Suspended DIG Bhullar Bail का मामला एक बार फिर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। पंजाब के मुअत्तल डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर ने पिछले साल अक्टूबर में उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में नियमित जमानत के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दोबारा रुख किया है। उन्होंने यह अर्जी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अनुमति के दो महीने बाद दाखिल की है।
देखा जाए तो यह मामला पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट का क्या था आदेश?
10 अप्रैल, 2026 को सुनाए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने एक अहम टिप्पणी की थी।
बेंच ने कहा था: जबकि हम इस चरण पर जमानत अर्जी पर विचार करने को इच्छुक नहीं हैं, लेकिन हम याचिकाकर्ता को यह छूट देते हैं कि अगर दो महीने में मुकदमा शुरू नहीं होता है, तो वह दोबारा हाई कोर्ट का रुख कर सकता है।
समझने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस छूट के साथ ही स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी थी।
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पहले भी हो चुकी है जमानत खारिज
भुल्लर ने हाई कोर्ट के 16 फरवरी के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उस आदेश में हाई कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी रद्द कर दी थी।
मुलजिम की ओर से पेश हुए सीनियर वकील की दलील थी कि जांच पहले ही पूरी हो चुकी है। प्राथमिक और सप्लीमेंट्री दोनों चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि वकील ने तर्क दिया कि लंबी हिरासत का कोई मकसद नहीं बचता: खासकर तब जब मुलजिम पहले से ही मुअत्तल है और उसके फरार होने का कोई खतरा नहीं।
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5 लाख की रिश्वत का गंभीर आरोप
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मामला कैसे शुरू हुआ था। भुल्लर के कथित सहायक कृष्णानु शारदा को 16 अक्टूबर, 2025 को शिकायतकर्ता से मांगी गई रिश्वत के हिस्से के तौर पर 5,00,000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया था।
भुल्लर को उसी दिन गिरफ्तार किया गया था। बीएनएसएस की धारा 193 के तहत चार्जशीट 3 दिसंबर, 2025 को दाखिल हुई।
पूरी कहानी क्या है?
इस मामले में एफआईआर एक व्यक्ति आकाश बत्ता की शिकायत पर दर्ज हुई थी। आरोप था कि भुल्लर, जो उस समय डीआईजी रोपड़ रेंज के तौर पर तैनात थे, ने एक निजी बिचौलिए कृष्णानु शारदा के जरिए अवैध रिश्वत मांगी।
रिश्वत किस लिए? पुलिस स्टेशन सरहिंद में दर्ज एफआईआर में अनुकूल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए। साथ ही यह तय करने के लिए कि शिकायतकर्ता के कारोबार के खिलाफ कोई जबरदस्ती कार्रवाई न हो।
सीबीआई कोर्ट ने भी झटका दिया था
6 जून को पिछली सुनवाई के दौरान विशेष सीबीआई अदालत चंडीगढ़ ने भुल्लर को बड़ा झटका दिया था। उन्होंने एक अर्जी दाखिल की थी जिसमें गृह मंत्रालय द्वारा उनके खिलाफ दी गई मुकदमा चलाने की मंजूरी को अवैध घोषित करने की मांग की थी।
अदालत ने यह अर्जी खारिज कर दी। सुनवाई 2 जुलाई 2026 तक आरोपों पर बहस के लिए स्थगित कर दी गई।
जानें पूरा मामला
हरचरण सिंह भुल्लर पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी थे, जिन्हें डीआईजी रोपड़ रेंज के पद पर तैनाती के दौरान भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया। यह मामला पंजाब पुलिस की छवि के लिए भी एक बड़ा झटका रहा है। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं और जमानत के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- सस्पेंडेड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर ने हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दायर की
- सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को दो महीने के अंदर मुकदमा शुरू न होने पर हाई कोर्ट जाने की छूट दी थी
- 16 अक्टूबर 2025 को सहायक कृष्णानु शारदा को 5 लाख रुपये की रिश्वत के साथ पकड़ा गया था
- बीएनएसएस की धारा 193 के तहत चार्जशीट 3 दिसंबर 2025 को दाखिल
- सीबीआई कोर्ट में अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को













