India Forex Reserve में बड़ी गिरावट आई है और भारत को बड़ा झटका लगा है। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट आई है। रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है और अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है।
महंगाई का भी झटका लगा है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस बड़ी गिरावट से आम आदमी पर कितना असर पड़ने वाला है? मुद्रा भंडार में कितनी गिरावट आई है? यह गिरावट क्यों आई है?
एक हफ्ते में $4.82 अरब की कमी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 अप्रैल तक यह घटकर $698.49 अरब डॉलर रह गया। यानी एक हफ्ते में करीब $4.82 अरब डॉलर की कमी।
अब इसे समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं। 1 हफ्ता पहले यानी 17 अप्रैल को यह भंडार बढ़कर $703.30 अरब डॉलर हुआ था। और उससे पहले फरवरी के आखिर में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर $728.49 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
देखा जाए तो साफ है कि हाल के हफ्तों में इसमें उतार-चढ़ाव चल रहा है। अब सवाल है यह गिरावट आई क्यों?
किन हिस्सों में आई गिरावट
विदेशी मुद्रा भंडार कई हिस्सों से मिलकर बनता है। सबसे बड़ा हिस्सा होता है फॉरेन करेंसी एसेट्स। इसमें करीब $2.84 अरब डॉलर की कमी आई और यह घटकर $554.62 अरब डॉलर रह गया।
इसके अलावा सोने के भंडार में भी गिरावट आई है, करीब $1.90 अरब डॉलर की। इसके बाद यह $620.24 अरब डॉलर रह गया। SDR (स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स) में भी थोड़ी कमी आई है और IMF के साथ भारत की रिजर्व पोजीशन भी हल्की सी घटी है।
अगर गौर करें तो मतलब कुल मिलाकर हर हिस्से में थोड़ी-थोड़ी गिरावट देखने को मिली है। अब बड़ा सवाल, इसका मतलब क्या है?
सुरक्षा कवच का काम करता है फॉरेक्स रिजर्व
जानकारों की मानें तो विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के लिए सुरक्षा कवच जैसा होता है। इससे देश अपनी मुद्रा को स्थिर रखने, आयात का भुगतान करने और बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने में सक्षम रहता है।
हाल की गिरावट का एक बड़ा कारण रिजर्व बैंक की सक्रिय भूमिका भी हो सकती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता है या रुपया दबाव में आता है तो रिजर्व बैंक डॉलर बेचकर बाजार में संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
दिलचस्प बात यह है कि ऐसे में रिजर्व घटता है। लेकिन यह एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे हमेशा नकारात्मक संकेत के तौर पर नहीं देखा जाता।
ग्लोबल फैक्टर्स का भी असर
इसके अलावा ग्लोबल फैक्टर्स भी असर डालते हैं। जैसे डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और निवेशकों का रुख। इन सबका असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
कुल मिलाकर फिलहाल इसे किसी संकट के रूप में देखने की जरूरत नहीं है। लेकिन हां, यह जरूर एक संकेत है कि वैश्विक आर्थिक माहौल आसान नहीं है और भारत भी उससे पूरी तरह अलग नहीं है।
आम आदमी पर क्या असर होगा
समझने वाली बात यह है कि अगर विदेशी मुद्रा भंडार कम होता रहा, तो रुपया और कमजोर हो सकता है। इससे आयात महंगा होगा, खासकर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोना।
जब आयात महंगा होगा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी। रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम प्रभावित होंगे। विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा महंगी हो जाएगी।
RBI की रणनीति अहम
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि RBI अभी भी मजबूत स्थिति में है। $698 अरब डॉलर का रिजर्व अभी भी काफी मजबूत है। यह करीब 10 महीने के आयात को कवर कर सकता है।
इसलिए आने वाले हफ्तों में इन आंकड़ों पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा, क्योंकि यहीं से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है।
मुख्य बातें (Key Points)
- India Forex Reserve घटकर $698.49 अरब, एक हफ्ते में $4.82 अरब की कमी
- फॉरेन करेंसी एसेट्स में $2.84 अरब, सोने में $1.90 अरब की गिरावट
- मिडिल ईस्ट तनाव, डॉलर की मजबूती और RBI की बाजार में दखल मुख्य कारण
- फिलहाल संकट नहीं, लेकिन निगरानी जरूरी













