Satluj Film Sukhbir Badal: Sukhbir Singh Badal ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की कड़ी निंदा की है। Shiromani Akali Dal के अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब को अपनी सच्चाई दबाने की नहीं, बल्कि अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने की जरूरत है। फिल्म भारत में ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन दो दिन बाद ही प्लेटफॉर्म से गायब हो गई।
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सुखबीर बादल ने क्या कहा
सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह सिर्फ सेंसरशिप नहीं है, बल्कि साझा याददाश्त, सच और अभिव्यक्ति की आजादी पर बड़ा हमला है। उन्होंने कहा कि वह इस कदम की सख्त निंदा करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने फिल्म को सिर्फ एक सिनेमाई काम नहीं माना, बल्कि पंजाब के दर्दनाक इतिहास से जुड़ी एक जरूरी कोशिश बताया। उनके शब्दों में, पंजाब अपने अतीत का सामना ईमानदारी से करने का हकदार है।
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जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी केंद्र में
इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra की भूमिका निभाई है। खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के कथित अंतिम संस्कार के मामलों की जांच की थी। इसके बाद 1995 में वह खुद रहस्यमय हालात में लापता हो गए।
| साल | घटना |
|---|---|
| 1984 से 1994 | कथित अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की जांच |
| 1995 | जसवंत सिंह खालड़ा लापता हुए |
| 2005 | चार पुलिसकर्मियों को सात साल की सजा |
| 2007 | सजा बढ़ाकर उम्रकैद की गई |
| 2023 | TIFF प्रीमियर लाइनअप से फिल्म हटाई गई |
| 2025 | भारत छोड़कर विश्व रिलीज की योजना थी |
| हालिया रिलीज | भारत में OTT पर रिलीज के बाद हटाई गई |
TIFF से CBFC तक विवादों की लंबी लाइन
अगर गौर करें, तो ‘सतलुज’ की मुश्किलें अचानक शुरू नहीं हुईं। 2023 में फिल्म का प्रीमियर Toronto International Film Festival में होना था, लेकिन बिना आधिकारिक बयान के इसे लाइनअप से हटा दिया गया।
इसके बाद Central Board of Film Certification के साथ भी फिल्म का लंबा विवाद चला। बोर्ड ने फिल्म पर 127 कट लगाने की मांग की थी। यही वजह रही कि फिल्म की रिलीज बार-बार टलती रही।
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सवाल सिर्फ फिल्म का नहीं, याद का भी है
देखा जाए तो इस विवाद ने फिल्म से आगे जाकर पंजाब की सामूहिक याद, अभिव्यक्ति और इतिहास पर बहस छेड़ दी है। सुखबीर बादल का बयान भी इसी दिशा में है। वह इसे दबाव के रूप में देख रहे हैं, जबकि सरकारी पक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा और गलत इस्तेमाल की आशंका की बात कर रहा है।
आम दर्शक के लिए चिंता का विषय यह है कि जिस फिल्म का इंतजार लंबे समय से था, वह रिलीज होकर भी उपलब्ध नहीं है। और यही बात इस पूरे मामले को भावनात्मक बना देती है।
मुख्य बातें (Key Points)
• सुखबीर बादल ने ‘सतलुज’ हटाने की कड़ी निंदा की।
• उन्होंने इसे सच और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया।
• फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है।
• फिल्म पहले भी TIFF और CBFC विवादों में फंस चुकी थी।













