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The News Air - Breaking News - TVK Crosses 118 Seats: Vijay Thalapathy बने तमिलनाडु के नए CM

TVK Crosses 118 Seats: Vijay Thalapathy बने तमिलनाडु के नए CM

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर, फिल्म स्टार से मुख्यमंत्री तक का ऐतिहासिक सफर

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 9 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, सियासत
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Vijay Thalapathy
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Vijay Thalapathy CM Tamil Nadu: तमिलनाडु की राजनीति ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहां कुछ भी असंभव नहीं है। दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय थलपति ने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कलगम (TVK) के साथ जो राजनीतिक करिश्मा दिखाया है, वह आने वाले दशकों तक याद किया जाएगा। 108 सीटों पर रुकने के बाद चार दिनों तक अटकी सरकार आखिरकार बनने जा रही है।

देखा जाए तो, यह सफर इतना आसान नहीं था। जब चुनाव परिणाम आए, तो विजय की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े 118 तक पहुंचना एक अलग ही चुनौती साबित हुआ। गवर्नर के विवादास्पद रवैये से लेकर राजनीतिक दलों के दांवपेच तक, यह कहानी हर मोड़ पर रोमांचक रही है।

एक्टर से CM तक का अभूतपूर्व सफर

विजय थलपति ने जो कारनामा किया है, वह तमिलनाडु की राजनीति में MGR के बाद शायद सबसे बड़ा सरप्राइज है। सिर्फ दो साल की ग्राउंड वर्क के साथ, जिस काम में किसी पार्टी को 20 साल लग जाते हैं, वह विजय ने कर दिखाया। फरवरी 2024 में उन्होंने अपने फैन क्लब्स को राजनीतिक कार्यकर्ताओं में बदल दिया। सितंबर 2025 में उनकी रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत के बावजूद, उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।

नवंबर 2025 में महाबलीपुरम की विशाल रैली में विजय को आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया। और सबसे बोल्ड कदम था मार्च 2026 में लिया गया फैसला – किसी भी बड़ी पार्टी के साथ गठबंधन किए बिना, 233 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का साहसिक निर्णय।

85% वोटिंग का रिकॉर्ड और चौंकाने वाले नतीजे

दिलचस्प बात यह है कि इस चुनाव में तमिलनाडु ने अपने इतिहास का सबसे ऊंचा वोटिंग प्रतिशत दर्ज किया – 85.1%। यह आंकड़ा खुद में बताता है कि जनता में विजय को जिताने का कितना उत्साह था। जब नतीजे आए, तो TVK ने 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। 59 सालों से DMK और AIADMK के बीच चल रही “दोपाली” को तोड़ते हुए एक नई पार्टी ने तूफान मचा दिया।

सिटिंग मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, जो अपनी सीट से तीन बार लगातार जीत चुके थे, वे भी इस बार हार गए। यह विजय थलपति की लहर की ताकत को दर्शाता है। DMK को 59 सीटें, AIADMK को 47, कांग्रेस को 5, लेफ्ट पार्टियों को 6, और बाकी छोटी पार्टियों को मिलाकर कुल 7 सीटें मिलीं।

118 का जादुई आंकड़ा और सरकार बनाने की जद्दोजहद

अब यहां असली ड्रामा शुरू हुआ। तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी, और TVK के पास सिर्फ 108 थीं। यानी 10 सीटों की कमी। इस स्थिति में कई विकल्प थे – AIADMK का समर्थन (47 सीटें), कांग्रेस का साथ (5 सीटें), लेफ्ट पार्टियों का सहयोग (6 सीटें), या BJP-PMK का समर्थन।

समझने वाली बात यह है कि हर विकल्प के अपने राजनीतिक समीकरण थे। AIADMK ने साफ इनकार कर दिया। उनकी चिंता यह थी कि अगर विजय के साथ जुड़े, तो उनकी अपनी पार्टी की पहचान खत्म हो जाएगी। दोनों पार्टियों की विचारधारा समान है – द्रविड़ राजनीति और कल्याणकारी नीतियां। और विजय की लोकप्रियता तो बेमिसाल है। तो AIADMK के लिए यह आत्मघाती साबित होता।

कांग्रेस का दोहरा खेल और लेफ्ट का साथ

कांग्रेस की भूमिका काफी दिलचस्प रही। चुनाव से पहले जब विजय ने गठबंधन की संभावना तलाशी, तो कांग्रेस ने मना कर दिया। वे DMK के पुराने सहयोगी थे और उसी गठबंधन में बने रहे। लेकिन जैसे ही नतीजे आए और TVK सबसे बड़ी पार्टी बनी, कांग्रेस ने तुरंत DMK का साथ छोड़कर विजय को समर्थन दे दिया।

उनका तर्क था – विजय भी BJP-विरोधी हैं, कांग्रेस भी। तो यह “प्राकृतिक गठबंधन” है। इसी तर्क पर लेफ्ट पार्टियों ने भी समर्थन दिया। CPI(M) और अन्य कम्युनिस्ट पार्टियों के सामने अस्तित्व का संकट था – पहली बार ऐसा हो सकता था कि भारत में कहीं भी कोई कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में न हो। इसलिए उन्होंने भी विजय का साथ देने का फैसला किया।

इस तरह गणित बैठी: TVK की 108 + कांग्रेस की 5 + लेफ्ट की 6 = कुल 119 सीटें। बहुमत हासिल!

गवर्नर का विवादास्पद रोल और संवैधानिक संकट

अब यहां सबसे विवादास्पद अध्याय आता है। सामान्य परंपरा यह है कि राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। फिर शपथ ग्रहण होता है, और उसके बाद विधानसभा में बहुमत साबित किया जाता है। यदि बहुमत साबित नहीं हो पाता, तो सरकार गिर जाती है।

लेकिन तमिलनाडु के राज्यपाल आरलेकर ने उल्टा किया। उन्होंने कहा – पहले मुझे 118 विधायकों की लिस्ट दिखाओ, तभी मैं सरकार बनाने का न्योता दूंगा। यह पूरी तरह से अभूतपूर्व और संविधान की भावना के खिलाफ था। राज्यपाल को तटस्थ रहना चाहिए, लेकिन केंद्र की BJP सरकार द्वारा नियुक्त होने के कारण, उन्होंने एक पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया।

गौर करें तो, विजय ने दो बार राज्यपाल से मुलाकात की, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिली। राज्यपाल के कार्यालय से आधिकारिक बयान आया कि “बहुमत साबित नहीं हो पाया है।” इसी कारण नेहरू स्टेडियम में 7 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह भी स्थगित करना पड़ा। चार दिनों तक तमिलनाडु में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना रहा।

द्रविड़ राजनीति की विरासत और नया मोड़

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि तमिलनाडु की राजनीति 1950 के दशक से एक खास पैटर्न पर चलती रही है। पेरियार द्वारा शुरू की गई द्रविड़ आंदोलन ने यहां की राजनीति को ब्राह्मणवाद-विरोधी और द्रविड़ अस्मिता केंद्रित बना दिया। इसी आधार पर DMK और AIADMK जैसी पार्टियां बनीं।

1967 से लेकर अब तक, हर चुनाव में DMK और AIADMK में से कोई एक जीतती थी। वे बारी-बारी से सत्ता में आते थे। कभी कोई पार्टी लगातार दो बार नहीं जीती। AIADMK का उदय MGR जैसे फिल्म स्टार के कारण हुआ, जिसके बाद जयललिता ने विरासत संभाली।

रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गजों ने भी राजनीति में हाथ आजमाया, लेकिन सफल नहीं हो सके। रजनीकांत ने तो शुरू करने से पहले ही किनारा कर लिया। कमल हासन की पार्टी ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई। लेकिन विजय थलपति ने वह कर दिखाया जो अभूतपूर्व था – महज दो सालों में एक मजबूत राजनीतिक संगठन खड़ा करना और पुरानी पार्टियों को चुनौती देना।

फैन क्लब से राजनीतिक मशीनरी तक

विजय की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका जमीनी काम था। उन्होंने सिर्फ अपने स्टारडम पर भरोसा नहीं किया। फरवरी 2024 में उन्होंने अपने फैन क्लबों को राजनीतिक कार्यकर्ताओं में बदलना शुरू किया। ये फैन क्लब पूरे तमिलनाडु में फैले हुए थे और इनकी संख्या लाखों में थी।

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इन फैन क्लबों को संगठित किया गया, उन्हें प्रशिक्षण दिया गया, और उन्होंने घर-घर जाकर प्रचार किया। सोशल वेलफेयर के काम किए, द्रविड़ विचारधारा को बढ़ावा दिया, और विजय के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। यह एक शानदार उदाहरण है कि कैसे एक मजबूत जमीनी संगठन बनाया जाता है।

सितंबर 2025 की वह भगदड़ भी विजय की लोकप्रियता की गवाह थी। उनकी रैली में इतनी भीड़ उमड़ी कि दुर्भाग्यवश 41 लोगों की मौत हो गई। लेकिन इससे उनकी छवि पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। लोग समझ गए कि यह एक दुर्घटना थी, और उनका समर्थन बना रहा।

अकेले चुनाव लड़ने का जोखिम भरा फैसला

मार्च 2026 में विजय ने सबसे बड़ा जोखिम उठाया। जब सभी को लग रहा था कि वे किसी बड़ी पार्टी के साथ गठबंधन करेंगे, उन्होंने ऐलान किया – 233 सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे। कोई गठबंधन नहीं, कोई समझौता नहीं।

यह बेहद साहसिक निर्णय था। एक नई पार्टी के लिए यह आत्मघाती भी हो सकता था। लेकिन विजय को अपनी जमीनी ताकत पर पूरा भरोसा था। और यह भरोसा सही साबित हुआ। इस फैसले ने उनकी छवि को और मजबूत किया – एक निडर नेता की, जो किसी से समझौता नहीं करता।

9 मई को होगा ऐतिहासिक शपथ ग्रहण

अब आखिरकार सारी अड़चनें दूर हो चुकी हैं। कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के समर्थन से TVK के पास 119 सीटें हैं। हालांकि एक छोटी तकनीकी समस्या है – विजय ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीते हैं। नियम के अनुसार, उन्हें 14 दिन के भीतर एक सीट छोड़नी होगी। इसका मतलब है कि वहां उपचुनाव होगा और अस्थायी रूप से संख्या 118 पर आ जाएगी। लेकिन फिलहाल बहुमत सुरक्षित है।

कल यानी 9 मई 2026 को सुबह 11 बजे नेहरू इंडोर स्टेडियम में विजय थलपति मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह तमिलनाडु के इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण होगा। एक ऐसा क्षण जब 59 साल की DMK-AIADMK की दोपाली टूटेगी, और एक नया युग शुरू होगा।

आम आदमी के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव

राहत की बात यह है कि विजय ने अपने चुनाव प्रचार में आम आदमी के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर दिया। द्रविड़ विचारधारा को अपनाते हुए भी उन्होंने एक नई, युवा ऊर्जा का संचार किया।

अगर गौर करें, तो तमिलनाडु में पिछले कुछ दशकों से राजनीति में नए चेहरों की कमी थी। DMK और AIADMK में पुरानी लीडरशिप चल रही थी। विजय ने एक ताजगी भरा विकल्प दिया, जिसे खासकर युवाओं ने खुले दिल से अपनाया।

यह सवाल उठता है कि क्या विजय अपने वादों को पूरा कर पाएंगे? क्या वे एक फिल्म स्टार से एक सफल मुख्यमंत्री बन पाएंगे? यह समय ही बताएगा। लेकिन फिलहाल उन्होंने जो कर दिखाया है, वह अपने आप में एक प्रेरणादायक कहानी है।

चुनौतियां और आगे का रास्ता

विजय के सामने अब असली चुनौती है – शासन करने की। चुनाव जीतना एक बात है, लेकिन एक राज्य को चलाना बिल्कुल अलग। उन्हें एक अनुभवी टीम बनानी होगी, नौकरशाही को संभालना होगा, और विपक्ष के दबाव को झेलना होगा।

DMK और AIADMK अब विपक्ष में हैं, लेकिन वे कमजोर नहीं हैं। उनके पास दशकों का अनुभव है। वे हर कदम पर सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे। विजय को बहुत सावधानी से काम करना होगा।

कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के साथ गठबंधन में भी अपनी चुनौतियां हैं। हर पार्टी की अपनी मांगें होंगी, अपने एजेंडे होंगे। इन्हें संतुलित करना और साथ ही अपनी पहचान बनाए रखना आसान नहीं होगा।

जानें पूरा मामला – द्रविड़ राजनीति का इतिहास

तमिलनाडु की राजनीति को समझने के लिए द्रविड़ आंदोलन को समझना जरूरी है। 1950 के दशक में पेरियार ने इस आंदोलन को शुरू किया था। उनका मानना था कि दक्षिण भारत की द्रविड़ संस्कृति उत्तर भारत की आर्य संस्कृति से अलग है। उन्होंने इसे ब्राह्मणवाद-विरोध के साथ जोड़ा।

इसी आधार पर DMK (द्रविड़ मुनेत्र कलगम) का गठन हुआ, जो 1967 में पहली बार सत्ता में आई। बाद में MGR ने AIADMK (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कलगम) बनाई। MGR एक फिल्म स्टार थे और उन्होंने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल राजनीति में किया।

तब से लेकर अब तक, ये दोनों पार्टियां बारी-बारी से सत्ता में रहीं। OBC और दलित राजनीति का एक खास मिश्रण यहां देखने को मिलता है। ब्राह्मण नेताओं को टिकट नहीं दिया जाता। यह एक अलग तरह की सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था है।

विजय ने भी इसी द्रविड़ विचारधारा को अपनाया है, लेकिन एक नए अंदाज में। उन्होंने पुरानी पार्टियों के भ्रष्टाचार और कुशासन को निशाना बनाया, और बदलाव का वादा किया। यही उनकी सफलता की कुंजी रही।

मुख्य बातें (Key Points)

• TVK की ऐतिहासिक जीत: विजय थलपति की पार्टी ने 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनी, 59 साल की DMK-AIADMK दोपाली को तोड़ते हुए

• कांग्रेस-लेफ्ट का समर्थन: 5 सीटों वाली कांग्रेस और 6 सीटों वाली लेफ्ट पार्टियों के समर्थन से TVK 119 सीटों पर पहुंची, बहुमत का आंकड़ा 118

• गवर्नर का विवादास्पद रोल: राज्यपाल आरलेकर ने परंपरा तोड़ते हुए पहले बहुमत की सूची मांगी, चार दिन तक सरकार बनने में देरी हुई

• 85% वोटिंग टर्नआउट: तमिलनाडु के इतिहास में सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत, सिटिंग CM स्टालिन भी अपनी सीट से हारे

• 9 मई को शपथ ग्रहण: नेहरू इंडोर स्टेडियम में सुबह 11 बजे विजय थलपति मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: विजय थलपति की पार्टी TVK ने कितनी सीटें जीतीं?

TVK ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतीं। बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी, जो कांग्रेस (5 सीटें) और लेफ्ट पार्टियों (6 सीटें) के समर्थन से पूरी हुई। कुल मिलाकर गठबंधन के पास 119 सीटें हैं।

प्रश्न 2: विजय थलपति कब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे?

विजय थलपति 9 मई 2026 को सुबह 11 बजे नेहरू इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। गवर्नर के विवादास्पद रवैये के कारण शपथ ग्रहण में चार दिन की देरी हुई थी।

प्रश्न 3: तमिलनाडु में इस चुनाव का वोटिंग प्रतिशत कितना रहा?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में 85.1% वोटिंग हुई, जो राज्य के इतिहास में सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत है। यह आंकड़ा विजय थलपति की लोकप्रियता और जनता के उत्साह को दर्शाता है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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