Behbal Kalan Firing Sukhbir Badal SIT : शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के लिए कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। यह स्थिति बहबल कलां पुलिस फायरिंग मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार गियानी रघबीर सिंह द्वारा दर्ज कराए गए एक महत्वपूर्ण बयान के बाद बनी है। देखा जाए तो यह 2015 के बेअदबी कांड के बाद हुई पुलिस फायरिंग का एक अहम मोड़ हो सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, बयान दर्ज करने के दौरान बादल के गुनाह कबूलने (confession) और धार्मिक पेशियों से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग तथा दस्तावेजों को प्रमुखता से सामने लाया गया। दिलचस्प बात यह है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी अपने X (पूर्व में Twitter) हैंडल पर इस संबंध में सोशल मीडिया पोस्ट साझा की है।
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क्या कहा गियानी रघबीर सिंह ने
पूर्व जत्थेदार ने कथित तौर पर SIT के सामने बयान दिया कि शिरोमणि अकाली दल के शासनकाल के दौरान एक साजिश के तहत निहत्थे और बेकसूर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया था। समझने वाली बात यह है कि धार्मिक मामलों में सर्वोच्च सिख सत्ता के पूर्व प्रमुख का ऐसा बयान बेहद गंभीर माना जाएगा।
AAP के प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने भी इस घटना और सुखबीर सिंह बादल द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के सामने किए गए गुनाहों के कबूलनामे का हवाला दिया है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि अकाल तख्त के सामने किया गया कोई भी कबूलनामा सिख समुदाय में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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बहबल कलां फायरिंग: एक दर्दनाक इतिहास
यह घटना अक्टूबर 2015 में फरीदकोट, पंजाब में बेअदबी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान घटी थी, जब सूबे में अकाली-भाजपा गठजोड़ की सरकार सत्ता में थी। इस दर्दनाक घटना में दो सिख प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।
अगर गौर करें तो 2015 में पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की कई घटनाएं हुई थीं। बरगाड़ी, फरीदकोट और अन्य स्थानों पर हुई इन घटनाओं ने पूरे सिख समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया था। जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने गोलियां चलाईं, तो बहबल कलां और कोटकपूरा में लोगों की मौत हो गई।
राजनीतिक पतन की शुरुआत
इस मामले को कई विशेषज्ञ अकाली दल के राजनीतिक पतन की शुरुआत मानते हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में अकाली दल की करारी हार का एक बड़ा कारण यही बेअदबी कांड और पुलिस फायरिंग माना जाता है।
तब से लेकर अब तक सुखबीर बादल को इस मामले में न्याय की मांग कर रहे परिवारों और सिख संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें धार्मिक सजा के रूप में अकाल तख्त के सामने ‘तनखाह’ (धार्मिक दंड) भी भुगतनी पड़ी थी।
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SIT की जांच और आगे क्या हो सकता है
वर्तमान AAP सरकार ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। SIT लगातार गवाहों के बयान दर्ज कर रही है और सबूत इकट्ठा कर रही है।
अगर SIT को पर्याप्त सबूत मिलते हैं कि पुलिस फायरिंग के आदेश उच्च स्तर से दिए गए थे, तो उस समय के गृह मंत्री और उप मुख्यमंत्री रहे सुखबीर बादल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन पर आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
AAP का राजनीतिक हथियार
AAP इस मामले को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि यह न्याय का मामला है, न कि राजनीति का। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार अकाली दल को कमजोर करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है।
बलतेज पन्नू और अन्य AAP नेता लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी पार्टी सक्रिय रूप से इस मामले को हाइलाइट कर रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- गियानी रघबीर सिंह ने SIT के सामने महत्वपूर्ण बयान दर्ज कराया
- सुखबीर बादल के कबूलनामे और वीडियो रिकॉर्डिंग पेश की गई
- बहबल कलां फायरिंग अक्टूबर 2015 में हुई थी, 2 की मौत हुई
- अकाली-भाजपा सरकार के समय की घटना
- AAP इस मामले को राजनीतिक रूप से उछाल रही है













