घोड़े की एंटीबॉडी से बनाई जा रही है कोरोना की दवा, 90 घंटे में संक्रमण ख़त्म करने का दावा

नई दिल्ली, 11 अगस्त (The News Air)
कोरोना वायरस ( Coronavirus ) के बढ़ते ख़तरे के बीच ख़तरे से निपटने के लिए सबसे ज़्यादा फोक्स वैक्सीनेशन पर दिया जा रहा है। वैक्सीन को लेकर कई तरह के परीक्षण भी लगातार किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक परीक्षण महाराष्ट्र के कोल्हापुर की आईसेरा बायोलॉजिकल ( iSera Biological ) कंपनी कर रही है।
ये कंपनी घोड़ों की एंटीबॉडी से बनाई गई कोरोनावायरस की एक नई दवा का परीक्षण कर रही है। माना जा रहा है कि यह दवा सभी परीक्षणों में सफल होती है, तो यह कोरोना के हल्क़े और मध्यम लक्षणों वाले मरीज़ों के इलाज अहम भूमिका निभाएगी।
आईसेरा बॉयोलॉजिक अपने परीक्षण में सफल होती है तो, यह इस तरह की देश की पहली स्वदेशी दवा होगी, जिसका इस्तेमाल संक्रमण के इलाज के लिए किया जाएगा।
72 से 90 घंटे में आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती परीक्षणों में दवा की वजह से 72 से 90 घंटों के अंदर ही संक्रमितों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट निगेटिव हो जा रही है।
चल रहा ह्यूमन ट्रायल का पहला चरण- आईसेरा फ़िलहाल इस दवा को लेकर ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में ही है। बताया जा रहा है कि अगस्त के अंत तक ये ट्रायल पूरा हो सकता है।
घोड़ों की एंटीबॉडी से बनाई गई दवा- iSera Biological की कोरोना की दवा घोड़ों की एंटीबॉडी से बनाई गई है, जो कोरोना के हल्क़े और मध्यम लक्षणों वाले मरीज़ों के इलाज अहम भूमिका निभाएगी।
सीरम इंस्टीट्यूट का सहयोग- iSera Biological कंपनी ज़्यादा पुरानी नहीं है। इस अभी सिर्फ़ चार वर्ष का ही समय हुआ है। ऐसे में इस दवा को बनाने में पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ( Serum Institute of India ) ने भी मदद की है।
दावा है कि कंपनी ने एंटीबॉडीज़ ( Antibodies ) का एक ऐसा कॉकटेल तैयार किया है, जो कोरोना के हल्क़े और मध्यम लक्षण वाले मरीज़ों में संक्रमण को फैलने से रोक सकता है। यही नहीं इसके साथ ही शरीर में मौजूदा वायरस को भी ख़त्म कर सकता है।
अभी तक ये कंपनी एंटीसीरम प्रोडक्ट यानी साँप काटने, कुत्ते के काटने और डिप्थीरिया के इलाज में कारगर दवाएं बनाती है। लेकिन सीरम की मदद से बेहतर परिणाम की उम्मीद की जा रही है।
नतीजों का इंतज़ार- वहीं इस दवा को लेकर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर एनके गांगुली का कहना है कि, अब तक तो यह दवा काफ़ी हद तक उम्मीद जगाती है, लेकिन हमें मानव परीक्षण के नतीजों का इंतज़ार करना चाहिए।
अगर दवा सभी मानकों पर सही साबित हुई, तो यह भारत जैसे देश में कोरोना के ख़िलाफ़ जारी ज़ंग में काफ़ी फायदेमन्द साबित हो सकती है। मुझे लगता है कि बाज़ार में उपलब्ध इंटरनेशनल उत्पादों के मुक़ाबले यह दवा सस्ती भी होगी।

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