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The News Air - Breaking News - IVF Dark Truth: भ्रूण बदली जा रही, DNA मैच नहीं, अवैध क्लीनिक चल रहे, धोखाधड़ी का काला सच

IVF Dark Truth: भ्रूण बदली जा रही, DNA मैच नहीं, अवैध क्लीनिक चल रहे, धोखाधड़ी का काला सच

आईवीएफ के बाद डीएनए टेस्ट में बच्चे माता-पिता से मैच नहीं हो रहे, एम्ब्रियो मिक्स-अप और अनलाइसेंस क्लीनिकों की बड़ी साजिश उजागर

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 27 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय, स्पेशल स्टोरी, हेल्थ
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IVF Dark Truth
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IVF Scam India: आईवीएफ (IVF) यानी कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन। यह एक ऐसी विधि है जब कभी भी कोई दंपत्ति या कोई कपल सामान्य तौर पर यानी कि प्राकृतिक तरीके से माता-पिता नहीं बन पाते या ऐसी कुछ समस्याएं फेस कर रहे होते हैं तो इस दौरान विज्ञान की कुछ मदद ली जाती है।

विज्ञान की मदद से भ्रूण को डेवलप किया जाता है और इस दौरान गर्भधारण को सफल बनाया जाता है। इसे ही इन विट्रो फर्टिलाइजेशन कहते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ यह विधि दुनिया में एक कपल को सबसे महत्वपूर्ण सुख देने के लिए डेवलप की गई थी, वहीं यहां इस मामले को कमर्शियलाइज करके अब बहुत ज्यादा चीजों को नेगेटिवली प्रेजेंट किया जा रहा है।

धोखाधड़ी और इसी के साथ-साथ लोगों की बिगड़ती हुई चीजें, ये सारे मामले सामने आ रहे हैं। साथ ही साथ यहां पर बच्चों को भी बदल दिया जा रहा है।

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हाल की चौंकाने वाली घटनाएं

हाल ही में यह मुद्दा इस प्रकार सामने आया कि जब आईवीएफ के बाद कुछ कपल्स ने बच्चों को जन्म दिया और बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया तो पता चला कि ये बच्चे माता-पिता से संबंधित ही नहीं थे।

यानी कि आईवीएफ की प्रक्रिया में एक कपल ने प्रोसेस तो पूरा ठीक किया लेकिन बीच में कहीं ना कहीं एक ऐसी गड़बड़ी हुई जिस वजह से एम्ब्रियो मिक्स-अप हो गया।

हैरान करने वाली बात यह है कि जब लास्ट में यह पता चला कि बच्चे का जन्म तो हुआ है बट डीएनए टेस्ट में वह बच्चा पेरेंट्स से मैच हुआ ही नहीं। अब ऐसे कई सारे मामले हैं जो हाल ही में इस दौरान आईवीएफ की धोखाधड़ी से जुड़े हुए सामने आए।

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प्रमुख मामले

राहुल एवं मीनू राठौर का मामला: आईवीएफ के बाद जन्मे जुड़वा बच्चों का जब डीएनए करवाया गया तो डीएनए टेस्ट में ये पेरेंट्स से मैच हुए ही नहीं।

बलविंदर कौर का मामला: इसी तरह का था कि जब महिला प्रेग्नेंट होती है आईवीएफ के बाद में तो यह देखा जाता है कि डीएनए टेस्ट कभी भी यहां पर पेरेंट्स और भ्रूण का मैच ही नहीं करता।

इस तरह के अलग-अलग धोखाधड़ी के मामले और भी रहे। जैसे कि साल 2024 में गुड़गांव में अवैध आईवीएफ केंद्र में 84 भ्रूण बरामद हुए।

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने तो ₹1.5 करोड़ का जुर्माना साल 2023 में लगाया था।

समझने वाली बात यह है कि नवजात का डीएनए प्रोफाइल जारी करना अनिवार्य तो कर दिया गया लेकिन उसके बावजूद खराब प्रक्रियाएं निरंतर व्यवस्था में जारी हैं।

मुख्य समस्याएं

दंपतियों ने यह मुद्दा उठाया है कि:

  • व्यवस्था के दौरान गलत प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं
  • खराब रिकॉर्ड रखा जाता है
  • अस्पष्ट दाता की संलिप्तता रहती है
  • क्लीनिकों के अंदर जवाबदेही की बहुत ज्यादा कमी है

यह मुद्दा कई मामलों में कोर्ट तक भी पहुंचा है।

क्या है आईवीएफ – IVF

जब कभी भी कोई भी दंपत्ति प्राकृतिक तौर पर माता-पिता नहीं बन पाते या गर्भधारण करने में समस्याओं का सामना करते हैं तो ऐसे में:

  • महिला के शरीर से अंडाणु निकाले जाते हैं
  • पुरुष के शुक्राणु लिए जाते हैं
  • इन दोनों को प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है
  • जब प्रयोगशाला के दौरान भ्रूण विकसित हो जाता है तो उस भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है
  • फिर आगे की पूरी प्रक्रिया महिला के गर्भाशय में प्राकृतिक तौर से कंप्लीट होती है
आईवीएफ उद्योग का विकास

पिछले एक दशक में आईवीएफ उद्योग बहुत तेजी से प्रचलित हुआ है और फेमस भी हुआ है। खासतौर पर महानगरों के अंदर और द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में भी लोगों ने इसको बहुत ज्यादा पसंद किया है।

ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार साल 2023 में उद्योग का आकार $0.06 बिलियन था और साल 2024 से 2030 के दौरान यह माना जा रहा है कि यहां 7.8% की वृद्धि भी होने वाली है। यानी कि आईवीएफ बहुत लोकप्रिय हो रहा है।

कानून: ART अधिनियम 2021

जब यह सारा काम तेजी से प्रचलन में आया तो यह कमी महसूस की गई कि भारत में इसको रेगुलेट करने के लिए कोई खास कानून नहीं था। जिसकी वजह से अवैध गतिविधि ज्यादा हो रही थी।

व्यवस्था को ठीक करने के लिए ART (असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) एक्ट 2021 लाया गया। इसमें बहुत सारे ऐसे प्रावधान किए गए:

मुख्य प्रावधान:

  • क्लीनिकों और बैंकों का पंजीकरण अनिवार्य
  • उपचार में पारदर्शिता आवश्यक
  • रोगियों के अधिकारों की सुरक्षा
  • रिकॉर्ड मेंटेन होना चाहिए
  • नैतिक मानकों का पालन जरूरी
  • दाता एवं इच्छुक दंपत्तियों के हितों की रक्षा
  • लिंग चयन पर प्रतिबंध
  • भ्रूण एवं युग्मकों की बिक्री पर रोक
  • उपचार से पहले परामर्श जरूरी
  • सूचित सहमति अनिवार्य
  • गैर-कानूनी गतिविधियों पर दंड का प्रावधान
कानून बना लेकिन प्रवर्तन नहीं

मामला तो ठीक है लेकिन फिर भी क्या कानून बनने के बाद देश में सभी चीजें सही हो गईं? जी नहीं।

राष्ट्रीय ART एवं सरोगेसी रजिस्ट्री का यह जिम्मा है कि देश भर में कितने क्लीनिक्स ऐसे हैं जो असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी के लिए अप्लाई कर रहे हैं।

आंकड़े:

  • साल 2021 से 7732 आवेदन प्राप्त हुए
  • जिनमें से केवल 4188 आवेदन स्वीकृत हुए
  • 719 आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए
  • बाकी प्रोसेस में चल रहे हैं

चिंता का विषय यह है कि एक बड़ा आंकड़ा ऐसा भी है जहां पर अप्रूवल नहीं दिया गया है। अब इस पूरी एक्टिविटी के दौरान जो अस्वीकृत क्लीनिकल हैं, वे भी उपचार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

यानी कि आप अस्वीकृत तो हो गए हैं लेकिन अस्वीकृत होने के बावजूद आप व्यवस्था में बने हुए हैं और कपल्स से बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं।

प्रमुख अनियमितताएं

1. भ्रूण की अदला-बदली: यह केवल इललीगल में ही नहीं बल्कि लीगल में भी देखी गई है। माता-पिता के सैंपल्स को कलेक्ट तो कर लेते हैं लेकिन उनको ठीक से संभालकर रखना भूल जाते हैं।

जब निषेचन का काम होता है तो कई बार सैंपल्स बदल जाते हैं जिसकी वजह से डीएनए मैच नहीं करता।

2. रिकॉर्ड प्रबंधन की कमी: भ्रूण का उचित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। साथ ही लेबलिंग एवं ट्रैकिंग में भी त्रुटियां बनी हुई हैं।

3. दाता संबंधी अनियमितताएं: कई बार इच्छुक माता-पिता को अपनी पसंद का दाता चुनने की अनुमति दे दी जाती है। यानी कि माता या पिता का किसी एक का कोई सैंपल अगर दिक्कत करता है तो कहते हैं किसी एक्सटर्नल की मदद ले लीजिए।

यह कानूनों के विपरीत पड़ता है क्योंकि लीगल पेरेंट्स या कपल को ही इस तरह की एक्टिविटी में शामिल होने की मंजूरी है।

4. अपंजीकृत क्लीनिकों का चलना: अपंजीकृत क्लीनिकों का मौजूद रहना यह बहुत बड़ी गड़बड़ है क्योंकि यहां पर ना तो प्रथा ठीक है, ना विधि ठीक है।

5. अपर्याप्त परामर्श: कई बार जब इस तरह की एक्टिविटीज होनी होती हैं तो पेरेंट्स को ना तो सारी बातें बताई जाती हैं, ना कपल को सारी इनफॉर्मेशन दी जाती है, ना जोखिम बताए जाते हैं।

कमर्शियलाइजेशन की समस्या

अब इस दौरान मार्केट के अंदर आईवीएफ की लोकप्रियता बहुत ज्यादा हो गई है और आईवीएफ को एक तरह से कमर्शियलाइज कर दिया गया है।

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इसके कमर्शियलाइजेशन की कंडीशन में बहुत ज्यादा पैसा यहां लोगों से बटोरा जा रहा है। जो लोग एक बार में अमाउंट पे नहीं कर पा रहे हैं, उन लोगों के लिए EMI का ट्रेंड शुरू कर दिया गया है।

जहां लीगल हाई चार्ज कर रहे होते हैं, वहीं इललीगल कम चार्ज में भी बच्चों की डिलीवरीज की सारी बातें इंश्योर कर देते हैं।

महिलाओं पर प्रभाव

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि क्लीनिक को तो अपने पैसों से मतलब है। वास्तविकता जो झेलनी पड़ती है वो महिला को झेलनी पड़ती है।

शारीरिक प्रभाव:

  • हॉर्मोन इंजेक्शंस की प्रक्रिया
  • बार-बार चिकित्सीय प्रक्रिया
  • आईवीएफ का बड़ा बोझ

मानसिक एवं सामाजिक प्रभाव:

  • भावनात्मक आघात
  • मानसिक तनाव
  • सामाजिक कलंक
  • विश्वास का संकट
  • परिवार पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव

एक महिला इस दौरान जहां पहले से ही संतान ना प्राप्त करने की समस्या से जूझ रही थी, अब आईवीएफ में इंक्लूड होकर उसकी समस्या ज्यादा हो गई है।

समाधान और सावधानियां

1. ART अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन: अभी वर्तमान में जो ज्यादातर दिक्कतें हैं वह इसी वजह से हैं क्योंकि कानून तो बना हुआ है लेकिन प्रवर्तन उस हिसाब से नहीं हो रहा।

2. राष्ट्रीय रजिस्ट्री का नियमित अपडेशन: रेगुलर अपडेट हो तो पता लग सके कि कौन रजिस्टर्ड है, कौन नहीं।

3. क्लीनिकों का समयबद्ध निरीक्षण: ताकि सही और गलत की पहचान होती रहे और जो गलत पाए जाएं उनको सील किया जाए।

4. डिजिटल भ्रूण ट्रैकिंग और रिकॉर्ड प्रणाली: जिससे सही तरह से काम कंप्लीट हो सके और बच्चों की अदला-बदली ना हो।

5. DNA रिकॉर्ड एवं ऑडिट व्यवस्था: को मजबूत किया जाना आवश्यक है।

6. अनिवार्य काउंसलिंग: उपचार से पहले जरूरी है कि अनिवार्य काउंसलिंग हो ताकि कपल को सारी बातें ठीक से समझाई और बताई जाएं।

7. रोगी अधिकारों की सुरक्षा: यहां बहुत ज्यादा जरूरी है।

8. क्लीनिक में पारदर्शिता और जवाबदेही: रहनी चाहिए।

9. चिकित्सीय नैतिकता और गुणवत्ता मानकों का कठोर अनुपालन: होना चाहिए।


मुख्य बातें (Key Points)

• आईवीएफ के बाद कई बच्चे DNA टेस्ट में माता-पिता से मैच नहीं हो रहे
• एम्ब्रियो मिक्स-अप की घटनाएं बढ़ रही हैं
• 7732 में से केवल 4188 क्लीनिक्स को अप्रूवल मिला
• 719 अस्वीकृत क्लीनिक भी चोरी-छुपे काम कर रहे हैं
• ART अधिनियम 2021 है लेकिन प्रवर्तन कमजोर
• महिलाओं पर शारीरिक और मानसिक दोहरा बोझ
• आईवीएफ का कमर्शियलाइजेशन गड़बड़ियों की जड़


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: IVF क्या है और यह कैसे काम करता है?

उत्तर: IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है। फिर विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

प्रश्न 2: IVF में क्या-क्या धोखाधड़ी हो रही है?

उत्तर: भ्रूण की अदला-बदली, DNA मिसमैच, अवैध क्लीनिकों का संचालन, खराब रिकॉर्ड प्रबंधन, थर्ड पार्टी डोनर का अवैध उपयोग, और EMI के नाम पर ठगी मुख्य समस्याएं हैं।

प्रश्न 3: ART अधिनियम 2021 क्या है?

उत्तर: यह असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी को रेगुलेट करने के लिए बनाया गया कानून है जो क्लीनिकों का पंजीकरण, पारदर्शिता, मरीजों के अधिकार और नैतिक मानकों को सुनिश्चित करता है। लेकिन इसका प्रवर्तन कमजोर है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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