Iran Missile Boats – हम अक्सर भारत के IT सेक्टर को आधुनिक भारत के मंदिर मानते हैं, लेकिन आज बात करेंगे उस समुद्री संकट की जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। सऊदी अरब घबरा गया है। उसने अमेरिका पर दबाव डालना शुरू कर दिया है कि होरमुस जलसंधि में नाकाबंदी हटा ले।
देखा जाए तो सऊदी अरब की चिंता यह है कि अगर जवाब में ईरान ने दूसरे रास्तों को बंद करना शुरू कर दिया, तो उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। ईरान कह रहा है यह नाकाबंदी उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र में उसके राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र के निदेशक को पत्र लिखा है कि यह समुद्री कानून का उल्लंघन किया जा रहा है।
मगर ईरान जवाबी हमले के लिए तैयार है। उधर चीन में बहुत कुछ हो रहा है। बीजिंग में स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेस मौजूद हैं। उनके साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान भी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति के उपाय सुझाए हैं, जिसके बारे में हम आगे विस्तार से बात करेंगे।
Red Bees: ईरान की मिसाइल नावें क्या हैं
बोट मिसाइल क्या होती है? होती भी है या नहीं? क्या अमेरिका के पास ऐसी बोट मिसाइलें नहीं हैं? ईरान ने यह वीडियो जारी किया है – छोटी-छोटी नावों का बेड़ा, फुर्र से भागती हुई नावें जिनसे मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
अगर ईरान मिसाइल दागने वाली नावें बना सकता है, तब तो टेक्नोलॉजी के गुरु इजराइल को फूंक से उड़ने वाली मिसाइलें बना लेनी चाहिए थीं। ईरान के मुंबई कॉन्सुलेट ने यह वीडियो जारी किया है।
Red Bees – ईरान का कहना है फारस की खाड़ी की लाल मधुमक्खियां तैयार हो रही हैं। ट्रंप दावा करते रहे कि ईरान की नौसेना खत्म कर दी गई। अब उन्हें पता चलेगा कि जब झुंड हमला करता है तो कैसे उन्हें रोका जा सकता है। अभी तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।
समझने वाली बात है कि जिन Red Bees की बात हो रही है, वह मधुमक्खी का एक प्रकार है। लाल रंग की होती है, काट जाए तो दर्द होता है। अकेले रहना पसंद करती हैं, मगर झुंड में हमला भी कर सकती हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल का विश्लेषण: छोटी नावें बड़ा खतरा
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है कि ईरान की नौसेना बर्बाद हो चुकी है। मगर उसके पास अभी भी कई सारी छोटी-छोटी नावें हैं जिन्हें पकड़ना मुश्किल है। यह नावें अमेरिका के लिए खतरा बन सकती हैं।
यह बातचीत के समय की तस्वीर बताई जा रही है। AI भी हो सकती है। जर्मनी में ईरान के दूतावास ने जारी की है। कुर्सी पर कौन बैठा है यह कहना मुश्किल है, लेकिन कमरे में ईरान की टीम की उपस्थिति कुछ और ही बता रही है – कितनी सहजता और आत्मविश्वास! फिक्र ही नहीं कि सुपर पावर से डील कर रहे हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता: दूसरे दौर की बातचीत
अलजजीरा ने खबर ब्रेक की है कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान को दूसरे दौर की बातचीत का प्रस्ताव दिया है। तुर्की की न्यूज़ एजेंसी अनादोलू ने पाकिस्तानी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट की है।
बातचीत को लेकर दूसरे राउंड की शीर्ष बैठक बहुत जल्द इस्लामाबाद में हो सकती है। कौन-कौन भाग लेगा, इसकी जानकारी अभी नहीं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि ट्रंप 2 मई के चीन दौरे से पहले डील फाइनल कर लेना चाहते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि इस बार 45 से 60 दिनों के युद्ध विराम की कोशिश हो रही है।
सऊदी अरब की चिंता: Bab-al-Mandab का खतरा
तो क्या होरमुस का नाकाबंदी अमेरिका का नया ड्रामा है? अपने युद्धपोतों को यहां तैनात कर ट्रंप क्या हासिल करना चाहते हैं? सऊदी अरब क्यों परेशान है? क्यों ट्रंप को सलाह दे रहा है – ईरान को उकसाने की जरूरत नहीं?
सऊदी अरब के दूसरी तरफ लाल सागर है। इसी लाल सागर और एडेन की खाड़ी के बीच यमन के तट पर पतला सा समुद्री रास्ता है, जिसे Bab-al-Mandab कहते हैं।
अरबी में Bab-al-Mandab का मतलब “आंसुओं का दरवाजा” – बहुत मुश्किल इलाका है जहाजों के लिए, इसीलिए यह नाम पड़ा। जब होरमुस से तेल जाना बंद हो गया तो विकल्प के रूप में एक रास्ता यह भी बचा हुआ था।
चिंता का विषय यह है कि अगर Bab-al-Mandab बंद हो गया तो तेल की अर्थव्यवस्था को ऐसा झटका लगेगा जैसा अभी तक लगा नहीं।
ईरान का आत्मविश्वास: सोशल मीडिया युद्ध
ईरान ने कहा है – होरमुस सोशल मीडिया नहीं कि किसी ने आपको ब्लॉक कर दिया तो आपने भी बदले में ब्लॉक कर दिया। अमेरिका की क्लोई नाम की किसी महिला ने घाना के ईरान दूतावास से पूछा कि क्या अमेरिका ने माइन हटाकर होरमुस पर कब्जा कर लिया है? मुझे ईरान की बड़ी चिंता है।
इस पर दूतावास पलटकर जवाब देता है – “रिलैक्स क्लोई! कल तुम्हारी नौसेना ने कोशिश की थी। ईरान ने कॉल किया और अमेरिका को यू-टर्न लेना पड़ा। ऑपरेशन से लंबी तो फोन कॉल चल पड़ी। इससे ज्यादा लड़ाई तो Uber के ड्राइवर ट्रिप कैंसिल होने से पहले करते हैं।”
हैरान करने वाली बात तो यह है कि क्या ईरान वाकई इतना रिलैक्स है? उसे अमेरिका की एकदम परवाह नहीं। अमेरिका ईरान को आंखें दिखाना चाहता है, मगर ईरान उसकी तरफ देखना भी नहीं चाहता।
Netanyahu का घमंड: Trump को रिपोर्ट करते हैं
जिस Netanyahu पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में सुनवाई चल रही है, युद्ध विराम का बहाना बनाकर सुनवाई टाली गई एक महीने के लिए – वो Netanyahu अमेरिका को उसकी जगह दिखा रहे हैं।
कह रहे हैं युद्ध को लेकर ट्रंप का प्रशासन उन्हें हर दिन रिपोर्ट करता है। JD Vance ने इस्लामाबाद बातचीत से लौटते हुए अपने विमान से उन्हें फोन किया और बातचीत के बारे में जानकारी दी।
साफ है कि Netanyahu अमेरिका को कुछ नहीं समझते और जो भी एक्सपर्ट कह रहे हैं कि ट्रंप खुद से फैसला ले ही नहीं सकते, शायद उनकी बात सही लग रही है।
चीन का कूटनीतिक दांव: Xi Jinping की चार सूत्री योजना
अब सवाल उठता है – क्या चीन इस इलाके में कुछ बड़ा कूटनीतिक प्रयास कर रहा है? जो काम पाकिस्तान से नहीं हो सकता, वो अब चीन ने सीधे अपने हाथों में ले लिया है।
बीजिंग में स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेस और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई। स्पेन ने अमेरिका का खुलकर विरोध किया तो ट्रंप ने 36 घंटे के भीतर स्पेन से हर तरह का संबंध तोड़ लेने की धमकी दे दी है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि स्पेन के प्रधानमंत्री इतिहास के सही पक्ष के साथ खड़े हैं। चीन भी स्पेन के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। पिछले 3 वर्षों में स्पेन और चीन एक-दूसरे के काफी करीब आए हैं। यूरोप के देशों में चीन का सबसे करीबी दोस्त स्पेन माना जाता है।
Xi Jinping के चार सूत्र: शांति की राह
सांचेस से बातचीत में शी जिनपिंग ने कहा कि जंगल के कानून का विरोध होना चाहिए। इसके लिए स्पेन और चीन को मिलकर काम करना चाहिए। दुनिया में बेहतर बातचीत की जरूरत है ताकि विश्वास कायम हो सके और कानून का पालन हो। मिलकर बहुध्रुवीय व्यवस्था की रक्षा करनी होगी और दुनिया में शांति और विकास के लिए काम करना होगा।
बीजिंग में संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान भी मौजूद हैं। शी जिनपिंग और क्राउन प्रिंस के साथ बैठक हुई। यह भी हो सकता है कि खाड़ी के देश चीन की तरफ देखने लगे हों।
शी जिनपिंग ने अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के सामने चार बिंदुओं का प्रस्ताव रखा:
- शांति से एक-दूसरे के साथ रहने के सिद्धांत पर अमल होना चाहिए
- राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांत का पालन होना चाहिए
- अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का पालन होना चाहिए
- विकास और रक्षा के मामलों पर मिलकर काम होना चाहिए
चीन की चुनौती: तेल शिपमेंट जारी रहेगी
चीन ने साफ कर दिया है कि उसके जहाज ईरान से तेल लेकर होरमुस पार करते रहेंगे। कोई उसके रास्ते में बाधा न डाले। चीन का जहाज पार भी किए जा रहे हैं।
खबर यह भी है कि चीन ईरान को हथियारों का शिपमेंट भेजने की तैयारी में है। अमेरिका के खुफिया विभाग के अनुसार किसी तीसरे देश के रास्ते ये हथियार भेजे जा सकते हैं ताकि पहचान उजागर न हो। चीन पर नजर रखी जानी चाहिए।
भारत का मौन: Modi बंगाल चुनाव में व्यस्त
मगर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहां हैं? बंगाल के विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं। रील बना रहे हैं। बंगाल चुनाव को देखते हुए संसद में महिला आरक्षण को लेकर कुछ बड़ा होने जा रहा है ताकि मतदान से पहले महिलाओं के कल्याण का मुद्दा बड़ा किया जा सके।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि बंगाल का चुनाव BJP के लिए होरमुस के जैसा हो गया है।
ईरान का दावा: होरमुस हमारा है
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई के सलाहकार और पूर्व विदेश मंत्री अली अकबर विलायती ने कहा है कि होरमुस ईरान का है। उसका कंट्रोल ईरान के मजबूत हाथों में है।
इससे साफ होता है कि ईरान होरमुस के कंट्रोल को लेकर लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। उसने हर तरफ से साफ कर दिया है। अब अमेरिका को तय करना है कि वह और जंग चाहता है या नहीं।
यह तस्वीर ईरान से जुड़े एक हैंडल ने जारी की है। कहा है कि अमेरिका का युद्धपोत जॉर्ज डब्ल्यू बुश मिडिल ईस्ट के थिएटर में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका का सबसे बड़ा युद्धपोत अब्राहम लिंकन भी अरब सागर की तरफ बढ़ रहा है।
क्या छोटी नावें बड़े युद्धपोतों को हरा सकती हैं?
क्या ईरान मिसाइल दागने वाली नावों से इन बड़े-बड़े भीमकाय युद्धपोतों पर हमला कर पाएगा? होरमुस में अभी तक ईरान ने गोले नहीं दागे, न अमेरिका ने।
अमेरिकी अखबार लिख रहे हैं कि होरमुस के नाकाबंदी से ईरान को घाटा नहीं होगा क्योंकि ईरान ने युद्ध के दौरान जमकर कच्चे तेल को टैंकरों में भर दिया है और वे पानी में तैर रहे हैं। उसने इतना तेल रवाना कर दिया कि लंबे समय तक नाकाबंदी झेल सकता है।
ईरान की तेल रणनीति: 160 मिलियन बैरल तैयार
ईरान का कहना है कि 3 महीने की सप्लाई का तेल समंदर में है, जहाज में लोड है। जिस समय सबका तेल का निर्यात बंद था, उस समय ईरान ने रोजाना 13.9 मिलियन डॉलर की कमाई की है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया है कि तेल निर्यात बंद करने की अमेरिका की तमाम धमकियों के बावजूद ईरान कहीं से भी दबाव में नजर नहीं आ रहा। उसने अपने तटों से दूर चुपचाप बहुत बड़ा बफर बना लिया है।
जिस पर नाकाबंदी का कोई असर नहीं होगा। वह पहले ही 160 मिलियन बैरल तेल होरमुस से निकाल चुका है। फरवरी और मार्च के महीने में उसने बंपर निर्यात किया है – 2025 के मुकाबले 26% अधिक शिपमेंट भेजे हैं।
वह चीन जैसे ग्राहकों को महीनों तक तेल की सप्लाई कर सकता है। उसकी कमाई पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। कम से कम जुलाई तक चीन की सप्लाई पर असर नहीं पड़ेगा।
विशेषज्ञों की राय: नाकाबंदी बेअसर
एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अमेरिका ईरान को इस नाकाबंदी से आर्थिक तौर पर नुकसान नहीं पहुंचा सकता। लेकिन यहां जंग हो गई तो दुनिया की अर्थव्यवस्था चौपट होने लग जाएगी।
होरमुस के कारण कच्चे तेल का व्यापार ही नहीं, पर्यटन भी इस इलाके में ठप हो गया है। होरमुस का एक हिस्सा ओमान का भी है। ओमान के तट पर जो पर्यटन होता है, वो इस साल बंद ही है। खसब नाम का छोटा सा शहर है जो वीरान है।
दूसरी तरफ ईरान के दूतावास होरमुस पर पर्यटन का प्रचार करने लगे। क्यूबा में ईरान के दूतावास ने होरमुस के तट पर टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स की तस्वीरें जारी की हैं। लिखा है – “आपको यहां आना चाहिए।”
कमेंट में लोग लिख रहे हैं – “हमने दुबई जाने के लिए पैसे बचाकर रखे थे। अब ईरान जाना चाहते हैं। हमें स्पेशल वीजा दीजिए।” इस पर दूतावास ने लिखा है – “क्यूबा के यात्रियों को दो हफ्ते तक वीजा की कोई जरूरत नहीं। ईरान में आपका स्वागत है।”
चीनी जहाजों का पार होना: अमेरिका की नाकामी
उधर दुनिया इस बात को लेकर परेशान है कि अगर अमेरिका की नाकाबंदी है तो चीन का तेल वाहक जहाज कैसे गुजर गया? जिस जहाज पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया, वही गुजर जाए उसके रहते – अमेरिका का तो मजाक उड़ना तय है।
अमेरिका में टैलेंट की घोर कमी हो गई है। उसका प्रोपेगेंडा एकदम बोगस, नीरस और थर्ड क्लास है। चीन के जहाजों के पार होने की खबर पर हैदराबाद में ईरान के कॉन्सुलेट ने लिखा है कि ईस्टर्न टाइम में दी गई सभी डेडलाइन बेईमानी है। #OperationEpicFailure
ईस्टर्न टाइम यानी अमेरिका का टाइम जोन।
ईरान का काउंटर ब्लॉकेड: तीन लाइनों की रणनीति
हैदराबाद में ईरान के कॉन्सुलेट ने होरमुस के नक्शे की तस्वीर जारी की, जिस पर तीन लकीरें खींची हैं:
- पहली लकीर: ईरान के मौजूदा नाकाबंदी को दिखाती है जो लारक टापू के पास है
- दूसरी लकीर: अमेरिका के नाकाबंदी का इलाका दिखा रही है
- तीसरी लकीर: इसके काफी आगे – कॉन्सुलेट लिखता है कि ईरान यहां पर अमेरिका के नाकाबंदी को ब्लॉक कर देगा
मतलब अमेरिका खाड़ी के जिन जहाजों को जाने की अनुमति देगा, ईरान आगे रोक देगा। और अमेरिका के जहाज भी फंस जाएंगे ईरान के दोनों नाकाबंदी के बीच में।
युद्ध विराम में वाटर स्पोर्ट्स जैसा खेल
युद्ध विराम इस समय होरमुस के पानी में वाटर स्पोर्ट्स जैसा हो गया है। क्या 11 अप्रैल की रात अमेरिका ने होरमुस को पार किया? उसका दावा है – किया है। लेकिन ईरान का कहना है – नहीं किया है।
इस घटना पर Press TV ने एक AI वीडियो जारी किया। इससे पहले एक ऑडियो जारी किया गया जिसे अमेरिका के जहाज और ईरान की नौसेना के बीच बातचीत का हिस्सा बताया जा रहा है।
इसमें ईरान की नौसेना अमेरिका के जहाज को चेतावनी देती है कि आप वापस मुड़ जाइए, नहीं तो हमला होगा। ओमान सागर में खड़े जहाजों को संदेश दिया जाता है कि अमेरिका के युद्धपोत से 10 मील दूर हो जाइए क्योंकि उन पर बिना चेतावनी हमला हो सकता है।
11 अप्रैल की रात: AI वीडियो में दावा
वीडियो चूंकि AI का है, कहानी कुछ भी बन सकती है। लेकिन इसमें बताया गया है कि इस्लामाबाद में बातचीत के दौरान अमेरिका की नौसेना ने छल का सहारा लिया और दो युद्धपोतों ने अपने आप को ओमान का जहाज बताकर पार करने की कोशिश की।
ईरान ने अपनी छोटी नावों को भेजकर जहाजों की जांच की और उन पर क्रूज मिसाइल रडार लॉक कर दिया। जिसके बाद अमेरिका की सेना समझ गई कि उनकी चोरी पकड़ी गई है।
IRGC (Iranian Revolutionary Guard Corps) दोनों जहाजों को रोक देती है, जिसके बाद युद्धपोत ईरान की नौसेना से बात करते हैं। ईरान उन्हें चेतावनी देता है – हिंद महासागर में लौट जाइए, नहीं तो हमला हो जाएगा।
ईरान ने आखिरी चेतावनी जारी करते हुए उन पर शाही ड्रोन छोड़ दिया, जिसके बाद दोनों जहाज मुड़ गए। इस तरह यह प्रोपेगेंडा वीडियो समाप्त होता है।
नुकसान का हिसाब: Iran vs Israel
इन कहानियों को सुनिए, जानिए। पता चलेगा कि बम गिराने के अलावा दोनों पक्ष किस तरह से बातें कर रहे हैं। इजराइल और ईरान युद्ध के नुकसान का हिसाब भी बताने लगे हैं।
ईरान का दावा: शुरुआती आकलन के हिसाब से 270 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है, जिसका हर्जाना वह मांगेगा।
इजराइल का दावा: वित्त मंत्रालय ने कहा है कि पांच हफ्ते के युद्ध में इजराइल को 11.5 अरब डॉलर का खर्च हो गया। इसमें कुछ पैसे आम लोगों को हर्जाने के रूप में भी दिए गए जिनके घर और दुकानें बर्बाद हो गईं, काम छूट गया।
Trump की मानसिक स्थिति पर सवाल
उधर ट्रंप अजीब-अजीब मसलों से घिर गए हैं। रविवार को इस्लामाबाद टॉक्स के फेल हो जाने के बाद ट्रंप कभी Pope के खिलाफ बोलने लग जाते हैं, विवाद में पड़ गए तो कभी ईसा मसीह की तरह खुद को दिखाने की तस्वीर जारी कर देते हैं। ट्रंप को अपना ही ट्वीट डिलीट करना पड़ा।
अमेरिकी कांग्रेस के दो सदन होते हैं – House of Representatives और Senate। Senate उच्च सदन है, House of Representatives लोअर हाउस है।
House of Representatives में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) के प्रस्ताव पेश किए जाने लगे हैं। मांग हो रही है कि कैबिनेट को 25वें संशोधन के तहत अक्षम घोषित कर देना चाहिए। ट्रंप को अमेरिका में डेमोक्रेट उनकी मानसिक सेहत की जांच करने की मांग कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स ने ट्रंप की मानसिक हालत पर लंबी रिपोर्ट की है। ट्रंप इससे लेकर काफी नाराज हो गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनके अजीब बर्ताव और कमेंट के कारण उनकी मानसिक सेहत पर एक तरह से बहस को फिर से खड़ा कर दिया है।
रात-रातभर ट्रंप पोस्ट करते हैं, कभी गाली देते हैं, कभी सभ्यता खत्म करने की बातें करने लग जाते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स में पीटर बेकर की रिपोर्ट कहती है कि ट्रंप के बयानों के कारण उनके पुराने दोस्त और सहयोगी सवाल करने लगे हैं कि क्या ट्रंप की दिमागी हालत ठीक है या नहीं? वह पागलों जैसे बयान क्यों दे रहे हैं?
ट्रंप को लेकर यह बहस पुरानी है, तब कोई ध्यान नहीं देता था, मगर अब गंभीर हो गई है। व्हाइट हाउस इन सवालों को खारिज कर रहा है, कहता है ट्रंप पूरी तरह से फिट हैं।
लेकिन आधुनिक इतिहास में किसी राष्ट्रपति की मानसिक सेहत को लेकर इस तरह से कभी डिबेट नहीं हुआ, खासकर जब उसका असर इतना व्यापक हो।
Biden की तुलना और संवेदनशील मुद्दा
Biden को लेकर भी यह सवाल उठा और देश की आंखों के सामने उनकी सेहत बिगड़ती भी गई। लेकिन ट्रंप की सेहत का सवाल खासतौर पर इसलिए संवेदनशील है क्योंकि उन्होंने देश को युद्ध में झोंक दिया है।
पहले सिर्फ डेमोक्रेट या कॉमेडियन ऐसी बातें करते थे। अब रिटायर हो चुके जनरल, डिप्लोमैट और ट्रंप से दूर हो चुके रिपब्लिकन पार्टी के नेता जैसे Marjorie Taylor Greene कह रहे हैं – ट्रंप की भाषा कतई कूटनीति की नहीं है, पागलपन की है।
किसी राष्ट्रपति की दिमागी हालत बहस का मुद्दा बन जाए – इसी से पता चलता है कि ईरान ने अमेरिका की क्या हालत कर दी है। यह सब इसलिए भी हो रहा है क्योंकि अमेरिका ने युद्ध क्यों किया, किसी को पता नहीं। जब कारण पता न हो तो युद्ध विनाश के साथ-साथ तमाशा बन जाता है, जिसमें पहले हमला करने वाला जोकर की तरह नजर आता है।
मुख्य बातें (Key Points)
• ईरान ने Red Bees नाम की मिसाइल नावें तैनात कीं जो झुंड में हमला कर सकती हैं
• होरमुस जलसंधि पर अमेरिका की नाकाबंदी से सऊदी अरब घबराया हुआ है
• ईरान ने 160 मिलियन बैरल तेल पहले से निकाल लिया है, 3 महीने की सप्लाई तैयार
• पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत का प्रस्ताव दिया
• चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने चार सूत्री शांति योजना पेश की
• स्पेन और UAE के नेता बीजिंग में मौजूद हैं, चीन मध्यस्थता कर रहा है
• Bab-al-Mandab जलसंधि बंद होने का खतरा, तेल अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है
• चीन के जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के बावजूद पार हो गए
• ईरान ने तीन स्तरीय काउंटर ब्लॉकेड की धमकी दी है
• Trump की मानसिक स्थिति पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट की, महाभियोग के प्रस्ताव पेश हुए
• Netanyahu ने दावा किया कि Trump उन्हें हर दिन रिपोर्ट करते हैं
• भारत के PM Modi बंगाल चुनाव में व्यस्त, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मौन
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न













