Sukhbir Singh Badal SIT Inquiry: शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज 20 जुलाई 2026 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बहबलकलां फायरिंग मामले में एसआईटी के सामने दो घंटे की पूछताछ के बाद उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद गुरु साहिबान और संत जरनैल सिंह भिंडरावाला के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा की गई कथित बेअदबी से ध्यान भटकाने के लिए की जा रही है।
देखा जाए तो यह चौथी बार है जब बादल को 11 साल पुराने इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। चंडीगढ़ स्थित पंजाब पुलिस अधिकारी संस्थान (PPOI) के बाहर भारी बारिश के बावजूद हजारों अकाली समर्थक उनके साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए जुटे और ‘तख्त बदल दो, ताज बदल दो, बेईमानी का राज बदल दो’ के नारे लगाए।
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दो घंटे की पूछताछ में क्या हुआ
चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस अधिकारी संस्थान में दो घंटे तक चली पूछताछ के बाद अकाली दल अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एसआईटी बार-बार वही सवाल पूछ रही है जो पहले तीन बार पूछे जा चुके हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि बादल ने साफ शब्दों में कहा, “एसआईटी बार-बार एक ही सवाल पूछ रही है। यह चौथी बार है जब मुझे बुलाया गया है। सभी सवाल और मेरे जवाब पहले ही कैमरे में रिकॉर्ड किए जा चुके हैं और पिछली एसआईटी रजिस्टरों में दर्ज की जा चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज पूछे गए सवाल साफ तौर पर राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और ऐसा लगता है कि दिल्ली आम आदमी पार्टी टीम ने एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना से राजनीतिक लाभ उठाने के लिए तैयार किए हैं।”
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बहबलकलां मामला क्या है
अगर गौर करें तो बहबलकलां फायरिंग मामला 11 साल पुराना है। यह घटना तब हुई थी जब सिख धर्म ग्रंथ की बेअदबी के मामलों के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। उस दौरान पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी।
समझने वाली बात यह है कि इतने सालों बाद भी इस मामले की जांच चल रही है और अब तक कई बार एसआईटी का गठन किया जा चुका है। बादल का कहना है कि हर बार उन्होंने समन का जवाब दिया है क्योंकि वे चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले।
लेकिन उनका आरोप है, “आम आदमी पार्टी सरकार की यह मंशा नहीं, उसने एसआईटी का गठन आरोपियों को सजा दिलाने के लिए नहीं बल्कि इस मामले पर राजनीति करने के लिए किया है।”
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भगवंत मान पर गंभीर आरोप
दिलचस्प बात यह है कि बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गुरु साहिबान और संत जरनैल सिंह भिंडरावाला के खिलाफ अपनी बेअदबी की कार्रवाइयों से ध्यान भटकाने के लिए यह सब कर रहे हैं।
बादल के अनुसार, “सच्चाई यह है कि यह ध्यान भटकाने की चाल है, क्योंकि मुख्यमंत्री अकाली दल से डरते हैं। यही कारण है कि मुझे मुख्यमंत्री द्वारा की गई बेअदबी के आचरण से ध्यान हटाया जा सके, जिसमें गुरु साहिबान के चित्रों पर शराब छिड़कना और संत जरनैल सिंह भिंडरावाला की तस्वीर पर पेशाब करने की कोशिश करना शामिल है।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये बेहद संवेदनशील आरोप हैं जो सिख धार्मिक भावनाओं से जुड़े हैं।
हजारों समर्थकों ने दिखाई एकजुटता
चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस अधिकारी संस्थान के बाहर का दृश्य देखने लायक था। भारी बारिश के बावजूद शिरोमणी अकाली दल के हजारों समर्थक सुखबीर सिंह बादल के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए जुटे।
समझने वाली बात यह है कि इतनी भारी बारिश में भी कार्यकर्ताओं का यह जमावड़ा अकाली दल की जमीनी ताकत को दर्शाता है। ‘तख्त बदल दो, ताज बदल दो, बेईमानी का राज बदल दो’ के नारों के बीच अकाली कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे इस कथित बदलाखोरी की कार्रवाई का डटकर मुकाबला करेंगे।
सरदार बादल ने कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में बाहर आकर आम आदमी पार्टी सरकार को चेतावनी देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
वरिष्ठ अकाली नेताओं ने दिया साथ
अकाली दल अध्यक्ष के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इनमें बलविंदर सिंह भूंदड़, बिक्रम सिंह मजीठिया, जनमेजा सिंह सेखों, महेशइंदर सिंह ग्रेवाल, सिकंदर सिंह मलूका, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, हीरा सिंह गाबड़िया, परमजीत सिंह सरना, एन.के. शर्मा और अर्शदीप सिंह कलेर शामिल थे।
यह दर्शाता है कि पूरी पार्टी अपने अध्यक्ष के साथ खड़ी है और इस मामले को पूरी तरह से राजनीतिक मानती है।
बेअदबी के मामलों पर बादल का पलटवार
दिलचस्प बात यह है कि बादल ने मुख्यमंत्री पर पलटवार करते हुए राज्य में बेअदबी की घटनाओं को रोकने में विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों में राज्य में बेअदबी के 597 मामले हुए हैं।
बादल के अनुसार, “मुख्यमंत्री ने उनकी ठीक से जांच कराने की जहमत तक नहीं उठाई, जिसके चलते बड़े पैमाने पर लोग बरी हो गए और मामले रद्द कर दिए गए। भगवंत मान ने खुद सुल्तानपुर लोधी में गुरु घर के अंदर पुलिस बल भेजकर अखंड पाठ में बाधा उत्पन्न करने जैसी घोर बेअदबी की थी।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आरोप सीधे तौर पर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की धार्मिक नीतियों पर सवाल उठाते हैं।
अकाल तख्त को चुनौती देने की चेतावनी
अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि भगवंत मान यहीं नहीं रुके, बल्कि अब वे सिखों की पवित्र संस्था श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती दे रहे हैं।
बादल ने साफ शब्दों में कहा, “मैं उन्हें यह साफ तौर से बता देना चाहता हूं कि जिसने भी श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती देने की कोशिश की उसने धूल ही चाटी है। उसका अंजाम भी वैसा ही होगा।”
समझने वाली बात यह है कि अकाल तख्त सिख धर्म की सर्वोच्च लौकिक संस्था है और इसके खिलाफ जाना किसी भी सिख राजनेता के लिए राजनीतिक आत्महत्या माना जाता है।
आम आदमी पार्टी पर जमकर बरसे बादल
बादल ने स्पष्ट किया कि पंजाबी आम आदमी पार्टी से तंग आ चुके हैं। उन्होंने कहा, “इस पार्टी ने राज्य और इसके संसाधनों को लूटने के सिवाय कुछ नहीं किया है। पंजाबी उन्हें करारा सबक सिखाने के लिए आगामी विधानसभा चुनावों का इंतजार कर रहे हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि बादल ने आने वाले चुनावों की ओर इशारा करते हुए कहा कि जनता इस सरकार को सत्ता से बेदखल कर देगी।
एसआईटी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल
बादल ने एसआईटी के गठन और इसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईटी का उद्देश्य न्याय दिलाना नहीं बल्कि राजनीतिक बदला लेना है।
अगर गौर करें तो यह आरोप बहुत गंभीर है क्योंकि इससे पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। बादल का कहना है कि 11 साल पुराने मामले में अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है, जो एसआईटी की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
राजनीतिक संदर्भ और निहितार्थ
समझने वाली बात यह भी है कि यह पूरा मामला पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। एक तरफ आम आदमी पार्टी की सरकार है जो बेअदबी के मामलों में कार्रवाई का दावा कर रही है, दूसरी तरफ अकाली दल है जो इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है।
धार्मिक भावनाएं और राजनीति पंजाब में हमेशा से जुड़े रहे हैं। अकाली दल पारंपरिक रूप से शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के साथ जुड़ा रहा है और खुद को सिख हितों का रक्षक मानता है।
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी ने 2022 के चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की थी और बेअदबी के मामलों में कार्रवाई का वादा किया था।
आगे क्या हो सकता है
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मामला आगे और गर्म हो सकता है। अकाली दल ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को आगामी चुनावों में मुख्य मुद्दा बनाएगा।
बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री को उनके सभी “पापों” के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन्हें इसी जगह पर उन्हीं पुलिस अधिकारियों के सामने पेश किया जाएगा।
दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी सरकार की भी अपनी जांच और कार्रवाई जारी रहेगी। देखना होगा कि इस राजनीतिक टकराव का अंतिम परिणाम क्या होता है।
मुख्य बातें (Key Points)
• सुखबीर सिंह बादल को बहबलकलां फायरिंग मामले में चौथी बार एसआईटी ने पूछताछ के लिए बुलाया, दो घंटे तक चली पूछताछ
• बादल ने आरोप लगाया कि यह मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा गुरु साहिबान और संत भिंडरावाला के खिलाफ कथित बेअदबी से ध्यान भटकाने की चाल है
• हजारों अकाली समर्थकों ने भारी बारिश के बावजूद चंडीगढ़ में बादल के साथ एकजुटता जताई और विरोध प्रदर्शन किया
• बादल ने कहा कि एसआईटी का गठन राजनीतिक बदले के लिए किया गया है न कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए













