Air India Kanishka Bombing: 1985 में एक ऐसा आतंकी हमला होता है जिसकी वजह से पूरी दुनिया सदमे में आ जाती है। हवा में प्लेन को ब्लास्ट से उड़ा दिया गया था। सभी 329 लोग मारे गए थे। भारत ने कनाडा को काफी लंबे समय से चेतावनी दी थी कि प्लीज सतर्क रहिए, चेकिंग प्रॉपर करिए, कुछ ऐसा हो सकता है। लेकिन कनाडा ने नहीं सुनी और इसका अंजाम आप सब देख सकते हो।
बड़ी बात यह है कि 41 साल बाद कनाडा ने आखिरकार यहां पर माना है कि इसके पीछे खालिस्तानी का प्लॉट था। दिलचस्प बात यह है कि यह कनाडा की प्रीमियर इंटेलिजेंस एजेंसी CSIS (कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस) की सबसे मजबूत आधिकारिक स्वीकृति है।
🔍 यह भी पढ़ें- Punjab MLA Hostel Heritage Chairs: अमेरिका में 59 लाख में नीलाम, स्पीकर ने दिया जांच का भरोसा
23 जून 1985 को क्या हुआ था
एयर इंडिया की फ्लाइट 182 जिसे कनिष्क भी कहा जाता है, एयर इंडिया की फ्लैगशिप इंटरनेशनल फ्लाइट थी। इसका रूट टोरंटो (कनाडा) से लंदन, फिर दिल्ली और उसके बाद मुंबई था।
यह मॉन्ट्रियल से चली और लंदन लैंड करनी थी। अटलांटिक महासागर पार करने के ठीक बाद आयरलैंड के तट के पास जब यह हवा में थी, तभी इसमें बड़ा ब्लास्ट हो जाता है। मिड एयर में ही पूरा एयरक्राफ्ट टूट जाता है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी ऊंचाई पर बम से ब्लास्ट होना… किसी के बचने की उम्मीद तो रहती ही नहीं। पूरे 329 लोग मारे गए जिसमें 268 कनाडियन, 26-27 ब्रिटिश, 24 भारतीय और बाकी क्रू मेंबर्स थे।
समझने वाली बात यह है कि उस समय तक का यह सबसे डेडलीएस्ट एविएशन टेररिस्ट अटैक था। कनाडा का सबसे बड़ा आतंकी हमला। एयर इंडिया की सबसे बड़ी त्रासदी। 2001 में 9/11 हमले के बाद ही यह दूसरे नंबर पर चला गया।
🔍 यह भी पढ़ें- AAP Political Affairs Committee की अहम मीटिंग 11 जून को, टिकट वितरण पर चर्चा
पृष्ठभूमि: पंजाब में क्या चल रहा था
1980 के दशक में भारत के पंजाब में कई विकास हो रहे थे। यहां खालिस्तान को लेकर मांग उठ रही थी। कई एक्सट्रीमिस्ट संगठन एक स्वतंत्र देश की मांग कर रहे थे जिसका नाम होगा खालिस्तान।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह बहुत कम आबादी थी। कुछ ही एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप थे जो इसकी मांग कर रहे थे। ज्यादातर सिख समुदाय हिंसा का समर्थन नहीं करता।
1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसे लॉन्च किया ताकि गोल्डन टेंपल में छुपे उग्रवादियों को निकाला जाए। लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि बहुत जनहानि हुई, लोगों में गुस्सा आया, रेडिकलाइजेशन तेजी से बढ़ा।
इंदिरा गांधी की हत्या अक्टूबर 1984 में हुई। इसके पीछे भी यही कारण बताया जाता है। एंटी-सिख दंगे दिल्ली में हुए। तो यहां एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप्स भारत के बाहर और ज्यादा आक्रामक होते गए।
💡 यह भी पढ़ें- AC Working Science: ठंडा नहीं कर रहा तो Mechanic बुलाने से पहले जानें
कनाडा क्यों महत्वपूर्ण
कनाडा में सबसे बड़ा सिख डायस्पोरा है। यहां बड़ी आबादी है भारतीयों की जिसमें सिख समुदाय सबसे ज्यादा है। पॉलिटिकल ऑर्गनाइजेशन हैं, फंड रेजिंग नेटवर्क हैं।
ज्यादातर डायस्पोरा ऑर्गनाइजेशन शांतिपूर्ण हैं, उसमें कोई दिक्कत नहीं। लेकिन भारतीय खुफिया ने बार-बार चेतावनी दी थी कि इनमें से कुछ एक्सट्रीमिस्ट ग्रुप्स पैसा इकट्ठा कर रहे हैं, समर्थकों को भर्ती कर रहे हैं, विस्फोटक खरीद रहे हैं, हमलों की योजना बना रहे हैं।
चिंता का विषय यह है कि कनाडा का रिस्पांस बहुत धीमा था। वे ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे। उनका कहना था कि हम लिबरल देश हैं, यहां आजादी है, सिविल लिबर्टीज हैं, हम उन्हें रोक नहीं सकते।
साजिश कैसे रची गई
यह बॉम्बिंग अचानक नहीं हुई। यह कई महीनों से प्लान की गई थी। जांच से पता चला कि विस्फोटक प्राप्त किए गए, सूटकेस में बम रखा गया। एयरलाइन के बैगेज ट्रांसफर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
उस समय शायद एयरपोर्ट सुरक्षा उतनी मजबूत नहीं होगी। इस बॉम्बिंग के बाद पूरी दुनिया में एयरपोर्ट्स ने अपनी सुरक्षा मजबूत की।
समझने वाली बात यह है कि आतंकवादियों ने एविएशन इंडस्ट्री की कमियों का फायदा उठाया। बम को सूटकेस में छुपाया, फ्लाइट में चेक इन करवाया। लेकिन जो यात्री थे वे फ्लाइट में नहीं चढ़े। उनका सामान फ्लाइट में चला गया और लंदन पहुंचने से पहले ही ब्लास्ट हो गया।
दूसरा बम भी था
एक दूसरा बम भी था जिसके बारे में कम लोग जानते हैं। जापान के नारीता एयरपोर्ट में बैगेज हैंडलर्स सामान ट्रांसफर कर रहे थे। लेकिन एयर इंडिया के फ्लाइट में ट्रांसफर होने से पहले ही वो बैग ब्लास्ट हो जाता है। दो बैगेज हैंडलर्स की मृत्यु हो जाती है।
अगर यह बैग एयर इंडिया के फ्लाइट में चला जाता तो एक और फ्लाइट ब्लास्ट हो जाती। कितने और लोगों की मृत्यु होती, सोच कर ही रूह कांप जाती है।
कौन थे जिम्मेदार
यहां एक एक्सट्रीमिस्ट ऑर्गनाइजेशन था – बब्बर खालसा। इसके पीछे दो मुख्य आरोपी बताए गए – तलविंदर सिंह परमार और इंद्रजीत सिंह रियाद।
रियाद ने खुद गुनाहगार मान लिया था और उसे सजा भी हुई। लेकिन बाकी लोगों को सजा नहीं हो पाई क्योंकि कनाडा में “गिल्ट बियॉन्ड रीजनेबल डाउट” होना चाहिए।
जांच में कमियां
कनाडा की जांच बेहद विवादास्पद थी। दो एजेंसियां शामिल थीं – CSIS और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस। वे आपस में जानकारी साझा नहीं कर रहे थे।
भारतीय खुफिया ने चेतावनी दी थी। CSIS ने एयर इंडिया और भारतीय मिशनों के खतरे का आकलन भी किया था। फिर भी इसे रोका नहीं जा सका।
हैरान करने वाली बात यह है कि वायर टेप रिकॉर्डिंग्स भी नष्ट कर दी गईं। आतंकवादियों के बीच फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग थी। CSIS ने अपनी रूटीन प्रक्रिया के तहत उन्हें डिलीट कर दिया।
कई गवाह मारे गए। कई गवाह गायब हो गए। इसलिए बहुत कम लोगों को सजा हो पाई – सिर्फ एक व्यक्ति को।
41 साल बाद स्वीकृति
2026 में सबसे बड़ा बदलाव हुआ। CSIS ने पब्लिकली कहा: “23 जून 1985 को कनाडा बेस्ड खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए बम ने एयरक्राफ्ट को नष्ट कर दिया।”
यह पहली बार आधिकारिक रूप से माना गया। 41 साल बाद कनाडा ने यह स्वीकार किया। इसके पीछे का कारण है कि जस्टिन ट्रूडो के जाने के बाद कूटनीतिक रूप से यह महत्वपूर्ण है।
भारत काफी लंबे समय से खालिस्तानी एक्सट्रीमिज्म को चर्चा में ला रहा था। जस्टिन ट्रूडो जब तक थे, संबंध और खराब हो गए थे। लेकिन शायद अब चीजों को फिर से सुधारा जा रहा है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 23 जून 1985 |
| फ्लाइट | एयर इंडिया 182 (कनिष्क) |
| मृतकों की संख्या | 329 (268 कनाडियन, 27 ब्रिटिश, 24 भारतीय) |
| स्थान | आयरलैंड तट के पास, अटलांटिक महासागर |
| जिम्मेदार | बब्बर खालसा (खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट) |
| सजा | केवल 1 व्यक्ति (इंद्रजीत सिंह रियाद) |
मुख्य बातें (Key Points)
• 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 को हवा में बम से उड़ाया गया
• 329 लोगों की मौत हुई – उस समय का सबसे बड़ा एविएशन आतंकी हमला
• 41 साल बाद कनाडा की CSIS ने पहली बार माना कि खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट जिम्मेदार थे
• भारत ने पहले से चेतावनी दी थी लेकिन कनाडा ने नहीं सुनी
• कनाडा की जांच विवादास्पद रही, सबूत नष्ट किए गए
• केवल एक व्यक्ति को सजा हो पाई













