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The News Air - Breaking News - बगदाद में Iran का बड़ा दांव: US को सुलेमानी की याद दिलाकर क्या संदेश दिया?

बगदाद में Iran का बड़ा दांव: US को सुलेमानी की याद दिलाकर क्या संदेश दिया?

अमेरिका से बातचीत के बीच ईरान के विदेश मंत्री ने अचानक बगदाद जाकर शहीद जनरल कासिम सुलेमानी को दी श्रद्धांजलि, अमेरिकी दूतावास के पास छापेमारी से मचा हड़कंप

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
सोमवार, 29 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय
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Iran Baghdad Visit
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 Iran Baghdad Visit : जब दुनिया यह सोच रही थी कि अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों की डिप्लोमेटिक बातचीत शांति की दिशा में एक कदम है, ठीक उसी वक्त तेहरान ने एक ऐसा दांव चला है जिसने वाशिंगटन को चौंका दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची अचानक बगदाद पहुंचे और सबसे पहले उस शख्स को श्रद्धांजलि दी जिसे 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार गिराया गया था – जनरल कासिम सुलेमानी। यह सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया की जियोपॉलिटिक्स में एक साफ संदेश है।

🔍 यह भी पढ़ें- US-Iran Peace Deal: Pakistan की मध्यस्थता से बड़ी सफलता, Hormuz Strait तुरंत खुलेगा

सुलेमानी की याद, अमेरिका को चेतावनी

देखा जाए तो यह कोई साधारण डिप्लोमेटिक विजिट नहीं थी। अब्बास अराघची जैसे अनुभवी राजनयिक का बगदाद में कासिम सुलेमानी के स्मारक पर पहुंचना – वह भी तब जब अमेरिका-ईरान वार्ता चल रही हो – यह एक सुनियोजित रणनीतिक कदम था।

बगदाद में जो मेमोरियल है, वहां दो मूर्तियां हैं। एक सुलेमानी की, जो ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य कमांडर थे। दूसरी अबू महदी अल-मुहंदिस की, जो इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के डिप्टी कमांडर थे। दोनों को 3 जनवरी 2020 को बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में मार दिया गया था – वह हमला जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद अधिकृत किया था।

अराघची का वहां जाना सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं थी। यह अमेरिका को याद दिलाना था कि ईरान ने 2020 की हत्या को भुलाया नहीं है।

🔍 यह भी पढ़ें- US Eases Iran Oil Sanctions: अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगाई पाबंदियों में दी बड़ी राहत

कौन थे कासिम सुलेमानी और क्यों मायने रखती है उनकी विरासत?

समझने वाली बात यह है कि सुलेमानी सिर्फ एक सैन्य अधिकारी नहीं थे। वे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के कमांडर थे – वह यूनिट जो विदेशी अभियानों, गुप्त मिशनों और क्षेत्रीय मिलिशिया के समन्वय के लिए जिम्मेदार है।

पिछले दो दशकों में सुलेमानी ने ही “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” का निर्माण किया था। यह नेटवर्क इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में फैला हुआ है:

  • हिज़्बुल्लाह (लेबनान)
  • हमास (फिलिस्तीन)
  • हौथी (यमन)
  • PMF मिलिशिया (इराक)

ये सभी समूह ईरान के रणनीतिक प्रभाव के स्तंभ हैं। और इनके आर्किटेक्ट थे सुलेमानी।

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बगदाद में ग्रीन जोन में छापेमारी, 47 गिरफ्तार

दिलचस्प बात यह है कि अराघची की यात्रा से ठीक पहले, बगदाद के “ग्रीन जोन” में बड़े पैमाने पर छापेमारी हुई। यह वह इलाका है जहां अमेरिकी दूतावास स्थित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 47 लोगों को गिरफ्तार किया गया – जिनमें राजनेता और अधिकारी शामिल हैं।

यह संयोग नहीं था। यह संदेश था।

ईरान यह साफ कर रहा था कि इराक में उसका प्रभाव मजबूत है, और अमेरिकी उपस्थिति के बावजूद वह अपना नेटवर्क सक्रिय रख सकता है।

इराक क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

अगर गौर करें तो इराक ईरान के लिए एक रणनीतिक गलियारा है। दोनों देश 1,600 किलोमीटर से अधिक की सीमा साझा करते हैं। इराक में लाखों शिया तीर्थयात्री हर साल आते हैं। और सबसे बड़ी बात – इराक के रास्ते ही ईरान का सीरिया और लेबनान तक पहुंच मार्ग है।

यही नहीं, इराक में अमेरिकी सैनिक भी तैनात हैं। यानी यह एक ऐसा देश है जहां ईरान और अमेरिका दोनों का प्रभाव टकराता है।

पक्षइराक में प्रभाव का तरीका
ईरानशिया मिलिशिया, धार्मिक संबंध, PMF के माध्यम से
अमेरिकासैन्य उपस्थिति, राजनीतिक दबाव, सुरक्षा सहयोग
अब्बास अराघची कौन हैं और यह यात्रा क्यों खास है?

अब्बास अराघची ईरान के सबसे अनुभवी राजनयिकों में से एक हैं। उन्होंने परमाणु वार्ता में भाग लिया है, रूस-चीन के साथ समन्वय किया है, और अमेरिका के साथ डील करने का अनुभव रखते हैं।

ऐसे में जब एक चीफ डिप्लोमेट किसी सैन्य कमांडर की याद में श्रद्धांजलि देने जाता है, तो यह सिर्फ भावना नहीं, नीति का संकेत है।

अमेरिका को क्या संदेश?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान दोहरी रणनीति अपना रहा है:

  1. एक तरफ वह अमेरिका से बातचीत कर रहा है।
  2. दूसरी तरफ अपने क्षेत्रीय नेटवर्क को मजबूत कर रहा है।

यह संदेश साफ है: “हम बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन समर्पण नहीं करेंगे।”

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भारत के लिए क्या मायने रखता है यह विकास?

भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है। इराक भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है। ईरान के साथ भी ऐतिहासिक संबंध हैं। और अमेरिका एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है।

ऐसे में भारत की रणनीति यही रहेगी कि वह सभी पक्षों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे।

क्या यह शांति का अंत है?

नहीं, लेकिन यह एक चेतावनी जरूर है। ईरान स्पष्ट कर रहा है कि भले ही 60 दिनों की डिप्लोमेसी चल रही हो, लेकिन वह अपनी सैन्य और सांस्कृतिक पहचान से पीछे नहीं हटेगा।

इजराइल, अमेरिका और खाड़ी के देशों के लिए यह एक संकेत है कि “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” अभी जिंदा है। और सुलेमानी की विरासत अभी खत्म नहीं हुई है।


मुख्य बातें (Key Points)

  • ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बगदाद में कासिम सुलेमानी को श्रद्धांजलि दी
  • 2020 में अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में सुलेमानी की हत्या को ईरान ने नहीं भुलाया
  • बगदाद के ग्रीन जोन में छापेमारी और 47 गिरफ्तारियां अमेरिका के लिए चिंता का विषय
  • ईरान अमेरिका से बातचीत के साथ-साथ अपना क्षेत्रीय प्रभाव मजबूत कर रहा है
  • इराक में ईरान और अमेरिका दोनों का प्रभाव, भारत के लिए संतुलन जरूरी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कासिम सुलेमानी कौन थे और उन्हें क्यों मारा गया?

कासिम सुलेमानी ईरान के IRGC की कुद्स फोर्स के कमांडर थे। 3 जनवरी 2020 को बगदाद में अमेरिकी ड्रोन स्ट्राइक में उनकी हत्या कर दी गई। अमेरिका का आरोप था कि वे अमेरिकी कर्मियों पर हमले की योजना बना रहे थे।

प्रश्न 2: ईरान और अमेरिका के बीच अभी क्या बातचीत चल रही है?

दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय तनाव और प्रतिबंधों को लेकर 60 दिनों की अनौपचारिक वार्ता चल रही है। लेकिन विश्वास की कमी अभी भी बनी हुई है।

प्रश्न 3: इराक में ईरान का इतना प्रभाव क्यों है?

इराक में बड़ी शिया आबादी है, जो ईरान से धार्मिक रूप से जुड़ी है। इसके अलावा, PMF जैसी मिलिशिया ईरान समर्थित हैं। और भौगोलिक रूप से भी इराक ईरान के लिए सीरिया-लेबनान तक पहुंचने का रास्ता है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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