MGNREGA Replaced VBJY Scheme: देश में ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला किया है! 1 जुलाई से मनरेगा (MGNREGA) की जगह अब ‘विकसित भारत जीरामजी योजना’ (VBJY – Viksit Bharat Jeevika aur Rozgar Mission for Grameen India) को लागू कर दिया गया है। इस नई योजना के तहत रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है और मजदूरी का भुगतान अब 15 दिन के बजाय मात्र 7 दिनों में होगा।
देखा जाए तो यह केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि पूरी योजना में व्यापक सुधार किए गए हैं। जीरामजी योजना में चार मुख्य क्षेत्रों – जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका और जलवायु परिवर्तन – पर धनराशि खर्च की जाएगी।
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रोजगार गारंटी 100 से बढ़कर 125 दिन
मनरेगा में 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, लेकिन विकसित भारत जीरामजी में यह बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यानी ग्रामीण परिवारों को साल में 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा।
अगर गौर करें तो यह बदलाव उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो पूरी तरह से इस योजना पर निर्भर हैं। 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मतलब अधिक आमदनी।
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मजदूरी भुगतान 15 से घटकर 7 दिन में
पहले 15 दिन में मजदूरी का भुगतान होता था लेकिन अब उसकी समय सीमा को कम करते हुए 7 दिन कर दिया गया है। यह मजदूरों के लिए बहुत बड़ी राहत है क्योंकि उन्हें अपने पैसों के लिए कम इंतजार करना पड़ेगा।
समझने वाली बात यह है कि मजदूर वर्ग के लिए समय पर भुगतान बेहद महत्वपूर्ण होता है। देरी से मिलने वाला पैसा अक्सर उनकी मुसीबतें बढ़ा देता था।
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जुर्माना ₹1,000 से बढ़कर ₹10,000
जीरामजी अधिनियम का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति पर ₹10,000 का जुर्माना लगेगा। मनरेगा में यह ₹1,000 था। इसमें ₹9,000 बढ़ा दिए गए हैं। यह कदम अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कड़ा जुर्माना यह सुनिश्चित करेगा कि अधिकारी नियमों का पालन करें और मजदूरों के अधिकारों का हनन न हो।
वर्षा सीजन में 60 दिन काम बंद
जीरामजी में वर्षा के सीजन में खेती-किसानी के समय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए 60 दिन काम बंद रखने का प्रावधान भी किया गया है। जबकि पहले ऐसा कोई प्रावधान नहीं था।
दिलचस्प बात यह है कि यह किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया नियम है। बारिश के समय जब खेती का काम चरम पर होता है, तब मनरेगा काम बंद रहेगा ताकि मजदूर खेतों में काम कर सकें।
कामों की संख्या 260 से बढ़कर 318
मनरेगा में अनुमत कार्यों की संख्या 260 थी लेकिन जीरामजी में उनको बढ़ाकर 318 कर दिया गया है। कामों को चार वर्गों में वर्गीकृत करते हुए स्कूल भवन, प्रयोगशाला सहित जल जीवन मिशन के कार्य भी इसमें सम्मिलित किए गए हैं।
प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़कर 9%
प्रशासनिक मद में खर्च की धनराशि भी 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है। इससे बेहतर प्रबंधन और निगरानी संभव होगी।
डैशबोर्ड और रियल टाइम सूचना
अब नागरिकों को रियल टाइम सूचना प्रदान करने और मैनेजमेंट के लिए डैशबोर्ड की व्यवस्था रहेगी। ग्राम पंचायतों को 2047 तक विकसित पंचायत निर्माण की परिकल्पना की गई है। अकुशल मजदूरों को प्रशिक्षित कर आजीविका से जोड़ते हुए कौशल विकास में वृद्धि का प्रावधान भी किया गया है।
इससे साफ होता है कि योजना को आधुनिक और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। डिजिटल डैशबोर्ड से हर नागरिक देख सकेगा कि कहां क्या काम हो रहा है।
राज्य स्तरीय संचालन समिति का गठन
विकसित भारत जीरामजी के लिए ऑपरेशन, गाइडेंस, कोऑर्डिनेशन और मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति गठित की जाएगी। जबकि पहले राज्य स्तरीय सशक्त समिति गठित थी।
बजट व्यवस्था में बदलाव
राज्य के लिए मानक बजट स्वीकृत किया जाएगा। इससे अधिक राशि व्यय होने पर देनदारी राज्य सरकार की होगी। मनरेगा में मजदूरी और प्रशासनिक मदद की पूरी तथा सामग्री मदद की 75% राशि केंद्र सरकार देती थी।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1 जुलाई से मनरेगा की जगह विकसित भारत जीरामजी योजना लागू
- रोजगार गारंटी 100 से बढ़कर 125 दिन, मजदूरी भुगतान 7 दिन में
- जुर्माना ₹1,000 से बढ़कर ₹10,000, कार्यों की संख्या 260 से 318
- वर्षा सीजन में 60 दिन काम बंद रहेगा
- रियल टाइम डैशबोर्ड और कौशल विकास का प्रावधान













