Arvind Kejriwal Delhi High Court: भरी अदालत में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच बहस हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि केजरीवाल ने जज से सीधे सवाल कर दिया, “आप RSS से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होती हैं। क्या आप मेरे साथ निष्पक्ष रह पाएंगी?”
यह असाधारण घटना 13 अप्रैल 2025 को सामने आई, जब Delhi Liquor Policy Case में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई चल रही थी। देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनेता ने अदालत में इस तरह का सवाल उठाया हो, लेकिन इसकी तीव्रता और सीधापन चौंकाने वाला है।

क्या है पूरा मामला?
शराब घोटाला मामले में केजरीवाल को ट्रायल कोर्ट से क्लीन चिट मिल चुकी है। लेकिन इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की single bench में इस मामले की सुनवाई चल रही थी।
अपना पक्ष रखने के लिए खुद केजरीवाल वहां खड़े थे। और तभी उन्होंने वह सवाल पूछा, जिससे पूरी अदालत में सनसनी फैल गई।
कोर्ट में क्या हुआ? शब्दशः बहस
Arvind Kejriwal Delhi High Court में अपनी दलील रखते हुए बोले:
“यह BJP और RSS का एक वैचारिक संगठन है। संगठन के कार्यक्रम में महोदया चार बार शामिल हुईं—26 दिसंबर 2022, 17 मार्च 2023, 30 अगस्त 2024 और 8 अगस्त 2025 को। महोदया किसी विशेष विचारधारा वाले संगठन के कार्यक्रमों में शामिल हो रही हैं। इसीलिए मेरे मन में पक्षपात को लेकर सवाल पैदा होता है।”
इस पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने पूछा:
“आप यह कहना चाहते हैं कि मैं उनकी विचारधारा को follow करती हूं?”
केजरीवाल ने जवाब दिया:
“नहीं, मैं यह नहीं कह रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि हो सकता है कि आपका उनकी तरफ झुकाव हो, क्योंकि आप उनके प्रोग्राम में चार बार शामिल हुई हैं।”
जज ने कहा:
“आपने जो बहस की है, वही लिखवाऊंगी। आपकी क्या दलील है?”
केजरीवाल ने कहा:
“मेरी दलील यह है कि आपके चार बार जाने से मेरे मन में सवाल उठता है। जिस कार्यक्रम में आप शामिल हुईं, उसकी विचारधारा और मेरी विचारधारा एकदम अलग है। ऐसी स्थिति में क्या मुझे न्याय मिलेगा?”
इस पर जज ने सवाल किया:
“मेरा आपसे सिर्फ एक सवाल है। क्या उस कार्यक्रम में मैंने कोई political बयान दिया था? और क्या मैंने किसी विचारधारा वाला बयान दिया था?”
अमित शाह का नाम भी आया
Arvind Kejriwal ने इस केस को political बताया और बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह का नाम भी लिया। केजरीवाल ने कहा:
“फैसला आने से पहले ही अमित शाह कह रहे थे कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुझे Supreme Court जाना पड़ेगा।”
इस पर जज ने साफ कहा:
“गृह मंत्री बाहर क्या कहते हैं, उसका कोर्ट से कोई संबंध नहीं है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केजरीवाल ने जज की निष्पक्षता पर सीधे सवाल उठाया, जो एक बेहद दुर्लभ और साहसिक कदम है।
कौन हैं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा?
अगर गौर करें, तो जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की प्रोफाइल बेहद प्रभावशाली है। दिल्ली हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार:
- दिल्ली यूनिवर्सिटी से English Literature में BA किया
- 1991 में LLB पूरी की
- 2004 में LLM किया
- 2025 में PhD पूरी की
- सिर्फ 24 साल की उम्र में Magistrate बनीं
- 35 साल की उम्र में Session Judge बन गईं
- 28 मार्च 2022 को Delhi High Court का permanent judge बनाया गया
इसके अलावा, जस्टिस स्वर्णकांता ने कुछ किताबें भी लिखी हैं, जैसे:
- “Don’t Break After Breakup”
- “Beed Bagwaan”
- “Tumhari Sakhi”
दिलचस्प बात यह है कि वे न केवल एक न्यायाधीश हैं, बल्कि एक लेखिका भी हैं।
क्या केजरीवाल की दलील सही है?
Arvind Kejriwal की दलील है कि यदि कोई न्यायाधीश किसी विशेष विचारधारा वाले संगठन के कार्यक्रम में बार-बार शामिल होता है, तो यह “reasonable apprehension of bias” यानी पक्षपात की उचित आशंका पैदा करता है।
समझने वाली बात यह है कि न्याय केवल निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। अगर पीड़ित पक्ष को लगता है कि न्यायाधीश पक्षपाती हो सकता है, तो यह न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
हालांकि, जज ने यह भी साफ किया कि उन्होंने किसी भी कार्यक्रम में कोई political या ideological बयान नहीं दिया। इससे साफ होता है कि उनकी उपस्थिति सामाजिक या औपचारिक थी, न कि राजनीतिक।
क्या होगा अब?
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। यानी अब कोर्ट अपना समय लेकर इस मामले पर निर्णय देगी।
यदि कोर्ट केजरीवाल की आशंका को स्वीकार करता है, तो जस्टिस स्वर्णकांता इस केस से खुद को अलग कर सकती हैं। लेकिन अगर कोर्ट को यह आशंका निराधार लगती है, तो केस वहीं चलता रहेगा।
चिंता का विषय यह है कि यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक भी हो चुका है। Delhi Liquor Policy Case पहले से ही AAP और BJP के बीच की लड़ाई का हिस्सा बन चुका है।
न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल?
Arvind Kejriwal Delhi High Court में उठाए गए सवाल ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। क्या न्यायाधीशों को किसी विशेष विचारधारा वाले संगठनों के कार्यक्रमों में नहीं जाना चाहिए? या फिर यह उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता है?
राहत की बात यह है कि भारतीय न्यायपालिका में ऐसे तंत्र मौजूद हैं जिनसे पक्षपात की आशंका होने पर न्यायाधीश खुद को केस से अलग कर सकते हैं।
लेकिन सवाल उठता है कि क्या हर बार ऐसी आशंका जायज होती है? या फिर यह राजनीतिक दबाव बनाने का तरीका है?
राजनीतिक प्रतिक्रिया
हालांकि अभी तक इस मामले पर BJP या AAP की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों ने अपनी-अपनी राय रखी है।
AAP समर्थकों का कहना है कि केजरीवाल ने सही सवाल उठाया है। वहीं, BJP समर्थकों का मानना है कि यह सिर्फ केस से बचने की कोशिश है।
उम्मीद की किरण यह है कि कोर्ट इस मामले पर निष्पक्ष और पारदर्शी फैसला देगी, जो न्यायिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- 13 अप्रैल 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल और जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बीच बहस
- केजरीवाल ने जज पर आरोप लगाया कि वे RSS के कार्यक्रमों में 4 बार शामिल हुईं
- जज ने कहा कि उन्होंने कोई political बयान नहीं दिया
- Amit Shah का नाम भी बहस में आया
- जज ने फैसला सुरक्षित रख लिया
- यह मामला Delhi Liquor Policy Case से जुड़ा है
- जस्टिस स्वर्णकांता 28 March 2022 को Delhi HC की permanent judge बनीं













