Bhagwant Mann Viral Video Forensic Report को लेकर पंजाब की सियासत में गुरुवार को एक बड़ा मोड़ आ गया। आम आदमी पार्टी ने मोहाली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जुड़ी जो विवादित वीडियो पिछले दिनों वायरल हुई थी, उसमें दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री है ही नहीं। पार्टी ने इस दावे के समर्थन में देश की दो बड़ी फॉरेंसिक लैबों की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और पार्टी प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अब इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच की मांग को लेकर ‘आप’ का एक प्रतिनिधिमंडल आज ही DGP पंजाब से मुलाकात करेगा।
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‘1191 फ्रेम की जांच में क्या निकला’
देखा जाए तो यह मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं, बल्कि एक मुख्यमंत्री की छवि और पंजाब की राजनीतिक जमीन का है। पार्टी का कहना है कि विवादित वीडियो को पंजाब से बाहर की दो प्रमुख प्रयोगशालाओं में भेजा गया था। वहां वीडियो के पूरे 1191 फ्रेम का तकनीकी विश्लेषण किया गया।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों रिपोर्टों में एक जैसा निष्कर्ष निकला : वीडियो में दिख रहा शख्स CM भगवंत मान नहीं है।
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‘कद, चेहरा और पोश्चर : तीनों में अंतर’
रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में मौजूद व्यक्ति की लंबाई करीब 5 फुट 10 इंच आंकी गई है। जबकि भगवंत मान की लंबाई 5 फुट 8 इंच है। यानी दोनों के कद में ही साफ-साफ अंतर निकल आया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सिर्फ कद नहीं, बल्कि साइड प्रोफाइल और बैक प्रोफाइल भी मुख्यमंत्री से मेल नहीं खा रही। शरीर की बनावट, कंधों की चौड़ाई और खड़े होने का तरीका (पोश्चर) : तीनों में बड़ा अंतर मिला। चेहरे की पहचान भी आपस में मेल नहीं खाई।
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‘अकाली दल पर सीधा निशाना’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि इस पूरी ‘साजिश’ के पीछे शिरोमणि अकाली दल और सुखबीर सिंह बादल का हाथ है। उनका कहना था कि जब से पंजाब सरकार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब कानून बनाया है, तभी से अकाली दल लगातार मुख्यमंत्री को निशाना बना रहा है।
अगर गौर करें तो यह आरोप सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि एक बड़े नैरेटिव की लड़ाई का हिस्सा है। ‘आप’ इसे ‘मुख्यमंत्री को बदनाम करने की बड़ी साजिश’ बता रही है।
‘पुरानी बेअदबी की घटनाएं भी दोहराईं’
पार्टी नेताओं ने अकाली शासन के दौरान हुई पुरानी घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1986 में नकोदर, और फिर 2015 में बरगाड़ी और बहबल कलां में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाएं हुई थीं। बेगुनाह नौजवानों पर गोलियां चलवाई गई थीं।
समझने वाली बात यह है कि ‘आप’ इन हवालों के जरिए जनता को यह संदेश देना चाहती है कि अकाली दल हमेशा से ऐसी ‘साजिशें’ रचता आया है, जबकि मौजूदा सरकार पंजाबियों के लिए काम कर रही है।
‘आम जनता पर क्या असर’
राहत की बात यह है कि सरकार ने वीडियो आते ही चुप्पी साधने की बजाय फॉरेंसिक रास्ता चुना। लेकिन चिंता का विषय यह भी है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे वीडियो आम लोगों के बीच भरोसे का संकट पैदा कर रहे हैं। सवाल उठता है : अगर लैब रिपोर्ट मान भी ली जाए, तो असली वीडियो किसका था और क्यों उछाला गया?
‘आगे क्या होगा’
अब निगाहें DGP पंजाब के दफ्तर पर टिकी हैं। ‘आप’ ने उच्च स्तरीय जांच की मांग रखी है। दूसरी ओर अकाली दल भी अपनी प्रतिक्रिया देगा। यह दर्शाता है कि आने वाले हफ्तों में पंजाब की सियासत इसी एक वीडियो के इर्द-गिर्द घूमने वाली है।
‘जानें पूरा मामला’
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा था, जिसके बारे में दावा किया जा रहा था कि उसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान दिख रहे हैं। वीडियो को लेकर अकाली दल और कुछ धार्मिक संगठनों ने सरकार पर हमला बोला था। इसी पर सरकार ने वीडियो को दो प्रमुख फॉरेंसिक लैब में भेजा और अब उन रिपोर्टों के आधार पर ‘आप’ ने पूरा पक्ष जनता के सामने रखा है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- ‘आप’ ने दो फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट पेश की : वायरल वीडियो में दिख रहा शख्स CM भगवंत मान नहीं।
- वीडियो के 1191 फ्रेम का तकनीकी विश्लेषण किया गया।
- कद, चेहरे, साइड व बैक प्रोफाइल और पोश्चर : चार जगह बड़ा अंतर मिला।
- पार्टी ने अकाली दल और सुखबीर बादल पर साजिश रचने का आरोप लगाया।
- आज ‘आप’ का प्रतिनिधिमंडल DGP पंजाब से मिलकर उच्च स्तरीय जांच की मांग रखेगा।













