) का सहारा ले रहे थे, उनके लिए भी बुरी खबर आ गई है।

महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने चुपचाप एक ऐसा फरमान जारी कर दिया है जिसने मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के लाखों परिवारों के मासिक बजट का कबाड़ा निकाल दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि “जियोपॉलिटिकल टेंशन और एनर्जी क्राइसिस” के कारण वह अपनी सब्सिडी सपोर्ट स्कीम्स को तुरंत प्रभाव से बंद कर रही है।

देखा जाए तो यह केवल मुंबई की समस्या नहीं है। यह पूरे भारत के मध्यम वर्ग पर लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव की कहानी है। समझने वाली बात यह है कि पिछले 11 दिनों में चार बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। और अब गैस कनेक्शन की सब्सिडी भी खत्म। आम आदमी अब कहां जाए?

अगर गौर करें तो हजारों किलोमीटर दूर मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच चल रही तनातनी का खामियाजा भारत का मध्यम वर्ग अपनी रसोई में क्यों भुगत रहा है? आज के इस सेशन में हम पूरी क्रोनोलॉजी समझेंगे, डेटा के साथ विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि आपकी जेब से पैसा कैसे और क्यों निकाला जा रहा है।

🔍 यह भी पढ़ें- Petrol Diesel Price Hike: CM Vijay ने केंद्र पर साधा निशाना, चुनाव बाद दाम बढ़ाना अन्याय

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MGL का बड़ा झटका – नए कनेक्शन महंगे, पुराने की सब्सिडी खत्म

महानगर गैस लिमिटेड मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में पाइप्ड नेचुरल गैस सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। इसने एक आधिकारिक घोषणा में साफ कर दिया है कि दुनिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव और एनर्जी संकट की वजह से कंपनी भारी घाटे में है। इसलिए सभी सब्सिडी और सपोर्ट स्कीम्स तुरंत बंद की जा रही हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस फैसले का दोहरा प्रहार है:

पहला झटका – नए कनेक्शन पर: अगर आप अपने घर में नया PNG कनेक्शन लेने जा रहे हैं, तो जो सरकारी या कंपनी की तरफ से वित्तीय सहायता मिलती थी, वह अब पूरी तरह खत्म हो गई है। यानी इंस्टॉलेशन कॉस्ट अब पूरी तरह आपकी जेब से जाएगी। नया कनेक्शन लेना सीधे-सीधे महंगा हो गया है।

दूसरा झटका – मौजूदा उपभोक्ताओं पर: जिन लोगों ने पहले ही अपने पैसे से कनेक्शन लगवा लिया था और जिन्हें हर महीने थोड़ी सब्सिडी या छूट मिल जाती थी, वह मासिक सब्सिडी भी अब पूरी तरह बंद कर दी गई है। यानी जो लोग पहले से इस्तेमाल कर रहे थे, उनका भी नुकसान है।

दिलचस्प बात यह है कि सरकार सीधे दाम नहीं बढ़ा रही, बल्कि सब्सिडी का सपोर्ट खींच लिया गया है। परिणाम एक ही है – आम आदमी की जेब पर सीधा असर। चाहे इधर से पकड़ो या उधर से, बोझ उठाना तो आपको ही है।

🔍 यह भी पढ़ें- CNG Price Hike: 15 दिन में चौथा झटका, Petrol 100 पार

₹100 के पार पेट्रोल – 11 दिनों में 4 बार वृद्धि

पिछले 11 दिनों में चार बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। कई राज्यों और शहरों में पेट्रोल के दाम ₹100 प्रति लीटर से ऊपर निकल गए हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद – हर जगह एक ही चीख सुनाई दे रही है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल के दाम (अनुमानित):

शहरपेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)
दिल्ली₹96-98₹89-91
मुंबई₹104-106₹92-94
बेंगलुरु₹102-104₹88-90
चेन्नई₹100-102₹91-93
कोलकाता₹104-106₹92-94

यहां समझने वाली बात यह है कि यह केवल संख्याओं का खेल नहीं है। हर ₹5 की बढ़ोतरी का सीधा असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। और इसे समझने के लिए हमें Cost Push Inflation की अवधारणा को जानना होगा।

🔍 यह भी पढ़ें- Petrol Diesel Price: चुनाव के बाद ₹25 का बड़ा झटका!

कॉस्ट पुश इन्फ्लेशन – जब पेट्रोल पंप की आग रसोई तक पहुंचती है

बहुत से लोग सोचते हैं – “मेरे पास तो गाड़ी है ही नहीं, मैं मेट्रो से चलता हूं, मुझे पेट्रोल महंगे होने से क्या फर्क पड़ता है?”

यह सबसे बड़ा भ्रम है। अर्थशास्त्र में एक शब्द है – Cost Push Inflation यानी लागत जनित मुद्रास्फीति। इसे आसान भाषा में समझिए:

जब देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो जो ट्रक नागपुर से संतरा लेकर आ रहा है, जो ट्रक नासिक से प्याज लेकर आ रहा है, उसका ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी बढ़ेगा। जब ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, तो लॉजिस्टिक्स महंगा होगा।

और जब लॉजिस्टिक्स महंगा होता है, तो:

  • आपके घर में आने वाला दूध महंगा होता है
  • सब्जी महंगी होती है
  • राशन महंगा होता है
  • यहां तक कि Zomato और Swiggy से आने वाले ऑनलाइन खाने के डिलीवरी चार्जेस भी बढ़ जाते हैं

दिलचस्प बात यह है कि पेट्रोल पंप पर लगी हुई आग धीरे-धीरे रेंगते हुए आपके किचन के मसालों के डिब्बे तक पहुंच जाती है। आप इससे बच नहीं सकते। यह सिस्टमेटिक प्रभाव है जो पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।

जियोपॉलिटिक्स का खेल – स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज और भारत की रसोई

अब आते हैं असली मुद्दे पर। हजारों किलोमीटर दूर मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल आपस में क्यों लड़ रहे हैं, इसका भारत से क्या लेना-देना?

यहां ध्यान से समझिए। Strait of Hormuz (हॉर्मोज जलडमरूमध्य) दुनिया का सबसे खतरनाक और रणनीतिक ऑयल चोक पॉइंट है। दुनिया का लगभग 20-30% क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।

जियोपॉलिटिकल इम्पैक्ट की चेन:

  1. मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है → ईरान-इजराइल आंखें तरेरते हैं
  2. इंटरनेशनल ऑयल ट्रेडर्स पैनिक में आ जाते हैं → रिस्क परसेप्शन बढ़ता है
  3. जहाजों का इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ जाता है → शिपिंग महंगी हो जाती है
  4. ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगती हैं → अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल
  5. भारत 85% कच्चा तेल आयात करता है → महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है
  6. ऑयल कंपनियां घाटा सहती हैं या दाम बढ़ाती हैं → अंतिम उपभोक्ता पर बोझ

अगर गौर करें तो भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है। हमें अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल बाहर के देशों से आयात करना पड़ता है। अब आप खुद सोचिए – जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होगा, तो भारत सरकार या हमारी ऑयल कंपनियां इसे सस्ता कैसे बेच सकती हैं?

यानी तेहरान या तेल अवीव में जब मिसाइल चलती है, तो इसका सीधा धमाका हमारे और आपके मासिक बजट पर होता है। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि वैश्वीकरण का कठोर सच है।

 

सरकार की मजबूरी या बहाना? – तीन रास्ते, तीनों में जनता पिसती है

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल – सरकार क्या कर रही है? विपक्ष कहता है कि जैसे ही चुनाव खत्म हुए, सरकार ने जनता को लूटना शुरू कर दिया। सरकार की दलील है कि ऑयल कंपनियां भारी घाटे में चल रही हैं।

सच्चाई क्या है? आइए बिल्कुल तटस्थ होकर डेटा के साथ समझते हैं।

भारत में फ्यूल प्राइसिंग न तो पूरी तरह फ्री मार्केट है और न ही पूरी तरह सरकार के कंट्रोल में है। हमारी सरकारी कंपनियां – IOCL (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन), BPCL (भारत पेट्रोलियम), HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम) – दो पाटों के बीच पिस रही हैं:

  • एक तरफ इंटरनेशनल प्राइसिंग का दबाव है
  • दूसरी तरफ सरकार का पॉलिटिकल प्रेशर है कि “चुनाव आ गए हैं, अभी दाम मत बढ़ाना वरना जनता वोट नहीं देगी”

जब इंटरनेशनल दाम बढ़ते हैं लेकिन कंपनियां अपना दाम नहीं बढ़ा पातीं (राजनीतिक कारणों से), तो वे घाटा सहती हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन कंपनियों को प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था।

लेकिन जैसे ही पॉलिटिकल विंडो साफ होती है (चुनाव खत्म होते ही), कंपनियां अपना घाटा पूरा करने के लिए एकदम से दाम बढ़ाना शुरू कर देती हैं। यही कारण है कि 11 दिनों में 4 बार वृद्धि देखी गई।

सरकार के पास तीन ही रास्ते हैं:

विकल्पक्या होगापरिणाम
सरकार सब्सिडी देराजकोषीय घाटा बढ़ेगा, कर्ज लेना पड़ेगाअर्थव्यवस्था के लिए खतरा
ऑयल कंपनियां दिवालिया होने देंतेल सप्लाई चेन टूटेगीपूरी अर्थव्यवस्था ठप
जनता महंगा खरीदेआम आदमी पर बोझ बढ़ेगामध्यम वर्ग पिसेगा

हमारे देश का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि अंत में सारा बोझ जनता के सर पर धीरे-धीरे ट्रांसफर कर दिया जाता है। और इस खेल में पूरा और सबसे ज्यादा पिस कौन रहा है? भारत का शहरी मध्यम वर्ग।

सबसे ज्यादा मार किस पर? – मिडिल क्लास का दर्द

न तो अल्ट्रा रिच लोग पिस रहे हैं (जिनके पास इतना पैसा है कि पेट्रोल ₹100 का हो या ₹200 का, उन्हें Mercedes से चलना है)। न ही बेहद गरीब वर्ग पिस रहा है (क्योंकि सरकार उन्हें राशन और विभिन्न वेलफेयर स्कीम्स के जरिए सुरक्षा कवच देती है)।

सबसे ज्यादा मार पड़ती है भारत के अर्बन मिडिल क्लास पर – शहरी मध्यम वर्ग पर:

  • जो सुबह उठकर ऑफिस भागता है
  • अपनी कार या बाइक में तेल डलवाता है
  • ईमानदारी से इनकम टैक्स देता है
  • बच्चों की फीस भी दे रहा है और घर की EMI भी चुका रहा है

अब सोचिए:

  • सैलरी बढ़ नहीं रही है
  • लेकिन पेट्रोल महंगा हो रहा है
  • LPG महंगा हो रहा है
  • PNG-CNG की सब्सिडी खत्म हो रही है
  • ट्रांसपोर्ट के कारण सब्जी-राशन महंगा हो रहा है

इसे कहते हैं The Shrinking of Disposable Income – व्यय योग्य आय का सिकुड़ना। यानी सब कुछ चुकाने के बाद मिडिल क्लास के हाथ में जो कुछ पैसा बचता था, वह अब और कम होगा। लगातार कम होगा।

PNG-CNG सब्सिडी खत्म होने का असर – घर और गाड़ी दोनों पर वार

पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इस्तेमाल घरों में खाना बनाने के लिए होता है। कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) का इस्तेमाल गाड़ियों में होता है। पिछले कुछ सालों से सरकार और कंपनियां इसे “स्वच्छ और सस्ता ईंधन” के रूप में प्रमोट कर रही थीं।

लाखों लोगों ने सोचा – “चलो पेट्रोल-डीजल महंगा है, LPG सिलेंडर भी महंगा है, PNG लगवा लेते हैं। गाड़ी CNG पर चलाएंगे।” और अब? उन्हीं लोगों को बड़ा झटका लगा है।

MGL के फैसले का प्रभाव:

  • नए PNG कनेक्शन की लागत में 20-30% की वृद्धि संभव
  • मौजूदा उपभोक्ताओं के मासिक बिल में ₹100-200 की बढ़ोतरी
  • CNG भरवाने वालों के लिए भी खर्च बढ़ेगा
  • अन्य शहरों की गैस कंपनियां भी इसी रास्ते पर चलेंगी

यहां समझने वाली बात यह है कि MGL ने तो शुरुआत कर दी है। जल्द ही इंद्रप्रस्थ गैस (दिल्ली), गुजरात गैस, अडानी गैस और अन्य कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल सकती हैं। क्योंकि सभी का तर्क एक ही होगा – “अंतरराष्ट्रीय संकट और घाटा।”

क्या GST में लाना होगा समाधान? – विशेषज्ञों की राय

कई अर्थशास्त्री और विपक्षी नेता लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल को GST (वस्तु एवं सेवा कर) के दायरे में लाया जाए। इससे क्या फायदा होगा?

GST के तहत लाने के फायदे:

  1. एक देश एक कीमत: हर राज्य में अलग-अलग टैक्स की जगह एक समान दर होगी
  2. पारदर्शिता बढ़ेगी: टैक्स स्ट्रक्चर साफ होगा
  3. कीमतों में स्थिरता: राजनीतिक कारणों से दाम घटाने-बढ़ाने की गुंजाइश कम होगी
  4. इनपुट टैक्स क्रेडिट: व्यवसायियों को टैक्स क्रेडिट मिलेगा

लेकिन सरकार क्यों नहीं ला रही GST में?

सच्चाई यह है कि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से राज्य और केंद्र दोनों सरकारों को भारी राजस्व मिलता है। अगर GST में लाया गया तो यह राजस्व कम हो सकता है। इसलिए कोई भी सरकार इसे GST में लाने के लिए तैयार नहीं है – चाहे वह केंद्र में हो या राज्य में।

वैश्वीकरण का कड़वा सच – भारत की थाली पर विदेश की मार

इस पूरे मुद्दे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आज भारत की अर्थव्यवस्था ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स से इतनी बुरी तरह जुड़ चुकी है कि दुनिया के किसी भी कोने में हलचल होती है, तो इसका सीधा असर भारत के आम नागरिक की थाली पर पड़ता है।

वैश्वीकरण के दुष्परिणाम:

  • यूक्रेन-रूस युद्ध → गेहूं और तेल महंगा
  • ईरान-इजराइल तनाव → पेट्रोल-डीजल महंगा
  • अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ीं → भारत में निवेश कम, रुपया कमजोर
  • चीन में कोविड लॉकडाउन → सप्लाई चेन बाधित, सामान महंगा

यह वैश्वीकरण का सबसे कठोर और कड़वा सच है। भारत अब एक अलग-थलग द्वीप नहीं रह गया है। हम दुनिया की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं, और इसके फायदे-नुकसान दोनों भुगतने होंगे।

आम आदमी क्या करे? – बचाव के उपाय

हालांकि सरकारी नीतियां हमारे हाथ में नहीं हैं, लेकिन कुछ व्यक्तिगत स्तर पर उपाय किए जा सकते हैं:

  1. सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाएं: मेट्रो, बस का ज्यादा उपयोग करें
  2. कारपूलिंग करें: ऑफिस जाते समय सहकर्मियों के साथ शेयर करें
  3. ऊर्जा बचत करें: घर में बिजली, गैस का सोच-समझकर इस्तेमाल करें
  4. इलेक्ट्रिक व्हीकल पर विचार करें: अगर बजट हो तो EV एक विकल्प हो सकता है
  5. बजट प्लानिंग करें: मासिक खर्चों की प्राथमिकता तय करें
सरकार से सवाल – जवाबदेही कब?

यह खबर केवल आंकड़ों की नहीं है। यह उन करोड़ों भारतीयों की कहानी है जो हर महीने अपने बजट से जूझ रहे हैं। सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा:

  • क्यों हर चुनाव के बाद ही दाम बढ़ते हैं?
  • क्यों पेट्रोल-डीजल को GST में नहीं लाया जा रहा?
  • ऑयल कंपनियों के घाटे की असली तस्वीर क्या है?
  • मिडिल क्लास के लिए राहत के क्या उपाय हैं?

जब तक सरकारें राजनीतिक फायदे के लिए ऊर्जा क्षेत्र का इस्तेमाल करती रहेंगी, तब तक आम आदमी पिसता रहेगा। जरूरत है एक दीर्घकालिक, पारदर्शी और जनहितैषी ऊर्जा नीति की।

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मुख्य बातें (Key Points)

  • पेट्रोल सेंचुरी: कई शहरों में ₹100/लीटर के पार, 11 दिनों में 4 बार वृद्धि
  • PNG-CNG सब्सिडी खत्म: MGL ने नए कनेक्शन पर वित्तीय सहायता और मासिक सब्सिडी बंद की
  • जियोपॉलिटिकल प्रभाव: ईरान-इजराइल तनाव, Strait of Hormuz से 20-30% विश्व तेल गुजरता है
  • भारत की निर्भरता: 85% कच्चा तेल आयात, अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर
  • कॉस्ट पुश इन्फ्लेशन: पेट्रोल महंगा → ट्रांसपोर्ट महंगा → सब्जी-राशन महंगा
  • सबसे ज्यादा मार: शहरी मध्यम वर्ग पर, जिसकी व्यय योग्य आय लगातार सिकुड़ रही है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: महानगर गैस ने PNG-CNG पर सब्सिडी क्यों खत्म की?

उत्तर: MGL का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट के कारण कंपनी भारी घाटे में चल रही है। इसलिए नए कनेक्शन पर वित्तीय सहायता और मौजूदा उपभोक्ताओं की मासिक सब्सिडी दोनों बंद कर दी गई हैं। यह फैसला मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के लाखों परिवारों को प्रभावित करेगा।

प्रश्न 2: पेट्रोल महंगा होने से मेरी रसोई पर कैसे असर पड़ता है?

उत्तर: यह Cost Push Inflation के कारण होता है। जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो ट्रक का ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ता है। इससे सब्जी, फल, दूध, राशन – सब कुछ महंगा हो जाता है। यहां तक कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी के चार्जेस भी बढ़ जाते हैं। यानी पेट्रोल पंप की आग आपकी रसोई तक पहुंचती है।

प्रश्न 3: क्या पेट्रोल-डीजल को GST में लाना सही होगा?

उत्तर: कई विशेषज्ञों का मानना है कि GST में लाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कीमतों में एकरूपता आएगी। लेकिन सरकार इसे लागू नहीं कर रही क्योंकि पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से केंद्र और राज्यों को भारी राजस्व मिलता है। यह एक राजनीतिक फैसला है जिसमें आम जनता का हित गौण हो जाता है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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