America Iran Tension को लेकर एक अजीब स्थिति बन गई है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस में घोषणा कर दी कि ईरान के साथ जंग खत्म हो गई है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका खाड़ी देशों में $8.6 अरब डॉलर के हथियार भेज रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान ने शांति वार्ता का एक और प्रस्ताव दिया, लेकिन ट्रंप ने उसे भी खारिज कर दिया।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं – क्या वाकई जंग खत्म हो गई है या यह एक नई शुरुआत की तैयारी है?
60 दिन की समय सीमा खत्म, ट्रंप ने कहा जंग खत्म
पॉलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान युद्ध की 60 दिन की कानूनी समय सीमा खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने संसद को बताया कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध खत्म हो गया है। ट्रंप ने कहा, “7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच कोई गोलीबारी नहीं हुई है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई शत्रुता अब खत्म हो चुकी है।”
देखा जाए तो यह कदम ईरान युद्ध को जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत के विवाद को शांत करने की कोशिश माना जा रहा है। दरअसल अमेरिका में 1973 में पारित वॉर पावर्स रेजोल्यूशन के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई की सूचना कांग्रेस को देने के बाद 60 दिनों के अंदर उसे खत्म करना होता है।
जब तक कि कांग्रेस आगे की कार्रवाई को मंजूरी न दे। और मौजूदा हालात में ट्रंप को यह मंजूरी मुश्किल नजर आ रही है।
ईरान ने अमेरिका के 16 सैन्य ठिकानों को तबाह किया
समझने वाली बात यह है कि 40 दिन तक जो जंग चली, उसमें अमेरिका को ही बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिकी मीडिया CNN की जांच में पाया गया कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिका के 16 सैन्य ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। कई ठिकाने अभी भी इस्तेमाल करने लायक नहीं हैं।
जिन अमेरिकी ठिकानों पर हमले हुए उनमें कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक के ठिकाने शामिल थे। ईरानी हमलों के निशाने पर आधुनिक विमान थे। इनमें अमेरिकी E-3 सेंट्री सर्विलेंस विमान भी शामिल था, जिसे खाड़ी में अमेरिका की आंख कहा जाता है।
अगर गौर करें तो हमलों में महत्वपूर्ण संचार उपकरण, रडार सिस्टम भी तबाह हो गए। CNN की रिपोर्ट में ईरानी हमलों की सटीकता की वजह चीनी सेटेलाइट से मिलने वाले खुफिया इनपुट्स को बताया गया है।
ट्रंप का तर्क – परमाणु हथियार रोकना था मकसद
लेकिन इससे यह साफ हो जाता है कि इस जंग में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ गया। ऐसे में अमेरिका के लिए दोबारा जंग शुरू करना भी आसान नहीं दिखाई दे रहा। हालांकि ईरान को लेकर ट्रंप का कहना यह भी है, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं। इसलिए देखना होगा कि आगे क्या होता है।”
ट्रंप ने कहा, “मैं ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा। क्योंकि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। इसी वजह से अमेरिका को ईरान के खिलाफ जंग में उतरना पड़ा। अगर हम ऐसा नहीं करते तो उनके पास परमाणु हथियार होता और इजराइल, मिडिल ईस्ट और यूरोप तबाह हो जाते।”
दिलचस्प बात यह है कि हम ऐसे पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दे सकते।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में नया प्रस्ताव भी ठुकराया
यह बयान ईरान के नए प्रस्ताव पर आया है। आप जानते हैं कि पहले ईरान की तरफ से 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया गया लेकिन उस पर सहमति नहीं बन पाई। जिसके बाद ईरान ने तीन शर्तों का प्रस्ताव भी पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका को भेजा।
लेकिन ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई नरमी बरतने के लिए तैयार नहीं हुए। जिसके बाद अब एक बार फिर ईरान की तरफ से एक नया प्रस्ताव पेश किया गया। लेकिन इस बार भी ईरान की शर्तों को मानने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तैयार नहीं हैं।
खाड़ी देशों में $8.6 अरब के हथियार भेजे जा रहे
बल्कि अमेरिका अब खाड़ी देशों में एक बार फिर हथियार जुटा रहा है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों के लिए $8.6 अरब डॉलर के हथियार सौदों को मंजूरी दे दी है। अमेरिका जिन देशों को हथियार देगा उसमें इजराइल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं।
इस फैसले के तहत कतर को पेट्रियट एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सप्लाई और सपोर्ट सर्विसेज दी जाएंगी। इसके अलावा एडवांस्ड प्रसीजन किल वेपन सिस्टम भी बेचे जाएंगे। यानी तैयारी जंग की चल रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐसे में ईरान भी अब अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट गया है ताकि जंग के हालात में वो अमेरिका का एक बार फिर डटकर मुकाबला कर पाए।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान ने कसी पकड़
इसके लिए उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत की है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नौसेना कमान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नए नियमों की घोषणा की है।
जिसके तहत वो अरब की खाड़ी और रणनीतिक रूप से अहम हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ फैली ईरान की लगभग 2,000 किमी लंबी तटरेखा पर नियंत्रण रखेगी। वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामेनेई ने भी एक लिखित बयान के जरिए आवाम को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि ईरान ने सैन्य टकराव में दुनिया को अपनी खास ताकत दिखाई। अब उसे आर्थिक और सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दुश्मनों को हराना होगा।
पश्चिम एशिया सेंसिटिव जोन बना
मौजूदा हालात में पश्चिम एशिया बहुत ही सेंसिटिव जोन बन गया है। ऐसे में यहां पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि जंग खत्म हो गई, दूसरी तरफ हथियारों की बारिश हो रही है।
अगर गौर करें तो तीसरी तरफ ईरान अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि असली स्थिति क्या है। क्या यह जंग का अंत है या एक नए तूफान से पहले की शांति?
मुख्य बातें (Key Points)
- ट्रंप ने कांग्रेस को बताया ईरान जंग खत्म, 60 दिन की सीमा समाप्त
- CNN रिपोर्ट: ईरान ने अमेरिका के 16 सैन्य ठिकानों को तबाह किया
- खाड़ी देशों को $8.6 अरब के हथियार भेजे जा रहे
- ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पकड़ और मजबूत की













