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The News Air - Breaking News - History of Tariffs: 4000 साल पुराना है Tariff का इतिहास, जानें कैसे बना Trade War का हथियार

History of Tariffs: 4000 साल पुराना है Tariff का इतिहास, जानें कैसे बना Trade War का हथियार

इराक के गधों से लेकर ब्रिटिश इंडिया तक, "निशातुम" से "टैरिफ" बनने तक का रोमांचक सफर, समझिए कैसे व्यापार कर बना राजनीतिक हथियार

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 15 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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History of Tariffs
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History of Tariffs —

आज जब अमेरिका और चीन के बीच Trade War की बात होती है, या भारत किसी देश पर Counter Tariffs लगाने की घोषणा करता है, तो हम सोचते हैं कि यह आधुनिक युग की राजनीतिक रणनीति है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि Tariff का इतिहास लगभग 4000 साल पुराना है। और इसकी शुरुआत किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं, बल्कि एक सीधे-सादे व्यापारिक टैक्स से हुई थी।

देखा जाए तो 17वीं-18वीं सदी ईसा पूर्व में जब कोई सोशल मीडिया नहीं था, कोई डिजिटल पेमेंट नहीं था, तब भी व्यापार था, मुनाफा था, और टैक्स भी था। बस तरीका अलग था और नाम भी अलग था।

आइए आज हम इस fascinating journey में चलते हैं और समझते हैं कि कैसे एक साधारण “परमिशन फीस” आज के समय का सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियार बन गया।

17वीं-18वीं सदी ईसा पूर्व: “निशातुम” — दुनिया का पहला Trade Tax

कहानी शुरू होती है लगभग 4000 साल पहले से। उस समय आज के Iraq के इलाके से कुछ व्यापारी अपना सामान गधों पर लादकर आज के Turkey वाले क्षेत्र में ले जाकर व्यापार करते थे और मोटा मुनाफा कमाते थे।

अब जब यह व्यापार लगातार चलने लगा, तो उस इलाके के स्थानीय शासकों ने सोचा— ये लोग हमारे रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं, हमारी सुरक्षा का फायदा उठा रहे हैं, हमारे क्षेत्र में आकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, तो हमें भी इस मुनाफे में से हिस्सा मिलना चाहिए।

और बस यहीं से शुरू हुआ— “निशातुम” (Nishatun)।

यह एक तरह की Permission Fee थी जो व्यापारियों को उस क्षेत्र से गुजरने और व्यापार करने के लिए देनी पड़ती थी। दिलचस्प बात यह है कि इस निशातुम को इतिहासकार दुनिया के सबसे पुराने Documented Trade Tax में से एक मानते हैं।

विभिन्न सभ्यताओं में Trade Tax: अलग-अलग नाम, एक ही कॉन्सेप्ट

जब यह कॉन्सेप्ट सफल हुआ, तो दुनिया के अन्य हिस्सों में भी शासकों ने इसे अपनाना शुरू कर दिया। बस नाम अलग-अलग रखे गए:

सभ्यता/क्षेत्रTrade Tax का नामअर्थ
Mesopotamia (Iraq-Turkey)निशातुम (Nishatun)Permission Fee
Greece (ग्रीस)पेंटेकॉस्टी (Pentekostē)1/50वां हिस्सा
Roman Empire (रोमन साम्राज्य)पोर्टोरिया (Portoria)Port/Gate Tax
Ancient India (प्राचीन भारत)शुल्क (Shulk)Trade Duty

समझने वाली बात यह है कि सभी जगह मूल विचार एक ही था— जो व्यापारी हमारे इलाके से गुजरकर या यहां आकर व्यापार करेगा, उसे टैक्स देना होगा।

Long Distance Trade और “Tariff” शब्द का जन्म

समय के साथ जब व्यापार लंबी दूरी का होने लगा, तो दुनिया भर के बंदरगाहों (Ports) और देशों की सीमाओं (Borders) पर व्यापारियों के लिए नए नियम बनाए गए।

अब व्यापारी जब किसी देश की सीमा पर सामान बेचने आते थे, तो उन्हें एक विस्तृत सूची तैयार करनी पड़ती थी:

  • व्यापार के लिए लाए गए सभी सामानों के नाम
  • उनकी कीमत
  • उन पर लगने वाला टैक्स

यह सूची एक कागज पर लिखी जाती थी और किसी भी देश में प्रवेश करने से पहले सीमा पर इसे जमा करना पड़ता था।

अब यहीं से शुरू होती है “Tariff” शब्द की दिलचस्प यात्रा:

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अरब व्यापारी उस समय Mediterranean, North Africa, Middle East और Southern Europe हर तरफ व्यापार कर रहे थे। वे सीमा पर जमा की जाने वाली इस सूची को “तारीफ” (Ta’rif) कहते थे।

अरबी भाषा में “तारीफ” का अर्थ है: Information/Notification (सूचना/जानकारी)

रोजमर्रा की भाषा में अरब व्यापारी कहते थे— “तारीफ जमा कर दिया”। धीरे-धीरे बोलचाल में यह “तारिफ” हो गया।

जब यह शब्द यूरोप पहुंचा, तो वहां इसे “Tarifa” बोला जाने लगा।

फिर जब 18वीं सदी में यह अंग्रेजी में परिवर्तित हुआ, तो यह बन गया— “Tariff”।

और आज यही शब्द पूरी दुनिया में इस्तेमाल होता है।

18वीं सदी तक: केवल Revenue Generation का जरिया

18वीं सदी तक जो राजा और सरकारें टैक्स ले रही थीं, उनका मुख्य उद्देश्य केवल Revenue Generate करना था। कोई Trade Ban या Trade War जैसी स्थिति उस समय नहीं थी।

लेकिन 1721 में एक ऐसी घटना घटी जिसने Tariff की पूरी अवधारणा को ही बदल दिया।

1721: भारत-चीन के कपड़ों ने बदल दिया खेल

साल 1721 में भारत और चीन बहुत ही सस्ती कीमत में उच्च गुणवत्ता के कपड़े Britain को Export कर रहे थे। यह कपड़े इतने अच्छे और सस्ते थे कि ब्रिटिश जनता ने अपनी Local Textile Industry के कपड़े खरीदना लगभग बंद कर दिया।

परिणाम क्या हुआ?

  • ब्रिटेन की Local Textile Industry डूबने लगी
  • बेरोजगारी बढ़ने लगी
  • आर्थिक संकट पैदा होने लगा

यहां ध्यान देने वाली बात यह थी कि भले ही ब्रिटेन सरकार को Import पर टैक्स से Revenue मिल रहा था, लेकिन उससे कहीं ज्यादा नुकसान Local Business को हो रहा था।

और यही वह समय था जब ब्रिटिश सरकार को समझ आया कि:

“बाहर से सामान Import करने में Revenue तो Generate होता है, लेकिन Local Business डूबते हैं और दूसरे देश पर Dependency बढ़ जाती है।”

Calico Act of 1720 & 1721: पहला Protectionist Law

इस समस्या से निपटने के लिए ब्रिटेन ने Calico Act of 1720 and 1721 लाया।

इस Act के बाद भारत और चीन के कपड़ों पर लगभग प्रतिबंध जैसी स्थिति बन गई। लेकिन इसका परिणाम वह नहीं निकला जो सोचा गया था।

नकारात्मक प्रभाव:

  1. अन्य देशों ने भी अपनी Trade Policies सख्त कर दीं
  2. ब्रिटेन जो Industrialization के जरिए पूरी दुनिया में अपना सामान बेचना चाहता था, उसमें दिक्कत आने लगी
  3. International Relations खराब होने लगे
  4. ब्रिटेन के लोग ही अपनी सरकार को Criticize करने लगे कि उन्हें Low Quality कपड़े महंगे दामों में खरीदने पड़ रहे हैं
Tariff Schedule: ब्रिटेन का गेम-चेंजिंग प्लान

जब Direct Ban काम नहीं आया, तो ब्रिटेन ने एक नई रणनीति बनाई जिसे आज की भाषा में “Tariff Schedule” कहा जाता है।

ब्रिटेन की रणनीति:

ब्रिटेन ने बाहर से आने वाले सभी सामानों की सूची बनाई और उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा:

Category 1: Essential Items (जरूरी सामान)

  • जिनकी कमी थी
  • जो खुद बनाने में कठिनाई होती थी
  • इन पर बिल्कुल भी Tax नहीं लगाया

Category 2: Non-Essential or Competitive Items

  • जो जरूरी नहीं थे
  • जिनका Production पहले से Britain में हो रहा था
  • जो Local Businessmen के लिए Direct Competition बन रहे थे
  • इन पर Heavy Tariff लगाया गया

Concept सीधा-सादा था:

सामान पर Direct Ban लगाने से Relations खराब होते हैं। तो जो सामान ज्यादा Important नहीं है, उस पर Heavy Tariff लगा दो। जब वह Local Market में महंगा बिकेगा, तो लोग खुद ही नहीं खरीदेंगे। समस्या अपने आप Solve हो जाएगी।

यह था Strategic Protectionism का जन्म।

Global Adoption: पूरी दुनिया ने अपनाया यह Formula

ब्रिटेन की यह रणनीति इतनी सफल रही कि धीरे-धीरे दूसरे देशों ने भी इसे अपनाना शुरू कर दिया।

प्रमुख Tariff Acts:

वर्षदेश/क्षेत्रAct का नाममहत्व
4 July 1789United StatesUS Tariff ActAmerica का पहला Tariff Law
1878British IndiaSea Customs Actभारत में व्यवस्थित Customs की शुरुआत
1894British IndiaIndian Tariff Actभारत का पहला comprehensive Tariff Law
भारत में Tariff का इतिहास: शुल्क से Customs तक

प्राचीन भारत में व्यापार कर को “शुल्क” कहा जाता था। यह शब्द संस्कृत से आया है।

British India के दौरान:

  • 1878 में Sea Customs Act लाया गया
  • 1894 में Indian Tariff Act आया, जो अधिक व्यापक था
  • यह Act मूल रूप से Revenue Generation के लिए था, लेकिन धीरे-धीरे इसे भारतीय उद्योगों की सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा

आजादी के बाद भारत ने अपनी Trade Policy में कई बदलाव किए:

  • 1950-60s: High Tariffs (आत्मनिर्भरता की नीति)
  • 1991: Economic Liberalization (Tariffs में कमी)
  • 2000s onwards: Strategic Tariffs (China से competition)
Tariff: Revenue Tool से Political Weapon तक का सफर

अगर गौर करें तो Tariff की Journey बहुत ही दिलचस्प रही है:

Phase 1 (Ancient Times – 18th Century):

  • केवल Revenue Generation
  • कोई Political Agenda नहीं

Phase 2 (1721 onwards – Calico Act Era):

  • Local Industries की सुरक्षा
  • Economic Strategy

Phase 3 (20th Century):

  • Trade Wars
  • Political Pressure Tool
  • Economic Sanctions का हिस्सा

Phase 4 (21st Century – आज):

  • Geopolitical Weapon
  • US-China Trade War
  • Counter Tariffs
  • Retaliatory Measures
आधुनिक युग में Tariffs: 2025 की स्थिति

आज के समय में Tariffs सिर्फ Economic Tool नहीं रह गए हैं, बल्कि ये Political और Strategic Weapons बन चुके हैं।

हालिया उदाहरण:

  • US-China Trade War: 25% तक के Tariffs
  • India-Pakistan: व्यापार पर प्रतिबंध और Heavy Duties
  • Russia Sanctions: Western countries द्वारा Import-Export पर रोक
क्यों जरूरी है Tariffs को समझना?

समझने वाली बात यह है कि जब भी कोई देश Tariff लगाता है, तो उसके तीन मुख्य उद्देश्य होते हैं:

  1. Revenue Generation: सरकारी खजाने को भरना
  2. Protect Local Industries: घरेलू उद्योगों को बचाना
  3. Political Pressure: दूसरे देश पर दबाव बनाना

लेकिन Tariffs के नुकसान भी हैं:

  • Consumers को महंगा सामान मिलता है
  • Retaliatory Tariffs से Export प्रभावित होता है
  • International Relations बिगड़ सकते हैं
  • Global Trade slow हो जाता है
मुख्य बातें (Key Points)
  • “Tariff” शब्द अरबी शब्द “तारीफ” (Ta’rif) से आया है जिसका अर्थ है सूचना/जानकारी
  • दुनिया का सबसे पुराना documented trade tax “निशातुम” था (17-18वीं सदी BC, Iraq-Turkey route)
  • प्राचीन भारत में व्यापार कर को “शुल्क” कहा जाता था
  • 1721 में Britain का Calico Act पहला बड़ा Protectionist Law था जो भारत-चीन के कपड़ों के खिलाफ था
  • Tariff Schedule की अवधारणा Britain ने बनाई जिसमें अलग-अलग सामान पर अलग-अलग Tax लगाया जाता है
  • 1789 में US Tariff Act और 1894 में Indian Tariff Act लागू हुए
  • आधुनिक युग में Tariffs एक Political और Strategic Weapon बन चुके हैं

 

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

“Tariff” शब्द अरबी भाषा के “तारीफ” (Ta’rif) से आया है, जिसका अर्थ है सूचना या जानकारी। मध्यकाल में अरब व्यापारी सीमा पर जमा की जाने वाली सामानों की सूची को “तारीफ” कहते थे। यह शब्द यूरोप में “Tarifa” बना और फिर अंग्रेजी में “Tariff” हो गया।

2. दुनिया का सबसे पुराना Trade Tax कौन सा था?

दुनिया का सबसे पुराना documented trade tax “निशातुम” (Nishatun) था, जो लगभग 17वीं-18वीं सदी ईसा पूर्व में Iraq से Turkey जाने वाले व्यापार मार्ग पर लगाया जाता था। यह एक तरह की Permission Fee थी।

3. भारत में पहला Tariff Act कब लागू हुआ?

ब्रिटिश इंडिया में 1878 में Sea Customs Act लागू हुआ था। इसके बाद 1894 में Indian Tariff Act आया जो अधिक व्यापक था। आजादी के बाद भारत ने अपनी Trade Policy में कई बदलाव किए।

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