Shri Akal Takht Sacrilege Law Amendment : अमृतसर। पंजाब की AAP सरकार के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। श्री अकाल तख्त साहिब में सभी दलों के सिख विधायकों और मंत्रियों को बेअदबी कानून को लेकर जवाब देना पड़ा। देखा जाए तो यह महज एक धार्मिक सुनवाई नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ था।
जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज की अगुवाई में हुई इस सुनवाई में चौंकाने वाली बातें सामने आईं। कुछ विधायकों ने खुद माना कि उन्होंने कानून को बिना पढ़े ही साइन कर दिया था। सुनवाई के बाद अकाल तख्त ने सरकार को एक महीने का वक्त दिया है कि वह ‘जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026’ में संशोधन करे।
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धार्मिक अदालत में नंगे पैर पेश हुए नेता
सोमवार की सुबह अमृतसर में एक अलग ही नजारा था। AAP के सभी सिख विधायक और मंत्री एक बस में सवार होकर श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे। सभी नंगे पैर थे और हाथों में लिखित स्पष्टीकरण थे। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की अगुवाई में पहुंचे इस दल में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां समेत कई बड़े चेहरे शामिल थे।
कांग्रेस, अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी इस पेशी में मौजूद रहे। अकाल तख्त के अंदर 5 सिंह साहिबानों के सामने जमीन पर बैठकर सभी ने अपना पक्ष रखा। पूरी सुनवाई का लाइव टेलीकास्ट किया गया, जिसकी मांग खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने की थी।
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CM के दो वीडियो से शुरू हुई पूछताछ
जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सुनवाई की शुरुआत ही मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो वीडियो दिखाकर की। पहले वीडियो में मान कह रहे हैं कि अगर बेअदबी करने वाला मानसिक रोगी हुआ तो उसके कस्टोडियन पर कार्रवाई होगी। दूसरे वीडियो में वह कहते हैं कि अब मानसिक रोगी के मां-बाप या कस्टोडियन को सजा दी जाएगी।
जत्थेदार ने सीधा सवाल किया: “क्या यह बात कानून में लिखी है?”
कृषि मंत्री गुरमीत खुड्डियां कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। यहीं से सुनवाई का असली दौर शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि इस सवाल पर विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने अचानक मांग की कि इस सुनवाई का लाइव प्रसारण बंद कर दिया जाए क्योंकि यह संवेदनशील मामला है। लेकिन जत्थेदार ने याद दिलाया कि खुद सीएम ने ही हर कार्रवाई का लाइव प्रसारण करने को कहा था और अकाल तख्त को ललकारा भी था।
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बिना पढ़े कानून पर साइन करने की बात कबूली
सुनवाई में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब AAP विधायक जगरूप सिंह ने साफ़ शब्दों में कहा: “मैंने कानून को सहमति दी है, लेकिन पढ़ने का टाइम नहीं मिला।”
यह सुनकर पूरी सभा में सन्नाटा छा गया। एक ऐसा कानून जो गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़ा है, उसे बिना पढ़े पास कर दिया गया! जत्थेदार ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा: “शाबाश, ऐसे बुद्धिमान पंजाब को मिले।”
कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने बताया कि उन्होंने विधानसभा में राय लेने की मांग उठाई थी। उन्होंने कहा: “11 को कैबिनेट पास करती है और 12 अप्रैल को वेबसाइट पर डाल देते हैं। मैंने कहा था कि पहले चर्चा करो, इसमें कई खामियां हैं। लेकिन इनके पास मेजोरिटी है, ये पास कर देते हैं।”
अकाली MLA गनीव कौर ने दावा किया कि विधानसभा में बोलने की कोशिश करने पर उन्हें बेइज्जत किया जाता है। उन्होंने कहा: “ये बोलने नहीं देते, बेइज्जती करते हैं।”
SGPC से राय नहीं ली गई, यह बड़ा सवाल
जत्थेदार ने दूसरा बड़ा सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इस कानून को बनाने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) या अकाल तख्त से कोई राय ली?
गड़गज ने कहा: “सरकार अपने कानून बनाए, अकाल तख्त को कोई एतराज नहीं। लेकिन सिखों के लिए कोई कानून बने तो उसमें सिखों की राय लेनी चाहिए। कानून में शोध करनी थी तो हमें भी बुलाते।”
विधायक इंद्रबीर सिंह निज्जर ने जवाब दिया कि जब सुझाव मांगे थे तब SGPC को बुलाया था। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि कमेटी की तरफ से कोई चिट्ठी नहीं भेजी गई। समझने वाली बात है कि यहां जिम्मेदारी का खेल चल रहा था।
बाजवा ने खुलासा किया: “मैंने लीडर ऑफ अपोजिशन के तौर पर कहा था कि जो सिलेक्ट कमेटी बनाई है उसे 9 महीने हो गए हैं। उस कमेटी को पहले सदन में रखनी चाहिए। जब SGPC से राय नहीं ली जाती तब तक कोई कानून नहीं बनना चाहिए। स्पीकर साहब ने नहीं माना।”
जत्थेदार ने गिनाए पांच बड़े एतराज
अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कानून में पांच प्रमुख कमियां बताईं:
1. ‘बीड’ की जगह ‘स्वरूप’ शब्द का इस्तेमाल:
जत्थेदार ने कहा कि विधानसभा को सिख शब्दावली तय करने का हक नहीं है। बीड की जगह स्वरूप कहना सिख शब्दावली को बदलना है। अगर बीड के साथ स्वरूप कहते तो कोई एतराज नहीं था। यह अधिकार केवल पंथ का है।
2. ‘कस्टोडियन’ शब्द पर आपत्ति:
उन्होंने स्पष्ट किया कि कस्टोडियन यानी संभालकर्ता शब्द तय करना सरकार का अधिकार नहीं है। यह श्री अकाल तख्त साहिब का अधिकार है। किसको स्वरूप देना किसको नहीं, यह पंथ तय करेगा। इसे हटाया जाए।
3. यूनिक नंबर लगाने पर एतराज:
जत्थेदार ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब का यूनिक नंबर लगाने पर एतराज है। सिख रहित मर्यादा में लिखा है कि गुरमता विधानसभा नहीं करती, पंथ करता है। तुम यूनिक नंबर के लिए सुझाव भेज सकते हो, आदेश नहीं दे सकते। यहां पर सरकार टेक्निकल गलत हो गई।
4. कस्टोडियन के फर्ज तय करना:
कस्टोडियन की जिम्मेदारियां तय करने पर भी एतराज जताया गया। गड़गज ने कहा: “गुरु ग्रंथ साहिब किस तरह से रखना है यह विधानसभा तय नहीं करेगी। यह तय करने का हक पंथ का है। आप सुझाव देते कि अकाल तख्त ऐसे करे।”
5. दुर्घटना की स्थिति का जिक्र नहीं:
जत्थेदार ने कहा कि बेअदबी करने वाले को सजा देने पर कोई एतराज नहीं है। लेकिन इसमें यह नहीं लिखा कि अगर कोई दुर्घटना हो गई तो गुरु ग्रंथ साहिब केस प्रॉपर्टी नहीं बनेगा।
एक महीने में करना होगा संशोधन
सुनवाई के बाद जत्थेदार ने स्पष्ट आदेश दिया: “अकाल तख्त साहिब ने जो एतराज लगाए हैं, एक महीने में उसे दूर करो। यह आदेश है अकाल तख्त साहिब का।”
उन्होंने कहा कि सरकार एक महीने में शोध करके नया कानून बनाए। “जो पंथ की अथॉरिटी में दखल हो गया उस पर काम कर दो। कानून को होल्ड करो जब तक ये बदलाव नहीं होता। उसके बाद पंजाब नहीं भारत में यात्रा निकालो।”
जत्थेदार ने यह भी कहा कि फोन पर जिम्मेदार लोग उनसे बात करें और इस पर ठीक से शोध करें। अगर गौर करें तो यह एक बड़ी राहत भी है कि अकाल तख्त ने सरकार को मौका दिया है, वरना सख्त कार्रवाई भी हो सकती थी।
सच्चा सौदा प्रमुख को पंजाब क्यों नहीं लाए
सुनवाई के दौरान जत्थेदार ने एक और तीखा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा: “सच्चा सौदा वाले का चालान आपकी सरकार ने पेश किया। सच्चा सौदा वाले को पंजाब लाने के लिए क्या प्रयास किए?”
विधायक गुरप्रीत सिंह ने कहा कि जो भी SIT ने दोषी पाया उसके खिलाफ चालान पेश कर दिए हैं। लेकिन सच्चा सौदा प्रमुख को पंजाब लाने के सवाल पर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
राजनीति धर्म के पास आई: जत्थेदार
सुनवाई शुरू करते हुए जत्थेदार गड़गज ने कहा: “आज राजनीति धर्म के पास आई है। जब राजनीति धर्म के साथ चलती है तो इंसाफ होता है, लेकिन जब राजनीति अलग चलती है तो फिर अन्याय होता है।”
उन्होंने सभी को संबोधित करते हुए कहा: “हम सब गुरु भाई हैं। आपको लोगों ने पंजाब की सेवा का मौका दिया है। अब गुरु की छत्रछाया में बैठे हैं, इसलिए सब मर्यादित ढंग से अपनी बात करें।”
संधवां परिवार का इतिहास: पहले दादा अब पोता
यह सिख इतिहास में दूसरा मौका है जब एक ही परिवार के दो सदस्यों को अकाल तख्त ने तलब किया। करीब 42 साल पहले स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के दादा, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को ब्लू स्टार ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार मानते हुए तलब किया गया था। आज उन्हीं का पोता अकाल तख्त में पेश हुआ।
देखा जाए तो कुलतार सिंह संधवां पंजाब विधानसभा के पहले स्पीकर हैं जिन्हें अकाल तख्त ने तलब किया है। हालांकि वह ज्ञानी जैल सिंह के भाई के पोते हैं, लेकिन उन्हें जैल सिंह के पोते के रूप में ही जाना जाता है।
क्या है यह विवादित कानून
पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल 2026 को वैसाखी के दिन साल 2008 के पुराने एक्ट में संशोधन करके ‘जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026’ पास किया था। इस कानून में बेअदबी करने वालों के लिए उम्रकैद और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
CM भगवंत मान का तर्क है कि यह संगत की ही मांग थी कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए। लेकिन सवाल उठता है कि अगर मकसद सही था तो सिख धार्मिक संस्थाओं से राय क्यों नहीं ली गई?
विधायक जीवनजोत कौर की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
AAP की विधायक जीवनजोत कौर ने जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को ‘अकाल तख्त पर भारी बोझ’ बताया था। इस विवादित बयान पर जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि पेशी के दौरान उनसे इस मुद्दे पर भी चर्चा की जाएगी।
शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने इस बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जत्थेदार का पद पूरी सिख कौम के लिए पूजनीय है और किसी राजनीतिक नेता द्वारा आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अकाल तख्त की ताकत का इतिहास
श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है। इसकी स्थापना छठे गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी। 19वीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह को भी यहां तलब किया गया था और उन्हें 100 कोड़ों की सजा सुनाई गई थी।
1994 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री बूटा सिंह को यहां जूते साफ करने और बर्तन धोने की सजा मिली थी। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और हाल ही में सुखबीर सिंह बादल को भी यहां तनख्वाहिया मिली है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि अकाल तख्त के फैसले केवल धार्मिक नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति को भी प्रभावित करते हैं।
सरकार पर बढ़ेगा दबाव
अब AAP सरकार के लिए चुनौती यह है कि वह एक महीने में कानून में संशोधन कैसे करेगी। अकाल तख्त के आदेश को टालना संभव नहीं है। दूसरी ओर, विधानसभा में कानून फिर से पास करवाना और विपक्ष को संभालना भी आसान नहीं होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला 2027 के विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है।
मुख्य बातें (Key Points)
• श्री अकाल तख्त साहिब ने AAP सरकार के बेअदबी कानून में 5 बड़े एतराज गिनाए
• जत्थेदार ने सरकार को एक महीने में कानून में संशोधन का आदेश दिया
• कुछ AAP विधायकों ने माना कि उन्होंने कानून को बिना पढ़े साइन कर दिया
• SGPC और अकाल तख्त से पहले राय नहीं ली गई थी
• विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां पहले स्पीकर हैं जिन्हें अकाल तख्त ने तलब किया













