Chandigarh Electric Bus Accident – चंडीगढ़ में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से चलाई जा रही इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शनिवार सुबह सेक्टर-46 और 47 के बीच एक चलती इलेक्ट्रिक बस के दोनों टायर अचानक निकल गए। उस समय बस में करीब 15 यात्री सवार थे, जो रामदरबार से मलोया की तरफ जा रहे थे। चालक की चौकसी और सूझबूझ से बस को तुरंत काबू में कर सड़क किनारे रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
यह घटना चंडीगढ़ की इलेक्ट्रिक बस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। देखा जाए तो यह पहला मौका नहीं है जब शहर की इलेक्ट्रिक बसों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई हों। अगर गौर करें, तो पहले भी चलती बसों में तकनीकी खराबी, सड़क पर पलटने और अन्य मैकेनिकल खामियों के मामले सामने आ चुके हैं।
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कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस सामान्य रफ्तार से चल रही थी कि अचानक तेज आवाज के साथ उसके दोनों टायर निकल गए। चालक ने तुरंत ब्रेक लगाकर बस को काबू किया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर बस तेज रफ्तार में होती या समय पर काबू नहीं होती, तो गंभीर हादसा हो सकता था।
घटना के समय बस में मौजूद यात्रियों ने बताया कि अचानक धड़ाके की आवाज सुनाई दी और बस लड़खड़ाने लगी। चालक ने बहुत ही कुशलता से बस को संभाला और सड़क के किनारे सुरक्षित रोक दिया। इस घटना में किसी यात्री के जख्मी होने की सूचना नहीं है।
समझने वाली बात यह है कि अगर यह हादसा किसी भीड़भाड़ वाली जगह या तेज रफ्तार वाले रूट पर होता, तो नतीजे बेहद भयानक हो सकते थे।
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पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहला मौका नहीं है जब चंडीगढ़ की इलेक्ट्रिक बसों की सुरक्षा पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी चलती इलेक्ट्रिक बसों में तकनीकी खराबी, सड़क पर पलटने और अन्य मैकेनिकल खामियों के मामले सामने आ चुके हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
दिलचस्प बात यह है कि इन बसों को पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक तकनीक से लैस बताया जाता है। लेकिन बार-बार होने वाली तकनीकी खामियां इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
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नई बसों की योजना के बीच उठे सवाल
जिक्रयोग है कि इसी सप्ताह यूटी के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को और मजबूत करने के लिए अधिकारियों के साथ मीटिंग कर इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े का विस्तार करने पर चर्चा की थी।
अधिकारियों का कहना है कि नई बसें शामिल होने के बाद शहर के अधिकतर प्रमुख रूटों पर हर 15 मिनट में बस सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, शनिवार की घटना ने बसों की तकनीकी गुणवत्ता, नियमित फिटनेस जांच और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहले
यात्रियों का कहना है कि पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन तभी सफल माना जाएगा, जब उसमें सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा भी पूरी तरह सुनिश्चित हो। एक यात्री ने कहा: “हम इलेक्ट्रिक बस का समर्थन करते हैं, लेकिन हमारी जान भी तो सुरक्षित होनी चाहिए। बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।”
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों की नियमित सर्विसिंग और फिटनेस जांच को और सख्त बनाने की जरूरत है। टायर, ब्रेक, बैटरी और अन्य अहम पुर्जों की जांच रोजाना होनी चाहिए। साथ ही, ड्राइवरों को भी आपात स्थिति में वाहन संभालने की विशेष ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
इसके अलावा, बसों की खरीद के समय ही उनकी गुणवत्ता की पूरी जांच होनी चाहिए। सस्ती और घटिया क्वालिटी की बसें खरीदने से बचना चाहिए, चाहे उनकी कीमत कुछ ज्यादा ही क्यों न हो।
मुख्य बातें (Key Points):
- चंडीगढ़ की इलेक्ट्रिक बस के अचानक निकले दोनों टायर, 15 यात्री थे सवार
- ड्राइवर की सूझबूझ से बस काबू में आई, कोई हताहत नहीं हुआ
- पहले भी इलेक्ट्रिक बसों में तकनीकी खराबियों के मामले सामने आ चुके हैं
- प्रशासक ने हाल ही में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े बढ़ाने की योजना पर चर्चा की थी
- बसों की फिटनेस जांच और रखरखाव व्यवस्था पर उठे सवाल













