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The News Air - NEWS-TICKER - Punjab Heatwave Deaths 2024: अमृतसर में लू से 78 मौतें, NCRB के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

Punjab Heatwave Deaths 2024: अमृतसर में लू से 78 मौतें, NCRB के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

देश भर में सबसे ज्यादा हीटस्ट्रोक से मौतें अकेले अमृतसर शहर में, जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक स्थिति बनी मुख्य कारण

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 22 मई 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Heatwave
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Punjab Heatwave Deaths: National Crime Records Bureau (NCRB) की तरफ से जारी किए गए ताजा आंकड़ों ने पवित्र नगरी अमृतसर में एक बड़ी चिंता का विषय खड़ा कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 के दौरान देश भर में से लू (हीटस्ट्रोक) लगने के कारण सबसे ज्यादा 78 मौतें अकेले अमृतसर शहर में दर्ज की गई हैं। बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले लोगों (फ्लोटिंग पॉपुलेशन) वाले इस ऐतिहासिक शहर के लिए यह आंकड़ा बेहद भयानक और परेशान करने वाला है।

देखा जाए तो यह केवल एक सांख्यिकी नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करती है। जिस शहर को दुनिया भर में मेहमाननवाजी और सेवा के लिए जाना जाता है, वहां इतनी बड़ी संख्या में लू से मौतें होना कई सवाल खड़े करती हैं।

रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव ने जताई गहरी चिंता

जिला रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव सैमसन मसीह ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अमृतसर विश्व भर में अपनी मेहमाननवाजी और सेवा के लिए जाना जाता है, जहां सच्चखंड श्री हरिमंदर साहिब के गुरु रामदास जी लंगर हॉल में 24 घंटे निरंतर लंगर चलता है।

दिलचस्प बात यह है कि इसके अलावा विभिन्न धार्मिक अवसरों पर शहर भर में जगह-जगह मीठे और ठंडे जल की छबीलें और लंगर लगाए जाते हैं। पर इसके बावजूद लू लगने के कारण इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतें तस्वीर का दूसरा पहलू देखने के लिए मजबूर करती हैं।

बेसहारा और भिखारी सबसे ज्यादा संवेदनशील

सैमसन मसीह ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से बेसहारा और मांगने वाले लोग बड़ी तादाद में यहां आते हैं। यह वर्ग सबसे ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि उनके पास न तो रहने का कोई पक्का ठिकाना होता है और न ही मौसम की मार से बचने के साधन।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये लोग अक्सर धार्मिक स्थानों, मजारों के बाहर, सड़कों के किनारों और डिवाइडरों पर बैठे देखे जा सकते हैं। तपती धूप में इनके पास न छाया होती है, न पानी की उचित व्यवस्था। यही वर्ग हीटस्ट्रोक की सबसे ज्यादा चपेट में आता है।

समझने वाली बात यह है कि सुनहरे मंदिर की नगरी में सेवा और लंगर का जितना महिमामंडन होता है, उतना ही इन बेसहारा लोगों की मदद के लिए ठोस व्यवस्था की कमी भी दिखती है।

जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक स्थिति बनी मुख्य कारण

माहिरों के अनुसार अप्रैल से जून 2024 तक का समय बेहद गर्म और लंबी लू वाला रहा, जिसे जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के कारण भारत में लगातार तीसरे साल पड़ने वाली अति की गर्मी के रूप में दर्ज किया गया है।

सिहत माहिर डॉ. गुरमीत सिंह ने बताया कि मनुष्य का शरीर अपने आंतरिक तापमान को 37 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखने के लिए निरंतर काम करता है और शरीर को ठंडा रखने का मुख्य जरिया पसीना आना है।

अगर गौर करें तो जब बाहरी तापमान बहुत ज्यादा होता है और हवा में नमी (ह्यूमिडिटी) भी बढ़ जाती है, तो पसीना सूख नहीं पाता। पंजाब के मैदानी इलाकों और खास करके अमृतसर में हवा की गति कम होने और नमी ज्यादा होने के कारण पसीना वाष्पीकृत (इवेपोरेट) नहीं होता, जिससे शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है और व्यक्ति हीटस्ट्रोक का शिकार हो जाता है।

भूगोलिक नुकसान: कोई बड़ा जल स्रोत नहीं

इसके अलावा, भौगोलिक पक्ष से पंजाब के मैदानी इलाके चारों तरफ से जमीन से घिरे (लैंडलॉक्ड) होने के कारण यहां कोई बड़ा जल स्रोत नहीं है जो तापमान को संतुलित कर सके। इस कारण गर्मी तेजी से बढ़ती है और लंबे समय तक बनी रहती है।

यह समझने वाली बात है कि समुद्र या बड़ी झीलों के पास के इलाकों में तापमान अपेक्षाकृत नियंत्रित रहता है, लेकिन पंजाब जैसे landlocked राज्यों में यह सुविधा नहीं है।

विकास की भेंट चढ़ी हरियाली और बढ़ता प्रदूषण

पिछले कुछ दशकों के दौरान हुए विभिन्न अध्ययनों से सामने आया है कि शहर में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों, वाहनों के धुएं और उद्योगों के कारण प्रदूषण का स्तर खतरनाक हद तक बढ़ा है।

शहर के अंदरूनी और बाहरी हिस्सों में सड़कों को चौड़ा करने, फोर-लेनिंग, दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड रोड नेटवर्क, BRTS प्रोजेक्ट और शॉपिंग मॉल्स के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की गई, जिसने गर्मी के प्रकोप को और बढ़ा दिया है।

चिंता का विषय यह है कि विकास के नाम पर शहर की हरियाली को लगातार नष्ट किया जा रहा है। पेड़ प्राकृतिक एयर कंडीशनर का काम करते हैं, लेकिन अंधाधुंध कटाई ने शहर को कंक्रीट के जंगल में बदल दिया है।

डिप्टी कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह ने कहा कि वह स्वास्थ्य विभाग को इन मौतों के असल कारणों की बारीकी से जांच करने के निर्देश देंगे।

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उन्होंने कहा कि प्रशासन की तरफ से हर साल बड़े पैमाने पर पौधे लगाने की मुहिम चलाई जाती है, परंतु इस बार वह विशेष तौर पर यह जांच करवाएंगे कि पहले लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर (सर्वाइवल रेट) क्या रही है।

यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है क्योंकि अक्सर पौधरोपण के आयोजन तो धूमधाम से होते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं होती और ज्यादातर पौधे सूख जाते हैं।

जनता को जागरूक करने की मुहिम

डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से सभी गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) और शैक्षिक संस्थानों को पहले ही एडवाइजरी जारी करके अपील की गई है कि वे लोगों को प्यास न लगने पर भी अधिक से अधिक पानी पीने और दोपहर के समय बिना वजह घरों से बाहर न निकलने के लिए प्रेरित करें।

इसके साथ ही उन्होंने रेड क्रॉस सोसाइटी को हिदायत दी कि वह NGOs के साथ मिलकर सार्वजनिक जगहों पर आम लोगों के लिए ठंडे पानी के प्याऊ लगाएं, धूप से बचने के लिए छतरियों/शेड्स का प्रबंध करें और लोगों को जागरूक करने के लिए सेमिनार आयोजित करें।

क्या हैं हीटस्ट्रोक के लक्षण और बचाव?
हीटस्ट्रोक के लक्षणतुरंत बचाव के उपाय
तेज बुखार (104°F से ऊपर)तुरंत छाया में ले जाएं
चक्कर आना और बेहोशीगीले कपड़े से शरीर पोंछें
तेज सिरदर्द और उल्टीORS या पानी पिलाएं
त्वचा लाल और सूखीतुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं
तेज धड़कन और सांस फूलनाबर्फ की पट्टी माथे पर रखें
प्रशासनिक विफलता या सामाजिक उदासीनता?

सवाल उठता है कि जिस शहर में 24 घंटे लंगर चलता हो, जहां मुफ्त में खाना मिलता हो, वहां लू से इतनी मौतें क्यों? क्या यह प्रशासनिक विफलता है या समाज की उदासीनता?

शायद दोनों। लंगर में खाना तो मिल जाता है, लेकिन दोपहर की तपती गर्मी में सड़क पर बैठे उस बेसहारा व्यक्ति तक पानी या छाया पहुंचाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।

आगे की राह: क्या करना होगा?

इस त्रासदी से बचने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:

  • शहर भर में शेड और पानी की व्यवस्था: सड़कों, बस स्टॉप्स और सार्वजनिक जगहों पर छाया और पानी की व्यवस्था
  • बेसहारा लोगों के लिए शेल्टर होम: गर्मियों में विशेष शेल्टर होम जहां AC और पानी की सुविधा हो
  • अधिक पेड़ लगाना: विकास परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना
  • जागरूकता अभियान: मीडिया और NGOs के जरिए लोगों को हीटस्ट्रोक से बचने के उपाय बताना
  • इमरजेंसी मेडिकल टीमें: गर्मियों में विशेष मोबाइल मेडिकल यूनिट्स तैनात करना

मुख्य बातें (Key Points):

• साल 2024 में अमृतसर में हीटस्ट्रोक से 78 मौतें, देश में सबसे ज्यादा

• NCRB के आधिकारिक आंकड़ों में यह खुलासा हुआ

• बेसहारा और भिखारी वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

• जलवायु परिवर्तन, भौगोलिक स्थिति और बढ़ती नमी मुख्य कारण

• विकास परियोजनाओं के लिए हजारों पेड़ काटे गए

• डिप्टी कमिश्नर ने जांच और सख्त कदमों के दिए निर्देश

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