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The News Air - Breaking News - Ram Mandir Donation Scam: SIT ने 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार, टॉयलेट में छुपाए जाते थे नोट

Ram Mandir Donation Scam: SIT ने 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार, टॉयलेट में छुपाए जाते थे नोट

अयोध्या राम मंदिर डोनेशन घोटाले में 8 लोग गिरफ्तार, CCTV को कपड़े से ढकना, काउंटिंग के दौरान पैसे चुराना, सिस्टमैटिक ठगी का खुलासा

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 27 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Ram Mandir Donation Scam
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Ram Mandir Donation Scam: पिछले कुछ दिनों से आप लगातार राम मंदिर डोनेशन फ्रॉड के बारे में सुन रहे होंगे। लेकिन अभी तक चीजों में स्पष्टता नहीं थी कि एग्जैक्टली यह घोटाला किसने किया? कैसे कराया गया? कौन-कौन शामिल हो सकता है?

अब इन्वेस्टिगेशन में बहुत सारी चीजें स्पष्ट हो रही हैं। आप देख सकते हो खबर – अटेंडेंट, एक्स बैंक स्टाफ, द मेन विद की एट अरेस्टेड इन राम टेंपल डोनेशन रो।

दिलचस्प बात यह है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। जब लोग दिल से डोनेशन कर रहे हैं, अपना जो भी कुछ दे सकते हैं वो दे रहे हैं, और फिर इस तरह की चीजें पकड़ी जाती हैं तो आप समझ सकते हैं कि कितनी चोट लगती है करोड़ों लोगों को।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हम किसी को भी नहीं बख्शेंगे। लेकिन सवाल यह है कि एग्जैक्टली क्या हुआ? कैसे-कैसे चीजें हुईं? टॉयलेट में कैसे पैसा छुपाए गए? क्या हो रहा था?

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पृष्ठभूमि: राम मंदिर में डोनेशन

राम मंदिर आज के समय में भारत में सबसे ज्यादा डोनेशन पाने वाले मंदिरों में से एक है। आप साउथ में तिरुपति देखिए, वहां बहुत डोनेशन आता है। लेकिन जब से राम मंदिर बना है, लोग पूजा करने आते हैं और जो कुछ दे सकते हैं देने की कोशिश करते हैं।

हर दिन बहुत सारा कैश, गोल्ड ऑर्नामेंट्स, सिल्वर ऑर्नामेंट्स, विदेशी मुद्रा, ज्वेलरी और डिजिटल डोनेशन के जरिए पैसे आते हैं। चेक भी आते हैं। खासकर जब फेस्टिवल का समय आता है, स्पेशल अवसर होते हैं तो डोनेशन इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि उसे मैनेज करना ही बहुत मुश्किल है।

समझने वाली बात यह है कि जब इतना सारा डोनेशन आ रहा है तो एक प्रॉपर प्रोसीजर होना चाहिए। फाइनेंशियल कंट्रोल कौन कर रहा है? अलग-अलग लेवल पर वेरिफिकेशन हो रहा है कि नहीं? प्रॉपर सर्विलांस हो रहा है कि नहीं?

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मौजूदा प्रोसीजर क्या था

मैं आपको बता दूं कि मंदिर का जो ट्रस्ट है उन्होंने पहले से ही एक स्ट्रक्चर्ड प्रोसेस बना रखा था। यहां पर जो भी डोनेशन आता है वो हुंडी से निकाला जाता है। उसको प्रॉपर काउंटिंग रूम में ट्रांसफर किया जाता है। डेजिग्नेटेड पर्सनल ही उसे काउंट कर सकते हैं।

चारों तरफ CCTV लगे हुए हैं। एक-एक करके बंडल किया जाता है (जैसे ₹1 लाख का बंडल) और फिर उसे बैंक अकाउंट में डिपॉजिट किया जाता है।

लेकिन इतने सारे सेफगार्ड होने के बावजूद भी जो इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है, उसमें सिस्टमैटिक तरीके से कमियों को एक्सप्लॉयट करने की कोशिश की गई है।

टाइमलाइन: कैसे सामने आया मामला

कुछ दिन पहले अचानक न्यूज़ में खबरें आने लगीं कि बहुत सारा पैसा मंदिर डोनेशन का गायब है। विपक्षी नेता आरोप लगा रहे थे कि यहां इन्क्वायरी होनी चाहिए। ट्रस्ट कह रहा था कि नहीं, हमने कोई गलत काम नहीं किया है।

लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया। उनकी जिम्मेदारी थी कि सभी CCTV रिकॉर्डिंग्स देखें, बैंक डिपॉजिट का रिकॉर्ड देखें, काउंटिंग रजिस्टर्स देखें, स्टाफ डिप्लॉयमेंट और कैश मूवमेंट प्रोसीजर की जांच करें।

हैरान करने वाली बात यह है कि अब जो प्रारंभिक निष्कर्ष आए हैं, उसमें SIT ने बहुत सारी गड़बड़ियां पाई हैं। यहां FIR दर्ज कराया गया 8 लोगों के ऊपर और उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन सभी को गिरफ्तार भी कर लिया है।

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चोरी कैसे हुई – Step by Step

1. इनसाइडर एक्सेस: यह कोई बाहरी डकैती नहीं थी। जिन लोगों को देखभाल की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने ही पैसा हड़प लिया। मंदिर स्टाफ, कैश काउंटिंग पर्सनल, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स, पूर्व बैंकिंग कर्मी जो काउंटिंग ऑपरेशन से जुड़े थे – ये सब शामिल थे।

2. CCTV को कपड़े से ढकना: यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जांच में पाया गया कि जब भी चोरी करने की कोशिश की जा रही थी, तुरंत CCTV कैमरे को कपड़े से ढक दिया जाता था ताकि जहां चोरी हो रही है वो कैमरे में दर्ज न हो।

CCTV को जानबूझकर तोड़ा नहीं गया क्योंकि अगर आप CCTV को डैमेज कर दोगे तो तुरंत पता चलेगा कि कुछ गड़बड़ है। इसलिए यह तरकीब निकाली गई कि CCTV को ही ढक दिया जाए।

3. काउंटिंग के दौरान कैश चुराना: जब बहुत सारा पैसा आता था, पूरे टेबल पर बिछाया जाता था और काउंटिंग की जाती थी। जो लोग इसमें शामिल थे, वे क्या करते थे? मान लो बहुत सारा पैसा आया। इसमें से दो-चार नोट निकाल लिए। फिर कुछ नोट निकाल लिए। धीरे-धीरे करते-करते कपड़ों में छुपा लिया।

इस तरह से पैसे को छोटे-छोटे अमाउंट में डायवर्ट किया जा रहा था। इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है क्योंकि एक साथ बड़ा अमाउंट नहीं लिया जा रहा, छोटा-छोटा अमाउंट लिया जा रहा है।

4. टॉयलेट में पैसे छुपाना: और फिर क्या होता था कि एक साथ जो पैसा इकट्ठा होता था, छोटे-छोटे अमाउंट चुराए जाते थे, उसे अल्टीमेटली टॉयलेट में छुपा दिया जाता था। टॉयलेट के एक पर्टिकुलर एरिया में (शायद कोई डेजिग्नेटेड जगह बनाई गई होगी) वहां छुपाकर रख दिया जाता था।

फिर बाद में जैसे ही मौका मिलता था, टॉयलेट से पैसा निकालकर बाहर ले जाया जाता था। टॉयलेट को एक टेम्परेरी स्टोर की तरह बना दिया गया था।

चोरी अनडिटेक्ट क्यों रही

मैसिव कैश वॉल्यूम: जब अमाउंट बहुत ह्यूज होता है तो छोटे-छोटे अमाउंट निकालने पर पता नहीं चलता। राम मंदिर में करोड़ों लोगों की आस्था है। मैसिव कैश वॉल्यूम में पैसा आता था। इसलिए छोटे अमाउंट का पता नहीं चल पाता था।

इनसाइडर ट्रस्ट: अगर बाहर से कोई चोरी कर रहा होता तो तुरंत पकड़ा जाता। लेकिन जब अंदर वाले ही शामिल हों तो उन्हें कैसे पकड़ोगे?

सर्विलांस की कमी: CCTV का कवरेज तो था लेकिन उसे कपड़े से ढक दिया जाता था, इसलिए पकड़ा नहीं जा सका।

SIT की जांच में क्या मिला

रिपोर्ट्स के अनुसार SIT की इंटरिम फाइंडिंग में पता चला:

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  • यह चोरी बार-बार की गई (एक बार की नहीं)
  • CCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधि दिखी
  • टेम्परेरी तरीके से कैश छुपाया गया (टॉयलेट में)
  • मल्टीपल व्यक्तियों के बीच समन्वय हुआ
  • मैनेजमेंट सिस्टम में गंभीर कमियां

चिंता का विषय यह है कि अभी भी पता नहीं है कि एग्जैक्ट कितना अमाउंट चुराया गया है। शायद हमें पूरा पता भी नहीं लग पाएगा क्योंकि डोनेशन आ रहा है, इतने लोग पैसा डाल रहे हैं, उसमें से कितना गायब हुआ यह निर्धारित करना मुश्किल है।

8 आरोपी कौन हैं

टोटल 8 आरोपियों में शामिल हैं:

  • मंदिर अटेंडेंट्स
  • कैश काउंटिंग स्टाफ
  • पूर्व बैंक कर्मचारी जो मंदिर में काउंटिंग एरिया में जाते थे
  • वे व्यक्ति जिनके पास चाबी थी (की एक्सेस)
  • जो डोनेशन को हैंडल करते थे

इनमें से 6 लोग ऐसे हैं जिनकी डायरेक्ट जिम्मेदारी थी कैश डोनेशन की काउंटिंग की। उनके पास फ्री एक्सेस था काउंटिंग एरिया का।

कुछ कैश भी रिकवर हुए हैं। इनमें से कुछ व्यक्तियों के घर पर जाकर, अलग-अलग जगहों पर छापा मारा गया तो वहां से कुछ कैश बरामद हुए हैं।

सबक क्या मिलता है

1. फाइनेंशियल गवर्नेंस: बड़े धार्मिक संस्थानों में ड्यूटीज को सेग्रीगेट करना पड़ेगा। ड्यूल वेरिफिकेशन करना पड़ेगा। इंडिपेंडेंट ऑडिट बहुत जरूरी है। डिजिटल अकाउंटिंग बहुत जरूरी हो जाती है।

2. टेक्नोलॉजी: CCTV को टेम्पर प्रूफ करना पड़ेगा। कोई भी संदिग्ध गतिविधि हो तो AI का इस्तेमाल कर सकते हैं। वीडियो लंबे समय तक रखना पड़ेगा (यहां सिर्फ 45 दिन तक वीडियो रहता था)। रियल टाइम ऑडिट ट्रायल भी बहुत जरूरी है।

3. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन: ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी फिक्स करना बहुत इंपॉर्टेंट है। कितने वर्षों से यह चल रहा था और हमें पता भी नहीं चला।

कानूनी कार्रवाई

भारतीय न्याय संहिता के तहत:

  • चोरी
  • क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट
  • क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी

यह निर्भर करता है कि जब इन्वेस्टिगेशन कंप्लीट होगा तब कौन-कौन से सेक्शन लगाए जाएंगे।

योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “गिल्टी वोन्ट बी स्पेयर्ड”। खबरें आ रही हैं कि राम मंदिर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने मोरल ग्राउंड पर स्टेप डाउन किया है कि वो चीजों को शायद नहीं रोक पाए।

राहत की बात यह है कि मामला पकड़ में आ गया और कार्रवाई हो रही है। लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि यह मामला कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या और ऊपर के लेवल तक है। प्रॉपर इन्वेस्टिगेशन होगा तभी पता लगेगा।


मुख्य बातें (Key Points)

• राम मंदिर डोनेशन घोटाले में 8 लोग गिरफ्तार
• CCTV को कपड़े से ढककर चोरी की जाती थी
• काउंटिंग के दौरान छोटे-छोटे अमाउंट में पैसे चुराए जाते थे
• टॉयलेट में पैसे छुपाए जाते थे
• मंदिर स्टाफ, काउंटिंग पर्सनल, पूर्व बैंक कर्मचारी शामिल
• योगी आदित्यनाथ ने कहा – किसी को नहीं बख्शेंगे
• जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने स्टेप डाउन किया

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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