Ethanol Blended Petrol Excise Duty : केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी में छूट का विस्तार किया है। अब 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी की दर शून्य होगी। देखा जाए तो यह कदम सरकार के 2047 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दिलचस्प बात यह है कि यह छूट केवल उन ईंधन मिश्रणों पर लागू होगी जो Bureau of Indian Standards (BIS) के निर्धारित मानक IS 19850 के अनुरूप होंगे। यह निर्णय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन भारत के गजट के ताजा अंक में जारी किए गए आधिकारिक नोटिफिकेशन के माध्यम से आया है।
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क्या है इथेनॉल ब्लेंडिंग: समझें आसान भाषा में
इथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है जो गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। जब इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है, तो यह पेट्रोल पर निर्भरता कम करता है और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचाता है।
समझने वाली बात यह है कि भारत अपने पेट्रोल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इथेनॉल घरेलू स्तर पर बनाया जा सकता है, इसलिए इससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
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किन ब्लेंड्स पर मिलेगी शून्य एक्साइज ड्यूटी
गजट के अनुसार, शून्य ड्यूटी दर के लिए योग्य होने के लिए प्रत्येक मिश्रण की कानूनी परिभाषा एक सटीक संरचना के नियम का पालन करती है:
22% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: इस मिश्रण में मात्रा के हिसाब से 78% मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) और 22% इथेनॉल होगा, जिस पर उचित केंद्रीय टैक्स, राज्य टैक्स या इंटीग्रेटेड टैक्स का भुगतान किया गया हो और यह BIS मानक IS 19850 के अनुरूप हो।
25% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: 75% पेट्रोल + 25% इथेनॉल
27% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: 73% पेट्रोल + 27% इथेनॉल
30% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल: 70% पेट्रोल + 30% इथेनॉल
यहां ध्यान देने वाली बात है कि इथेनॉल पर पहले से ही उचित GST का भुगतान किया जाना चाहिए। यह छूट केवल अंतिम मिश्रण पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी से है।
BIS मानक IS 19850: क्यों जरूरी है
नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि यह छूट केवल उन मिश्रणों पर लागू होगी जो Bureau of Indian Standards के निर्धारित मानक IS 19850 का पालन करते हों।
अगर गौर करें तो यह मानक यह सुनिश्चित करता है कि ईंधन की गुणवत्ता बनी रहे और वाहनों के इंजन को नुकसान न हो। गलत अनुपात या निम्न गुणवत्ता वाला इथेनॉल इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है।
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‘उचित ड्यूटी’ का मतलब क्या है
गजट में व्याख्या वाले हिस्से में बताया गया है कि ‘एक्साइज की उचित ड्यूटी’ का मतलब है:
- केंद्रीय एक्साइज एक्ट, 1944 की चौथी अनुसूची के तहत लागू एक्साइज ड्यूटी
- फाइनेंस एक्ट, 2018 की धारा 112 के तहत लागू अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी
- फाइनेंस एक्ट, 2002 की धारा 147 के तहत लागू विशेष अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी
- फाइनेंस एक्ट, 2021 की धारा 125 के तहत लगाया जाने वाला कृषि अवसंरचना और विकास उपकर (Agriculture Infrastructure and Development Cess)
समझने वाली बात यह है कि पेट्रोल पर कई तरह के टैक्स लगते हैं। यह छूट सभी केंद्रीय टैक्सों से है, लेकिन राज्य के VAT से नहीं।
किसानों और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर प्रभाव
यह निर्णय किसानों के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि इथेनॉल गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि अपशिष्ट का सदुपयोग होगा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए भी यह सकारात्मक है। अगर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सस्ता हो जाता है, तो उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मांग बढ़ेगी।
दिलचस्प बात यह है कि कई कार निर्माता कंपनियां पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां भारत में लॉन्च करने की योजना बना रही हैं।
2047 तक का लक्ष्य: ऊर्जा आत्मनिर्भरता
भारत सरकार ने 2025-26 तक 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा है। अब यह छूट 30% तक के ब्लेंड को कवर करती है, जिससे साफ है कि सरकार आगे भी इस दिशा में तेजी से काम करना चाहती है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ब्राजील जैसे देशों में 27% तक इथेनॉल ब्लेंडिंग सामान्य है। भारत भी अब उसी रास्ते पर चल रहा है।
अगर गौर करें तो यह न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि तेल आयात पर निर्भरता कम होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी शून्य
- BIS मानक IS 19850 के अनुरूप ईंधन ही योग्य होंगे
- किसानों की आय बढ़ाने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद
- वित्त मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से लागू
- 2047 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में कदम
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