FAR Increase Chandigarh: चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया में फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) बढ़ाने का फैसला विवादों में घिर गया है। दिलचस्प बात यह है कि जिस विशेषज्ञ समिति ने FAR बढ़ाने की सिफारिश की, उसी ने साफ तौर पर लिख दिया था कि जब तक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं हो जाता, तब तक यह बदलाव लागू नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि फिर यह सिफारिश की ही क्यों गई?
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Chandigarh के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 में FAR को 1.5 से बढ़ाकर 2.0 करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही ग्राउंड कवरेज को 60 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा और दो कनाल तक की प्लॉट्स पर 68 फीट 3 इंच तक की ऊंचाई की इमारतें खड़ी की जा सकेंगी।
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विशेषज्ञ समिति ने खुद रखी थी शर्त
देखा जाए तो यह मामला काफी पेचीदा है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि “सिफारिश को तब तक स्थगित रखा जाना चाहिए जब तक कि इंफ्रास्ट्रक्चर के घटकों का विस्तार पूरा नहीं हो जाता।” रिपोर्ट में सीवर पाइपलाइन, पानी की पाइपलाइन, बिजली नेटवर्क, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, कचरा संग्रहण प्रणाली, सड़क की चौड़ाई और सार्वजनिक पार्किंग का विशेष जिक्र किया गया है।
यानी समिति भी मानती है कि चंडीगढ़ का मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर इस बढ़े हुए विकास के बोझ को सहने में सक्षम नहीं है। फिर भी उसने घनी निर्माण की अनुमति देने की सिफारिश कर दी। यह विरोधाभास ही इस पूरे मामले के केंद्र में है।
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Chandigarh Master Plan 2031 ने पहले ही चेताया था
अगर गौर करें तो यह मुद्दा नया नहीं है। Chandigarh Master Plan 2031 में पहले ही कहा जा चुका था कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव की वजह से FAR में और बढ़ोतरी नहीं की जानी चाहिए। लेकिन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन की मांग को देखते हुए समिति ने पड़ोसी राज्यों Punjab और Haryana के समकक्ष लाने का तर्क दिया।
समझने वाली बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ ऊंची इमारतों की इजाजत देना नहीं है, बल्कि यह चंडीगढ़ के पूरे शहरी चरित्र को बदल सकता है। खासकर दो कनाल तक की प्लॉट्स के मालिकों को आर्किटेक्चरल कंट्रोल छोड़कर जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाने का विकल्प दिया गया है, जो एक बार चुनने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता।
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निवासी संगठनों और शहरी योजनाकारों की चिंता
Resident Welfare Associations और शहरी योजनाकारों का कहना है कि चंडीगढ़ की सड़कें, पार्किंग सुविधाएं, पानी की आपूर्ति और नागरिक बुनियादी ढांचा पहले से ही दबाव में है। ऐसे में FAR बढ़ाने से स्थिति और खराब होगी।
वहीं दूसरी ओर, Chandigarh Chamber of Industries के उपाध्यक्ष नवीन मंगलानी का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर को बाद में नहीं, साथ-साथ विकसित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि UT Administration के पास संसाधन हैं और नियोजित विकास को समर्थन दिया जा सकता है।
कैग की रिपोर्ट और सार्वजनिक हित का सवाल
CAG (Comptroller and Auditor General) की रिपोर्ट में भी इस तरह के अनियोजित विकास पर सवाल उठाए गए हैं। एक्टिविस्ट आर के गर्ग ने साफ शब्दों में कहा है कि “शहर पहले से ही संतृप्त और भीड़भाड़ वाला है। FAR को 1.5 से 2.0 तक बढ़ाना भुगतान के आधार पर शहर के लिए असफलता होगी।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा मामला है। ट्रैफिक जाम, पानी की किल्लत, बिजली की समस्या और प्रदूषण सभी इससे प्रभावित होंगे।
मुख्य बातें (Key Points):
- विशेषज्ञ समिति ने FAR बढ़ाने की सिफारिश की लेकिन साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की शर्त भी रखी
- Chandigarh Master Plan 2031 ने पहले ही मौजूदा बुनियादी ढांचे पर दबाव की चेतावनी दी थी
- इंडस्ट्रियल एसोसिएशन पड़ोसी राज्यों के बराबर लाने की मांग कर रहे हैं
- निवासी संगठन और योजनाकार अनियोजित विकास की आशंका जता रहे हैं













