Punjab Sarpanch Honorarium: पंजाब सरकार ने सूबे के करीब आठ हजार सरपंचों को मान-भत्ता देने से पल्ला झाड़ लिया है और करीब 5,228 सरपंचों को सरकारी खजाने से मान-भत्ता देने की तैयारी शुरू कर ली है। इस बारे में ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग को जरूरी बजट आने वाले दिनों में मिल जाएगा। पंचायत विभाग की तरफ से वित्त विभाग के साथ औपचारिक पत्र व्यवहार किया जा रहा था और अब विभाग ने हामी भर दी है।
देखा जाए तो यह फैसला पंजाब के ग्रामीण नेतृत्व के लिए एक बड़ा झटका है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले साल भत्ता बढ़ाने का ऐलान तो किया था, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि करीब 60% सरपंचों को यह लाभ नहीं मिलेगा।
कौन से सरपंच पात्र हैं और कौन नहीं?
सूबे में 5,228 सरपंच वे हैं जिनकी पंचायतों के पास आमदनी का कोई स्रोत नहीं है। केवल इन्हीं सरपंचों को सरकारी खजाने से मान-भत्ता दिया जाएगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में इस समय 13,236 पंचायतें हैं, जिनमें से 8,008 पंचायतों के पास अपनी आमदनी के स्रोत हैं। पंजाब सरकार यह फैसला पहले ही कर चुकी है कि जिन पंचायतों के पास आमदनी के स्रोत हैं, उन गांवों के सरपंच पंचायती आमदनी से ही मान-भत्ता वसूल करेंगे।
अगर गौर करें तो एक तरीके से सूबा सरकार आठ हजार सरपंचों को मान-भत्ता देने से मुक्त हो गई है।
पंचायत विभाग ने मांगा विस्तृत विवरण
ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग ने जिला विकास और पंचायत अफसरों को पत्र जारी करके स्रोत रहित पंचायतों का विवरण मांगा है कि ऐसी पंचायतों ने अब तक सरपंचों को कितना मान-भत्ता दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि जिन पंचायतों के पास आमदनी के स्रोत नहीं हैं, उन्हें भत्ता देने के लिए कितने बजट की जरूरत है, इसकी भी गणना की जा रही है।
पत्र में कहा गया है कि 5,228 पंचायतों के पिछले सरपंचों को दस सालों का मान-भत्ता और नए चुने गए सरपंचों को 31 मार्च 2026 तक का मान-भत्ता दिया जाना है, जिसके लिए बजट प्राप्त हो रहा है। पंचायत विभाग ने हफ्ते के अंदर सूचना इकट्ठा करके बजट आवंटित करने की हामी भरी है।
भगवंत मान ने किया था भत्ता बढ़ाने का ऐलान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले साल 24 अप्रैल को पंचायत दिवस के मौके पर सरपंचों का मान-भत्ता ₹1,200 से बढ़ाकर ₹2,000 मासिक करने का ऐलान किया था।
समझने वाली बात यह है कि यह ऐलान बड़े धूमधाम से किया गया था और सरपंचों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। लेकिन अब जब यह शर्त लगाई गई है कि केवल स्रोत रहित पंचायतों के सरपंचों को ही सरकार भत्ता देगी, तो यह खुशी आधी रह गई है।
सरपंचों की आर्थिक स्थिति और संघर्ष
जिला लुधियाना के पिंड भागपुर के नए सरपंच गगनदीप सिंह को करीब 18 महीने से मान-भत्ते का इंतजार है। उन्हें पहली किस्त भी नहीं मिली।
गगनदीप सिंह के मुताबिक सरपंचों के रोजाना के खर्चों की पूर्ति के लिए दो हजार रुपए का मान-भत्ता बहुत कम है, जो दिसंबर 2024 से कभी मिला ही नहीं।
यहां समझने वाली बात यह है कि सरपंच का काम कोई छोटा-मोटा नहीं है। उन्हें गांव के विकास कार्यों की देखरेख, विवादों का निपटारा, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और लोगों की समस्याओं का समाधान करना होता है। इतने काम के बदले ₹2,000 भी बहुत कम हैं।
बरनाला के सरपंच का आरोप: पार्टी से जुड़ाव के आधार पर भेदभाव?
बरनाला जिले के पिंड राएसर के सरपंच बचित्तर सिंह ने कहा कि उन्हें न तो ग्रांट मिली और न ही मान-भत्ता। उन्होंने खुद को शिरोमणि अकाली दल से संबंधित बताया।
चिंता का विषय यह है कि क्या सरकार राजनीतिक आधार पर भेदभाव कर रही है? यह सवाल कई सरपंचों के मन में उठ रहा है। अगर ऐसा है तो यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
हाई कोर्ट में याचिका और सरकार की रणनीति
पंजाब के पूर्व सरपंचों ने मान-भत्ता लेने के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। पंचायत विभाग के सीनियर अधिकारी ने 5,228 सरपंचों को जल्द मान-भत्ता मिलने की पुष्टि की है।
देखा जाए तो सरकार ने एक चतुर रणनीति अपनाई है। स्रोत रहित पंचायतों के सरपंचों को तो भत्ता देने की हामी भर दी, लेकिन बाकी आठ हजार सरपंचों को अपनी पंचायत की आमदनी पर निर्भर कर दिया।
₹31.77 करोड़ का सालाना बजट चाहिए
दो हजार रुपए मासिक मान-भत्ता देने के लिए सालाना ₹31.77 करोड़ का बजट जरूरी है। यह राशि केवल 5,228 सरपंचों के लिए है।
अगर सभी 13,236 सरपंचों को भत्ता देना होता तो करीब ₹80 करोड़ सालाना का बजट चाहिए होता। शायद यही कारण है कि सरकार ने आधे से ज्यादा सरपंचों को इस योजना से बाहर कर दिया।
पंचायती आमदनी के स्रोत क्या होते हैं?
| आमदनी का स्रोत | विवरण |
|---|---|
| पंचायती जमीन का किराया | गांव की सरकारी जमीन पर दुकान/मकान का किराया |
| शादी-पार्टी हॉल | कम्युनिटी सेंटर का किराया |
| पानी कनेक्शन शुल्क | घरों में पानी कनेक्शन के लिए फीस |
| व्यवसायिक लाइसेंस फीस | गांव में दुकानों के लाइसेंस का शुल्क |
| बाजार/मेले की आमदनी | साप्ताहिक बाजार या मेलों से आय |
स्रोत रहित पंचायतें क्यों हैं?
जिन पंचायतों के पास आमदनी के स्रोत नहीं हैं, उनमें आमतौर पर निम्नलिखित कारण होते हैं:
- छोटी आबादी: बहुत कम घर होना
- कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं: गांव में दुकानें या बाजार न होना
- पंचायती संपत्ति का अभाव: किराए के लिए कोई जमीन या भवन न होना
- दूरदराज का इलाका: मुख्य सड़कों से दूर होना
ऐसे गांवों के सरपंचों के लिए तो सरकारी भत्ता एकमात्र सहारा है, लेकिन जो पंचायतें थोड़ी-बहुत आमदनी करती हैं, उनके सरपंचों को अब खुद ही व्यवस्था करनी होगी।
सरपंचों के सामने क्या विकल्प?
अब जिन 8,008 पंचायतों के सरपंचों को सरकारी भत्ता नहीं मिलेगा, उनके पास निम्नलिखित विकल्प हैं:
- पंचायत की आमदनी बढ़ाना: नए स्रोत विकसित करना
- पंचायत सदस्यों से पास प्रस्ताव: भत्ता देने के लिए औपचारिक निर्णय लेना
- कानूनी लड़ाई: कोर्ट में याचिका दायर करना
- राजनीतिक दबाव: विरोध प्रदर्शन और मांग करना
यह फैसला उचित है या नहीं?
सवाल उठता है कि क्या सरकार का यह फैसला न्यायसंगत है? एक ओर तो मुख्यमंत्री ने सभी सरपंचों को भत्ता बढ़ाने का ऐलान किया, लेकिन दूसरी ओर 60% सरपंचों को इस लाभ से वंचित कर दिया गया।
तर्क यह दिया जा रहा है कि जिन पंचायतों के पास आमदनी है, वे खुद भत्ता दे सकती हैं। लेकिन क्या यह तर्क सही है? कई पंचायतों की आमदनी इतनी कम है कि उससे विकास कार्य भी मुश्किल से हो पाते हैं।
मुख्य बातें (Key Points):
• पंजाब सरकार ने 8,008 सरपंचों को मान-भत्ता देने से किया इनकार
• केवल 5,228 स्रोत रहित पंचायतों के सरपंचों को सरकारी भत्ता मिलेगा
• मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अप्रैल 2024 में ₹1,200 से ₹2,000 करने का किया था ऐलान
• पंजाब में कुल 13,236 पंचायतें, जिनमें 8,008 के पास आमदनी के स्रोत
• ₹31.77 करोड़ सालाना बजट की जरूरत 5,228 सरपंचों के भत्ते के लिए
• कई सरपंचों को 18 महीने से भत्ता नहीं मिला, पहली किस्त भी लंबित
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