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The News Air - Breaking News - Apple Price Hike: भारत में सबसे ज्यादा महंगे हुए प्रोडक्ट्स, 70% तक बढ़े दाम

Apple Price Hike: भारत में सबसे ज्यादा महंगे हुए प्रोडक्ट्स, 70% तक बढ़े दाम

Apple के MacBook, iPad और अन्य प्रोडक्ट्स की कीमतों में 14% से 74% तक की बढ़ोतरी, AI मेमोरी डिमांड और कमजोर रुपया मुख्य कारण

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शनिवार, 27 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, टेक्नोलॉजी, बिज़नेस
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Apple Price Hike
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Apple Price Hike India: पिछले एक-दो दिनों से आप लगातार Apple के बारे में सुन रहे होंगे। मैं खाने वाले Apple की बात नहीं कर रहा हूं। लेकिन Apple के जो प्रोडक्ट्स हैं वो बहुत ज्यादा महंगे हो गए हैं भारत के अंदर।

iPhone को अगर आप छोड़ दो, बाकी जितने भी प्रोडक्ट्स हैं उसमें 20%, 50%, 70% तक का इजाफा हुआ है। आप देख सकते हो खबर – “Apple Biggest Price Hike Yet: Why Macs, iPads Suddenly Cost Up To ₹1 Lakh More”।

दिलचस्प बात यह है कि यह खासतौर पर भारत को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। वैसे तो पूरी दुनिया में कीमतें बढ़ रही हैं MacBook और अन्य प्रोडक्ट्स की, लेकिन भारत में सबसे ज्यादा असर हुआ है।

और सवाल यह भी आता है कि अगर Apple के प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ रहे हैं तो क्या बाकी कंपनियों – Lenovo, Dell आदि के भी दाम बढ़ेंगे? वो सब कुछ मैं आपको डिटेल से बताऊंगा।

हुआ क्या

हाल ही में Apple ने निर्णय लिया कि MacBook, iPad, Apple TV, HomePod – मतलब Apple के जितने भी प्रोडक्ट्स हैं उसमें कीमत बढ़ाई जाएगी। और यह 2026 की टेक्नोलॉजी स्टोरीज में सबसे बड़ी बन गई है।

हैरान करने वाली बात यह है कि सबसे ज्यादा प्रभाव भारत पर ही हुआ है – जो सबसे बुरी तरह प्रभावित बड़ा बाजार है। यहां 14% से 70% तक अलग-अलग प्रोडक्ट्स पर बढ़ोतरी की गई है।

और यह सिर्फ Apple की कहानी नहीं है। जिस तरह से ग्लोबल टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री ट्रांसफॉर्म हो रही है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रैपिड ग्रोथ हो रहा है, सप्लाई चेन में दिक्कतें आ रही हैं – हर तरफ से इसका असर देखने को मिलेगा।

कितनी बढ़ीं कीमतें – भारत vs अमेरिका
प्रोडक्टपुरानी कीमतनई कीमतभारत में वृद्धिअमेरिका में वृद्धि
MacBook Pro 14₹1,70,000₹2,40,00040%17%
iMac––––
Apple TV 4K––74%54%

समझने वाली बात यह है कि जो आप पहले ₹2 लाख में खरीदते थे, अब ढाई-तीन लाख देने होंगे। यह मैसिव जंप है।

कीमतें क्यों बढ़ रही हैं

ज्यादातर लोगों को लगेगा महंगाई है या ट्रंप के टैरिफ का चक्कर है। लेकिन यह बहुत छोटा हिस्सा है। असली कारण काफी बड़ा है और वो है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का रिवोल्यूशन।

पिछले तीन सालों से पूरी दुनिया AI आर्म्स रेस में चल चुकी है। कंपनियां सैकड़ों बिलियन डॉलर इन्वेस्ट कर रही हैं। OpenAI, Microsoft, Google, Amazon, Meta, Nvidia – हर एक कंपनी मैसिव अमाउंट में बिलियन डॉलर्स इन्वेस्ट कर रही है।

ये लोग AI डेटा सेंटर बना रहे हैं। और हर AI सर्वर को क्या चाहिए? एक्सट्रीमली पावरफुल GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) चाहिए। मैसिव रैम चाहिए, ह्यूज स्टोरेज कैपेसिटी चाहिए, हाई स्पीड नेटवर्किंग चाहिए।

और यह सब मेमोरी चिप्स पर निर्भर करता है।

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मेमोरी चिप्स की दो मुख्य प्रकार

1. DRAM (Dynamic Random Access Memory): यह कंप्यूटर की वर्किंग मेमोरी है। जैसे मान लो आपको वीडियो एडिट करना है, इंटरनेट पर ब्राउज करना है, Photoshop ओपन करना है, ChatGPT का इस्तेमाल करना है – तो DRAM का इस्तेमाल होता है।

2. NAND Flash: यह परमानेंट स्टोरेज है। जैसे SSD, iPhone स्टोरेज, MacBook स्टोरेज, USB ड्राइव्स।

दोनों ही बहुत एक्सपेंसिव हो गए हैं क्योंकि AI कंपनियां इन्हें बड़ी मात्रा में खरीद रही हैं।

AI को मेमोरी की इतनी जरूरत क्यों

एक नॉर्मल लैपटॉप में 16GB रैम और 512GB SSD होता है। लेकिन जो AI सर्वर होता है उसमें:

  • 1 से 2 TB रैम हो सकता है
  • मल्टीपल एंटरप्राइज SSDs हो सकते हैं
  • 8 से 16 AI GPUs हो सकते हैं

सोच के देखो, हजारों ऐसे सर्वर्स। एक सिंगल AI डेटा सेंटर में इतनी मेमोरी रहती है कि हजारों लैपटॉप्स एक साथ आ सकते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले दो-तीन वर्षों में डिमांड इतनी तेजी से बढ़ी है कि ग्लोबल सप्लाई में काफी बड़ा स्ट्रेन आ गया है।

मेमोरी मैन्युफैक्चरर्स किसे प्राथमिकता दे रहे

दुनिया के सबसे बड़े मेमोरी मैन्युफैक्चरर्स हैं – Samsung Electronics, SK Hynix, Micron Technology। पहले ये ज्यादातर स्मार्टफोन कंपनियों और लैपटॉप मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करते थे।

लेकिन अब जो बड़े-बड़े AI फर्म्स हैं जो बिलियन डॉलर्स खर्च कर रहे हैं, उनसे ज्यादा ऑर्डर आ रहा है। वॉल्यूम ज्यादा आ रही है, प्रीमियम हाई बैंडविथ मेमोरी है, लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट है, हायर मार्जिन प्रोडक्ट्स हैं।

नेचुरली जितने भी चिप मेकर्स हैं वो AI कस्टमर्स (Google, Meta, OpenAI) की तरफ शिफ्ट हो जाते हैं।

मेमोरी की कीमतें कितनी बढ़ीं

2026 में DRAM की कीमतें डबल हो गई हैं – यानी दो गुना। फर्दर इनक्रीस भी बताया जा रहा है अगर AI इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्सपैंड होता है (जो हो भी रहा है)। भारत में आप देखिए किस तरह से इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है, AI डेटा सेंटर्स बन रहे हैं। Google, Meta सब इन्वेस्ट कर रहे हैं।

NAND स्टोरेज की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं। Apple ने इनिशियली कॉस्ट को एब्सॉर्ब कर लिया, कीमतें नहीं बढ़ाईं। लेकिन अब Apple को समझ आ रहा है कि मेमोरी की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि उनका प्रॉफिट मार्जिन कम हो रहा है। इसलिए अब अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।

भारत में ही इतना ज्यादा क्यों

वैसे तो दाम हर जगह बढ़े हैं। कहीं 15%, कहीं 20%। लेकिन भारत में 50-70% ऐसा हाई क्यों हुआ? इसके तीन मुख्य कारण हैं:

1. इम्पोर्ट ड्यूटी और टैक्स: भारत में जब हम Apple की मैन्युफैक्चरिंग की बात करते हैं तो यहां बेसिकली सिर्फ iPhone ही बनते हैं। बाकी के प्रोडक्ट्स (Mac, iPad) अभी भी इम्पोर्ट होते हैं।

इम्पोर्टेड इलेक्ट्रॉनिक्स पर हैवी ड्यूटी लगती है, इंटीग्रेटेड GST लगता है, लॉजिस्टिक कॉस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर का मार्जिन। हर मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट जब इनक्रीस होती है तो कंज्यूमर तक पहुंचते-पहुंचते वह कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है।

2. कमजोर रुपया: पिछले दिनों आपने देखा होगा खासकर ईरान युद्ध के समय रुपया 97-98 तक चला गया था। Apple के प्रोडक्ट्स परचेस करना है, इम्पोर्ट करना है तो अगर डॉलर मजबूत हो रहा है, रुपया कमजोर है तो हमें इम्पोर्टेड इनफ्लेशन झेलना पड़ता है।

3. Apple की प्रीमियम प्राइसिंग: Apple अपने आप को प्रीमियम स्ट्रैटेजी में रखता है। वो अपने मार्जिन को कम नहीं करेगा क्योंकि उसकी प्रॉफिटेबिलिटी हार्म हो जाएगी। इसलिए वो तुरंत कीमतें बढ़ा देता है।

4. छोटा मार्केट साइज: iPhone की बात नहीं कर रहा, लेकिन Apple के बाकी प्रोडक्ट्स (Macs, iPads) का भारत में वॉल्यूम कम है। जब वॉल्यूम कम होता है तो कंपनी के पास फ्लेक्सिबिलिटी कम होती है कि वो कॉस्ट को एब्सॉर्ब कर सके।

iPhone क्यों नहीं प्रभावित हुआ

यह स्ट्रैटेजिक बिजनेस डिसीजन हो सकता है। अगर iPhone भी अचानक बहुत महंगा हो जाता तो:

  • सेल एकदम कम हो जाती
  • मार्केट शेयर हर्ट हो सकता था
  • इन्वेस्टर्स का कॉन्फिडेंस कमजोर हो सकता था

इसलिए Apple ने सोचा कि एक बार iPhone की कीमत उतनी नहीं बढ़ाते (वो भी थोड़ी बढ़ी है)। Macs और iPads को पहले बढ़ाते हैं। फिर देखते हैं क्या रिस्पांस आता है।

लेकिन ध्यान रखिए, अगर आगे भी मेमोरी कॉस्ट बढ़ता रहा तो Apple भी कुछ नहीं कर पाएगा। iPhone के भी दाम बढ़ाने ही पड़ेंगे अल्टीमेटली।

भारत पर असर

स्टूडेंट्स: जो MacBook का इस्तेमाल करते हैं इंजीनियरिंग, कोडिंग, डिज़ाइन के लिए – उनके लिए अफोर्डेबिलिटी कम हो जाएगी।

सॉफ्टवेयर डेवलपर्स: MacBook जो iOS डेवलपमेंट, AI प्रोग्रामिंग के लिए इस्तेमाल होता है – उनके लिए एंट्री कॉस्ट बढ़ रहा है।

स्टार्टअप्स: अपग्रेड करने में मुश्किल आएगी।

यूनिवर्सिटीज और लैब्स: रिसर्च के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं – बजट कंस्ट्रेंट आ सकता है।

क्रिएटिव प्रोफेशनल्स: वीडियो एडिटर, डिजाइनर, आर्किटेक्ट – सबके लिए मुश्किल।

क्या दूसरे ब्रांड्स भी बढ़ाएंगे

बिल्कुल हो सकता है। Dell Technologies, HP, Lenovo, Asus – ये सब भी तो मेमोरी सप्लायर्स पर निर्भर करते हैं। अगर Apple की कीमतें बढ़ रही हैं मेमोरी महंगी होने की वजह से, तो यहां भी डेफिनेटली असर देखने को मिलेगा। बहुत जल्द देखने को मिल सकता है।

भारत की सेमीकंडक्टर पॉलिसी जरूरी

यह दिखाता है कि भारत की सेमीकंडक्टर पॉलिसी बहुत जरूरी है। सरकार ने India Semiconductor Mission, Semiconductor Manufacturing Scheme शुरू की है। कोशिश यह है कि इम्पोर्टेड चिप्स पर निर्भरता कम की जाए।

फैब्रिकेशन और पैकेजिंग इन्वेस्टमेंट भारत में लाया जाए। इलेक्ट्रॉनिक सप्लाई चेन को रेजिलिएंट बनाया जाए।

लेकिन भारत अभी भी काफी पीछे है कमर्शियल फैब्रिकेशन प्लांट्स में, एडवांस मेमोरी चिप्स के मामले में।


मुख्य बातें (Key Points)

• Apple के MacBook, iPad, Apple TV आदि की कीमतें 14% से 74% तक बढ़ीं
• भारत सबसे ज्यादा प्रभावित बाजार – दुनिया में सबसे ज्यादा वृद्धि
• AI की मेमोरी डिमांड मुख्य कारण – DRAM और NAND Flash महंगे
• कमजोर रुपया, इम्पोर्ट ड्यूटी और छोटा मार्केट भारत के लिए समस्या
• iPhone की कीमतें अभी उतनी नहीं बढ़ीं – स्ट्रैटेजिक डिसीजन
• Dell, HP, Lenovo भी जल्द कीमतें बढ़ा सकते हैं

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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