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The News Air - NEWS-TICKER - Ration Card Big Change: गरीबों के राशन में बड़ा बदलाव, करोड़ों परिवारों पर क्या होगा असर?

Ration Card Big Change: गरीबों के राशन में बड़ा बदलाव, करोड़ों परिवारों पर क्या होगा असर?

अंत्योदय अन्न योजना में नया फॉर्मूला, अब परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन, लेकिन 35 किलो की सीमा बरकरार

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शनिवार, 27 जून 2026
in NEWS-TICKER, Breaking News, काम की बातें, राष्ट्रीय
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Ration Card
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Ration Card Changes India: भारत के सबसे गरीब परिवारों के पेट से जुड़ी हुई है। उनके चूल्हे से जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार एक ऐसा बड़ा बदलाव करने वाली है जो देश के करोड़ों परिवारों के राशन कार्ड और उस पर मिलने वाले अनाज की मात्रा को सीधे-सीधे प्रभावित करेगा।

जी हां, भारत सरकार ने अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत राशन बांटने का एक नया फार्मूला तैयार किया है। और अब सवाल यह उठता है कि क्या यह फार्मूला गरीबों के लिए कोई मास्टर स्ट्रोक होने जा रहा है या फिर कोई एक ऐसा लूपहोल होगा जिससे गरीब परिवारों के लिए नुकसान होने जा रहा है?

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चर्चा क्यों हो रही है?

दरअसल केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) में संशोधन का एक नया ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।

सरकार ने इसमें एक प्रस्ताव रखा है और प्रस्ताव यह है कि अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत जो राशन अब तक परिवार के हिसाब से मिलता था, अब वह प्रति व्यक्ति (Per Capita) के हिसाब से दिया जाएगा।

सरकार ने इस पर आम जनता और विशेषज्ञों से सुझाव भी मांगे हैं। यानी कि बदलाव की सुगबुगाहट अब तेज हो चुकी है।

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क्रोनोलॉजी समझिए

यह योजना शुरू होती है वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय में। उद्देश्य था देश के सबसे गरीब Poorest of the Poor परिवारों को अनाज उपलब्ध कराना।

अब तक व्यवस्था क्या थी?
नियम यह था कि हर अंत्योदय परिवार को हर महीने 35 किलो अनाज दिया जाता था।

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सरकार को क्या पेंच नजर आया?

एक उदाहरण से समझिए:

मान लीजिए कि दो परिवार हैं:

  • परिवार A: 2 सदस्य हैं → मिला 35 किलो राशन → प्रति व्यक्ति 17.5 किलो
  • परिवार B: 7 सदस्य हैं → मिला वही 35 किलो राशन → प्रति व्यक्ति 5 किलो

समझने वाली बात यह है कि सरकार का कहना है भाई यह सरासर असमानता है। छोटे परिवारों को जरूरत से ज्यादा मिल रहा है और बड़े परिवार के लोग भूखे मर रहे हैं।

इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए सरकार यह नया प्रस्ताव ला रही है।

सरकार का गणित क्या है?

पहले: हर परिवार को 35 किलो दिया जा रहा था।

अब सरकार का प्रस्ताव:

  • हर व्यक्ति को 7 किलो अनाज प्रति व्यक्ति के हिसाब से दिया जाएगा
  • परिवार को 35 किलो नहीं, बल्कि सदस्यों को देखा जाएगा

सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है। लेकिन यहां पर थोड़ा सा समझना होगा। यहीं पर एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है।

बड़ा ट्विस्ट: 35 किलो की सीमा

सरकार ने कहा है कि मैक्सिमम लिमिट पर फैमिली अभी भी 35 किलो रहेगी। लेकिन हम मेंबर वाइज देंगे।

गणित से समझिए:

परिवार में सदस्यमिलने वाला राशनप्रति व्यक्ति
1 सदस्य7 किलो7 किलो
2 सदस्य14 किलो7 किलो
3 सदस्य21 किलो7 किलो
4 सदस्य28 किलो7 किलो
5 सदस्य35 किलो7 किलो
6 सदस्य35 किलो (कैप)5.8 किलो
7 सदस्य35 किलो (कैप)5 किलो
8 सदस्य35 किलो (कैप)4.4 किलो

यानी कि एक से पांच तक परिवार व्यक्ति के हिसाब से चलेगा। पांच लोगों से ऊपर अगर परिवार के सदस्य हैं तो 35 किलो से ज्यादा राशन नहीं दिया जाएगा।

फायदा या नुकसान?

सरकार का तर्क:

  • राशन वितरण में तर्कसंगतता आएगी
  • छोटे परिवारों में अनाज बर्बादी रुकेगी
  • कुपोषण से लड़ाई आसान हो जाएगी

विशेषज्ञों की आपत्ति:

खाद्य सुरक्षा और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों ने इस पर उंगली उठाई है। उनका कहना है:

चिंता का विषय यह है कि सरकार अगर वास्तव में प्रति व्यक्ति न्याय करना चाहती है तो 35 किलो का कैप क्यों लगाया है? लिमिट क्यों लगाई है?

जिस बड़े परिवार में सात या आठ लोग हैं, उन्हें तो आज भी 35 किलो ही मिल रहा है। यानी कि उनके जीवन में तो कोई सुधार होगा ही नहीं। अगर सुधार करना है तो यह सीमा पूरी तरह से हटाई जानी चाहिए थी।

पोषण का मुद्दा

दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा और भी है – न्यूट्रिशन का, पोषण का। हम अक्सर बात करते हैं कि भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स में कहां खड़ा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान को जिंदा रहने के लिए केवल गेहूं और चावल यानी कि केवल कैलोरी नहीं चाहिए। उन्हें दाल, तेल, प्रोटीन, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी चाहिए।

सरकार करोड़ों रुपए की सब्सिडी दे रही है। लेकिन क्या हम सिर्फ पेट भर रहे हैं या पोषण कर रहे हैं? खाद्य सुरक्षा को अब पोषण सुरक्षा में बदलने का वक्त आ गया है।

आर्थिक पहलू

भारत इस समय दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत लगभग 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। सरकार हर साल लाखों करोड़ रुपया इस पर खर्च करती है।

इसीलिए सरकार की कोशिश सोशल जस्टिस के साथ-साथ सब्सिडी की बेहतर टारगेटिंग भी है। इतने बड़े खर्च के कारण सरकार का राजकोषीय घाटा भी बढ़ता जाता है जिसे सरकार कम करना चाहती है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

यह टॉपिक कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के लिए बहुत क्रिटिकल है:

GS Paper 2 में:

  • शासन और खाद्य सुरक्षा
  • National Food Security Act 2013
  • अंत्योदय अन्न योजना
  • कल्याणकारी योजनाएं

GS Paper 3 में:

  • PDS में सुधार
  • खाद्य सब्सिडी प्रबंधन
  • FCI और खरीद नीति
  • समावेशी विकास

संभावित प्रश्न:

  • अंत्योदय अन्न योजना कब शुरू हुई थी?
  • National Food Security Act 2013 के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
  • One Nation One Ration Card कैसे काम करता है?
निष्कर्ष

निष्कर्ष यह है कि सरकार का इरादा राशन वितरण को और अधिक प्रैक्टिकल बनाने का है। लेकिन जब बड़े परिवारों के लिए 35 किलोग्राम की सीमा नहीं हटाई गई है, तब यह पूर्ण सामाजिक न्याय की अवधारणा को कहीं न कहीं लैक करता है।

साथ ही अब समय आ गया है कि देश की राशन की दुकानों में केवल अनाज ना पहुंचे बल्कि पोषण से भरपूर अन्य चीजें भी गरीबों को प्राप्त हों।


मुख्य बातें (Key Points)

• अंत्योदय अन्न योजना में नया फॉर्मूला – प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन
• पहले हर परिवार को 35 किलो मिलता था चाहे 2 सदस्य हों या 7
• नए नियम में भी 35 किलो की अधिकतम सीमा बरकरार
• 5 से ज्यादा सदस्यों वाले परिवारों को कोई फायदा नहीं
• छोटे परिवारों को राशन कम मिलेगा, बड़े परिवारों को वही 35 किलो
• 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है
• विशेषज्ञों की मांग – पोषण सुरक्षा पर फोकस करें, केवल अनाज नहीं


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अंत्योदय अन्न योजना क्या है?

उत्तर: यह योजना 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य देश के सबसे गरीब (Poorest of the Poor) परिवारों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराना है।

प्रश्न 2: नए फॉर्मूले में क्या बदलाव है?

उत्तर: पहले हर परिवार को 35 किलो राशन मिलता था चाहे सदस्य 2 हों या 7। अब प्रति व्यक्ति 7 किलो का नियम होगा लेकिन अधिकतम सीमा 35 किलो ही रहेगी। यानी 5 से ज्यादा सदस्यों वाले परिवारों को कोई फायदा नहीं।

प्रश्न 3: बड़े परिवारों के लिए यह फायदेमंद है या नुकसानदायक?

उत्तर: 6-7 या इससे ज्यादा सदस्यों वाले परिवारों के लिए कोई फायदा नहीं है क्योंकि उन्हें अभी भी 35 किलो ही मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रति व्यक्ति न्याय करना है तो 35 किलो की सीमा हटाई जानी चाहिए।

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Ajay Kumar

Ajay Kumar

पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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