Hemkund Sahib Yatra 2026: उत्तराखंड में स्थित लगभग 15 हजार फीट की ऊंचाई पर विराजमान पवित्र गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा 2026 आज रस्मी तौर पर खालसाई परंपराओं के साथ शुरू हो गई है। और बस यहीं से शुरू हुआ श्रद्धा का यह पवित्र सफर। पहले ही दिन करीब 6500 से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे में मत्था टेका और गुरु के दरबार में हाजिरी लगाई।
देखा जाए तो यह यात्रा सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर साल हजारों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए इस पवित्र स्थल तक पहुंचते हैं।
पंज प्यारों की अगुवाई में हुआ गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश
सुबह-सुबह पंज प्यारों (पांच प्यारे) की अगुवाई में मुख्य ग्रंथी ने पावन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सुखआसन स्थान से गुरुद्वारे में लाकर प्रकाश किया। यह पल अत्यंत भावुक और पवित्र था। संगतों ने सतनाम वाहेगुरु का जाप किया और पावन सरूप पर फूलों की वर्षा की।
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय सेना के बैंड ने शब्दी धुनें बजाईं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भले ही एक दिन पहले बर्फबारी हुई थी, लेकिन संगत के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।
सुखमनी साहिब का पाठ और गुरबाणी कीर्तन
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाश के बाद संगत ने सुखमनी साहिब का पाठ किया और पहली अरदास की। इसके बाद प्रसिद्ध रागी जत्थों ने गुरबाणी का मधुर कीर्तन किया। समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा एक पूरा अनुभव था।
भारतीय सेना को सिरोपाओं से किया गया सम्मानित
इस मौके पर गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के प्रधान नरिंदरजीत सिंह बिंदरा और ट्रस्ट के CEO सेवा सिंह ने भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हर साल गुरुद्वारे तक पहुंचने के रास्ते से बर्फ हटाने का काम भारतीय सेना की टुकड़ी करती है। इस सेवा के लिए कमांडेंट ब्रिगेडियर बत्रा, कर्नल वरिंदर ओला, इंस्पेक्टर चित्रगुप्त और सब-इंस्पेक्टर अमनदीप को सिरोपाओ भेंट कर सम्मानित किया गया।
ट्रस्ट चेयरमैन ने की अपील, फोटोग्राफी से बचें
अपने संबोधन में गुरुद्वारा ट्रस्ट के चेयरमैन ने भारतीय सेना का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने बर्फ साफ करने और यात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित बनाने में सेना की सेवा की सराहना की।
अगर गौर करें तो उन्होंने संगत से विशेष तौर पर गुरुद्वारा परिसर के अंदर फोटो खींचने और वीडियोग्राफी करने से परहेज करने की भी अपील की। यह अपील इसलिए की गई ताकि पवित्र स्थल की गरिमा बनी रहे और श्रद्धालु पूर्ण भक्ति भाव से दर्शन कर सकें।
रतुड़ा में नई सराय का निर्माण, संगतों को मिलेगी राहत
ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि ऋषिकेश से गुरुद्वारा गोबिंद घाट के रास्ते में रतुड़ा में एक नई सराय बनाई गई है। यहां श्रद्धालुओं के लिए ठहराव और लंगर की व्यवस्था की गई है।
समझने वाली बात यह है कि इस व्यवस्था से गुरुद्वारा गोबिंद घाट और गोबिंद धाम में भीड़ के प्रबंधन में मदद मिलेगी। श्रद्धालु अब रास्ते में इस स्थान पर भी रुक सकेंगे।
20 मई को ऋषिकेश से रवाना हुआ था पहला जत्था
सुबह गुरुद्वारा गोबिंद धाम से पंज प्यारों की अगुवाई में सिख श्रद्धालुओं का जत्था छह किलोमीटर दूर ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुआ था।
दरअसल, सिख श्रद्धालुओं का यह पहला जत्था 20 मई को ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा साहिब से रवाना हुआ था। दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर तरनजीत सिंह संधू ने इस जत्थे को खालसाई परंपराओं के साथ रवाना किया था।
चार धाम यात्रा पहले ही शुरू हो चुकी है
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा पहले ही शुरू हो चुकी है। इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमनोत्री और गंगोत्री मंदिरों की यात्रा शामिल है। हर साल लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं।
देखा जाए तो उत्तराखंड की ये धार्मिक यात्राएं न सिर्फ आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।
मुख्य बातें (Key Points):
- गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब यात्रा 2026 आज खालसाई परंपराओं के साथ शुरू हुई
- पहले दिन 6500 से अधिक श्रद्धालुओं ने मत्था टेका
- भारतीय सेना को बर्फ हटाने की सेवा के लिए सिरोपाओं से सम्मानित किया गया
- रतुड़ा में नई सराय बनाई गई है जहां श्रद्धालु ठहर सकते हैं
- चार धाम यात्रा भी पहले ही शुरू हो चुकी है












