ED Raid Row: एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने मोहाली के बिल्डर अजय सहगल को शुक्रवार की देर रात गिरफ्तार करने के बाद आज एडिशनल जिला एवं सेशन जज हरदीप सिंह की अदालत में पेश किया। इस दौरान ED ने अदालत से सहगल का पांच दिनों का रिमांड हासिल कर लिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध बिक्री का आरोप है और कुछ सीनियर सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
गौरतलब है कि ED ने बीते शुक्रवार को ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के पांच अधिकारियों समेत इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी (सनटेक सिटी के प्रमोटर) के सचिव अजय सहगल को तलब किया था। इस दौरान ED ने रात को GMADA टीम को तो वापस भेज दिया, लेकिन बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया।
क्या है पूरा घोटाला?
यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR से उपजा है। समझने वाली बात यह है कि यह FIR उन किसानों की शिकायत पर आधारित थी जिनकी सहमति CLU (Change of Land Use) प्राप्त करने के लिए फर्जी तरीके से तैयार की गई थी।
ED अधिकारियों के अनुसार, अजय सहगल पर 15 लोगों की मालिकाना 30.5 एकड़ जमीन के संबंध में “फर्जी” सहमति पत्र तैयार करने का आरोप है। और बस यहीं से शुरू हुई एक ऐसी धोखाधड़ी जिसमें सरकारी अथॉरिटीज की भी भूमिका सवालों के घेरे में है।
कैसे हुआ फर्जी CLU का खेल?
ED ने अपने बयान में कहा, “इन फर्जी सहमति पत्रों के आधार पर मुलजिम संस्था/व्यक्तियों को ‘सनटेक सिटी’ नामक एक रियल एस्टेट मेगा प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए CLU दिया गया था। ये सहमति पत्र जमीन मालिकों के फर्जी दस्तखत और अंगूठे के निशानों के साथ तैयार किए गए थे।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि GMADA जैसी सरकारी अथॉरिटी ने इन सहमति पत्रों की सत्यता की जांच किए बिना ही CLU दे दिया। यह सवाल उठता है कि क्या अधिकारियों की मिलीभगत थी?
| प्रोजेक्ट का नाम | विवरण | स्थिति |
|---|---|---|
| सनटेक सिटी | मेगा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट | फर्जी CLU से शुरू |
| ला कैनेला (La Canela) | रिहायशी बहु-मंजिला कॉम्प्लेक्स | RERA से पहले बिक्री |
| डिस्ट्रिक्ट 7 (District 7) | व्यापारिक कॉम्प्लेक्स | अवैध तरीके से विकसित |
RERA से पहले ही शुरू हो गई बिक्री
सहगल पर यह भी आरोप है कि उसने फर्जी सहमति पत्रों के साथ प्राप्त किए CLU के आधार पर एक रिहायशी बहु-मंजिला कॉम्प्लेक्स ‘ला कैनेला’ (La Canela) और एक व्यापारिक कॉम्प्लेक्स ‘डिस्ट्रिक्ट 7’ (District 7) भी विकसित किया।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन प्रोजेक्ट्स में यूनिट्स (फ्लैट/प्लॉट) रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के पास रजिस्ट्रेशन और मंजूरी मिलने से पहले ही बेची जा रही थीं। इसका मतलब साफ है – खरीदारों के साथ भी धोखाधड़ी की गई।
200 करोड़ की अवैध बिक्री
ED ने बताया कि मुलजिमों ने इन गैर-कानूनी प्रोजेक्ट्स से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री की है। और दिलचस्प यह है कि अजय सहगल ने आज तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए रिजर्व प्लॉट ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) को ट्रांसफर नहीं किए हैं।
अगर गौर करें तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक पूरा सिस्टम इसमें शामिल दिखता है। EWS प्लॉट न देना दिखाता है कि बिल्डर ने गरीबों का हक भी मारा।
GMADA अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
ED अधिकारियों ने बताया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और GMADA के कुछ सीनियर अधिकारियों और सरकारी अथॉरिटीज की भूमिका की जांच की जा रही है। चिंता का विषय यह है कि ED ने साफ कहा है कि वे इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां करने की प्रक्रिया में हैं।
वहीं, राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस मामले में बड़े नाम सामने आएंगे। पंजाब में रियल एस्टेट घोटाले अक्सर राजनीतिक संरक्षण से जुड़े होते हैं।
PMLA के तहत कार्रवाई
अजय सहगल, जो इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी (ICHBS) का सचिव भी है, को केंद्रीय एजेंसी के जलंधर दफ्तर द्वारा शुक्रवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया है।
एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने इसी महीने की शुरुआत में सहगल और ‘सनटेक सिटी’ प्रोजेक्ट से जुड़े ठिकानों और कुछ अन्य जगहों पर छापेमारी की थी। उस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत बरामद किए गए थे।
किसानों का दर्द
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा पीड़ित वो किसान हैं जिनकी जमीनों पर फर्जी सहमति से प्रोजेक्ट खड़ा किया गया। ये किसान अब न तो अपनी जमीन के मालिक हैं और न ही उन्हें उचित मुआवजा मिला।
समझने वाली बात यह है कि 30.5 एकड़ जमीन पर 15 लोगों की मालिकाना थी, लेकिन उनसे बिना पूछे या फर्जी तरीके से दस्तखत लेकर यह पूरा घोटाला किया गया। यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा?
रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती धोखाधड़ी
पंजाब में रियल एस्टेट सेक्टर में यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ सालों में कई बिल्डर्स ने फर्जी दस्तावेजों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से लोगों को ठगा है।
राहत की बात यह है कि अब ED और अन्य एजेंसियां ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि जब तक घोटाला सामने नहीं आता, तब तक सरकारी अधिकारी कहां सोए रहते हैं?
आगे क्या होगा?
अजय सहगल को पांच दिन के रिमांड पर भेजा गया है। इस दौरान ED उससे पूछताछ करेगी और मामले में शामिल अन्य लोगों के नाम जानने की कोशिश करेगी। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
वहीं, GMADA और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों की जांच भी जारी है। अगर उनकी मिलीभगत साबित होती है तो यह मामला और बड़ा हो सकता है।
इस मामले में खरीदारों का क्या होगा, यह भी एक बड़ा सवाल है। जिन लोगों ने इन प्रोजेक्ट्स में अपनी मेहनत की कमाई लगाई है, उनका पैसा डूब सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मोहाली बिल्डर अजय सहगल को ED ने गिरफ्तार कर 5 दिन के रिमांड पर भेजा
- सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में 30.5 एकड़ जमीन पर फर्जी सहमति पत्र तैयार करने का आरोप
- 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध बिक्री का मामला
- RERA से पहले ही ला कैनेला और डिस्ट्रिक्ट 7 कॉम्प्लेक्स की यूनिट्स बेची गईं
- GMADA और टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी
- ED ने और गिरफ्तारियां करने के संकेत दिए
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