Bhagwant Mann Video Controversy: भगवंत सिंह मान ने उस विवादित वीडियो में खुद के होने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके बाद अकाल तख्त साहिब की तरफ से उनके खिलाफ हुक्मनामा जारी हुआ था। एक दिन बाद सामने आए अपने वीडियो बयान में पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि वीडियो वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और उन्हें बदनाम करने के लिए झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है।
🔍 यह भी पढ़ें- CM Bhagwant Mann Fatehgarh Sahib: फतेहगढ़ साहिब में लोक मिलनी कार्यक्रम आज
मामला यहीं नहीं रुका। जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने इससे पहले दावा किया था कि विवादित वीडियो की दो फॉरेंसिक लैब से जांच कराई गई और वीडियो सही पाया गया। इसी आधार पर सिख संगत को मुख्यमंत्री मान से किसी भी तरह का साझा नाता न रखने का हुक्मनामा जारी किया गया था। समझने वाली बात है: अब यह विवाद सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक और सियासी बहस के बीच आ खड़ा हुआ है।
| मुद्दा | एक पक्ष का दावा | भगवंत मान का जवाब |
|---|---|---|
| विवादित वीडियो | दो फॉरेंसिक जांच में सही बताया गया | वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मैं नहीं हूं |
| हुक्मनामा | सिख संगत को दूरी रखने को कहा गया | मैं पहले ही अकाल तख्त सचिवालय में अपना पक्ष रख चुका हूं |
| पहचान का सवाल | वीडियो को आधार बनाया गया | कद-काठी और शरीर मेरी तरह नहीं है |
मान ने अपने बचाव में क्या कहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले ही अकाल तख्त सचिवालय में पेश होकर साफ कर चुके हैं कि वीडियो वाला शख्स वह नहीं हैं। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की कद-काठी और शारीरिक बनावट उनसे मेल नहीं खाती।
अगर गौर करें, तो मान ने अपनी बात सिर्फ सफाई तक नहीं रखी। उन्होंने यह भी कहा कि अकाल तख्त के मौजूदा पदाधिकारी राजनीतिक तौर पर नियुक्त लोग हैं और अपने सियासी आकाओं को खुश करने के लिए उन पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। यही वह बिंदु है, जहां से विवाद और तेज हो गया।
🔍 यह भी पढ़ें- Bhagwant Mann का जालंधर में बड़ा ऐलान, किसानों-महिलाओं को राहत
विरोधियों पर बिना नाम लिए निशाना
इसी बीच मान ने बिना किसी का नाम लिए विरोधियों पर भी सीधा हमला बोला। इशारा साफ तौर पर सुखबीर सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल की तरफ माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पंजाब की खेती, पानी और नौजवानी को बचाने के लिए काम कर रही है और इसी वजह से विरोधी बौखलाए हुए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मान ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सोध एक्ट’ का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि पहले सख्त बेअदबी विरोधी कानून की मांग की गई, लेकिन जब कानून बन गया तो अब उसी पर यह कहकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि सलाह-मशविरा नहीं हुआ। इससे साफ होता है कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले को सियासी दबाव और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल से जोड़कर देख रहे हैं।
उन्होंने टकराव से भी दूरी रखी
मान ने कहा कि वह अकाल तख्त साहिब को सर्वोच्च मानते हैं और उसके आगे सिर झुकाते हैं। इसी वजह से वह संस्था से सीधा टकराव नहीं चाहते। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरा मामला गुरु नानक नाम लेवा संगत की कचहरी में छोड़ते हैं।
देखा जाए तो यह बयान दो संदेश देता है। पहला: वह वीडियो को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। दूसरा: वह संस्था के खिलाफ सीधे टकराव से बचना चाह रहे हैं। और बस यहीं से शुरू होती है असली राजनीतिक चुनौती।
🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Stray Dog Removal पर SC सख्त, Bhagwant Mann के बयान वाली याचिका खारिज
अब मामला किस मोड़ पर है
यह विवाद फिलहाल वीडियो की सच्चाई बनाम मुख्यमंत्री की सफाई के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ फॉरेंसिक जांच का हवाला है, दूसरी ओर मुख्यमंत्री का साफ इनकार। सवाल उठता है: आने वाले दिनों में संगत किस पक्ष की बात को ज्यादा भरोसेमंद मानेगी? यही इस पूरे प्रकरण का सबसे अहम बिंदु है।
मुख्य बातें (Key Points)
- भगवंत मान ने विवादित वीडियो में खुद के होने से इनकार किया।
- हुक्मनामा जारी होने से पहले वीडियो की दो फॉरेंसिक जांच का दावा किया गया।
- मान ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए झूठा नैरेटिव गढ़ा जा रहा है।
- मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त को सर्वोच्च मानते हुए सीधे टकराव से दूरी बनाई।













