शनिवार, 9 मई 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले BJP CM: ममता को हराने वाले योद्धा का ऐतिहासिक उदय

शुभेंदु अधिकारी बने बंगाल के पहले BJP CM: ममता को हराने वाले योद्धा का ऐतिहासिक उदय

294 में से 208 सीट जीतकर बनी बीजेपी सरकार, ममता का 15 साल का राज खत्म, अमित शाह ने की घोषणा, 7 मई को शपथ ग्रहण

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 9 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पश्चिम बंगाल, सियासत
A A
0
Suvendu Adhikari CM West Bengal
104
SHARES
692
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Suvendu Adhikari CM West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा गया है। जिस राज्य में कभी बीजेपी की उपस्थिति नगण्य थी, वहां आज पार्टी अपना पहला मुख्यमंत्री देने जा रही है। और यह मुख्यमंत्री कोई और नहीं, बल्कि शुभेंदु अधिकारी हैं – वही नेता जिन्होंने ममता बनर्जी को उनके अपने गढ़ में न सिर्फ एक बार, बल्कि दो बार मुंह की खाई दी।

2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 सीटों में से 208 सीटें जीतकर तूफानी जीत दर्ज की है। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक भूचाल है। 15 साल तक ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) का निर्बाध शासन यहां रहा। और उससे पहले करीब 34 साल लेफ्ट पार्टियों का वर्चस्व। यानी कुल मिलाकर लगभग आधी सदी तक बंगाल में गैर-बीजेपी विचारधारा का राज रहा।

देखा जाए तो, शुभेंदु अधिकारी की नियुक्ति एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद कोलकाता गए और नवनिर्वाचित विधायकों से परामर्श किया। और सभी एक नाम पर सहमत हुए – शुभेंदु अधिकारी।

7 मई 2026 को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा, जो बंगाल के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण होगा।

ममता ने इस्तीफा देने से किया इनकार, गवर्नर ने भंग की विधानसभा

चुनाव परिणाम आने के बाद एक दिलचस्प राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। ममता बनर्जी ने साफ-साफ कह दिया कि वे इस्तीफा नहीं देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव गलत तरीके से जीते गए हैं।

अगर गौर करें, तो संविधान में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं है कि हारने वाले मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना ही होगा। यह एक परंपरा और औपचारिकता है। लेकिन जब इस्तीफा नहीं आया, तो पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने अपने विवेकाधिकार का प्रयोग किया।

समझने वाली बात यह है कि ममता बनर्जी का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। इसलिए राज्यपाल ने पुरानी राज्य विधानसभा को भंग कर दिया, ताकि नई सरकार का गठन हो सके।

यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि ममता बनर्जी इस हार को स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं। लेकिन संवैधानिक प्रक्रिया ने अपना काम किया और बीजेपी के लिए रास्ता साफ हो गया।

शुभेंदु अधिकारी: “ममता किलर” से मुख्यमंत्री तक का सफर

शुभेंदु अधिकारी की कहानी अपने आप में एक राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। यह एक ऐसा झटका था जो किसी को उम्मीद नहीं थी। हालांकि ममता बाद में भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी रहीं।

लेकिन इस बार 2026 में शुभेंदु ने कमाल कर दिया। उन्होंने ममता को उनकी अपनी सीट भवानीपुर में ही हरा दिया। यानी दो बार, दो अलग-अलग सीटों पर ममता बनर्जी को पराजित करना – यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय राजनीति में आपकी छवि तब बनती है जब आप किसी दिग्गज नेता को हराते हैं। ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली में प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल को हराकर अचानक सुर्खियां बटोरीं। शुभेंदु के लिए ममता को हराना एक “गेम चेंजर” साबित हुआ।

वे अब सिर्फ एक विधायक नहीं रहे, बल्कि टीएमसी-विरोधी राजनीति के प्रतीक बन गए। जनता में एक भावनात्मक जुड़ाव बना कि यह वही शख्स है जिसने ममता दीदी को हराया।

5 बड़े कारण: क्यों शुभेंदु को चुना गया मुख्यमंत्री

बंगाल बीजेपी में कई वरिष्ठ नेता हैं – दिलीप घोष, सुकांता मजूमदार, अग्निमित्रा पॉल, रूपा गांगुली। फिर शुभेंदु अधिकारी ही क्यों? आइए समझते हैं पांच ठोस कारण:

पहला – “जॉइंट किलर” का नैरेटिव

शुभेंदु ने सिर्फ एक नहीं, बल्कि दो बार ममता को हराया। 2021 में नंदीग्राम और 2026 में भवानीपुर। यह उपलब्धि उन्हें बाकी नेताओं से अलग करती है। जनता की नजर में वे “योद्धा” बन गए हैं।

इमोशनली चार्ज्ड कॉन्टेक्स्ट था यह। ममता बनर्जी कई दशकों से बंगाल की राजनीति का चेहरा रही हैं। उन्हें हराना बेहद मुश्किल माना जाता था। शुभेंदु ने यह “असंभव” कर दिखाया। इसलिए वे स्वाभाविक रूप से बीजेपी के सबसे मजबूत बंगाली चेहरे बन गए।

दूसरा – टीएमसी की अंदरूनी जानकारी

दिलचस्प बात यह है कि शुभेंदु अधिकारी हमेशा से बीजेपी में नहीं थे। वे ममता बनर्जी के दाएं हाथ माने जाते थे। 2020 में उन्होंने बीजेपी में प्रवेश किया।

इससे पहले वे तृणमूल कांग्रेस में कैबिनेट मंत्री थे। ग्रामीण विस्तार की पूरी रणनीति उन्हीं के हाथों में थी। वे टीएमसी की कार्यप्रणाली को अंदर से जानते हैं – उसकी ताकत, उसकी कमजोरियां, उसके नेटवर्क।

यही नहीं, नंदीग्राम आंदोलन (2007) में शुभेंदु की बड़ी भूमिका थी। यह आंदोलन तब हुआ जब वामपंथी सरकार ने नंदीग्राम को स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) बनाने का फैसला किया। स्थानीय किसान भड़क गए। शुभेंदु ने ममता के साथ मिलकर इस आंदोलन को नेतृत्व दिया। कहा जाता है कि 2011 में ममता की सत्ता में वापसी में शुभेंदु का बड़ा योगदान था।

तो बीजेपी के लिए यह एक बड़ा फायदा है। शुभेंदु बंगाल की राजनीति को भीतर-बाहर से समझते हैं। यह अनुभव अमूल्य है।

तीसरा – “हेमंत मॉडल” की नकल

बीजेपी एक खास रणनीति अपनाती है। वह क्षेत्रीय मजबूत नेताओं को अपने साथ मिलाती है, न कि बाहर से किसी को थोपती है।

असम में हेमंत बिस्वा शर्मा इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। वे भी शुरू में कांग्रेस में थे। जब उन्हें लगा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे, तो वे बीजेपी में शामिल हो गए। और आज असम के निर्विवाद नेता हैं।

यह भी पढे़ं 👇

Hantavirus

अटलांटिक में फंसा Hantavirus Cruise Ship: दो भारतीय भी सवार, 3 मौतें, कोई देश नहीं लेने दे रहा जहाज

शनिवार, 9 मई 2026
Sanjeev Arora

पंजाब AAP मंत्री पर ED रेड: ₹100 करोड़ GST फ्रॉड, BJP पर CM का हमला

शनिवार, 9 मई 2026
Vijay Thalapathy

TVK Crosses 118 Seats: Vijay Thalapathy बने तमिलनाडु के नए CM

शनिवार, 9 मई 2026
One Gas Connection Per House

One Gas Connection Per House: एक घर एक गैस कनेक्शन! सरकार का नया नियम क्या है, किन पर पड़ेगा असर

शनिवार, 9 मई 2026

त्रिपुरा में भी बीजेपी ने लेफ्ट का शासन खत्म किया। असम में हेमंत को लाकर बीजेपी ने साबित किया कि क्षेत्रीय जड़ों वाले मजबूत नेता चुनावी तौर पर ज्यादा उपयोगी होते हैं।

शुभेंदु के साथ भी यही फॉर्मूला अपनाया जा रहा है। किसी बाहरी नेता को लाने से बेहतर है कि बंगाल का ही कोई मजबूत चेहरा हो।

चौथा – हिंदुत्व और बंगाली राजनीति का मिश्रण

ऐतिहासिक रूप से, बीजेपी को बंगाल में “हिंदी बेल्ट पार्टी” या “सांस्कृतिक बाहरी” के रूप में प्रचारित किया जाता था। टीएमसी इस नैरेटिव का सफलतापूर्वक इस्तेमाल करती थी।

लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे समीकरण को बदल दिया। उन्होंने बंगाल की क्षेत्रीय पहचान को हिंदुत्व राजनीति के साथ जोड़ दिया। इससे बीजेपी कई सामाजिक समूहों को एकजुट कर पाई:

• हिंदू शरणार्थी: विभाजन के समय बांग्लादेश से आए लोग
• मतुआ समुदाय: सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मौजूद, जिन्होंने बीजेपी को भारी समर्थन दिया
• शहरी हिंदू मध्यम वर्ग: जो टीएमसी के शासन, भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और बेरोजगारी से परेशान था
• आदिवासी और OBC हिंदू: खासकर झारखंड की सीमा से लगे जंगलमहल इलाके में बीजेपी का क्लीन स्वीप

इस जनाधार को मजबूत करने में शुभेंदु की भूमिका केंद्रीय रही।

पाँचवा – जनाधार और जमीनी ताकत

बंगाल में बीजेपी के पास और भी नेता हैं जिनमें वैचारिक प्रतिबद्धता, संगठनात्मक अनुभव और मीडिया में दिखावट है। लेकिन किसी के पास भी शुभेंदु जैसी चीजें नहीं हैं:

• ग्रामीण जुड़ाव (Rural connect)
• राज्यव्यापी जन-जुटान क्षमता (Statewide mobilization)
• आक्रामक चुनाव प्रचार (Aggressive campaigning)
• कार्यकर्ताओं की वफादारी (Cadre loyalty)

बीजेपी नेतृत्व ने यह निष्कर्ष निकाला कि बंगाल को एक प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय ताकत की जरूरत है, जो सिर्फ प्रशासन तक सीमित न रहे, बल्कि एक जन-नायक के रूप में उभरे।

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि शुभेंदु की घोषित संपत्ति केवल ₹85 लाख है। इसमें कोई गाड़ी नहीं, कोई सोना नहीं। सिर्फ ₹12,000 नकद। यह “सादगी” की छवि भी उनके पक्ष में गई।

बंगाल बीजेपी के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण था?

पश्चिम बंगाल बीजेपी के लिए “अंतिम पूर्वी मोर्चा” था। असम में बीजेपी पहुंच चुकी है, त्रिपुरा में पहुंच चुकी है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी उसकी मजबूत उपस्थिति है।

लेकिन बंगाल अभी तक बीजेपी के लिए दुर्गम था। क्यों?

• वामपंथी बौद्धिक परंपरा (Left intellectual tradition)
• मजबूत बंगाली भाषाई राष्ट्रवाद (Bengali linguistic nationalism)
• मुस्लिम वोटों का मजबूत एकीकरण (Strong minority consolidation)
• ममता बनर्जी का करिश्मा

इन सभी बाधाओं के बावजूद बीजेपी ने बंगाल जीत लिया। यह उसके लिए सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि वैचारिक प्रतिष्ठा का मामला है।

इसके अलावा:

• राज्यसभा में संख्या बल: बंगाल से बीजेपी की राज्यसभा में सीटें बढ़ेंगी, जिससे संसद में उसकी स्थिति मजबूत होगी
• बंगाल की खाड़ी की राजनीति: पूर्वी भारत में बीजेपी का प्रभुत्व बढ़ेगा, जिससे बांग्लादेश, म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों में भी असर होगा

शुभेंदु के सामने पाँच बड़ी चुनौतियां

राज्यपाल भवन में शपथ लेना तो एक औपचारिकता है, लेकिन असली चुनौतियां अब शुरू होंगी। शुभेंदु अधिकारी के सामने कई बड़े संकट हैं:

पहली चुनौती – राजनीतिक हिंसा पर लगाम

बंगाल में चुनावों के दौरान हिंसा एक दुखद परंपरा बन चुकी है। इस बार भी कई जगह खून-खराबा हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि खुद शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (Personal Assistant) की हत्या कर दी गई।

जब शुभेंदु को मुख्यमंत्री घोषित किया गया, तो उन्होंने सबसे पहले कहा: “भय आउट, भरोसा इन।” यानी बंगाल से भय खत्म होगा, और लोगों का सरकार पर भरोसा होगा।

लेकिन यह कहना आसान, करना मुश्किल है। टीएमसी के कार्यकर्ताओं और बीजेपी समर्थकों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है।

दूसरी चुनौती – ब्यूरोक्रेसी का प्रतिरोध

1970 से 2026 तक – यानी 56 सालों में सिर्फ वाम मोर्चा और टीएमसी का शासन रहा। इतने लंबे समय में प्रशासनिक तंत्र में इनका गहरा प्रभाव है।

सवाल उठता है – क्या नौकरशाह बीजेपी की बात सुनेंगे? क्या वे नई सरकार के फैसलों को ईमानदारी से लागू करेंगे? या फिर चुपचाप प्रतिरोध करेंगे?

शुभेंदु को एक नई टीम बनानी होगी, भरोसेमंद अधिकारियों को चुनना होगा, और पुराने “सिस्टम” को तोड़ना होगा।

तीसरी चुनौती – अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संबंध

बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 27% है। यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं। टीएमसी ने हमेशा इस वोट बैंक को साधा।

अब बीजेपी के सामने दुविधा है: हिंदू समर्थन को बनाए रखना है, और साथ ही अल्पसंख्यकों के “अलगाव” की धारणा को भी चुनौती देनी है।

अगर बीजेपी सिर्फ हिंदुत्व के एजेंडे पर चले, तो 27% आबादी से दूरी बढ़ेगी। लेकिन अगर बहुत सॉफ्ट रुख अपनाए, तो अपने मूल वोट बैंक को खो सकती है।

यह संतुलन बनाना बेहद कठिन होगा।

चौथी चुनौती – आर्थिक समस्याएं

बंगाल में कई बड़ी आर्थिक चुनौतियां हैं:

• बेरोजगारी: युवाओं में नौकरियों की कमी
• औद्योगिक ठहराव: उद्योग नहीं लग रहे, पुराने बंद हो रहे हैं
• कर्ज का बोझ: राज्य सरकार पर भारी कर्ज

शुभेंदु को निवेश लाना होगा, रोजगार पैदा करने होंगे, और राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना होगा। यह आसान नहीं होगा।

पाँचवी चुनौती – टीएमसी का विपक्ष

ममता बनर्जी हार मान लेने वाली नेता नहीं हैं। वे अब विपक्ष में होंगी, लेकिन खामोश नहीं रहेंगी। उनके पास दशकों का अनुभव है, मजबूत कार्यकर्ता आधार है।

वे हर कदम पर बीजेपी सरकार को घेरेंगी। विधानसभा में, सड़कों पर, मीडिया में – हर जगह।

शुभेंदु को बहुत सावधानी से काम करना होगा।

ममता का विरोध – “चुनाव गलत तरीके से जीते गए”

जैसा कि उम्मीद थी, ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव में धांधली हुई है, गलत तरीकों से जीता गया है।

हालांकि उनके पास कोई ठोस सबूत नहीं हैं। चुनाव आयोग ने भी चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष बताया है।

लेकिन ममता का यह रुख उनकी निराशा और हताशा को दर्शाता है। 15 साल बाद सत्ता से बाहर होना उनके लिए आसान नहीं है।

राज्यपाल ने जब विधानसभा भंग की, तो उन्होंने इसे भी “संवैधानिक तानाशाही” करार दिया। लेकिन कानूनी तौर पर राज्यपाल का यह कदम सही था।

अमित शाह की भूमिका – विधायकों से परामर्श

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद कोलकाता पहुंचे। उन्होंने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक की। बीजेपी में यह प्रथा है कि “हाई कमांड” राज्य जाता है और विधायकों से परामर्श करता है।

अमित शाह ने सभी से राय ली – आपको कौन मुख्यमंत्री के रूप में पसंद है? अधिकांश का जवाब एक ही था: शुभेंदु अधिकारी।

यह लोकतांत्रिक तरीका था। इससे यह भी सुनिश्चित हो गया कि विधायकों में कोई नाराजगी नहीं है।

7 मई को ऐतिहासिक शपथ ग्रहण

7 मई 2026 को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा। यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बंगाल के इतिहास में एक मील का पत्थर होगा।

पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बंगाल में। पहली बार वाम-टीएमसी की 50 साल की “दोपाली” टूटी।

यह समारोह पूरे देश की निगाहों में होगा। बीजेपी इसे एक “विजय उत्सव” के रूप में मनाना चाहती है।

नंदीग्राम और भवानीपुर – दो युद्धक्षेत्र, एक विजेता

नंदीग्राम ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर का प्रतीक था। यहीं से उन्होंने 2007 में वामपंथी सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था। इसी आंदोलन ने उन्हें 2011 में सत्ता दिलाई।

2021 में जब शुभेंदु ने यहां ममता को हराया, तो यह एक प्रतीकात्मक पराजय थी।

और फिर 2026 में भवानीपुर – ममता की अपनी सीट, जहां से वे 2021 के उपचुनाव में जीती थीं। यहां भी शुभेंदु ने उन्हें पराजित किया।

दो बार, दो अलग-अलग युद्धक्षेत्रों में, एक ही योद्धा ने जीत हासिल की। यह शुभेंदु के राजनीतिक कौशल और जनाधार की मजबूती को दर्शाता है।

बंगाल की जनता क्या चाहती है?

चुनाव परिणाम साफ बताते हैं कि बंगाल की जनता बदलाव चाहती थी। 15 साल के टीएमसी शासन में कई समस्याएं बढ़ीं:

• राजनीतिक हिंसा और गुंडागर्दी
• भ्रष्टाचार
• बेरोजगारी
• उद्योगों का पलायन
• कानून-व्यवस्था की समस्या

लोगों को लगा कि अब “परिवर्तन” की जरूरत है। और उन्होंने बीजेपी को मौका दिया।

अब देखना यह है कि बीजेपी इस विश्वास पर खरी उतरती है या नहीं।

मुख्य बातें (Key Points)

• शुभेंदु अधिकारी बनेंगे पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री, 7 मई 2026 को शपथ ग्रहण

• 294 में से 208 सीटें जीतकर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, ममता बनर्जी का 15 साल का शासन समाप्त

• दो बार ममता को हराया: 2021 में नंदीग्राम से और 2026 में भवानीपुर से, “ममता किलर” की छवि बनी

• अमित शाह ने कोलकाता जाकर परामर्श किया, सभी विधायक शुभेंदु के नाम पर सहमत हुए

• बड़ी चुनौतियां आगे: राजनीतिक हिंसा, ब्यूरोक्रेसी का प्रतिरोध, आर्थिक समस्याएं, अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संबंध


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: शुभेंदु अधिकारी कब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे?

शुभेंदु अधिकारी 7 मई 2026 को राजभवन, कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह बंगाल के इतिहास में पहली बार होगा जब बीजेपी का मुख्यमंत्री बनेगा। गृह मंत्री अमित शाह ने नवनिर्वाचित विधायकों से परामर्श के बाद शुभेंदु के नाम की घोषणा की।

प्रश्न 2: शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री क्यों चुना गया?

शुभेंदु को पांच बड़े कारणों से चुना गया: (1) उन्होंने ममता बनर्जी को दो बार (2021 नंदीग्राम और 2026 भवानीपुर) हराया, (2) वे टीएमसी की अंदरूनी कार्यप्रणाली जानते हैं क्योंकि 2020 तक वे ममता के करीबी थे, (3) असम में हेमंत बिस्वा शर्मा जैसा “रीजनल स्ट्रॉन्गमैन” मॉडल, (4) हिंदुत्व और बंगाली पहचान का सफल मिश्रण, और (5) मजबूत जमीनी जुड़ाव और जन-समर्थन।

प्रश्न 3: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बीजेपी को कितनी सीटें मिलीं?

बीजेपी ने 294 विधानसभा सीटों में से 208 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया। यह पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का 15 साल का शासन समाप्त हो गया। बीजेपी ने खासकर जंगलमहल, उत्तरी बंगाल और शहरी क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन किया।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

पंजाब AAP मंत्री पर ED रेड: ₹100 करोड़ GST फ्रॉड, BJP पर CM का हमला

Next Post

अटलांटिक में फंसा Hantavirus Cruise Ship: दो भारतीय भी सवार, 3 मौतें, कोई देश नहीं लेने दे रहा जहाज

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Hantavirus

अटलांटिक में फंसा Hantavirus Cruise Ship: दो भारतीय भी सवार, 3 मौतें, कोई देश नहीं लेने दे रहा जहाज

शनिवार, 9 मई 2026
Sanjeev Arora

पंजाब AAP मंत्री पर ED रेड: ₹100 करोड़ GST फ्रॉड, BJP पर CM का हमला

शनिवार, 9 मई 2026
Vijay Thalapathy

TVK Crosses 118 Seats: Vijay Thalapathy बने तमिलनाडु के नए CM

शनिवार, 9 मई 2026
One Gas Connection Per House

One Gas Connection Per House: एक घर एक गैस कनेक्शन! सरकार का नया नियम क्या है, किन पर पड़ेगा असर

शनिवार, 9 मई 2026
May 9 History

May 9 History: 9 मई को घटीं दुनिया बदल देने वाली ये बड़ी घटनाएं

शनिवार, 9 मई 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

शनिवार, 9 मई 2026
Next Post
Hantavirus

अटलांटिक में फंसा Hantavirus Cruise Ship: दो भारतीय भी सवार, 3 मौतें, कोई देश नहीं लेने दे रहा जहाज

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।