Western Disturbance: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देशभर के कई राज्यों के लिए बड़ा मौसम अलर्ट जारी किया है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में उत्तर-पश्चिमी भारत में 4 से 10 अप्रैल 2026 तक भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा। विभाग ने बताया कि 7 और 8 अप्रैल को इस विक्षोभ की तीव्रता अपने चरम पर होगी, जिससे किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 4 अप्रैल 2026 को दोपहर 2 बजे प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि मध्य पाकिस्तान और उसके आसपास के इलाकों में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद पश्चिमी विक्षोभ अभी भी बना हुआ है। निचले और ऊपरी क्षोभमंडलीय स्तरों के बीच स्थित यह मौसम प्रणाली पूरे उत्तर भारत को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा, एक नया पश्चिमी विक्षोभ 7 अप्रैल 2026 से उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करने वाला है।

जम्मू-कश्मीर में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुज़फ़्फराबाद में 4 अप्रैल को कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। 7 से 10 अप्रैल के दौरान इस क्षेत्र में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (गति 30-50 किमी प्रति घंटा तक, झोंकों में 60 किमी प्रति घंटा तक) के साथ छिटपुट से काफी बड़े इलाके में हल्की से मध्यम बारिश या बर्फबारी का एक और दौर आने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश में 4 और 6 अप्रैल को, उत्तराखंड में 5 अप्रैल को, तथा 7 से 9 अप्रैल के दौरान फिर से गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ काफी बड़े इलाके में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। इन राज्यों में 7 और 8 अप्रैल को कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हो सकती है।
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मौसम का मिजाज
पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 4 अप्रैल को गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (गति 30-50 किमी प्रति घंटा तक, झोंकों में 60 किमी प्रति घंटा तक) के साथ कहीं-कहीं या छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 7 और 8 अप्रैल को भी इन राज्यों में 40-50 किमी प्रति घंटा की गति से चलने वाली तेज़ हवाओं के साथ बारिश का दौर रहेगा।
इन क्षेत्रों में 4, 7 और 8 अप्रैल को ओलावृष्टि होने की भी संभावना जताई गई है। गरज के साथ तेज़ हवाओं की गति 50-60 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जो झोंकों में 70 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश का अनुमान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 4, 7 और 8 अप्रैल को तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 और 8 अप्रैल को गरज, बिजली और तेज़ हवाओं के साथ छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। दोनों क्षेत्रों में 4 अप्रैल को ओलावृष्टि भी हो सकती है।
पूर्वी राजस्थान में 6 अप्रैल को और पश्चिमी राजस्थान में 4 अप्रैल को छिटपुट बारिश का अनुमान है। 4 और 7 अप्रैल को पूर्वी राजस्थान में तथा 6 और 7 अप्रैल को पश्चिमी राजस्थान में ओलावृष्टि हो सकती है।
मध्य भारत में ओलावृष्टि का खतरा
मध्य भारत के राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहेगा। अगले 5 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में गरज, बिजली चमकने और तेज़ हवाओं (गति 30-50 किमी प्रति घंटा तक) के साथ कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
4 अप्रैल को पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना जताई गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय करें।
महाराष्ट्र में मौसम अलर्ट
मध्य महाराष्ट्र में 4 अप्रैल को, मराठवाड़ा में 4 और 5 अप्रैल को, तथा गुजरात राज्य में 4 और 8 अप्रैल को गरज, बिजली चमकने और तेज़ हवाओं (गति 30-40 किमी प्रति घंटा तक) के साथ कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। 4 अप्रैल को मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में छिटपुट ओलावृष्टि की संभावना है।
पूर्वी भारत में बारिश और तेज़ हवाएं
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 4 से 7 और 9 तारीख को, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 4 से 6 और 9 तारीख को, बिहार में 5, 6 और 9 तारीख को, झारखंड में 4, 7 और 8 तारीख को, तथा ओडिशा में अगले 5 दिनों के दौरान गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (गति 30-50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है) के साथ कहीं-कहीं से लेकर छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम तथा बिहार में 7 और 8 तारीख को, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 7 तारीख को, तथा झारखंड में 5 से 7 अप्रैल के दौरान कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की संभावना है। 8 और 9 अप्रैल को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
पूर्वोत्तर भारत में भारी वर्षा का अनुमान
अरुणाचल प्रदेश में 5 तारीख को और फिर 7 से 10 अप्रैल के दौरान, तथा असम और मेघालय में 5, 8 और 9 अप्रैल को कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। 5 और 8 अप्रैल को असम और मेघालय में, तथा 4 और 5 अप्रैल को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज, बिजली चमकने और तेज़ हवाओं (गति 30-40 किमी प्रति घंटा तक) के साथ कहीं-कहीं से लेकर काफी व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
दक्षिण भारत में मौसम का हाल
केरल और माहे में 4 से 7 तारीख के दौरान, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 4 से 8 तारीख के दौरान, रायलसीमा में 5 से 8 तारीख के दौर��न, तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 4 से 8 तारीख के दौरान गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (जिनकी गति 30-50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है) के साथ कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तथा केरल और माहे में 4 से 6 अप्रैल के दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
तापमान में गिरावट का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में 4 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। 5 और 6 अप्रैल को इसमें धीरे-धीरे 2-3°C की बढ़ोतरी होगी और 7 से 10 अप्रैल के बीच 3-5°C की गिरावट आएगी। हालांकि, 9 अप्रैल 2026 तक यह सामान्य या सामान्य से नीचे ही रहेगा।
पूर्वी भारत में 4 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। 5 से 8 अप्रैल के बीच इसमें धीरे-धीरे 3-4°C की गिरावट आएगी और 10 अप्रैल तक फिर कोई खास बदलाव नहीं होगा।
पश्चिमी भारत में 7 अप्रैल तक अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है। 8 से 10 अप्रैल के बीच अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2-3°C की बढ़ोतरी होगी।
ओडिशा में गर्म और आर्द्र मौसम
4 अप्रैल को ओडिशा के कुछ अलग-अलग इलाकों में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की प्रबल संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें और खुद को हाइड्रेटेड रखें।
मछुआरों के लिए चेतावनी
मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे 4 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 के दौरान कुछ विशेष क्षेत्रों में न जाएं। अरब सागर के संबंध में 6 अप्रैल को ओमान की खाड़ी के ऊपर, 7 अप्रैल को ओमान की खाड़ी और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी अरब सागर के ऊपर, तथा 8 अप्रैल को खंभात की खाड़ी के ऊपर मछली पकड़ने से बचने की सलाह दी गई है। बंगाल की खाड़ी के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
दिल्ली-NCR में मौसम का हाल
दिल्ली और NCR में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में 2-4°C तक और न्यूनतम तापमान में 1-2°C तक की गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में दिल्ली में न्यूनतम तापमान 18-21°C की सीमा में और अधिकतम तापमान 33-34°C की सीमा में रह रहा है।
4 अप्रैल को दिल्ली में आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, जो दोपहर तक आम तौर पर बादलों से घिर जाएगा। शाम के समय बहुत हल्की बारिश या बूंदाबांदी के साथ गरज-बिजली कड़कने और तेज़ सतही हवाएं (20-30 किमी प्रति घंटा की गति से, जो झोंकों में 40 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं) चलने की संभावना है। अधिकतम तापमान 30°C से 32°C के बीच रहने की संभावना है।
7 अप्रैल को दिल्ली में आसमान आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। सुबह से दोपहर के बीच गरज-बिजली कड़कने और 30-40 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से चलने वाली तेज़ सतही हवाओं (जो 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती हैं) के साथ बहुत हल्की से हल्की बारिश के एक या दो दौर आने की संभावना है।
किसानों के लिए कृषि-मौसम सलाह
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ और झारखंड में फलों के बगीचों और सब्जियों के पौधों को क्षति से बचाने के लिए हेल नेट या हेल कैप का उपयोग करने की सलाह दी गई है। परिपक्व फसलों और फलों की कटाई तथा तुड़ाई अविलंब करें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करें।
जम्मू-कश्मीर में कटाई की गई सरसों, मसूर और चने को सुरक्षित स्थानों पर रखें। खड़ी फसलों से अतिरिक्त वर्षा जल निकालने की व्यवस्था करें। तेज़ हवाओं से फसल को बचाने के लिए मटर की बेलों को सहारा (स्टेकिंग) दें।
अरुणाचल प्रदेश में ग्रीष्मकालीन झूम धान, मक्का और सब्जियों की बुवाई को स्थगित करें। पत्ता गोभी, मटर, सरसों, देर से पकने वाली धान की किस्मों और आलू की कटाई या खुदाई करें और उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
असम में खड़ी फसलों के खेतों से अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी की व्यवस्था बनाए रखें। उपयुक्त मिट्टी की नमी की स्थिति में उड़द, भिंडी और ओलिटोरियस जूट की बुवाई करें तथा केले, हल्दी और अदरक की रोपाई करें।
केरल और तमिलनाडु में केले के पौधों को गिरने से बचाने के लिए उन्हें सहारा प्रदान करें। काली मिर्च, लौंग, जायफल और दालचीनी में बेहतर वर्षा जल संग्रहण हेतु क्यारियां तैयार करें। मध्यम या भारी वर्षा के दौर में कीटनाशकों का प्रयोग न करें।
पशुपालन के लिए सलाह
भारी वर्षा या ओलावृष्टि के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार दें। चारे और पशु आहार को खराब होने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थान पर रखें। तालाबों के चारों ओर जाली सहित उचित निकास की व्यवस्था करें ताकि अधिक जल भराव की स्थिति में मछलियां बाहर न निकलें।
ओलावृष्टि और तूफान से संभावित प्रभाव
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि से निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं:
• पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं, सड़क किनारे लगे बड़े पेड़ उखड़ सकते हैं।
• केले और पपीते के पेड़ों को मामूली से लेकर गंभीर नुकसान हो सकता है।
• शाखाएं टूटने से बिजली और संचार लाइनों को मामूली से लेकर गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
• तेज हवा या ओलावृष्टि से बागानों, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।
• खुले स्थानों पर ओलों से लोगों और मवेशियों को चोट लग सकती है।
• तेज हवाओं के कारण कमजोर ढांचों को आंशिक नुकसान पहुंच सकता है।
• कच्चे मकानों, दीवारों और झोपड़ियों को मामूली नुकसान हो सकता है।
• ढीली वस्तुएं उड़ सकती हैं।
लोगों के लिए सुरक्षा सुझाव
लोगों को सलाह दी जाती है कि:
• मौसम की स्थिति पर नजर रखें और आवश्यकतानुसार सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें।
• घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें और संभव हो तो यात्रा करने से बचें।
• सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें।
• कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और न ही कंक्रीट की दीवारों से टेक लगाकर खड़े हों।
• बिजली या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्लग निकाल दें।
• तुरंत पानी से बाहर निकल जाएं।
• बिजली का संचालन करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें।
पिछले 24 घंटों में दर्ज महत्वपूर्ण वर्षा
आज सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान कुछ स्थानों पर महत्वपूर्ण वर्षा दर्ज की गई:
जम्मू-कश्मीर: राज पुरा (जिला पुंछ) 6 सेमी, राजौरी (जिला राजौरी) और बटोट (जिला रामबन) 5-5 सेमी, नौगाम (जिला कुपवाड़ा) और पुंछ 4-4 सेमी।
तमिलनाडु: कुंडेरीपल्लम (जिला इरोड) 6 सेमी, पिलावक्कल (जिला विरुदुनगर) और वराट्टुपल्लम (जिला इरोड) 4-4 सेमी।
केरल: रन्नी (जिला पथानामथिट्टा) 5 सेमी, वडकारा (जिला कोझिकोड) 4 सेमी।
उत्तर आंतरिक कर्नाटक: बेलगावी 7 सेमी, हुक्केरी (जिला बेलगावी) 4 सेमी।
बिहार: शेरघाटी (जिला गया) 4 सेमी।
पिछले 24 घंटों में तेज हवाएं
पिछले 24 घंटों से तेज हवाएं चल रही हैं (अधिकतम गति किमी प्रति घंटा में):
झारखंड: बरही 67 किमी/घंटा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश: आगरा 67 किमी/घंटा, शाहजहांपुर 48 किमी/घंटा
हिमाचल प्रदेश: नेरी 59 किमी/घंटा, ताबो 46 किमी/घंटा
बिहार: अरवल 57 किमी/घंटा
गुजरात क्षेत्र: आनंद 56 किमी/घंटा
पंजाब: मोहाली और संगरूर 56-56 किमी/घंटा, बठिंडा 50 किमी/घंटा
जम्मू-कश्मीर: राजौरी 48 किमी/घंटा
मौसम प्रणालियों का विवरण
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, वर्तमान में निम्नलिखित मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं:
• मध्य पाकिस्तान और उसके आसपास के इलाकों में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद पश्चिमी विक्षोभ निचले और ऊपरी क्षोभमंडलीय स्तरों के बीच स्थित है।
• निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर पंजाब और उसके आसपास के इलाकों में एक ऊपरी-हवाई चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।
• निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर छत्तीसगढ़ और उसके आसपास के इलाकों में एक ऊपरी-हवाई चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।
• निचले क्षोभमंडलीय स्तरों पर दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और उसके आसपास के इलाकों में एक ऊपरी-हवाई चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है।
• एक नया पश्चिमी विक्षोभ 7 अप्रैल 2026 से उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है।
इस मौसम परिवर्तन का आम जनजीवन पर प्रभाव
अचानक मौसम में बदलाव से आम लोगों के जीवन पर काफी असर पड़ने की संभावना है। किसानों को खड़ी फसलों का नुकसान हो सकता है, खासकर गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों को। ओलावृष्टि से फलों के बगीचों, सब्जियों और बागवानी फसलों को भारी क्षति पहुंच सकती है।
यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों और नदी तटों के कई हिस्सों में जलभराव या बाढ़ की स्थिति बन सकती है। नगरपालिका सेवाओं (पानी, बिजली आदि) में स्थानीय और अल्पकालिक व्यवधान आ सकता है।
तेज हवाओं के कारण बिजली और संचार लाइनें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे कुछ इलाकों में अस्थायी रूप से बिजली गुल हो सकती है। पुरानी इमारतों और खराब रखरखाव वाली संरचनाओं के लिए खतरा बढ़ सकता है।
क्या है पश्चिमी विक्षोभ और इसका असर
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसम प्रणाली है जो भूमध्य सागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर पश्चिमी जेट स्ट्रीम के माध्यम से भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचती है। यह निचले दबाव की एक प्रणाली होती है जो नमी लेकर आती है और उत्तर-पश्चिमी भारत में बारिश और बर्फबारी का कारण बनती है।
सर्दियों और वसंत ऋतु में ये विक्षोभ उत्तर भारत में बारिश लाते हैं, जो रबी फसलों के लिए फायदेमंद होते हैं। हालांकि, जब ये बहुत सक्रिय होते हैं, तो ओलावृष्टि, भारी बारिश और तेज हवाओं के रूप में नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
इस बार का पश्चिमी विक्षोभ विशेष रूप से सक्रिय है और इसकी तीव्रता 7-8 अप्रैल को अपने चरम पर होगी। यही कारण है कि मौसम विभाग ने व्यापक क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी की है।
मुख्य बातें (Key Points)
• सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में उत्तर-पश्चिमी भारत में 4 से 10 अप्रैल तक बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा।
• 7 और 8 अप्रैल को एक नए पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता अपने चरम पर होगी।
• जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में तेज हवाओं और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी।
• मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, विदर्भ में 4 अप्रैल को ओलावृष्टि की संभावना।
• पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड में 5 से 7 अप्रैल के दौरान ओलावृष्टि और तेज हवाओं की आशंका।
• अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय में 5 से 10 अप्रैल तक कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
• दिल्ली में 4 और 7 अप्रैल को गरज-बिजली के साथ हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना।
• उत्तर-पश्चिम भारत में 7 से 10 अप्रैल के बीच तापमान में 3-5°C की गिरावट का अनुमान।
• किसानों को खड़ी फसलों की सुरक्षा और परिपक्व फसलों की तुरंत कटाई की सलाह दी गई है।
• मछुआरों को 4 से 9 अप्रैल तक अरब सागर के कुछ विशेष क्षेत्रों में न जाने की चेतावनी।












