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The News Air - Breaking News - Surya Grahan 2026: साल का दूसरा Solar Eclipse कब लगेगा? भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक काल मान्य है या नहीं – पूरी जानकारी

Surya Grahan 2026: साल का दूसरा Solar Eclipse कब लगेगा? भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक काल मान्य है या नहीं – पूरी जानकारी

12-13 अगस्त को वलयाकार सूर्य ग्रहण, हरियाली अमावस्या के दिन, भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक लागू नहीं, जानें धार्मिक मान्यताएं

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शनिवार, 18 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Surya Grahan
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Surya Grahan August 2026 : साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कई मायनों में खास माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है। इसी दिन हरियाली अमावस्या भी मनाई जाएगी, इसलिए धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस ग्रहण को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

देखा जाए तो सूर्य ग्रहण हमेशा से ही धार्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी गई है। पंचांग के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। अगर गौर करें तो यह एक वलयाकार यानी Annular Solar Eclipse होगा।

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क्या है वलयाकार सूर्य ग्रहण? समझें पूरी बात

वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) एक विशेष प्रकार का ग्रहण होता है। इसमें चंद्रमा सूर्य के ठीक सामने आ जाता है, लेकिन पूरी तरह से सूर्य को ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप सूर्य की एक चमकदार “अंगूठी” या “वलय” दिखाई देती है।

वलयाकार ग्रहण क्यों होता है?

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  • चंद्रमा पृथ्वी से अपनी सबसे दूर की कक्षा में होता है
  • इस कारण चंद्रमा छोटा दिखाई देता है
  • वह पूरे सूर्य को ढक नहीं पाता
  • सूर्य के किनारे चमकते रहते हैं
  • “Ring of Fire” या “अग्नि वलय” जैसा दिखता है

समझने वाली बात यह है कि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण से अलग है। पूर्ण ग्रहण में सूर्य पूरी तरह छिप जाता है, जबकि वलयाकार में किनारे दिखते रहते हैं।

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ज्योतिषीय स्थिति: कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय सूर्य कर्क राशि में रहेगा और आश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।

कर्क राशि में सूर्य ग्रहण:

  • कर्क राशि जल तत्व की राशि है
  • चंद्रमा इसका स्वामी है
  • भावनात्मक और मानसिक प्रभाव अधिक

आश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव:

  • यह नक्षत्र बुध ग्रह के अधीन है
  • परिवर्तन और रहस्य से जुड़ा
  • ज्योतिषीय दृष्टि से संवेदनशील समय

ज्योतिषियों के अनुसार, कर्क राशि वालों को इस ग्रहण का प्रभाव ज्यादा हो सकता है। हालांकि चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका प्रभाव भी सीमित माना जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या भारत में दिखाई देगा यह ग्रहण?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा? इसका जवाब है नहीं। यह ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा।

कहां दिखाई देगा यह ग्रहण?
हालांकि सटीक भौगोलिक जानकारी के लिए NASA या अन्य खगोलीय संस्थाओं की घोषणा का इंतजार करना होगा, लेकिन आमतौर पर वलयाकार ग्रहण कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में ही दिखाई देते हैं।

यही कारण है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। यानी भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण के कारण सूतक से जुड़े नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सूतक केवल उन्हीं स्थानों पर लागू होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। अगर गौर करें तो यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तर्कसंगत है।

सूतक काल क्या होता है? क्यों मान्य नहीं होगा भारत में?

सूतक काल ग्रहण से पहले का वह समय होता है जब कुछ धार्मिक कार्य और रोजमर्रा की गतिविधियां वर्जित मानी जाती हैं।

सूतक काल की अवधि:

  • सूर्य ग्रहण के लिए: ग्रहण से 12 घंटे पहले
  • चंद्र ग्रहण के लिए: ग्रहण से 9 घंटे पहले

क्यों नहीं लागू होगा भारत में?
शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, सूतक केवल उस स्थान पर मान्य होता है जहां ग्रहण दृश्यमान (Visible) हो। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए:

  • भारत में सूतक काल लागू नहीं
  • सामान्य दिनचर्या पर कोई प्रतिबंध नहीं
  • पूजा-पाठ सामान्य रूप से कर सकते हैं
  • खाना-पीना सामान्य

समझने वाली बात यह है कि यह नियम सभी प्रमुख धर्मग्रंथों और पंचांग में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।

फिर भी यदि परंपरा का पालन करना चाहें तो…

हालांकि जो लोग धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, उनके लिए ग्रहण के समय कुछ विशेष बातें बताई जाती हैं। यदि आप श्रद्धालु हैं और परंपरा का पालन करना चाहते हैं तो निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

ग्रहण से पहले:

  1. स्नान करें: यदि संभव हो तो ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान कर लें
  2. घर की सफाई: घर को स्वच्छ रखें
  3. तुलसी पत्ता: खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता रख सकते हैं (यह वैकल्पिक है)

ग्रहण के दौरान:

  1. शांत रहें: जितना संभव हो शांत रहकर ईश्वर का स्मरण करें
  2. मंत्र जाप: “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का मानसिक जाप कर सकते हैं
  3. ध्यान/प्रार्थना: अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करें

ग्रहण के बाद:

  1. पुनः स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है
  2. दान: अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अनाज, तिल या वस्त्र का दान कर सकते हैं
  3. पूजा-पाठ: सामान्य पूजा-पाठ फिर से शुरू करें

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि चूंकि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देगा, ये सभी कार्य पूरी तरह वैकल्पिक हैं। इन्हें करना या न करना आपकी व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।

किन कार्यों से बचने की परंपरागत सलाह दी जाती है?

कुछ पारंपरिक मान्यताओं में ग्रहण के समय निम्नलिखित कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:

ग्रहण के दौरान क्या न करें (परंपरागत मान्यता):

  1. भोजन न करें: कुछ लोग ग्रहण के दौरान खाना-पीना वर्जित मानते हैं
  2. बाहर न निकलें: अनावश्यक रूप से बाहर नहीं जाना चाहिए
  3. नुकीली वस्तुएं: कुछ मान्यताओं में कैंची, चाकू आदि का उपयोग वर्जित
  4. तेल-मालिश: तेल मालिश से परहेज
  5. दातून/कंघी: कुछ लोग इनसे भी परहेज करते हैं

महत्वपूर्ण नोट: ये सभी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक लागू नहीं होगा और सामान्य दिनचर्या पर इसका कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं माना जाएगा।

अगर गौर करें तो आधुनिक युग में धर्म और विज्ञान दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सलाह

परंपरागत रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बताई जाती हैं:

पारंपरिक मान्यताएं:

  • ग्रहण के दौरान बाहर न जाएं
  • नुकीली चीजों का उपयोग न करें
  • लेटकर आराम करें
  • मंत्र जाप करें

आधुनिक चिकित्सा की राय:
हालांकि आधुनिक विज्ञान और चिकित्सा के अनुसार ग्रहण का गर्भवती महिलाओं या शिशु पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता। फिर भी यदि आप मानसिक शांति के लिए परंपरा का पालन करना चाहती हैं तो कर सकती हैं।

समझने वाली बात यह है कि तनाव से बचना और शांत रहना गर्भवती महिलाओं के लिए हमेशा अच्छा है, चाहे ग्रहण हो या न हो।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ग्रहण को कैसे देखें?

यदि आप किसी ऐसे स्थान पर हैं जहां यह ग्रहण दिखाई देता है, तो सावधानी बरतें:

सुरक्षित तरीके से ग्रहण देखना:

  1. विशेष Eclipse Glasses का उपयोग: ISO 12312-2 प्रमाणित चश्मा
  2. सीधे सूर्य की ओर न देखें: नंगी आंखों से कभी न देखें
  3. Pinhole Projector: घर पर बनाया जा सकता है
  4. Welding Glass: नंबर 14 या उससे गहरा
  5. टेलीस्कोप/बाइनोक्युलर: विशेष सोलर फिल्टर के साथ

क्या न करें:

  • सामान्य धूप के चश्मे से न देखें
  • मोबाइल/कैमरे से सीधे न देखें (बिना फिल्टर के)
  • स्मोक्ड ग्लास, X-ray फिल्म आदि का उपयोग न करें

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि वलयाकार ग्रहण के दौरान भी सूर्य की किरणें बहुत शक्तिशाली होती हैं और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

ग्रहण का समय: कब से कब तक?

हालांकि सटीक समय NASA या भारतीय ज्योतिष विभाग द्वारा घोषित किया जाएगा, लेकिन पंचांग के अनुसार:

  • ग्रहण आरंभ: 12 अगस्त 2026 (शाम/रात)
  • मध्य ग्रहण: 12-13 अगस्त की मध्य रात्रि
  • ग्रहण समाप्ति: 13 अगस्त 2026 (सुबह/दोपहर)

भारतीय समयानुसार: चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारतीय समय का विशेष महत्व नहीं है। जो लोग विदेश में हैं, उन्हें स्थानीय समय के अनुसार देखना होगा।

हरियाली अमावस्या का महत्व

यह ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन पड़ रहा है, जो इसे और विशेष बनाता है।

हरियाली अमावस्या:

  • श्रावण मास की अमावस्या
  • हरियाली और प्रकृति पूजन का दिन
  • किसान इस दिन विशेष पूजा करते हैं
  • नए पौधे रोपने की परंपरा

अगर गौर करें तो ग्रहण और हरियाली अमावस्या का संयोग दुर्लभ है। धार्मिक दृष्टि से यह विशेष माना जाता है।

ज्योतिषीय उपाय: क्या करें क्या न करें?

ज्योतिषियों के अनुसार कुछ सामान्य उपाय:

सकारात्मक कार्य:

  • दान-पुण्य करें
  • गरीबों की मदद करें
  • पितरों का तर्पण (यदि परंपरा में हो)
  • पवित्र नदी में स्नान (यदि संभव हो)

बचने योग्य कार्य:

  • नए काम की शुरुआत
  • बड़े निवेश
  • विवाह/मुंडन जैसे शुभ कार्य (ग्रहण के दिन)
  • लंबी यात्रा की योजना

समझने वाली बात यह है कि ये सब आस्था आधारित हैं। आधुनिक युग में व्यक्ति को अपनी बुद्धि और विवेक से निर्णय लेना चाहिए।

अंतिम शब्द: आस्था और विज्ञान का संतुलन

सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना जरूरी है। साथ ही यदि आपकी धार्मिक आस्था है तो उसका सम्मान करते हुए परंपराओं का पालन भी कर सकते हैं।

याद रखने योग्य मुख्य बातें:

  • यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा
  • इसलिए सूतक काल लागू नहीं होगा
  • सामान्य दिनचर्या पर कोई प्रतिबंध नहीं
  • परंपरा का पालन पूरी तरह वैकल्पिक है
  • वैज्ञानिक जानकारी को प्राथमिकता दें

अगर गौर करें तो ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं से हमें ब्रह्मांड की विशालता और प्रकृति के नियमों का बोध होता है। इन्हें भय के बजाय जिज्ञासा और सम्मान के साथ देखना चाहिए।


मुख्य बातें (Key Points)

• 12-13 अगस्त 2026 को वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण
• श्रावण कृष्ण पक्ष हरियाली अमावस्या के दिन, कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में
• यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा
• इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं, सामान्य दिनचर्या चलेगी
• धार्मिक परंपरा का पालन पूरी तरह वैकल्पिक, व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यदि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता तो क्या मंदिर बंद रहेंगे?

नहीं, चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए मंदिर सामान्य रूप से खुले रहेंगे। सूतक काल केवल उन स्थानों पर लागू होता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। भारत में सभी धार्मिक स्थल सामान्य रूप से कार्यरत रहेंगे।

प्रश्न 2: क्या गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ग्रहण का गर्भवती महिलाओं या शिशु के स्वास्थ्य पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि यदि परंपरागत मान्यताओं का पालन करने से मानसिक शांति मिलती है तो वह कर सकती हैं। लेकिन चिकित्सीय दृष्टि से कोई विशेष सावधानी जरूरी नहीं है।

प्रश्न 3: वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण में क्या अंतर है?

पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) में चंद्रमा पूरे सूर्य को ढक लेता है और कुछ मिनटों के लिए अंधेरा हो जाता है। वलयाकार ग्रहण (Annular Solar Eclipse) में चंद्रमा सूर्य के बीच में आता है लेकिन पूरी तरह नहीं ढक पाता, जिससे सूर्य का एक चमकीला वलय (Ring) दिखाई देता है जिसे “Ring of Fire” कहते हैं।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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