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The News Air - Breaking News - ED Manpower Expansion: सरकार का Black Money पर बड़ा वार, 60% बढ़ाई ताकत

ED Manpower Expansion: सरकार का Black Money पर बड़ा वार, 60% बढ़ाई ताकत

वित्त मंत्रालय ने 1227 नए पदों को दी मंजूरी, साइबर क्राइम और क्रिप्टोकरेंसी घोटालों पर कसेगा शिकंजा

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 29 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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ED Manpower Expansion
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ED Manpower Expansion – भारत सरकार ने भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जंग को और तेज करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय ने प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) यानी ED की कार्यबल क्षमता में 60 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत 1227 नए पदों का सृजन किया जाएगा, जिससे ED का कुल कार्यबल 2029 से बढ़कर 3256 हो जाएगा।

देखा जाए तो यह महज संख्याओं का खेल नहीं है। यह सरकार का एक स्पष्ट संदेश है कि अब देश में काले धन, मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों के खिलाफ कोई समझौता नहीं होगा। पिछले कुछ वर्षों में ED ने जिस तरह बड़े-बड़े घोटालों को उजागर किया है, उससे यह साफ हो गया था कि एजेंसी को और मजबूती की जरूरत है। अब सरकार ने उसी दिशा में ठोस कदम उठाया है।

अगर गौर करें तो ED के छापों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। 2024-25 में जहां 1491 छापे मारे गए, वहीं 2025-26 में यह संख्या लगभग दोगुनी होकर 2892 तक पहुंच गई। समझने वाली बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर काम करने के लिए मानव संसाधन बढ़ाना अनिवार्य हो गया था।

🔍 यह भी पढ़ें- India Fifth Largest Defence Spender: भारत बना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश

60% वृद्धि का मतलब – ब्लैक मनी पर डबल अटैक

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार ED का कैडर रीस्ट्रक्चरिंग यानी संवर्ग पुनर्गठन किया गया है। यह कदम तीन प्रमुख कार्य क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है – कार्यकारी (Executive), कानूनी (Legal) और न्याय निर्णय (Adjudication)।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ED अब तक सीमित जनशक्ति के साथ काम कर रही थी। जब 2029 कर्मचारियों के साथ ही इतने बड़े स्तर पर छापेमारी और जांच हो रही थी, तो अब 3256 कर्मचारियों के साथ कितनी तेजी से काम होगा, यह समझा जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि यह विस्तार केवल संख्या बढ़ाने के लिए नहीं है। नए युग के आर्थिक अपराध – साइबर क्राइम, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े घोटाले, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग – इन सभी क्षेत्रों में विशेषज्ञों की आवश्यकता है। ED को अब टेक-सेवी इन्वेस्टिगेटर्स की जरूरत है जो डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक कर सकें।

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छापों में जबरदस्त उछाल – आंकड़े चौंकाने वाले

ED की कार्रवाइयों का ट्रैक रिकॉर्ड:

अवधिछापे की संख्याकुर्क संपत्ति
2005-2014 (पहला दशक)सीमित₹5,171 करोड़
2014-2024 (दूसरा दशक)बढ़ी हुई₹1,19,386 करोड़
2024-25 (एकल वर्ष)1,491₹33,000 करोड़ (लगभग)
2025-26 (एकल वर्ष)2,892₹81,422 करोड़

यह आंकड़े देखकर साफ हो जाता है कि ED के काम करने के तरीके में आमूलचूल परिवर्तन आया है। 2005-2014 के पहले दशक में जहां केवल 5,171 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की गई थी, वहीं 2014-2024 के दूसरे दशक में यह राशि बढ़कर 1,19,386 करोड़ रुपए हो गई।

अगर गौर करें तो सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2025-26 के एक ही वित्तीय वर्ष में 81,422 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की गई। यह पूरे पहले दशक से 16 गुना ज्यादा है। यह दर्शाता है कि भारत में काले धन का साम्राज्य कितना विशाल है और ED कितनी मजबूती से उस पर प्रहार कर रही है।

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क्यों जरूरी हो गई मैनपावर बढ़ाना? – तीन बड़े कारण

पहला कारण – जटिल अपराधों का उदय: आज के समय में वित्तीय अपराध केवल नकदी छुपाने या रिश्वत लेने तक सीमित नहीं रह गए हैं। साइबर क्राइम, हॉकिंग, डिजिटल वॉलेट्स, क्रिप्टोकरेंसी, शेल कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अत्याधुनिक तरीके सामने आ रहे हैं। इनकी जांच के लिए विशेष प्रशिक्षित जनशक्ति चाहिए।

समझने वाली बात यह है कि कोई अपराधी अब बोरी में नोट भरकर नहीं रखता। वह क्रिप्टो वॉलेट में छुपा देता है, NFT में convert कर देता है या फिर विदेशी शेल कंपनियों के जरिए लेयरिंग करता है। ED को इन सभी तकनीकों से लैस इन्वेस्टिगेटर्स चाहिए।

दूसरा कारण – मामलों की बढ़ती संख्या: पिछले कुछ वर्षों में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की रिपोर्ट और FIR की संख्या में भारी उछाल आया है। छोटे से लेकर बड़े तक, हर स्तर पर आर्थिक अपराध बढ़े हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब मामले बढ़ रहे हों और जांच अधिकारियों की संख्या सीमित हो, तो केस लंबित होने लगते हैं। न्याय में देरी होती है। इसलिए तेजी से जांच पूरी करने और चार्जशीट समय पर दाखिल करने के लिए अधिक अधिकारियों की जरूरत थी।

तीसरा कारण – लंबित मामलों का निपटारा: कई पुराने केस वर्षों से लटके हुए थे। सरकार चाहती है कि हर जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचे। इसके लिए समर्पित टीमें और पर्याप्त मानव संसाधन अनिवार्य हैं।

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ब्लैक मनी क्या है? – जानें पूरी परिभाषा

काला धन या ब्लैक मनी वह पैसा होता है जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है, जो कर चोरी करके या गलत तरीके से कमाया गया है और जिसकी जानकारी सरकार के साथ साझा नहीं की गई है। रिश्वत में मिला पैसा, अघोषित आय, बेनामी संपत्ति – यह सब ब्लैक मनी के दायरे में आता है।

दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटिश काल से भारत में काले धन का राज शुरू हुआ। जब भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था, तब हमारी अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे मजबूत थी। लेकिन धीरे-धीरे भ्रष्टाचार, घोटाले और काले धन ने देश की रीढ़ को कमजोर कर दिया।

आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन अगर काला धन पूरी तरह रोक लिया जाए तो हम शायद टॉप-3 में आ सकते हैं। यह सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि विशेषज्ञों का आकलन है।

ED का इतिहास और शक्तियां – 1956 से 2026 तक का सफर

Enforcement Directorate की स्थापना 1956 में FERA (Foreign Exchange Regulation Act) को लागू करने के लिए की गई थी। आज यह वित्त मंत्रालय के अधीन काम करती है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। देशभर में इसके पांच क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

ED किन कानूनों के तहत काम करती है?

  1. PMLA (Prevention of Money Laundering Act), 2002 – मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम के लिए
  2. FEMA (Foreign Exchange Management Act), 1999 – विदेशी मुद्रा प्रबंधन के लिए
  3. Fugitive Economic Offenders Act, 2018 – भगोड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ
  4. Benami Transactions (Prohibition) Act, 1988 – बेनामी संपत्ति के खिलाफ

यहां समझने वाली बात यह है कि ED के पास तलाशी, जब्ती, गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्क करने की व्यापक शक्तियां हैं। जब कोई केस PMLA के दायरे में आता है तो ED सीधे एक्शन ले सकती है।

भारत का एंटी-करप्शन इकोसिस्टम – कौन-कौन लड़ रहा है?

भारत में भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ने वाली कई संस्थाएं हैं:

संस्थास्थापना वर्षमुख्य कार्य
लोकपाल2014केंद्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच
लोकायुक्तराज्यवार अलगराज्य स्तर पर भ्रष्टाचार की जांच
CVC (केंद्रीय सतर्कता आयोग)1964भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की निगरानी
CBI1963एंटी-करप्शन ब्यूरो के तहत जांच
ED1956मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा उल्लंघन

देखा जाए तो यह सभी संस्थाएं मिलकर भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति अपना रही हैं। लेकिन सच यह भी है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और निष्पक्ष कार्रवाई के बिना इन संस्थाओं की ताकत सीमित हो जाती है।

स्विस बैंक से काला धन – अधूरा अभियान

खबर में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है – स्विस बैंक में जमा भारतीयों का काला धन। दशकों से यह मुद्दा चर्चा में रहा है कि कई भारतीय नेता, उद्योगपति और अपराधी अपना काला धन स्विस बैंकों में छुपाकर रखते हैं।

अगर गौर करें तो भारत सरकार ने इस मामले पर कई बार स्विस सरकार से बातचीत की है। Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) और Automatic Exchange of Information जैसे समझौते भी हुए हैं। लेकिन अब तक ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन वापस आ जाए, तो भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। लेकिन यह काम बेहद जटिल है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया और गोपनीयता कानून इसमें बाधा बनते हैं।

राजनीतिक पक्षपात का आरोप – ED पर सवाल

जब भी ED की बात होती है, एक सवाल हमेशा उठता है – क्या यह एजेंसी निष्पक्ष रूप से काम कर रही है या सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर?

विपक्ष का आरोप है कि ED का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने और दबाव बनाने के लिए किया जाता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि जो नेता विपक्ष में थे और उन पर ED की कार्रवाई हुई, वे सत्ता पक्ष में शामिल होते ही “क्लीन चिट” पा जाते हैं।

समझने वाली बात यह है कि भले ही ED का काम सराहनीय है, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में होने लगे, तो संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजमी है। लोकतंत्र में जांच एजेंसियों को पूरी तरह स्वायत्त और निष्पक्ष होना चाहिए।

आगे का रास्ता – क्या होगा असर?

ED की मैनपावर में 60% की वृद्धि का सीधा मतलब है कि अब और तेजी से छापेमारी होगी, और मामले सुलझेंगे, और ज्यादा लोग जांच के दायरे में आएंगे। यह अच्छी बात है यदि यह काम निष्पक्ष रूप से हो।

दिलचस्प बात यह है कि क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल पेमेंट्स, ऑनलाइन गैंबलिंग, फेक शेल कंपनियां – इन सभी क्षेत्रों में अब ED की पैनी नजर होगी। टेक्नोलॉजी के जानकार इन्वेस्टिगेटर्स अब डिजिटल फुटप्रिंट्स को ट्रैक करेंगे।

यहां समझने वाली बात यह है कि भ्रष्टाचार और काला धन भारत की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा हैं। अगर सरकार सचमुच इसे जड़ से खत्म करने का इरादा रखती है, तो उसे केवल विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही लोगों के खिलाफ भी सख्ती से कार्रवाई करनी होगी।

क्या भारत ‘सोने की चिड़िया’ फिर बन सकता है?

ट्रांसक्रिप्ट में एक भावनात्मक लेकिन सच्चा सवाल उठाया गया है – अगर भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म हो जाए, तो क्या भारत फिर से विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है?

ऐतिहासिक रूप से देखें तो ब्रिटिश शासन से पहले भारत दुनिया की 1/3 अर्थव्यवस्था पर राज करता था। यहां की समृद्धि, व्यापार और संस्कृति दुनियाभर में मशहूर थी। लेकिन औपनिवेशिक लूट, विभाजन और आजादी के बाद भ्रष्टाचार ने देश को पीछे धकेल दिया।

अगर गौर करें तो आज भी भारत के पास युवा जनसंख्या, प्रतिभा, संसाधन और क्षमता है। लेकिन जब तक करप्शन-फ्री सिस्टम नहीं बनता, तब तक यह सपना अधूरा रहेगा। ED जैसी एजेंसियों की मजबूती एक सही दिशा में कदम है, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब हर स्तर पर जवाबदेही हो।


मुख्य बातें (Key Points)

  • मैनपावर में उछाल: ED का कार्यबल 2029 से बढ़कर 3256 हुआ, 1227 नए पद सृजित (60% वृद्धि)
  • छापों में तेजी: 2024-25 में 1491 छापे, 2025-26 में 2892 छापे (लगभग दोगुना)
  • भारी कुर्की: 2025-26 में अकेले ₹81,422 करोड़ की संपत्ति कुर्क, पिछले दशक से 16 गुना ज्यादा
  • नए खतरे: साइबर क्राइम, क्रिप्टोकरेंसी, AI-based scams पर अब फोकस
  • ऐतिहासिक संदर्भ: 1956 में FERA लागू करने के लिए स्थापित ED अब PMLA, FEMA, Benami Act के तहत काम करती है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: ED की मैनपावर में 60% वृद्धि क्यों की गई?

उत्तर: साइबर क्राइम, क्रिप्टोकरेंसी घोटाले, डिजिटल मनी लॉन्ड्रिंग जैसे जटिल अपराधों में वृद्धि और मामलों की बढ़ती संख्या के कारण ED को अधिक विशेषज्ञ जांच अधिकारियों की जरूरत थी। वित्त मंत्रालय ने 1227 नए पदों को मंजूरी दी है।

प्रश्न 2: ED ने अब तक कितनी संपत्ति कुर्क की है?

उत्तर: केवल 2025-26 में ED ने ₹81,422 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। पिछले दशक (2014-24) में कुल ₹1,19,386 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ED की कार्यक्षमता लगातार बढ़ रही है।

प्रश्न 3: क्या ED पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप सही है?

उत्तर: यह एक विवादास्पद सवाल है। विपक्ष का आरोप है कि ED का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि एजेंसी निष्पक्ष रूप से काम करती है। असली सच्चाई यह है कि अगर छापे सभी दलों के भ्रष्ट नेताओं पर बिना भेदभाव के पड़ें, तभी जनता का विश्वास बना रहेगा।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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