ED Investigation GMADA: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Enforcement Directorate (ED) ने Greater Mohali Area Development Authority (GMADA) और Town and Country Planning विभाग के अधिकारियों का धुआं निकाल रखा है। मोहाली के तीन बड़े बिल्डरों को दी गई अनुमतियों के मामले में ED की तरफ से लगातार पूछताछ का दौर जारी है। अब हालात यह हैं कि GMADA के अधिकारी अपने ही दफ्तर में कम नजर आने लगे हैं।
देखा जाए तो यह मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अधिकारियों को आमने-सामने बैठाकर उनके बयानों की मिलान करने का सिलसिला चल रहा है। ED के जलंधर ऑफिस में अब यह रोज का दृश्य बन गया है।
आज फिर पांच अधिकारी ED के सामने पेश
ED ने आज फिर GMADA के पांच सदस्यीय स्टाफ को तलब किया है। इसी तरह Indian Cooperative Housing Building Society (सनटेक सिटी के प्रमोटर) के पदाधिकारी अजय सहगल को भी आज ED ने बुलाया है।
अहम सूत्रों के अनुसार आज ED की तरफ से GMADA और टाउन एंड प्लानिंग विभाग के अधिकारियों और स्टाफ को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि आज DTP (Licensing), एक अकाउंटेंट, सुपरिंटेंडेंट और क्लर्क के अलावा एक सीनियर अधिकारी भी ED के जलंधर दफ्तर में पहुंचे हुए हैं।
जो अधिकारी पहले तलब हुए, वे अब GMADA ऑफिस में कम नजर आते हैं
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ED ने पहले जो अधिकारी तलब किए थे, वे अब GMADA दफ्तर में ज्यादा समय नजर नहीं आते। GMADA के अफसरों और स्टाफ का आए दिन ED के जलंधर दफ्तर में चक्कर लग रहा है।
अगर गौर करें तो ED ने GMADA के अधिकारियों को सबसे पहले 18 मई को तलब किया था। दूसरे दिन यानी 19 मई को फिर ED ने बुला लिया था। यह सिलसिला अब लगातार जारी है, जिससे विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
8 मई को हुई थी बड़ी छापेमारी
याद रहे कि ED ने 8 मई को मुहाली के तीन बड़े बिल्डरों के ठिकानों समेत दर्जनों जगहों पर छापेमारी की थी। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुहाली के अहम प्रोजेक्ट्स सनटेक सिटी और Altos Space Builders Private Limited को जारी किए गए LU (License to Use) में कथित बेनियमियों की जांच ED ने शुरू की है।
समझने वाली बात यह है कि मुख्य तौर पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को दी गई अनुमतियों पर भी उंगली उठ रही है।
तीन बड़े बिल्डर और एक कथित बिचौलिया निशाने पर
Indian Cooperative Housing Building Society (सनटेक सिटी के प्रमोटर) के पदाधिकारी अजय सहगल और सुरेश कुमार बजाज, Altos Space Builders Private Limited, धीर कंस्ट्रक्शन जिसके प्रमोटर गौरव धीर हैं समेत कथित बिचौलिया नितिन गोहिल के लिए अब रास्ते आसान नहीं हैं।
चिंता का विषय यह है कि ED की तरफ से लाइसेंसों और अनुमतियों से संबंधित सारे दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इन प्रोजेक्ट्स पर पहले ही मुहाली जिले में पुलिस केस दर्ज हैं।
GMADA और टाउन प्लानिंग विभाग के तारतम्य की जांच
ED विशेष रूप से यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने की प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता बरती गई। सूत्रों के अनुसार, कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो सवाल खड़े करते हैं कि क्या नियमों में ढील देकर या जानबूझकर लाइसेंस जारी किए गए।
देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब पंजाब में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को लेकर विवाद हुआ हो। लेकिन इस बार ED की सीधी दखलअंदाजी ने मामले को गंभीर बना दिया है।
मनी लॉन्ड्रिंग का कनेक्शन
ED की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि क्या इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से काले धन को सफेद किया गया। अगर ऐसा साबित होता है तो संबंधित अधिकारियों और बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
यहां समझने वाली बात यह है कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत कार्रवाई होती है, जिसमें संपत्ति कुर्क करने से लेकर गिरफ्तारी तक के प्रावधान हैं।
राजनीतिक प्रभाव की भी जांच संभव
हालांकि अभी तक किसी राजनीतिक नेता का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि ED की जांच आगे बढ़ने पर कुछ बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। सवाल उठता है कि बिना किसी उच्च स्तरीय संरक्षण के इतने बड़े प्रोजेक्ट्स को अनियमित तरीके से मंजूरी कैसे मिल सकती है?
पंजाब में रियल एस्टेट की स्थिति
पंजाब, खासकर मुहाली और चंडीगढ़ के आसपास के इलाके में रियल एस्टेट का कारोबार तेजी से बढ़ा है। इस विकास के साथ ही अनियमितताओं की खबरें भी आती रही हैं। कई बार खरीदारों ने शिकायत की है कि उन्हें वादे के मुताबिक अपार्टमेंट नहीं मिले या प्रोजेक्ट अधूरे रह गए।
इस पृष्ठभूमि में ED की यह जांच एक महत्वपूर्ण कदम है जो रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने में मददगार साबित हो सकता है।
अगले कदम क्या होंगे?
अब यह देखना होगा कि ED की जांच किस दिशा में जाती है। क्या सिर्फ छोटे अधिकारियों तक सीमित रहेगी या बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचेगी? और सबसे अहम सवाल – क्या इस मामले में किसी राजनीतिक संरक्षण का कोई कोण है?
फिलहाल तो GMADA और टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारी ED के सामने जवाब देने में व्यस्त हैं। जांच आगे बढ़ने पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points):
• ED ने मुहाली के तीन बड़े बिल्डरों को दी गई अनुमतियों के मामले में GMADA पर कसा शिकंजा
• 8 मई को दर्जनों जगहों पर छापेमारी, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू
• GMADA के अधिकारियों को आमने-सामने बिठाकर की जा रही पूछताछ
• सनटेक सिटी, Altos Space Builders और धीर कंस्ट्रक्शन के प्रमोटर निशाने पर
• 18 और 19 मई को भी अधिकारी तलब किए गए थे, सिलसिला जारी
• लाइसेंसों और अनुमतियों से जुड़े सभी दस्तावेजों की हो रही जांच













