World News Today: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान ने मुसीबत में फंसा रखा है। ट्रंप जल्दी ही ईरान से कोई डील करना चाहते हैं जिसे वो अपनी जीत के रूप में दिखा सके। लेकिन ईरान भी ट्रंप की परीक्षा ले रहा है।
अमेरिकी प्रतिनिधियों को पाकिस्तान बुलाता है और बिना किसी समझौते के वापस लौटा देता है। और अब खबर यह सामने आ रही है कि ट्रंप ने CIA को निर्देश दिए हैं कि वो ईरान को हुए नुकसान की ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाए।
Trump युद्ध से बाहर निकलने को बेताब
देखा जाए तो जिसके बाद ट्रंप ईरान युद्ध में खुद को विजेता बताते हुए युद्ध को खत्म करने का ऐलान कर सकें। यानी ईरान से डील हो या ना हो, अब ट्रंप को इससे कोई मतलब नहीं है। ट्रंप इस युद्ध को खत्म करने के लिए बेहद उतावले दिखाई दे रहे हैं।
वो ईरान की शर्तों पर डील करने को तैयार नहीं हैं और ईरान के खिलाफ नई युद्ध के लिए भी तैयार नहीं दिख रहे। इसलिए वो युद्ध से एकतरफा बाहर होने की तैयारी उसी तरह से कर रहे हैं जिस तरह से उन्होंने एकतरफा सीजफायर का ऐलान किया था।
समझने वाली बात यह है कि लेकिन एक डर यह भी बना हुआ है कि क्या ईरान ट्रंप के ऐलान को मानेगा? अगर ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला या फिर अमेरिका के मित्र देशों से हॉर्मुज में टैक्स वसूली शुरू कर दी तब अमेरिका क्या कर पाएगा? अमेरिका की पूरी दुनिया में किरकिरी हो जाएगी।
मध्यावधि चुनाव का डर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह डर लग रहा है कि अगर ईरान युद्ध फिर से शुरू होती है तब वो अमेरिका में ही घिर जाएंगे। और मध्यावधि चुनाव (Mid-Term Poll) में उनकी पार्टी की बड़ी हार भी तय हो जाएगी।
नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी हारती है तब राष्ट्रपति ट्रंप की ताकत भी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। इसलिए अब वो ईरान युद्ध से बाहर निकलना चाहते हैं।
जबकि ईरान अमेरिका को कोई मौका नहीं दे रहा है। ईरान की तरफ से ट्रंप को एक और प्रस्ताव बातचीत का दिए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। ईरान यह पहले ही कह चुका है कि बातचीत वो अपनी ही शर्तों पर करेगा।
उपराष्ट्रपति का सवाल
अगर गौर करें तो इसका संकेत अमेरिकी न्यूज वेबसाइट द अटलांटिक की रिपोर्ट से मिलता है। जिसमें दावा किया गया है कि JD Vance ने युद्ध को लेकर दी जा रही सूचनाओं पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने बंद कमरे में हुई रक्षा मामलों की बैठक में सीधे-सीधे सवाल कर दिया कि:
- क्या रक्षा मंत्री और जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष सही जानकारी दे रहे हैं?
- क्या पेंटागन अमेरिकी हथियारों को लेकर सच्चाई बता रहा है?
- क्या अमेरिका के पास अभी भी इतने हथियार हैं, खासतौर पर इंटरसेप्टर मिसाइलें कि वो एक बड़ी युद्ध लड़ सके?
हाइपरसोनिक मिसाइल का खतरा
इसके अलावा पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने एक ऐसी सच्चाई भी स्वीकार कर ली है जो अब अमेरिका को डरा रही है। अमेरिका के सैन्य अधिकारी ने सीनेट की सुनवाई के दौरान कहा है कि अमेरिका के पास फिलहाल चीन और रूस की आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों से बचने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि अब तक अमेरिका जिस रक्षा प्रणाली के भरोसे बैठा था वो केवल छोटे स्तर के हमलों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था। ईरान युद्ध के दौरान भी वो ईरान की कई हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा था।
ईरान की चतुराई
वहीं दूसरी तरफ ईरान भी अमेरिका की परेशानी बढ़ा रहा है। वो ट्रंप को कोई मौका नहीं दे रहा जिससे वह अपनी जीत का ऐलान कर सके। ईरान ने एक बार फिर कहा है कि उसके लिए युद्ध जैसे ही हालात हैं।
जिस तरह की स्थिति हॉर्मुज में बनी हुई है, ईरान उसे सामान्य नहीं मानता। सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार मॉनिटरिंग और सर्विलांस कर रही हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका का नाम लिए बिना ही ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि दुश्मन यह याद रखें कि अगर उसने अब ईरान पर हमला किया तो उसे नए हथियारों, नए तरीकों और नए मोर्चों पर जवाब दिया जाएगा।
नया प्रस्ताव आने वाला है
इस बीच खबर यह भी आ रही है कि ईरान ने अमेरिका को बातचीत का जो प्रस्ताव दिया था, ट्रंप ने उसे खारिज कर दिया है। ट्रंप की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण यह था कि प्रस्ताव में ईरान के परमाणु हथियार का कोई जिक्र नहीं किया गया।
इस बीच अब ईरान ट्रंप को बातचीत की शर्तों का एक और प्रस्ताव देने की तैयारी कर रहा है। और यह प्रस्ताव भी पाकिस्तान के जरिए ही अमेरिका तक पहुंचाया जाएगा। और इसमें भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की बात हो सकती है।
साथ ही इस बार ईरान की तरफ से बातचीत शुरू करने से पहले उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों की वापसी की शर्त भी लगाई जा सकती है।
King Charles ने Trump को दिया करारा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ब्रिटेन के King Charles III ने आईना दिखा दिया है। उन्होंने अमेरिका में ही ट्रंप को उन्हीं के अंदाज में जवाब दिया है।
और कहा है कि अगर ब्रिटेन नहीं होता तो आज अमेरिकी लोग फ्रेंच भाषा बोल रहे होते।
ईरान युद्ध में मदद नहीं मिली
आप जानते हैं कि ईरान युद्ध में मदद ना मिलने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ब्रिटेन से खासे नाराज हैं। उनकी तरफ से ब्रिटेन जैसे असहयोगी देशों को एक अलग सूची में डाल दिया गया है। और आने वाले समय में कार्रवाई की उम्मीद भी जताई जा रही है।
इस तनाव के बीच ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला अमेरिका दौरे पर पहुंचे। उनका यह राजकीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका ब्रिटेन से अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है।
स्टेट डिनर में करारा जवाब
किंग चार्ल्स थर्ड के लिए व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर आयोजित किया गया। और इस दौरान उन्होंने ट्रंप से मजाकिया अंदाज में कहा:
“आपने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका नहीं होता तो यूरोप के देश जर्मन बोल रहे होते। तो मैं कहूं कि अगर हम यानी ब्रिटेन नहीं होता तो आप फ्रेंच बोल रहे होते।”
देखा जाए तो यहां किंग चार्ल्स ने एक तीर से दो निशाना साधने का काम किया है। पहला तो उनका इशारा उत्तरी अमेरिका के उन इलाकों की तरफ था जहां पहले ब्रिटेन और फ्रांस का कब्जा था और दोनों के बीच लंबे समय तक लड़ाई हुई थी।
वहीं दूसरी तरफ उन्होंने नाम लेकर ट्रंप की उस टिप्पणी का जवाब दिया है जो उन्होंने जनवरी में दावोस सम्मेलन में की थी। उस समय ट्रंप ने कहा था कि अगर दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका मदद नहीं करता तो आप यानी ब्रिटेन के लोग जर्मन और थोड़ा जापानी बोल रहे होते।
कांग्रेस में संबोधन
इसके बाद किंग चार्ल्स थर्ड ने अमेरिकी कांग्रेस को भी संबोधित किया। जहां उन्होंने:
- NATO की एकता का संकल्प लिया
- रूस के आक्रमण के बीच यूक्रेन के लिए समर्थन का आह्वान किया
- ब्रिटेन और अमेरिका के $430 बिलियन के वार्षिक व्यापार की तारीफ की
- वैश्विक पर्यावरणीय चिंताओं का जिक्र किया
समझने वाली बात यह है कि यानी किंग चार्ल्स थर्ड ने ट्रंप को आईना दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ा। हालांकि उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी रोशनी डाली और आने वाले समय में बेहतर सहयोग की उम्मीद भी जताई है।
UAE ने छोड़ा OPEC
ईरान युद्ध ने खाड़ी देशों में सिर-फुटव्वल की स्थिति बना दी है। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर तेल निर्यात रोक दिया है। और इसके बाद से ही खाड़ी देशों में टकराव बढ़ता जा रहा है।
UAE ने खाड़ी सहयोग संगठन पर आरोप लगाए हैं कि युद्ध में सबसे ज्यादा हमले उस पर हुए। ईरान ने सबसे ज्यादा मिसाइल और ड्रोन उसके बड़े शहरों पर दागे लेकिन खाड़ी सहयोग संगठन ने यूएई की कोई मदद नहीं की।
1 मई से OPEC छोड़ेगा UAE
यूएई ने इसकी कड़ी आलोचना की है और ऐलान कर दिया है कि वह 1 मई 2026 से OPEC और OPEC+ को छोड़ रहा है।
यूएई के इस फैसले के पीछे कहीं ना कहीं सऊदी अरब को जिम्मेदार माना जा रहा है क्योंकि:
- यूएई की उत्पादन क्षमता 4.8 से 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक है
- लेकिन कोटे के कारण वह 3.2 से 3.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक ही उत्पादन कर पा रहा है
अब कोटे से मुक्त होकर यूएई ज्यादा तेल निकाल सकेगा और अपनी राष्ट्रीय हितों के मुताबिक नीतियां बना सकेगा।
अमेरिका का दबाव?
अगर गौर करें तो वैसे दावा यह भी किया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूएई की तरफ से यह कदम उठाया गया। अमेरिका लंबे समय से यह कोशिश कर रहा था कि OPEC को किसी भी तरह से तोड़ा जाए, उसे कमजोर किया जाए।
ऐसे में यूएई की तरफ से OPEC को छोड़ने का ऐलान कहीं ना कहीं अमेरिका को फायदा पहुंचा सकता है। क्योंकि OPEC देश दुनियाभर में तेल की आपूर्ति और कीमत पर नियंत्रण रखते हैं। और अब यूएई का इससे बाहर आना OPEC के बिखराव की शुरुआत मानी जा रही है।
सऊदी की परेशानी
व सऊदी अरब की परेशानी भी बढ़ती दिख रही है क्योंकि OPEC में उसका दबदबा था। अब यूएई के OPEC छोड़ने से इसकी एकजुटता कमजोर होगी और सऊदी का बाजार नियंत्रण घटेगा।
दिलचस्प बात यह है कि वैसे यूएई के इस फैसले के पीछे सऊदी के अलावा यमन और सूडान जैसे मुद्दों पर मतभेद भी बताए जा रहे हैं। साथ ही सऊदी का पाकिस्तान की तरफ झुकाव ने भी यूएई को नाराज कर दिया।
यह नाराजगी तब और बढ़ गई जब यूएई ने पाकिस्तान से अपना $3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस मांग लिया। और पाकिस्तान ने सऊदी से पैसे लेकर यूएई का पूरा कर्ज चुका दिया।
Pakistan का गहराता ऊर्जा संकट
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर कई देशों पर पड़ रहा है जिसमें पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। पाकिस्तान गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। जिसके चलते कई जिलों में लॉकडाउन जैसी स्थिति बनी हुई है।
पेट्रोलियम मंत्री का बड़ा खुलासा
और यह बात पेट्रोलियम मंत्री अली मलिक ने खुद स्वीकार की है। मलिक ने कहा कि देश के पास अब एक दिन का भी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार नहीं बचा है।
उन्होंने ईंधन संकट का जिक्र करते हुए कहा:
- “हमारे पास कोई रणनीतिक तेल भंडार नहीं है”
- “हमारे पास सिर्फ कमर्शियल भंडार है”
- “उसमें भी हमारे पास 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल है”
- “तेल मार्केटिंग कंपनियों के पास रिफाइंड उत्पाद केवल 20 से 21 दिनों तक चल सकता है”
- “हम भारत की तरह नहीं हैं जिसके पास 60 से 70 दिनों का भंडार है”
IMF की नई शर्तें
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पाकिस्तान ने IMF से कर्ज की मांग की। लेकिन यह कर्ज भी पाकिस्तान की मुसीबत बढ़ाता दिखाई दे रहा है।
क्योंकि इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड यानी IMF ने उसके $7 अरब के चल रहे एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी प्रोग्राम में 11 नई शर्तें जोड़ दी हैं।
बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक एक शर्त यह है कि:
- सरकार स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (SEZ) एक्ट में बदलाव करे
- मौजूदा टैक्स छूट जैसी सुविधाओं को धीरे-धीरे खत्म करना
- मुनाफे के आधार पर मिलने वाली राहत की जगह लागत के आधार पर राहत देना
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में एक और बात को लेकर चिंता जाहिर की गई कि सरकार कराची में 6000 एकड़ जमीन SEZ डेवलपर्स को बिना किसी शुल्क के लीज पर देने की योजना बना रही है।
Arunachal में मिली घर बनाने वाली मेंढक
आज तक आपने चिड़ियों को घोंसला बुनते देखा होगा या मधुमक्खियों को छत्ता तैयार करते हुए देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक मेंढक भी इंसानों की तरह अपना घर खुद बनाता है?
नामदफा टाइगर रिजर्व में खोज
जी हां, भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के नामदफा टाइगर रिजर्व में वैज्ञानिकों को मेंढक की एक नई प्रजाति मिली है। यह मेंढक इतना छोटा है कि इसका आकार हमारी उंगली के पोर के बराबर है। यानी करीब 2.3 से 3.5 सेंटीमीटर।
भारत में पहली बार
और भारतीय वन्य जीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में पहली बार ऐसा मेंढक मिला है जो मिट्टी से अपना घर तैयार करता है।
ज्यादातर मेंढक तो बस पानी या पत्तों पर अंडे देकर अपना काम खत्म कर देते हैं। लेकिन यह मेंढक उनसे काफी अलग है। यह जंगलों में जमीन पर गिरी पत्तियों के नीचे मिट्टी का एक छोटा सा कमरा बनाता है।
दिलचस्प बात तो यह है कि यह अपने इस घर में हवा के आने-जाने और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखता है। इसी मिट्टी के सुरक्षित घर में वह अपने अंडे देता है ताकि वह नष्ट होने से बचे रहें।
पहचान की निशानियां
अगर आप इसे पहचानना चाहें तो इसकी कुछ खास निशानियां हैं:
- दोनों आंखों के बीच एक गहरी भूरी रेखा
- पीठ पर अंग्रेजी के V आकार का निशान
- इसे फैंग फ्रॉग कहा जाता है क्योंकि निचले जबड़े में छोटे-छोटे दांतों जैसे उभार होते हैं
DNA टेस्ट के चौंकाने वाले नतीजे
वैज्ञानिकों ने जब इसका DNA टेस्ट किया तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। यह प्रजाति म्यांमार और चीन में तो पाई जाती थी लेकिन भारत में इसका मिलना एक बहुत बड़ी कामयाबी है।
दरअसल यह जिस नामदफा टाइगर रिजर्व में मिला है वो चीन और म्यांमार के बॉर्डर से ही सटा हुआ है। और दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले इलाकों में से एक है।
जानकारों का कहना है कि यह खोज बताती है कि पूर्वोत्तर भारत के जंगलों में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो दुनिया की नजरों से ओझल है।
मुख्य बातें (Key Points):
- ईरान युद्ध: Trump युद्ध से बाहर निकलने को बेताब, CIA को दिए नुकसान आकलन के निर्देश
- King Charles: ब्रिटेन के राजा ने Trump को दिया करारा जवाब, कहा – “ब्रिटेन नहीं होता तो फ्रेंच बोलते”
- UAE-OPEC: 1 मई से OPEC छोड़ेगा UAE, सऊदी अरब से तनाव, उत्पादन कोटा विवाद
- Pakistan संकट: 1 दिन का भी रणनीतिक तेल भंडार नहीं, IMF ने लगाई 11 नई शर्तें
- Arunachal खोज: घर बनाने वाली मेंढक की नई प्रजाति, नामदफा टाइगर रिजर्व में मिली













