Strait of Hormuz Ship Attack: देर रात एक बड़ी खबर आई है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (होर्मुज़ जलडमरूमध्य) के नजदीक सिंगापुर फ्लैग शिप पर एक बड़ा हमला हुआ और इसकी जिम्मेदारी अमेरिका ने ईरान पर डाल दी है। इस हमले को देखते हुए इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने पूरा इवैक्यूएशन प्लान सस्पेंड कर दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि खबरें यह भी आ रही हैं कि ईरान गल्फ देशों को एक साथ इकट्ठा करने की कोशिश कर रहा है ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से करीब 40 बिलियन डॉलर की फीस वसूली जा सके। यह मामला केवल एक हमला नहीं है बल्कि इसके पीछे एक बड़ी भू-राजनीतिक रणनीति नजर आ रही है।
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क्या हुआ था
सिंगापुर फ्लैग कार्गो शिप, जिसका नाम एवर लवली बताया जा रहा है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के नजदीक से गुजर रहा था। तभी पता चलता है कि जहाज का जो कंट्रोल रूम है जहां कैप्टन और ऑफिसर्स होते हैं, जो शिप को नेविगेट करते हैं, उस पर हमला हुआ।
समझने वाली बात यह है कि अभी तक किसी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई है, कोई मारा नहीं गया और कोई ऑयल स्पिल नहीं हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि हमला जहाज के ब्रिज (ऊपरी हिस्से) पर हुआ, इसलिए जहाज डूबा नहीं।
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कहां हुआ हमला
अगर लोकेशन की बात करें तो यह हमला गल्फ ऑफ ओमान के नजदीक, ओमान के पोर्ट के पास हुआ बताया जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से बाहर निकलते ही यह इलाका आता है।
पृष्ठभूमि क्या है
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले कई महीनों से यहां तनाव बना हुआ था। जब युद्ध शुरू हुआ था तो अमेरिका और ईरान बहुत तीव्र युद्ध की स्थिति में आ गए थे। चेतावनियां दी जा रही थीं, कमर्शियल शिप पास नहीं हो रहे थे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ क्लोज हो गया था।
फिर यहां पर कुछ प्रयास किए गए। हाल ही में 60 दिनों का समय दिया गया जिसमें अमेरिका और ईरान ने स्विट्जरलैंड में MOU साइन किया। बातचीत चल रही है। जब मामला ठंडा हुआ तो ऐसा लग रहा था कि चीजें ठीक हो जाएंगी। लेकिन तभी यह हमला हो गया।
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प्रोजेक्टाइल हमला
अब सवाल यह है कि प्रोजेक्टाइल क्या होता है? अभी काफी कंफ्यूजन है। कोई भी एग्जैक्टली नहीं बता रहा कि क्या ड्रोन से हमला हुआ है या मिसाइल से। यहां पर ड्रोन भी हो सकता है, लॉइटरिंग म्यूनिशन भी हो सकता है (जो ड्रोन ऊपर रुककर अचानक हमला करते हैं), क्रूज मिसाइल भी हो सकती है या गाइडेड रॉकेट भी।
अमेरिका ने तो बस ईरान पर जिम्मेदारी डाल दी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार रडार ट्रैकिंग, सैटेलाइट इमेज के जरिए यह कहीं न कहीं ईरान द्वारा ही किया गया। लेकिन ईरान ने न तो इसकी जिम्मेदारी ली है और अमेरिका ने भी कोई ठोस सबूत नहीं दिया है।
ईरान क्यों करेगा हमला
अगर मान लो ईरान ने हमला किया तो इसके पीछे का मकसद क्या हो सकता है? एक तो ईरान ने बार-बार यह तर्क दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की सुरक्षा में क्षेत्रीय राज्यों का शामिल होना चाहिए। बाहरी सैन्य प्रभाव से बचने की कोशिश हो सकती है।
दूसरा, यहां पर सीमित हमला करके, ताकि बड़ी जनहानि न हो, एक चेतावनी संकेत देने की कोशिश हो सकती है बिना पूर्ण पैमाने के संघर्ष के। तीसरा, राजनीतिक लाभ हो सकता है। क्योंकि अभी स्विट्जरलैंड में बातचीत चल रही है।
अगर गौर करें तो यह भी संभव है कि ईरान यह संदेश भेज रहा हो कि MOU साइन कर दिया, 60 दिनों के लिए चीजें रुक गईं, इसका मतलब यह नहीं कि ईरान अलर्ट पर नहीं है। वे कभी भी कुछ भी फिर से शुरू कर सकते हैं।
सिंगापुर फ्लैग का मतलब
सिंगापुर फ्लैगशिप का सिंपल मतलब यह होता है कि जो कार्गो शिप है वो सिंगापुर में रजिस्टर्ड है। हो सकता है कि उसमें सामान भारत का जा रहा हो, कहीं और का जा रहा हो। इसमें क्रू मेंबर्स कहीं और देश के हो सकते हैं। ज्यादातर क्रू मेंबर्स तो इंडियन ही देखने को मिलते हैं।
शिप डूबा क्यों नहीं
जब इस पर इतना बड़ा हमला हुआ तो शिप डूबा कैसे नहीं? पिछले कुछ समय पहले याद होगा कई भारतीयों की मौत हुई थी जब अमेरिका ने मिसाइल से शिप पर अटैक किया था।
चिंता का विषय यह है कि उस केस में जो हल वाला एरिया होता है (नीचे का जहां इंजन रूम, फ्यूल टैंक होते हैं) उस पर हमला किया गया था तो शिप डूबने के चांस ज्यादा होते हैं। लेकिन जब ऊपरी स्तर (ब्रिज) पर हमला होता है तो शायद जहाज सुरक्षित रहता है।
इवैक्यूएशन क्या था
जब यहां युद्ध शुरू हुआ था तो पूरा शिपिंग लेन क्लोज हो गया था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में कोई भी कमर्शियल शिप जाने से कतरा रही थी। बहुत सारे जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से बाहर, गल्फ ऑफ ओमान के नजदीक रुके हुए थे। वे जाने के लिए तैयार नहीं थे और कई महीनों से वहीं खड़े थे। खाने-पानी की दिक्कत हो रही थी।
जब मामला ठंडा पड़ने लगा तो IMO द्वारा इवैक्यूएशन लॉन्च किया गया। दो मुख्य रूट निकाले गए – एक नॉर्दर्न रूट (ईरानी क्षेत्र के नजदीक से) और दूसरा सदर्न रूट (ओमान अथॉरिटीज के साथ मिलकर)। इन दो शिपिंग लेन से जहाजों को इवैक्यूएट कराना था।
यह इवैक्यूएशन कुछ ही दिन पहले शुरू हुआ था जब MOU साइन हुआ था। लेकिन तभी सिंगापुर फ्लैगशिप पर हमले की खबर आई और IMO ने तुरंत इवैक्यूएशन सस्पेंड कर दिया। क्योंकि अगर नहीं रोका तो और भी शिप्स पर हमला हो सकता है।
अभी तक 57 कमर्शियल शिप्स को वहां से निकाला जा चुका था। 1100 से ज्यादा सी फेयरर्स को पार कराया जा चुका है। लेकिन यह बहुत छोटा नंबर है क्योंकि अभी भी हजारों की संख्या में लोग फंसे हुए हैं जिनमें कई भारतीय भी हैं।
ईरान की 40 बिलियन डॉलर की मांग
आज सुबह यह खबर भी आ रही है कि ईरान चाहता है कि गल्फ देशों के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में फीस कलेक्ट की जाए। ईरान का प्रस्ताव है कि गल्फ कंट्रीज संयुक्त रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को मैनेज करें।
ईरान का मानना है कि वे सुरक्षा, नेविगेशन सेफ्टी, एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन, मैरिटाइम सर्विस, इंश्योरेंस से संबंधित सेवाएं दे रहे हैं। इन सेवाओं का खर्चा कौन उठाएगा? इसलिए उन्हें फीस मिलनी चाहिए।
हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान ने अनुमान लगाया है कि अगर छोटी फीस भी ली जाए तो हर साल 40 बिलियन डॉलर कलेक्ट हो सकता है जो आपस में बांटा जा सकता है। अभी तक यह फ्री इंटरनेशनल पासेज था। कोई फीस नहीं लगता था।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान इसे टोल नहीं बल्कि फीस कह रहा है क्योंकि वे सेवाएं प्रदान करते हैं। राहत की बात यह है कि यह केवल एक प्रस्ताव है। देखना है कि इस पर क्या होता है।
भारत पर असर
इस पूरे मामले का असर भारत पर भी होगा। कीमतें बढ़ेंगी, समस्याएं होंगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से भारत का बहुत सारा तेल आता है और व्यापार होता है।
मुख्य बातें (Key Points)
• सिंगापुर फ्लैग कार्गो शिप ‘एवर लवली’ पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास हमला
• अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन ईरान ने जिम्मेदारी नहीं ली
• IMO ने इवैक्यूएशन प्लान सस्पेंड किया
• ईरान चाहता है गल्फ देशों के साथ मिलकर 40 बिलियन डॉलर फीस वसूलें
• अभी तक 57 शिप्स और 1100+ सी फेयरर्स को इवैक्यूएट किया जा चुका
• हजारों भारतीय अभी भी फंसे हुए हैं













