Anti-Sacrilege Law: श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज द्वारा पंजाब सरकार को जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन एक्ट की आपत्तिजनक धाराओं में बदलाव के लिए दिया गया 15 दिनों का अल्टीमेटम आज पूरा हो गया है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल सरकार की तरफ से अकाल तख्त को कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। और बस यहीं से शुरू हुआ एक बड़ा धार्मिक-राजनीतिक संकट, जो पंजाब में तनाव की नई इबारत लिख सकता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने श्री अकाल तख्त को जवाब तो भेजा है, लेकिन उसमें सिर्फ इतना कहा गया है कि अकाल तख्त का पत्र “आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को भेज दिया गया है”। समझने वाली बात यह है कि यह जवाब असल में कोई जवाब नहीं, बल्कि जिम्मेदारी टालने की कोशिश लग रही है।
क्या है पूरा मामला?
8 मई को श्री अकाल तख्त ने पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को अकाल तख्त साहिब में बुलाया था और उन्हें जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन एक्ट में मौजूद आपत्तिजनक मुद्दों के बारे में जानकारी दी थी। इस दौरान जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने स्पीकर को इन विवादित धाराओं को हटाने के लिए कहा और सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया था।
11 मई को श्री अकाल तख्त के सचिवालय ने आपत्तिजनक मुद्दों पर एक विस्तृत पत्र विधानसभा स्पीकर को भेजा था। इस पत्र के अनुसार 15 दिनों की मियाद 26 मई को खत्म हो रही है। अगर गौर करें तो अब सरकार के पास सिर्फ घंटे भर का वक्त बचा है, लेकिन कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा।
अकाल तख्त की मांग क्या है?
जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने साफ कहा था कि सरकार 15 दिनों के अंदर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए और इन आपत्तिजनक धाराओं को हटाया जाए या इनमें संशोधन किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इसे नजरअंदाज करने की सूरत में श्री अकाल तख्त पंज सिंह साहिबान की एकत्रता बुलाकर सख्त कार्रवाई करेगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंज सिंह साहिबान की बैठक का मतलब होता है – पांचों तख्तों के जत्थेदारों की संयुक्त बैठक। ऐसी बैठक तभी बुलाई जाती है जब कोई बेहद गंभीर धार्मिक या पंथिक मुद्दा हो। और इस बार मामला वाकई गंभीर है।
सरकार और अकाल तख्त के बीच टकराव
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 8 मई | स्पीकर को अकाल तख्त में बुलाया गया |
| 11 मई | अकाल तख्त ने विस्तृत पत्र भेजा |
| 26 मई | 15 दिन का अल्टीमेटम खत्म |
| 31 मई | बाबा बकाला में पंथिक संगठनों की बैठक |
इस पूरे मामले को लेकर अब तक सरकार और श्री अकाल तख्त के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल तक जत्थेदार ने पंज सिंह साहिबान की बैठक बुलाने की कोई तारीख तय नहीं की है।
शिरोमणि कमेटी की सक्रियता
देखा जाए तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) इस मामले में काफी सक्रिय है। श्री अकाल तख्त के आदेश पर शिरोमणि कमेटी ने तख्त श्री केसगढ़ साहिब, तख्त श्री दमदमा साहिब और अमृतसर में पंथिक संगठनों की बैठकें बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की है।
इन बैठकों में सिख संगठनों ने आपत्तिजनक धाराओं को लेकर गहरी चिंता जताई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार इतने व्यापक विरोध के बावजूद भी खामोश है।
अब इस मामले में शिरोमणि कमेटी ने 31 मई को बाबा बकाला में समूह पंथिक संगठनों की एक बड़ी एकत्रता बुलाई है। यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें ही आगे की रणनीति तय होगी।
राज्यपाल से भी हुई मुलाकात
बीते दिनों श्री अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार और शिरोमणि कमेटी के प्रधान ने इसी मामले को लेकर पंजाब के राज्यपाल से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में राज्यपाल को आपत्तिजनक धाराओं के बारे में जानकारी दी गई। राज्यपाल ने इस मामले में सरकार से पूछताछ करने का भरोसा दिया था।
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है।
आगे क्या होगा?
अगर सरकार इस मामले में कोई जवाब नहीं देती, तो श्री अकाल तख्त सरकार के खिलाफ अगली कार्रवाई करने से पहले 31 मई को होने वाली पंथिक संगठनों की एकत्रता में होने वाले फैसले का इंतजार कर सकता है।
चिंता का विषय यह है कि अगर यह मामला और बिगड़ा तो पंजाब में बड़े पैमाने पर धार्मिक आंदोलन शुरू हो सकता है। इतिहास गवाह है कि जब भी अकाल तख्त और सरकार के बीच टकराव हुआ है, स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है।
विपक्ष का रुख
फिलहाल विपक्षी दल भी इस मामले पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस दोनों ने सरकार पर अकाल तख्त के आदेश को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
राहत की बात यह है कि अभी तक कोई हिंसक घटना नहीं हुई है और सभी पक्ष संवैधानिक तरीके से मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन समय की कमी और सरकार की चुप्पी स्थिति को और जटिल बना रही है।
क्या कहते हैं धार्मिक विद्वान?
सिख धार्मिक विद्वानों का मानना है कि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन एक्ट में कुछ ऐसी धाराएं हैं जो सिख मर्यादा के खिलाफ हैं। इन्हीं धाराओं को लेकर अकाल तख्त ने आपत्ति जताई है।
इस मामले में यह भी दिलचस्प है कि कानून तो विधानसभा ने पास किया था, लेकिन उसमें कुछ ऐसे प्रावधान आ गए जो धार्मिक भावनाओं से टकराते हैं। अब सवाल उठता है कि क्या कानून बनाते समय धार्मिक विद्वानों से सलाह ली गई थी या नहीं?
31 मई की बैठक में क्या होगा?
बाबा बकाला में 31 मई को होने वाली बैठक में पंजाब भर के तमाम पंथिक संगठन शामिल होंगे। इस बैठक में तीन मुख्य मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है:
- सरकार की चुप्पी पर क्या रुख अपनाया जाए
- पंज सिंह साहिबान की बैठक बुलाने का फैसला
- संभावित आंदोलन की रणनीति
यह बैठक इस पूरे मामले का निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। इसके बाद ही पता चलेगा कि अकाल तख्त कौन सा कदम उठाता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- श्री अकाल तख्त का 15 दिन का अल्टीमेटम 26 मई को खत्म हो गया, सरकार ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया
- जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब संशोधन एक्ट की आपत्तिजनक धाराओं में बदलाव की मांग
- विधानसभा स्पीकर ने पत्र सरकार को फॉरवर्ड किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
- 31 मई को बाबा बकाला में पंथिक संगठनों की बड़ी बैठक होगी
- पंज सिंह साहिबान की एकत्रता बुलाने की चेतावनी दी गई थी
- शिरोमणि कमेटी ने कई जगह बैठकें कर मामले को उठाया है
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