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The News Air - Breaking News - Manipur Violence 2023: मैतेई-कुकी संघर्ष में 60+ मौतें, पूर्वोत्तर में तनाव

Manipur Violence 2023: मैतेई-कुकी संघर्ष में 60+ मौतें, पूर्वोत्तर में तनाव

ST Status विवाद से शुरू हुई हिंसा अब जातीय दंगों में बदली, पुलिस भी दो धड़ों में बंटी, हथियार लूटे गए

The News Air Team by The News Air Team
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, सियासत
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Manipur Violence 2023
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Manipur Violence 2023: पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में जो कुछ 3 मई 2023 से शुरू हुआ, वह अब एक भयावह जातीय संघर्ष का रूप ले चुका है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई यह हिंसा सिर्फ दंगा नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी बन गई है जिसमें पुलिस, आर्मी और आम नागरिक सभी दो खेमों में बंट गए हैं। देखा जाए तो पहले 48 घंटे में ही 60 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और हजारों लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए।

Manipur Violence की शुरुआत चुराचंदपुर जिले में हुई, जब All Tribal Student Union of Manipur ने एक Tribal Solidarity March निकाली। इस मार्च में 80,000 से भी ज्यादा लोग शामिल हुए थे। उनकी मांग साफ थी—मैतेई समुदाय को Scheduled Tribe (ST) का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए।

कैसे भड़की आग: ST Status का विवाद

असल में, मामला कुछ महीने पहले का है। मणिपुर हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था जिसमें राज्य सरकार से कहा गया कि वह मैतेई समुदाय को ST status देने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजे। यहीं से शुरू हुई असली कहानी।

कुकी और अन्य आदिवासी समूहों को यह बात नागवार गुजरी। उनका मानना था कि मैतेई समुदाय, जो पहले से ही राज्य की आबादी का बड़ा हिस्सा है और मुख्यधारा में है, उसे ST status देने से आदिवासियों के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे।

दूसरी ओर, मैतेई समुदाय ने भी रैली निकाली और कहा कि उन्हें यह दर्जा मिलना ही चाहिए। और बस यहीं से शुरू हुई वह हिंसा जो आज तक थमी नहीं है।

3 मई 2023: जब जला दिया गया Anglo-Kuki War Memorial Gate

शाम होते-होते स्थिति बिगड़ गई। चुराचंदपुर में स्थित Anglo-Kuki War Memorial Gate को जला दिया गया। यह स्मारक कुकी समुदाय के लिए बेहद पवित्र था। इससे दोनों समुदायों के बीच हिंसा भड़क उठी।

जिन इलाकों में कुकी कम थे और मैतेई ज्यादा थे, वहां कुकीज़ को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, जहां मैतेई अल्पसंख्यक थे और कुकी बहुसंख्यक, वहां मैतेई समुदाय पर हमले हुए।

अगर गौर करें, तो यह आम दंगा नहीं था। यहां पत्थर-डंडे नहीं चल रहे थे, बल्कि भारी हथियार इस्तेमाल हो रहे थे।

खतरनाक मोड़: जब पुलिस भी बंट गई

Manipur Violence 2023 में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि राज्य की पुलिस भी दो हिस्सों में विभाजित हो गई। कुकी पुलिस ने कुकी बहुल इलाकों के पुलिस स्टेशनों में शरण ली, और मैतेई पुलिस मैतेई बहुल इलाकों में चली गई।

इसका मतलब साफ है—कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। दोनों समुदायों के पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे कि वे अपने-अपने समुदायों का साथ दे रहे थे। पुलिस देर से घटनास्थल पर पहुंचती और यह देखती कि पीड़ित किस समुदाय का है, फिर रिपोर्ट करती।

समझने वाली बात यह है कि जब कानून की रक्षक ही दो खेमों में बंट जाए, तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे हो सकती है?

4000+ हथियार लूटे गए, या दिए गए?

3 मई 2023 को करीब 1600 हथियार पुलिस स्टेशनों से लूट लिए गए। और 27-28 मई को 2500 से ज्यादा हथियार गायब हो गए।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कई अधिकारियों ने यह भी कहा कि हथियार लूटे नहीं गए, बल्कि पुलिस ने खुद ही अपने समुदाय के लोगों को दे दिए। हथियार रजिस्टर फाड़ दिए गए ताकि किसी की ट्रेसिंग न हो सके।

कुछ लोग तो पुलिस के पास अपना Aadhaar Card जमा करके हथियार मांग रहे थे, यह कहते हुए कि “जब लड़ाई खत्म हो जाएगी, हम आपको वापस कर देंगे।”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मणिपुर में विभिन्न समुदायों के अपने insurgent groups भी हैं। इनकी अपनी सशस्त्र सेनाएं हैं। हालांकि इन्होंने सरकार से peace agreement किए हुए हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में ये समझौते तोड़कर दोबारा हथियार उठा लेते हैं।

ड्रग्स के अवैध व्यापार के जरिए इन्हें एडवांस्ड हथियारों तक पहुंच भी मिलती है।

फेक इमेज ने हिंसा को दिया नया मोड़

Manipur Violence में सबसे ज्यादा आग तब फैली जब एक लड़की की तस्वीर वायरल हुई, जिसे मारकर polybag में लपेटकर रखा गया था। इस भयावह तस्वीर को देखकर दोनों समुदायों में नफरत की आग और भड़क उठी। एक-दूसरे की महिलाओं को टारगेट किया जाने लगा।

लेकिन बाद में पता चला कि वह तस्वीर दिल्ली की थी, और 2022 की घटना से जुड़ी थी। पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। Churches, व्यापारिक प्रतिष्ठान, घर—सब कुछ निशाने पर आ गया। लोग मणिपुर छोड़-छोड़कर भागने लगे।

4 मई 2023: थौबल की वह भयानक घटना

4 मई 2023 को थौबल की एक बस्ती में दंगाइयों ने घुसकर लूटपाट और मारपीट शुरू कर दी। बगल में थौबल पुलिस स्टेशन था, लेकिन वह कुछ नहीं कर पाया।

भीड़ के हमले के बीच, पांच लोग बस्ती से निकलकर भागे—तीन महिलाएं और दो पुरुष। इनमें से एक महिला एक रिटायर्ड सूबेदार की पत्नी थी। ये पांच लोग जंगल की तरफ भागे। कहा जाता है कि उन्हें रास्ते में पुलिस दिखी और वे मदद के लिए पुलिस के पास गए।

लेकिन चिंता का विषय यह है कि दंगाइयों की भीड़ ने पुलिस से उन्हें छुड़ा लिया। उन पांच में से एक महिला को मारपीट कर छोड़ दिया गया। लेकिन बाकी दो महिलाओं के साथ जो हुआ, वह इंसानियत की सारी हदें पार कर गया।

उन दोनों महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया और उन्हें नग्न अवस्था में parade कराया गया। इस घटना का वीडियो भी बना था। भाई और पिता, जो उनके साथ थे, उन्हें मार डाला गया।

79 दिन बाद वायरल हुआ वीडियो, तब हुई कार्रवाई

यह घटना 4 मई 2023 को हुई थी। 14 दिन बाद 18 मई को पीड़ित महिला ने थौबल पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन कुछ नहीं हुआ।

इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह भी मणिपुर आए, लेकिन उन्हें भी इस घटना की जानकारी नहीं मिली।

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79 दिन बाद, जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, तब जाकर कार्रवाई हुई और दोषियों की गिरफ्तारी हुई।

राहत की बात यह नहीं है, बल्कि हैरान करने वाली बात यह है कि उसी दिन और भी महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन उनका वीडियो वायरल नहीं हुआ, इसलिए उन्हें इंसाफ नहीं मिल पाया।

1700+ Zero FIR, पर Transfer नहीं

सिर्फ चुराचंदपुर जिले में ही 1700 से ज्यादा Zero FIR दर्ज हुईं। Zero FIR का मतलब है कि आप किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा सकते हैं, जो बाद में संबंधित थाने में transfer हो जाती है।

लेकिन मणिपुर में ये Zero FIR तो दर्ज हो रहीं थीं, पर transfer नहीं हो रहीं थीं। इससे साफ होता है कि पुलिस तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था।

Supreme Court का फैसला: High Court की गलती

जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, तो कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मणिपुर हाई कोर्ट के पास किसी समुदाय को ST status देने की सिफारिश करने का अधिकार ही नहीं था।

Article 342 के अनुसार, यह अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास है। Supreme Court ने State of Maharashtra vs Milind (2000) केस का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट का यह आदेश “factually wrong” था।

लेकिन तब तक मणिपुर में दंगे फैल चुके थे और जान-माल का भारी नुकसान हो चुका था।

पुलिस और आर्मी आपस में भिड़े

मैतेई समुदाय का कहना है कि वे सिर्फ मैतेई पुलिस पर ही भरोसा करते हैं। उन्होंने Assam Rifles और Indian Army पर आरोप लगाया कि वे कुकीज़ का साथ दे रही हैं। इसलिए मैतेई बहुल इलाकों में आर्मी को घुसने ही नहीं दिया गया।

चुराचंदपुर के सुगनू इलाके में जब आर्मी जा रही थी, तो रास्ता खोद दिया गया। आर्मी ने लोकल पुलिस से मदद मांगी। लेकिन मदद करना तो दूर, पुलिस और आर्मी आपस में ही भिड़ गए।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस और आर्मी ने एक-दूसरे पर बंदूकें तान दीं। यह दर्शाता है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी थी।

केंद्र सरकार ने बनाई जांच समिति

4 जून 2023 को केंद्र सरकार ने एक समिति गठित की, जिसके अध्यक्ष Ajay Lamba हैं, जो Gauhati High Court के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं।

इस समिति को 6 महीने के अंदर रिपोर्ट देनी है:

  • हिंसा कैसे शुरू हुई?
  • पीछे के कारण क्या थे?
  • यह कैसे फैली?

इसके अलावा, 6 मामलों को “Conspiracy to Violence” के तहत CBI की जांच के लिए भेजा गया है।

अमित शाह की कोशिश भी नाकाम

अमित शाह 4 दिन तक मणिपुर में रहे। दोनों समुदायों से मिले। उनका कहना था कि अब शांति बहाल होगी। लेकिन शांति नहीं आई।

बल्कि, उम्मीद की किरण धीमी पड़ती गई। अब यह हिंसा आसपास के राज्यों में भी फैलने लगी है।

Mizoram में भी तनाव: मैतेई भाग रहे हैं

मिजोरम में कुकी समुदाय के सशस्त्र समूहों ने मैतेई समुदाय को धमकी दी है कि वे राज्य छोड़कर चले जाएं, वरना अंजाम अच्छा नहीं होगा।

और अब मैतेई लोग मिजोरम छोड़कर भागने लगे हैं। सवाल उठता है कि क्या यह हिंसा पूरे पूर्वोत्तर में फैल जाएगी?

48 घंटे तक मणिपुर सरकार नहीं, दंगाइयों के हाथ में था राज्य

Manipur Violence 2023 के शुरुआती 48 घंटों में पूरा राज्य दंगाइयों के हाथों में था। न सरकार का कोई नियंत्रण था, न पुलिस का। मुख्यमंत्री से जब पूछा गया कि वायरल वीडियो के बारे में क्या कहना है, तो उन्होंने कहा, “ऐसे बहुत सारे केस हुए हैं, इसीलिए तो इंटरनेट बंद किया गया।”

यह जवाब किसी समाधान का संकेत नहीं, बल्कि लाचारी का प्रतीक बन गया।

क्या है आगे का रास्ता?

अगर इस संकट को यह सोचकर छोड़ दिया गया कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, तो यह पूरे नॉर्थ ईस्ट के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है। यह पूर्वोत्तर भारत की जातीय संरचना, पहचान की राजनीति और ऐतिहासिक विवादों से जुड़ा मामला है।

जब तक सभी पक्षों के साथ न्याय नहीं होगा, जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, और जब तक ST status जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ठोस और स्पष्ट नीति नहीं बनेगी—तब तक मणिपुर की आग बुझना मुश्किल है।


मुख्य बातें (Key Points)

  • 3 मई 2023 को मणिपुर में मैतेई-कुकी संघर्ष शुरू हुआ, ST status विवाद के कारण
  • पहले 48 घंटे में 60+ लोगों की मौत, 1700+ Zero FIR दर्ज
  • 4000+ पुलिस हथियार लूटे गए या बांटे गए
  • पुलिस दो धड़ों में बंट गई—कुकी पुलिस और मैतेई पुलिस
  • 4 मई को थौबल में सामूहिक दुष्कर्म, 79 दिन बाद वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई
  • Supreme Court ने कहा High Court को ST recommendation का अधिकार नहीं
  • केंद्र ने जांच समिति बनाई, 6 cases CBI को दिए
  • हिंसा अब Mizoram तक फैल रही

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. मणिपुर में हिंसा क्यों शुरू हुई?

मणिपुर में हिंसा की मुख्य वजह ST status का विवाद है। हाई कोर्ट ने मैतेई समुदाय को ST दर्जा देने की सिफारिश की, जिसका कुकी और अन्य आदिवासी समुदायों ने विरोध किया।

2. Manipur Violence में अब तक कितने लोगों की मौत हुई?

शुरुआती 48 घंटे में ही 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। कुल आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है और अभी भी बढ़ रहा है।

3. क्या मणिपुर में पुलिस ने भी साथ दिया?

हां, मणिपुर में पुलिस दो समुदायों में बंट गई थी। कुकी पुलिस और मैतेई पुलिस अलग-अलग थानों में चली गईं और उन पर अपने समुदाय को समर्थन देने के आरोप लगे।

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