ED Punjab Mining Investigation: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत चल रही जांच के सिलसिले में लुधियाना की Greater Ludhiana Area Development Authority (GLADA) से “ऑफ द शेल्फ” स्कीम के तहत कई उद्योगिक घरानों को आवंटित जमीन का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है। यह कार्रवाई ED द्वारा सेवारत और सेवानिवृत्त PSIEC (Punjab Small Industries and Export Corporation) अधिकारियों के घरों समेत 11 स्थानों पर छापेमारी करने के कुछ दिन बाद सामने आई है।
देखा जाए तो यह मामला पंजाब में जमीन घोटाले और गैर-कानूनी खनन के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। जांच एजेंसी का संदेह है कि उद्योगिक जमीन को आवासीय और अन्य उपयोग में बदलकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है।
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क्या है “ऑफ द शेल्फ” स्कीम? जमीन के उपयोग में बदलाव की सुविधा
“ऑफ द शेल्फ स्कीम” पंजाब सरकार की एक योजना है जिसके तहत उद्योगपतियों को अविकसित उद्योगिक जमीन आवंटित की जाती है। इस स्कीम की खासियत यह है कि यह जमीन के उपयोग में परिवर्तन (Change of Land Use – CLU) की अनुमति देती है।
समझने वाली बात यह है कि इस स्कीम का मूल उद्देश्य औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना था। लेकिन ED की जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ उद्योगिक घराने इस स्कीम का दुरुपयोग कर उद्योगिक जमीन को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
जमीन के उपयोग में बदलाव से जमीन की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। जो जमीन उद्योगिक रूप में 50 लाख की हो, वही आवासीय बनने पर 5 करोड़ की हो सकती है।
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GLADA के एस्टेट ऑफिसर को भेजा गया नोटिस
ED के जलंधर जोनल कार्यालय ने GLADA के एस्टेट ऑफिसर को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में बताया गया है कि ED कुछ संस्थाओं और उनसे संबंधित फर्मों की जांच कर रही है। इन संस्थाओं को पंजाब सरकार द्वारा फोकल प्वाइंट, फेज VIII, ढंडारी कलां में अविकसित उद्योगिक जमीन आवंटित की गई थी।
पत्र में जो दस्तावेज मांगे गए हैं, उनमें शामिल हैं:
1. CLU और लेआउट अप्रूवल दस्तावेज – जमीन के उपयोग में बदलाव और लेआउट मंजूरी के पूरे कागजात
2. बाद में किए गए लेआउट बदलाव – अगर बाद में कोई परिवर्तन किया गया तो उसका पूरा ब्योरा
3. 60% औद्योगिक जमीन की शर्त – क्या जमीन का स्वामित्व इस शर्त पर था कि 60% क्षेत्र को उद्योगिक जमीन के रूप में विकसित किया जाएगा
4. शुद्ध आवासीय घनत्व के आंकड़े – संबंधित प्लॉटों के लिए रिहायशी घनत्व की जानकारी
5. पूरी फाइल के रिकॉर्ड – स्कैन की गई कॉपियां और सभी दस्तावेज
यह अनुरोध PMLA, 2002 की धारा 54 के तहत किया गया है। सहायक निदेशक मोहित गोदारा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में तुरंत जवाब मांगा गया है। पत्र की एक प्रति रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी, पंजाब को भी भेजी गई है।
20 जुलाई को 11 स्थानों पर छापेमारी, PSIEC अधिकारियों के घर तलाशी
इस नोटिस से कुछ दिन पहले, 20 जुलाई 2026 को ED ने लुधियाना और आसपास के 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में मुख्य रूप से निशाने पर थे:
- सेवारत PSIEC अधिकारी
- सेवानिवृत्त PSIEC अधिकारी
- कुछ बड़े उद्योगिक घराने
- रियल एस्टेट डेवलपर्स
छापेमारी के दौरान ED ने बड़ी मात्रा में दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए। जांच एजेंसी को संदेह है कि सरकारी अधिकारियों और उद्योगपतियों की मिलीभगत से यह घोटाला किया गया।
विधानसभा में भी गूंजा था यह मामला: प्रताप सिंह बाजवा ने उठाया मुद्दा
दिलचस्प बात यह है कि पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस मामले की गूंज सुनाई दी। विपक्षी नेता प्रताप सिंह बाजवा ने शून्यकाल में गैर-कानूनी माइनिंग का मुद्दा उठाते हुए इस मामले का विस्तार से जिक्र किया था।
बाजवा ने आरोप लगाया था कि एक मंत्री की सिफारिश पर एक BDPO को पदोन्नत करके DDPO और ADC बनाया गया। इस अधिकारी ने 92 एकड़ जमीन कौड़ियों के भाव एक व्यक्ति को दे दी और 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हो गया।
जब इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखा गया, तो उसी के आधार पर ED ने 20 जुलाई को छापेमारी की। यह पूरा मामला राजनीतिक घेराबंदी का भी हिस्सा बन गया है।
उद्योगिक से आवासीय: करोड़ों का खेल
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन उद्योगपतियों को सस्ते दामों पर उद्योगिक जमीन दी गई, उन्होंने उसे आवासीय कॉलोनियों में बदल दिया। इससे उन्हें कई गुना मुनाफा हुआ।
मान लीजिए किसी को 10 एकड़ उद्योगिक जमीन 2 करोड़ में मिली। अगर वह इसे आवासीय कॉलोनी में बदल दे, तो यही जमीन 20-30 करोड़ में बिक सकती है। यह सब CLU के जरिए होता है।
नियमों के मुताबिक, ऐसे बदलाव के लिए सरकारी मंजूरी चाहिए और अतिरिक्त शुल्क देना होता है। लेकिन अगर अधिकारी और उद्योगपति मिल जाएं, तो यह प्रक्रिया आसान हो जाती है।
60% उद्योगिक विकास की शर्त का उल्लंघन
“ऑफ द शेल्फ स्कीम” के तहत जमीन देते समय एक शर्त रखी जाती है कि कम से कम 60% क्षेत्र को उद्योगिक जमीन के रूप में विकसित करना होगा। बाकी 40% में सहायक सुविधाएं, कार्यालय या अन्य चीजें हो सकती हैं।
लेकिन ED की जांच में पता चल रहा है कि कई मामलों में यह शर्त पूरी तरह नजरअंदाज की गई। पूरी जमीन को ही रिहायशी या व्यावसायिक उपयोग में बदल दिया गया।
यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकार को होने वाले राजस्व का भी नुकसान है। साथ ही, औद्योगिक विकास का मूल उद्देश्य भी विफल हो जाता है।
मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप: काले धन को सफेद करने का जरिया
ED की जांच PMLA के तहत है, जिसका मतलब है कि यह केवल जमीन घोटाले तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस पूरे खेल का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया।
कैसे? मान लीजिए किसी के पास अवैध तरीके से कमाया हुआ पैसा है। वह सस्ते में उद्योगिक जमीन खरीदता है, फिर उसे आवासीय में बदलता है और महंगे दाम पर बेच देता है। इस प्रक्रिया में काला धन सफेद हो जाता है।
यही कारण है कि ED इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संपत्तियों की खरीद-बिक्री के सभी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
पंजाब में जमीन घोटाले: नई बात नहीं
पंजाब में जमीन से जुड़े घोटाले कोई नई बात नहीं हैं। पिछले कई सालों से अलग-अलग सरकारों के समय में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं।
चाहे वह अकाली-भाजपा सरकार हो, कांग्रेस की सरकार हो या अब AAP की सरकार – जमीन की अवैध बिक्री, CLU में गड़बड़ी, माइनिंग माफिया जैसे मुद्दे बार-बार उठते हैं।
अगर गौर करें, तो राजनेताओं, नौकरशाहों और व्यापारियों की त्रिकोणीय साठगांठ इसके पीछे मुख्य कारण है।
क्या होगी अगली कार्रवाई?
GLADA से दस्तावेज मिलने के बाद ED अपनी जांच को और आगे बढ़ाएगी। अगर गड़बड़ी के ठोस सबूत मिलते हैं, तो:
- संबंधित अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हो सकता है
- उद्योगपतियों की गिरफ्तारी हो सकती है
- अवैध संपत्ति कुर्क की जा सकती है
- राजनेताओं के नाम भी सामने आ सकते हैं
यह मामला आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में बड़ा सिरदर्द बन सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ED ने PMLA के तहत जांच में GLADA से उद्योगिक जमीन का पूरा रिकॉर्ड मांगा
- “ऑफ द शेल्फ स्कीम” के तहत दी गई जमीन के CLU दस्तावेज और लेआउट की जानकारी मांगी गई
- 20 जुलाई को PSIEC अधिकारियों और उद्योगपतियों के 11 ठिकानों पर छापेमारी हुई थी
- विधानसभा में प्रताप सिंह बाजवा ने 92 एकड़ जमीन सस्ते में देने का आरोप लगाया था
- उद्योगिक जमीन को आवासीय में बदलकर करोड़ों का मुनाफा कमाने का संदेह
- 60% उद्योगिक विकास की शर्त के उल्लंघन की जांच हो रही है
- मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की भी छानबीन जारी













