8th Pay Commission – अगर आप आठवें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं, तो उससे पहले एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। हालांकि यह फैसला केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के लाखों फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए है। राज्य सरकार ने आशा वर्कर्स, आंगनवाड़ी वर्कर्स और आंगनवाड़ी हेल्पर्स के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जो 1 अगस्त 2026 से लागू होगी।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा है जो वर्षों से स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। लंबे समय से यह कर्मचारी मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे और अब सरकार ने उनकी मांग पर बड़ा फैसला लिया है।
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आशा वर्कर्स का मानदेय ₹6,250 से बढ़कर ₹11,250
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक आशा वर्कर्स का मासिक फिक्स्ड मानदेय ₹6,250 से बढ़ाकर ₹11,250 कर दिया गया है। यानी करीब 80% की बढ़ोतरी।
खास बात यह है कि यह बढ़ा हुआ मानदेय उनके प्रदर्शन आधारित इंसेंटिव से अलग होगा। यानी जो प्रोत्साहन राशि उन्हें पहले मिलती थी, वह भी जारी रहेगी। इससे उनकी कुल मासिक आय पहले की तुलना में काफी बढ़ जाएगी।
देखा जाए तो यह फैसला उन महिलाओं के लिए बड़ी राहत है जो दूरदराज के इलाकों में जाकर टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और स्वास्थ्य जागरूकता का काम करती हैं।
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आंगनवाड़ी वर्कर्स को मिलेंगे ₹14,000, हेल्पर्स को ₹11,800
सिर्फ आशा वर्कर्स ही नहीं, बल्कि ICDS (Integrated Child Development Services) यानी एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत काम करने वाली आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स को भी राहत मिली है।
सरकारी आदेश के अनुसार:
- आंगनवाड़ी वर्कर्स का मासिक मानदेय बढ़ाकर ₹14,000 कर दिया गया है
- आंगनवाड़ी हेल्पर्स को अब हर महीने ₹11,800 मिलेंगे
यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर उनके मासिक मानदेय में दिखाई देगी। समझने वाली बात यह है कि यह राशि उनकी बुनियादी आय है, जो बिना किसी शर्त के मिलेगी।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा हैं।
इनकी भूमिका में शामिल है:
- टीकाकरण अभियान चलाना
- गर्भवती महिलाओं की नियमित देखभाल
- बच्चों का पोषण सुनिश्चित करना
- सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना
- जागरूकता फैलाना
अगर गौर करें, तो कोरोना महामारी के दौरान इन्हीं कार्यकर्ताओं ने सबसे आगे रहकर काम किया था। फिर भी उनका मानदेय बहुत कम था, जिसे लेकर लंबे समय से विरोध हो रहा था।
बजट में पहले से किया गया है प्रावधान
सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए खर्च के लिए बजट में पहले से प्रावधान किया गया है। वित्त विभाग भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है और संबंधित विभागों को समय पर फंड जारी किए जाएंगे ताकि 1 अगस्त 2026 से बढ़ा हुआ मानदेय बिना किसी देरी के कर्मचारियों के खाते में पहुंच सके।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने इसे सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरी तैयारी के साथ लागू करने की योजना बनाई है।
अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा दबाव
पश्चिम बंगाल के इस फैसले से अन्य राज्यों की सरकारों पर भी दबाव बढ़ सकता है। देश भर में आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कम मानदेय को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। अब जब एक राज्य ने इतनी बड़ी बढ़ोतरी दी है, तो दूसरे राज्यों में भी इसकी मांग तेज हो सकती है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को कब मिलेगा तोहफा?
फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारी आठवें वेतन आयोग का इंतजार कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 से लागू हैं और अब नए वेतन आयोग की उम्मीद की जा रही है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
| कर्मचारी श्रेणी | पुराना मानदेय | नया मानदेय | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| आशा वर्कर्स | ₹6,250 | ₹11,250 | ₹5,000 (80%) |
| आंगनवाड़ी वर्कर्स | – | ₹14,000 | – |
| आंगनवाड़ी हेल्पर्स | – | ₹11,800 | – |
मुख्य बातें (Key Points):
- पश्चिम बंगाल में आशा और आंगनवाड़ी कर्मचारियों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी
- आशा वर्कर्स का मानदेय ₹6,250 से बढ़कर ₹11,250 हुआ
- आंगनवाड़ी वर्कर्स को ₹14,000 और हेल्पर्स को ₹11,800 मिलेंगे
- 1 अगस्त 2026 से नई दरें लागू होंगी
- बजट में पहले से प्रावधान, फंड समय पर जारी होंगे













