Arvind Kejriwal Social Media Law: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि नया लाया गया सोशल मीडिया कानून सरकार की आलोचना को दबाने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi बढ़ते जनविरोध से डरने लगे हैं और इसीलिए यह दमनकारी कानून लाया गया है।
मोदी सरकार का नया कानून आया है। अगर सरकार किसी भी social media platform को कोई पोस्ट delete करने के लिए कहती है, तो उन्हें 3 घंटे के भीतर उसे delete करना होगा।
Gen Z के आंदोलन के बाद से ही मोदी जी को बहुत डर लगने लगा है। मोदी जी, आप जितना देश के लोगों की आवाज़ दबाएंगे, उनका… pic.twitter.com/XSlFRBHXs2
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) August 7, 2026
केजरीवाल ने कहा कि नए कानून के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार द्वारा फ्लैग की गई किसी भी पोस्ट को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। उन्होंने दावा किया कि यह कानून पेपर लीक, इथेनॉल नीति और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार की आलोचना करने वालों को चुप कराने के लिए बनाया गया है।
🔍 यह भी पढ़ें- Kejriwal Nitin Nabin Row बढ़ी, BJP ने किया तीखा पलटवार
3 घंटे में डिलीट होगी आपकी पोस्ट: केजरीवाल का आरोप
केजरीवाल ने अपने बयान में कहा, “मोदी सरकार ने एक नया कानून लाया है। अगर सरकार किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म – चाहे वह Instagram हो, Facebook हो या कोई और – को कोई पोस्ट या वीडियो डिलीट करने के लिए कहती है, तो उसे तीन घंटे के अंदर हटाना होगा।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर आप मोदी जी, सरकार, पेपर लीक, इथेनॉल के मुद्दे या भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते हो, तो आपकी पोस्ट तीन घंटे के अंदर डिलीट कर दी जाएगी। लेकिन अगर उनसे जुड़े लोग गाली-गलौज करें या महिलाओं को निशाना बनाएं, तो ऐसी सामग्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।”
समझने वाली बात यह है कि यह आरोप बेहद गंभीर है और यह सवाल उठाता है कि क्या सरकार वाकई में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा रही है।
🔍 यह भी पढ़ें- ईडी पार्टी के पदाधिकारी नशे के साथ Punjab में Arrest, Kejriwal ने साधा निशाना
जेन-जेड के विरोध प्रदर्शन से घबराए मोदी: केजरीवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हाल ही में Gen Z से जुड़े विरोध प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री मोदी को चिंतित कर दिया है।
केजरीवाल ने कहा, “मोदी जी इस देश के लोगों से डरते हैं। वह नौजवानों, बच्चों और महिलाओं से डरते हैं। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद वे डर की गिरफ्त में आ गए हैं।”
यह टिप्पणी उस समय आई है जब देश के विभिन्न हिस्सों में युवा पेपर लीक, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर सड़कों पर उतर रहे हैं। खासकर NEET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने युवाओं में बड़ा गुस्सा पैदा किया है।
💡 यह भी पढ़ें- UNESCO लिस्ट में कैसे शामिल हुई दिवाली? जानिए इस विश्व प्रसिद्ध त्योहार की मान्यता के ‘गुप्त नियम’
लोगों की आवाज दबाने से समस्या नहीं सुलझेगी: केजरीवाल
केजरीवाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता की राय को दबाने से सरकार की समस्याएं हल नहीं होंगी, बल्कि जनता का गुस्सा और बढ़ेगा।
उन्होंने कहा, “इसका हल लोगों की आवाजों को चुप कराना नहीं है। अगर सरकार अच्छा काम करती है, तो लोग खुद उसकी प्रशंसा करेंगे। जनता की किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। लेकिन अगर आप लोगों की चिंताओं को दूर करने की बजाय आलोचना को दबाते हो, तो जनता का गुस्सा सिर्फ बढ़ेगा।”
यह बयान सरकार और विपक्ष के बीच चल रही तल्खी को और गहरा कर सकता है।
जिन सरकारों को अपने नागरिकों से डर लगे, वे टिक नहीं सकतीं
अपने बयान के अंत में केजरीवाल ने एक दार्शनिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो सरकारें अपने ही नागरिकों से डरती हैं, वे ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकतीं।
यह संकेत था कि AAP सरकार इस मुद्दे को 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भी राजनीतिक रूप से उठाती रहेगी।
क्या है नया सोशल मीडिया कानून? पूरा विवरण
हालांकि केजरीवाल ने विस्तार से कानून की धाराओं का जिक्र नहीं किया, लेकिन यह Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules के तहत आए बदलावों की ओर इशारा है।
नए नियमों के मुताबिक:
- सरकार किसी भी सामग्री को “गैर-कानूनी” घोषित कर सकती है
- सोशल मीडिया कंपनियों को 3 घंटे में ऐसी सामग्री हटानी होगी
- न हटाने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लग सकता है
- बार-बार उल्लंघन पर भारत में सेवाएं बंद हो सकती हैं
सरकार का तर्क है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, फर्जी खबरों और घृणास्पद सामग्री को रोकने के लिए जरूरी है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
यह विवाद पुराना है। एक तरफ सरकार कहती है कि फेक न्यूज, दंगे भड़काने वाली सामग्री और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने वाली पोस्ट्स पर अंकुश जरूरी है।
दूसरी तरफ, विपक्ष और नागरिक समाज संगठन कहते हैं कि इस तरह के कानून का दुरुपयोग सरकार की आलोचना को दबाने के लिए किया जा सकता है।
अगर गौर करें, तो दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों में यह संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।
Twitter, Facebook, Instagram पर क्या होगा असर?
अगर यह नियम सख्ती से लागू होता है, तो सोशल मीडिया कंपनियों के सामने बड़ी दुविधा होगी:
- वे किस आधार पर तय करेंगी कि कौन सी सामग्री हटाई जाए?
- क्या हर सरकारी आदेश मानना होगा?
- अगर कोई पोस्ट वैध आलोचना है, तो भी हटानी होगी?
यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में सरकारें और बड़ी टेक कंपनियां इस सवाल से जूझ रही हैं।
विपक्ष एकजुट हो सकता है इस मुद्दे पर
केजरीवाल का यह बयान विपक्षी एकता का आधार बन सकता है। Congress, TMC, DMK और अन्य दल भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर सरकार को घेर सकते हैं।
आने वाले दिनों में संसद में इस मुद्दे पर बड़ा हंगामा हो सकता है।
क्या कहती है सरकार?
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पहले भी सरकार ने कहा है कि ये नियम केवल गैर-कानूनी सामग्री के लिए हैं, न कि वैध आलोचना के लिए।
सरकार का कहना है कि लोकतंत्र में हर किसी को बोलने का अधिकार है, लेकिन फर्जी खबरें और घृणास्पद सामग्री पर अंकुश जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- केजरीवाल ने नए सोशल मीडिया कानून को सरकार की आलोचना दबाने का हथियार बताया
- नए नियम के तहत सरकार द्वारा फ्लैग की गई पोस्ट 3 घंटे में डिलीट करनी होगी
- केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पेपर लीक, इथेनॉल नीति पर बोलने वालों को चुप कराया जाएगा
- AAP नेता ने दावा किया कि जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शन से PM मोदी घबरा गए हैं
- केजरीवाल बोले – जनता की आवाज दबाने से गुस्सा बढ़ेगा, समस्या हल नहीं होगी
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा का पुराना विवाद फिर सामने
- विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हो सकते हैं













