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The News Air - Breaking News - WhatsApp Username Feature पर सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है पूरा मामला

WhatsApp Username Feature पर सरकार का बड़ा फैसला, जानें क्या है पूरा मामला

भारत सरकार ने मेटा को भेजा नोटिस, गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को लेकर मांगे जवाब, यूजरनेम फीचर की लॉन्चिंग पर लगी रोक

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 2 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, टेक्नोलॉजी
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WhatsApp
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WhatsApp Username Feature को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। भारत सरकार ने मेटा को नोटिस जारी कर इस नए फीचर की लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगा दी है। सरकार ने अगले तीन दिनों के भीतर विस्तृत तकनीकी और कानूनी जवाब मांगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह फीचर ग्लोबल लेवल पर पहले ही लॉन्च हो चुका है, लेकिन भारत में इसे लागू करने से पहले सरकार सतर्क हो गई है।

देखा जाए तो यह कोई छोटा-मोटा फैसला नहीं है। WhatsApp के करीब 850 मिलियन यूजर्स अकेले भारत में हैं, यानी दुनिया भर के लगभग 28 से 30 प्रतिशत यूजर्स। ऐसे में किसी भी नए फीचर का असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है। सरकार की चिंता का मुख्य कारण साइबर क्राइम और डिजिटल फ्रॉड में संभावित बढ़ोतरी है।

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क्या है यूजरनेम फीचर और क्यों लाया जा रहा है

अब तक WhatsApp पर किसी से भी बात करने के लिए उसका फोन नंबर जरूरी था। लेकिन नए यूजरनेम फीचर के जरिए अब लोग बिना नंबर शेयर किए भी चैट कर सकेंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे UPI में आप नंबर या UPI ID दोनों से पेमेंट कर सकते हैं।

Meta का तर्क है कि यह प्राइवेसी बढ़ाने वाला फीचर है। अगर गौर करें तो आजकल ऑनलाइन शॉपिंग हो, कस्टमर सपोर्ट हो, किसी अनजान व्यक्ति से फोटो शेयर करनी हो, हर जगह हमें अपना नंबर देना पड़ता है। और एक बार नंबर दे दिया तो स्पैम कॉल्स, एडवर्टाइजिंग, स्कैम और हैरेसमेंट का खतरा बढ़ जाता है।

यूजरनेम फीचर के साथ आपका असली फोन नंबर छिपा रहेगा। खासतौर पर महिलाओं, पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और बिजनेस ओनर्स के लिए यह काफी उपयोगी हो सकता है। Meta का कहना है कि हम प्राइवेसी एनहांस कर रहे हैं, एनोनिमिटी नहीं ला रहे।

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सरकार को क्या चिंता है, समझने वाली बात

लेकिन भारत सरकार की चिंताएं भी वाजिब हैं। देखिए, भारत में साइबर क्राइम का अनुभव काफी कड़वा रहा है। खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाया जाता है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फेक पुलिस ऑफिसर बनकर वीडियो कॉल, सेक्सटॉर्शन, फेक जॉब ऑफर्स – यह सब रोजाना हो रहा है।

अभी क्या होता है? अगर किसी के साथ साइबर फ्रॉड हुआ तो वह पुलिस को फोन नंबर दे देता है। फिर पुलिस टेलीकॉम ऑपरेटर्स (Airtel, Jio) से संपर्क करके SIM रजिस्ट्रेशन, KYC डिटेल्स निकालती है और अपराधी तक पहुंच जाती है।

लेकिन अब सोचिए, अगर कोई सिर्फ यूजरनेम से फ्रॉड करे तो? उसे पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाएगा। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि फ्रॉडस्टर किसी भी नाम का यूजरनेम बना सकता है – जैसे “CBI_Officer”, “Income_Tax_India” या “SBI_Official”। लोग आसानी से धोखा खा सकते हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा अपडेट: YouTube Chat Feature लॉन्च! अब WhatsApp की जरूरत खत्म?

Telegram से तुलना: क्यों WhatsApp पर ज्यादा सख्ती

अब सवाल उठता है कि जब Telegram में यूजरनेम फीचर पहले से है तो WhatsApp पर क्यों रोक? दरअसल, यहां स्केल का मामला है। Telegram का यूजर बेस काफी छोटा है और कुछ खास कम्युनिटीज़ द्वारा ही इस्तेमाल होता है – जैसे स्टूडेंट्स, टेक एंथूजियास्ट्स आदि।

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लेकिन WhatsApp तो हर किसी के फोन में है – आपकी मां से लेकर रिक्शा चालक तक। 850 मिलियन यूजर्स मतलब लगभग हर भारतीय स्मार्टफोन यूजर। तो वल्नरेबिलिटी भी उतनी ही ज्यादा है। इसीलिए सरकार पहले सतर्क होना चाह रही है।

सरकार ने Meta से क्या सवाल पूछे हैं

सरकार ने मेटा से कई अहम सवाल किए हैं, जिनके जवाब अगले तीन दिनों में चाहिए:

  • यूजरनेम को कैसे क्रिएट किया जाएगा? क्या कोई भी किसी भी प्रकार का यूजरनेम चुन सकता है?
  • वेरिफाइड यूजरनेम्स का सिस्टम होगा या नहीं? क्या ऑफिशियल ऑर्गेनाइजेशन्स को ब्लू टिक मिलेगा?
  • फेक या डुप्लीकेट यूजरनेम्स को कैसे ब्लॉक किया जाएगा?
  • AI से impersonation को डिटेक्ट करने का क्या तरीका है?
  • फेक अकाउंट्स को रिपोर्ट और रिज़ॉल्व करने का सिस्टम क्या होगा?
  • साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन पर इसका क्या असर पड़ेगा?
  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन में कोई बदलाव तो नहीं?
  • क्या कोई एडिशनल यूजर डेटा कलेक्ट किया जाएगा?

यह सवाल सिर्फ औपचारिकता नहीं हैं। यह असली चिंताओं को दर्शाते हैं।

पहलूअभी का सिस्टमनए यूजरनेम फीचर के साथ
पहचान का आधारफोन नंबरयूजरनेम या फोन नंबर
प्राइवेसीनंबर शेयर करना जरूरीनंबर छिपा रह सकता है
फ्रॉड ट्रैकिंगनंबर से आसानयूजरनेम से मुश्किल
इंपर्सोनेशन रिस्ककमज्यादा
Meta का जवाब: क्या कहा WhatsApp ने

कल रात Meta की तरफ से भी जवाब आया। कंपनी ने साफ किया कि अभी भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं हुआ है। कोई भी यूजर फिलहाल यूजरनेम क्रिएट नहीं कर सकता। यह अभी भी अंडर डेवलपमेंट है।

साथ ही WhatsApp ने कुछ सेफगार्ड्स की भी जानकारी दी:

हाई-प्रोफाइल नेम्स रिजर्व रहेंगे: प्राइम मिनिस्टर, प्रेसिडेंट, सेलिब्रिटीज के नाम पब्लिक इस्तेमाल नहीं कर सकेगी।

फोन नंबर अभी भी जरूरी: यूजरनेम देने के बावजूद अकाउंट के पीछे फोन नंबर जरूर होगा। अगर कोई फ्रॉड होता है तो इन्वेस्टिगेशन में सरकार यूजरनेम के पीछे का नंबर मांग सकती है।

अननोन कांटेक्ट्स की वॉर्निंग: जैसे अभी नए नंबर से मैसेज आने पर “This person is not in your contact list” दिखता है, वैसे ही नए यूजरनेम से मैसेज पर भी वॉर्निंग मिलेगी। यूजर को ब्लॉक या कंटिन्यू का ऑप्शन रहेगा।

क्या प्राइवेसी और सिक्योरिटी दोनों साथ हो सकते हैं

देखा जाए तो यह सवाल बहुत गहरा है। एक तरफ WhatsApp कह रहा है हम प्राइवेसी दे रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार कह रही है सिक्योरिटी का क्या?

दोनों चीजें एक साथ संभव हैं, लेकिन इसके लिए सख्त उपाय चाहिए:

वेरिफाइड बैजेस: सरकारी एजेंसियों, बैंकों को ग्रीन या ब्लू टिक मिले ताकि लोग आसानी से पहचान सकें।

ऑफिशियल यूजरनेम्स रिजर्व हों: CBI, Income Tax जैसे नाम पहले से ब्लॉक कर दिए जाएं।

AI-based Detection: विजुअली मिलते-जुलते नामों (जैसे CBI_India vs CBI*India) को AI तुरंत पकड़े।

रैपिड कंप्लेंट रिज़ॉल्यूशन: फेक अकाउंट की शिकायत पर तुरंत एक्शन हो।

सरकार के साथ फास्ट कोऑपरेशन: जरूरत पड़ने पर यूजरनेम के पीछे का डेटा तुरंत शेयर किया जाए।

भारत क्यों ले रहा है सख्त पोजीशन

यहां समझने वाली बात यह है कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल इकोनॉमी में से एक है। UPI, Aadhar, DigiLocker – हमने डिजिटल इंडिया को साकार किया है। लेकिन साथ ही हम साइबर क्राइम के भी सबसे बड़े शिकार हैं।

WhatsApp पर बैंकिंग अलर्ट्स आते हैं, सरकारी नोटिफिकेशन आते हैं, छोटे व्यापारी इसी से बिजनेस चलाते हैं। यह सिर्फ एक चैटिंग ऐप नहीं, एक राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर बन चुका है। इसलिए सरकार हर कदम सोच-समझकर उठा रही है।

पिछले दिनों NEET एग्जाम में पेपर लीक हुआ, तो सरकार ने Telegram पर अस्थायी रोक लगाई थी। क्योंकि Telegram में भी यूजरनेम फीचर है और इसका दुरुपयोग हो रहा था। तो सरकार का अनुभव यह है कि यूजरनेम-बेस्ड चैटिंग में खतरे ज्यादा हैं।

आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा

अभी तो कोई असर नहीं है क्योंकि फीचर लॉन्च ही नहीं हुआ। जो लोग सोशल मीडिया पर रील्स देखकर परेशान हो रहे थे कि उनके फोन में यूजरनेम फीचर क्यों नहीं आ रहा – उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है।

अगर यह फीचर आता है तो भी सावधानी बरतनी होगी। अपने सोशल मीडिया अकाउंट वाला यूजरनेम WhatsApp पर बिल्कुल मत रखिएगा। वरना कोई भी आपको ढूंढकर मैसेज भेज सकता है।

और जब भी कोई नया यूजरनेम से संपर्क करे, तो तुरंत विश्वास मत कीजिए। पहले वेरिफाई कीजिए कि सामने वाला असली है या नकली।

अब आगे क्या होगा

अब गेंद Meta के पाले में है। अगले तीन दिनों में उन्हें सरकार के सभी सवालों के विस्तृत जवाब देने होंगे। अगर जवाब संतोषजनक रहे और पर्याप्त सेफगार्ड्स हों, तो सरकार हरी झंडी दे सकती है।

लेकिन अगर सरकार को लगा कि साइबर सिक्योरिटी खतरे में है, तो यह फीचर भारत में लॉन्च नहीं हो पाएगा। दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत ने किसी बड़ी टेक कंपनी को रोका हो। पहले भी कई बार डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी के मुद्दों पर भारत सख्त रुख अपना चुका है।

जानें पूरा मामला: क्यों है यह इतना अहम

यह केस सिर्फ एक फीचर अपडेट का नहीं है। यह डिजिटल सॉवरेनिटी, यूजर प्राइवेसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन का मामला है। जब दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां भारत जैसे विशाल बाजार में कुछ नया लाती हैं, तो उन्हें स्थानीय कानून, सांस्कृतिक संवेदनाओं और सुरक्षा चिंताओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

भारत सरकार का संदेश साफ है: इनोवेशन का स्वागत है, लेकिन जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। Meta को यह समझना होगा कि भारतीय बाजार की अपनी अनूठी चुनौतियां हैं और यहां “one-size-fits-all” मॉडल नहीं चलेगा।

मुख्य बातें (Key Points)
  • WhatsApp Username Feature को भारत सरकार ने फिलहाल रोक दिया है, मेटा से तीन दिन में विस्तृत जवाब मांगे गए हैं
  • भारत में 850 मिलियन WhatsApp यूजर्स हैं, जो वैश्विक यूजर्स का 28-30% है
  • सरकार की मुख्य चिंता साइबर क्राइम, डिजिटल फ्रॉड और इंपर्सोनेशन स्कैम्स में बढ़ोतरी की संभावना है
  • Meta का कहना है कि यूजरनेम के बावजूद फोन नंबर बैकएंड में जरूरी रहेगा और हाई-प्रोफाइल नाम रिजर्व रहेंगे
  • Telegram की तुलना में WhatsApp का स्केल बहुत बड़ा है इसलिए सरकार ज्यादा सतर्क है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: क्या WhatsApp पर अभी यूजरनेम फीचर इस्तेमाल कर सकते हैं?

नहीं, फिलहाल भारत में यह फीचर उपलब्ध नहीं है। Meta ने खुद स्पष्ट किया है कि अभी भारत में इसे लॉन्च नहीं किया गया है और यह अंडर डेवलपमेंट है।

Q2: यूजरनेम फीचर से सबसे बड़ा खतरा क्या है?

सबसे बड़ा खतरा इंपर्सोनेशन यानी नकली पहचान बनाने का है। फ्रॉडस्टर CBI, Income Tax, बैंक जैसे नाम से यूजरनेम बनाकर लोगों को ठग सकते हैं। साथ ही, अपराधी को ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि यूजरनेम के पीछे फोन नंबर छिपा रहेगा।

Q3: अगर यह फीचर आता है तो क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

अपने सोशल मीडिया वाला यूजरनेम WhatsApp पर बिल्कुल न रखें। किसी नए यूजरनेम से संपर्क करने वाले को तुरंत विश्वास न करें। हमेशा वेरिफाई करें कि सामने वाला असली है या नकली। अननोन यूजरनेम से आने वाले मैसेज पर WhatsApp की वॉर्निंग को गंभीरता से लें।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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