Device Farming Scam : नोएडा का कोई शांत अपार्टमेंट हो या बेंगलुरु का बेसमेंट – जहां कोई इंसान काम नहीं करता, लेकिन हजारों ‘डिजिटल इंसान’ एक साथ एक्टिव रहते हैं। यहां आवाज नहीं है, बातचीत नहीं है। बस कूलिंग फैन की गूंज और सैकड़ों मोबाइल स्क्रीन की चमक।
देखा जाए तो यह साइंस फिक्शन की कहानी लग सकती है। लेकिन हकीकत यह है कि यह भारत की ई-कॉमर्स इकोनॉमी में 48 बिलियन डॉलर का छेद कर चुकी है। इसे नाम दिया गया है – Jamtara 2.0। फर्क सिर्फ इतना है कि अब फोन कॉल से OTP नहीं मांगा जाता, बल्कि पूरा सिस्टम ही हैक कर लिया जाता है।
डिजिटल फैक्ट्री जहां बनती हैं नकली आइडेंटिटीज
ये स्क्रीन क्लिक कर रही हैं, स्क्रॉल कर रही हैं और हर सेकंड हजारों रुपए के ऑर्डर प्लेस कर रही हैं। आपके लिए यह केवल ‘ऑर्डर प्लेस्ड’ नोटिफिकेशन हो सकता है। लेकिन सिस्टम के लिए ये 300 अलग-अलग ग्राहक हैं – गृहिणियां, स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स।
लेकिन सच क्या है? यह सब नकली है। यह एक डिजिटल फैक्ट्री है जहां इंसान नहीं, आइडेंटिटीज बनाई जाती हैं। और यही आइडेंटिटीज ई-कॉमर्स की टोटल इकोनॉमी में 48 बिलियन डॉलर का छेद कर रही हैं।
Jamtara 1.0 से Jamtara 2.0 तक का सफर
कभी आपने जमतारा जरूर सुना होगा। मूवी और वेब सीरीज भी आई थी इस पर। जमतारा का नाम सुनते ही तस्वीर आती थी – छोटे कस्बों के लड़के, हाथ में सस्ता मोबाइल और एक स्क्रिप्ट: “सर आपका ATM ब्लॉक हो गया है, OTP दे दीजिए।”
यह दौर था फोन कॉल फ्रॉड का, जहां खेल भरोसे का था और हथियार था इंसानी बातचीत। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज का जमतारा कॉल नहीं करता, कोड लिखता है।
दिलचस्प बात यह है कि पहले स्कैमर दिन में 50 लोगों को कॉल करके कन्विंस करते थे। आज यह Device Farming Scam एक सेकंड में 5000 एक्टिविटीज कर रहा है। पहले आपको मनाया जाता था, आज सिस्टम ही मैनिपुलेट किया जा रहा है।
7 करोड़ यूजर्स के डेटा में छिपा खतरनाक पैटर्न
अगर गौर करें तो यह कोई छोटी-मोटी धोखाधड़ी नहीं है। यह एक संगठित डिजिटल इकोनॉमी है। 7 करोड़ यूजर्स के डेटा में एक ऐसा पैटर्न सामने आया जो किसी भी तरह से नेचुरल नहीं हो सकता।
45,000 अलग-अलग अकाउंट्स बने – अलग-अलग नाम, अलग-अलग शहर। लेकिन जब सिस्टम ने इसे गहराई से खंगाला तो सच्चाई सामने आई। ये सभी अकाउंट्स मात्र 9,000 फिजिकल डिवाइसेस से चल रहे थे।
समझने वाली बात है कि एक फोन 5 से 10 अकाउंट चला सकता है। लेकिन 45,000 अकाउंट्स? यहीं से आता है असली खेल – वर्चुअलाइजेशन और डिवाइस मास्किंग का।
कैसे काम करता है Device Farming का तकनीकी जाल
ये स्कैमर सिर्फ ऐप क्लोन नहीं कर रहे। ये आपके फोन की पूरी आइडेंटिटी बदल देते हैं। IMEI नंबर बदल जाता है, MAC Address बदल जाता है और यहां तक कि बैटरी का डेटा भी फेक हो जाता है।
जब नया अकाउंट बनता है तो सिस्टम को लगता है – यह बिल्कुल नया इंसान है, नया फोन है, नया यूजर है। और असल में यह है Device Farming Scam। जब एक साथ ऐसे 256 क्लस्टर काम करते हैं, यह कोई गैंग नहीं रहता – यह डिजिटल बटालियन बन जाती है।
तीन तरीके से होता है हमला – आपकी जेब पर सीधा वार
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ अकाउंट बनाने के लिए नहीं है। यह एक हथियार है और इससे वार किया जाता है तीन अलग-अलग तरीकों से।
पहला – रेफरल लूट का खेल
कोई नया ऐप आता है तो ₹500 या ₹100 का रेफरल देता है। आप एक-दो या पांच दोस्तों को इनवाइट कर सकते हैं। लेकिन यह Device Farm क्या करता है? खुद को हजारों बार इनवाइट भेजता है। एक ही दिन में 10,000 फेक यूजर्स क्रिएट कर देता है और 50 लाख रुपए का चूना लगा देता है उस नई कंपनी को।
दूसरा – रिफंड फ्रॉड की चालाकी
सोचिए किसी ने ₹1.5 लाख का iPhone मंगाया। डिलीवरी होती है और कुछ मिनटों में शिकायत आती है – “बॉक्स खाली था” या “इसमें सिर्फ ईंट निकली है।”
यहां ट्विस्ट यह है कि ये स्कैमर्स AI जनरेटेड अनबॉक्सिंग वीडियोज बनाते हैं जो इतने रियल होते हैं कि प्लेटफॉर्म भी कन्फ्यूज हो जाता है। नतीजा? रिफंड भी मिल जाता है और iPhone तो इनके पास पहुंच ही चुका है।
तीसरा – लॉजिस्टिक्स वॉर से कंपनियों को तबाह करना
यह सिर्फ फ्रॉड नहीं, एक तरह से डिजिटल वॉरफेयर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एक सेलर दूसरे सेलर को खत्म करने के लिए इसका यूज करता है।
हजारों Cash on Delivery ऑर्डर्स दे देते हैं। डिलीवरी पर रिजेक्ट कर देते हैं। सारा सामान 15 दिन तक ट्रांजिट में फंसा रहता है। सेलर का पैसा ब्लॉक हो जाता है, रेटिंग्स गिरने लगती हैं और धीरे-धीरे कंपनी मार्केट से बाहर हो जाती है।
सिंथेटिक आइडेंटिटी – 2025 का सबसे खतरनाक हथियार
वर्ष 2025 में भारत में हाई लेवल फ्रॉड में 20% की वृद्धि हुई है। और सबसे खतरनाक चीज है – Synthetic Identity।
ये लोग अब आपकी आइडेंटिटी चुराते नहीं, बनाते हैं। एक का PAN लेते हैं, दूसरे की फोटो लेते हैं, तीसरे का एड्रेस लेते हैं। फिर महीनों तक छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन्स करते रहते हैं जिससे सिस्टम का ट्रस्ट जीत सकें।
और जब ट्रस्ट बन जाता है तब होता है Exit Scam – एक बहुत बड़ा धोखा।
आम आदमी की जेब से निकल रहा पैसा – इनविजिबल फ्रॉड टैक्स
अब सवाल उठता है – यह ई-कॉमर्स वेबसाइट्स की बात है, उनकी कंपटीशन की है। हमें क्या फर्क पड़ता है?
यह एक भ्रम है। आप हर दिन एक इनविजिबल फ्रॉड टैक्स भर रहे हैं। जब आप खराब प्रोडक्ट रिटर्न नहीं कर पाते, जब आपका अकाउंट बार-बार वेरिफाई होता है और जब डिस्काउंट कम हो जाते हैं – यह सिर्फ पॉलिसी नहीं है।
वास्तव में यह रिएक्शन है उस फ्रॉड इकोसिस्टम का। हर कंपनी अपने रेवेन्यू का 10% फ्रॉड रोकने में खर्च कर रही है। और वह पैसा आखिरकार आपकी और हमारी जेब से जाता है।
2029 तक 107 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है फ्रॉड
चिंता का विषय यह है कि 2029 तक ई-कॉमर्स फ्रॉड 107 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। हम एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं – Generative Fraud का युग।
ऐसे बॉट्स जो आपकी तरह माउस मूव करते हैं। ऐसे बॉट्स जो Captcha को ह्यूमन फ्रस्ट्रेशन के साथ सॉल्व करते हैं। और ऐसे बॉट्स जो कस्टमर केयर से बहस करके रिफंड भी ले लेते हैं।
यह लड़ाई सड़कों पर नहीं लड़ी जाएगी। यह लड़ाई उस एक सेकंड में लड़ी जाएगी जहां आप ‘Buy Now’ का बटन क्लिक करते हैं।
0.95% लोग चुप्पी में कर रहे लूट
अगली बार जब आपको कोई अच्छी डील दिखे जो सच होने के लिए बहुत अच्छी लगे, तो उस अंधेरे कमरे को याद कीजिएगा जहां 200 फोन एक साथ एक्टिव हैं।
क्योंकि वहां आप कस्टमर नहीं, टारगेट हैं। और वो 0.95% लोग आपकी चुप्पी पर पल रहे हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि हम सिर्फ इंसानों से नहीं, एल्गोरिदम से लड़ रहे हैं। और सच यह है कि ये स्कैमर्स कई बार उन इंजीनियर्स से भी ज्यादा समझदार होते हैं जिन्होंने इस सिस्टम को बनाया है।
मुख्य बातें (Key Points)
• Device Farming Scam से ई-कॉमर्स इंडस्ट्री को $48 बिलियन का नुकसान हो चुका है
• 45,000 फेक अकाउंट्स सिर्फ 9,000 डिवाइसेस से ऑपरेट किए जा रहे थे
• रेफरल लूट, रिफंड फ्रॉड और लॉजिस्टिक्स वॉर – तीन मुख्य हमले के तरीके
• 2029 तक ई-कॉमर्स फ्रॉड 107 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है
• आम आदमी ‘इनविजिबल फ्रॉड टैक्स’ के रूप में इसकी कीमत चुका रहा है













