Kalawa Religious Significance: मंदिरों में पूजा के दौरान हाथ में कलावा बांधना शुभ माना जाता है। इसे कई सारे लोग धागा, कलावा, रक्षासूत्र और मौली भी कहते हैं। पूजा-पाठ की शुरुआत में ही इसे बांधा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इसे बांधने से आपके आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
देखा जाए तो कलावा बांधना हिंदू परंपरा का एक अभिन्न अंग है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अलग-अलग रंग के कलावे का अलग-अलग महत्व होता है? आइए बताते हैं मंदिरों में कौन-कौन से रंग के कलावे बांधे जाते हैं और उनका क्या महत्व है।
🔍 यह भी पढ़ें- Hinduism Definition 2026: Religion या Way of Life? Supreme Court के 9 Judges ने दी अहम राय, जानें पूरा सच
ब्रह्मा-विष्णु-महेश की कृपा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा धारण करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ ही लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। कलावा बांधने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं भी शामिल हैं। कथाओं में भी इसका वर्णन किया जाता है। साथ ही बताया गया है कि इससे जीवन में शुभता और सुरक्षा प्राप्त होती है।
अगर गौर करें तो कलावा केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और आस्था का प्रतीक है। इसमें तीन धागे होते हैं जो त्रिदेवों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
🔍 यह भी पढ़ें- Vikram Samvat 2083: चैत्र नवरात्रि और Hindu New Year शुरू, जानें राजा-मंत्री कौन
लाल रंग का कलावा: शक्ति और ऊर्जा
लाल रंग शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह देवी दुर्गा और हनुमान जी की ऊर्जा को दर्शाता है। कलाई पर लाल कलावा बांधने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार बहुत ज्यादा होता है।
समझने वाली बात यह है कि लाल कलावा सबसे आम है और लगभग सभी मंदिरों में यही बांधा जाता है। यह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
पीला रंग का कलावा: ज्ञान और शांति
पीला रंग सात्विकता, ज्ञान और शांति का प्रतीक है। यह भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को प्रिय होता है। पीला कलावा मुख्य रूप से सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक होता है। इसे अक्सर शुभ कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों में और मंदिरों में बांधा जाता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि विशेष पूजाओं में पीला कलावा बांधने की सलाह दी जाती है, खासकर बृहस्पतिवार को।
🔍 यह भी पढ़ें- Waqf Board Hindu Members बने, देश में पहली बार बड़ा फैसला
काला रंग का कलावा: बुरी नजर से बचाव
काला रंग नजर से बचाता है। इसे विशेष रूप से शनि देव या मां काली से जोड़ा जाता है। काला कलावा धारण करने से व्यक्ति पर बुरी नजर का प्रभाव बिल्कुल नहीं पड़ता। साथ ही आपके कार्यों में कोई रुकावट नहीं आती है।
दिलचस्प बात यह है कि शनिवार को शनि मंदिर में काला कलावा बांधने का विशेष महत्व है।
कलावा बांधने के नियम
अब यह भी जान लेते हैं कि कलावा कैसे और कब बांधना चाहिए:
कहां बांधें: कलावा हमेशा मंदिर में भगवान के सामने या किसी शुभ कार्य के दौरान बांधना चाहिए।
हाथ खाली नहीं: कलावा बांधते समय हाथों को कभी खाली नहीं रखना चाहिए। अक्षत या सिक्का हाथ में जरूर रखना चाहिए।
कौन से हाथ में: अविवाहित कन्याओं को कलावा दाहिने हाथ की कलाई पर बंधवाना चाहिए, जबकि विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ की कलाई पर इसे बांधना चाहिए। पुरुषों को दाहिने हाथ में बांधना चाहिए।
सही मुद्रा: कलावा बांधते समय मुट्ठी बंद रखनी चाहिए और दूसरे हाथ को सिर पर रखना चाहिए।
कब बदलें कलावा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा टूट जाए या गंदा हो जाए तो उसे बदल देना चाहिए। नहाते समय गीला होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर वह फट गया या बहुत गंदा हो गया तो नया बांध लें।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो कलाई पर एक विशेष नस होती है जो सीधे हृदय से जुड़ी होती है। कलावा बांधने से उस पर दबाव पड़ता है जो रक्त संचार को नियंत्रित करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- कलावा बांधने से ब्रह्मा, विष्णु, महेश और त्रिदेवियों की कृपा मिलती है
- लाल कलावा शक्ति और ऊर्जा, पीला ज्ञान और शांति, काला बुरी नजर से बचाव के लिए
- अविवाहित कन्याएं दाएं हाथ में, विवाहित महिलाएं बाएं हाथ में बांधें
- मंदिर में भगवान के सामने बांधना शुभ, हाथ में अक्षत रखें
- टूटा या गंदा हो जाए तो बदल देना चाहिए












