Mickey Mouse Ride Accident Solan : सोलन (हिमाचल प्रदेश)। रविवार की शाम एक मनोरंजक पल अचानक दहशत में बदल गया। हिमाचल प्रदेश के सोलन में चल रहे कौमी स्तर के शूलिनी मेले के आखिरी दिन थोडो ग्राउंड में लगे एक विशाल ‘मिकी माउस’ झूले की हवा निकल गई। इस हादसे में करीब 15 मासूम बच्चे भारी मलबे के नीचे दब गए।
देखा जाए तो यह एक बड़ी त्रासदी बनते-बनते रह गई। झूले के ऑपरेटर और उसका स्टाफ बच्चों को बचाने की बजाय टिकट काउंटर छोड़कर मौके से फरार हो गया। दिलचस्प बात यह है कि बच्चों की जान दो जागरूक पिताओं ने बचाई, वरना हादसा और भयानक हो सकता था।
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खुशियों का पल बन गया दहशत का मंजर
रविवार की शाम मेला अपने चरम पर था। सैकड़ों बच्चे विभिन्न झूलों का मजा ले रहे थे। उसी समय थोडो ग्राउंड में लगे एक विशाल ‘मिकी माउस’ नाम के इन्फ्लेटेबल झूले पर करीब 15 बच्चे खेल रहे थे। अचानक झूले की हवा निकलने लगी और देखते ही देखते यह विशाल संरचना पत्तों के महल की तरह ढह गई।
कुछ ही सेकंड में हंसते-खेलते बच्चे भारी सिंथेटिक मलबे और झूले के भार के नीचे दब गए। चारों ओर चीख-पुकार मच गई। माता-पिता अपने बच्चों को बचाने के लिए भागे। यह देखकर दिल दहल जाता है कि जिस झूले पर पल भर पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब उनकी चीखें सुनाई दे रही थीं।
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स्टाफ फरार, माता-पिता ने बचाई जानें
हादसे के बाद जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई वह यह थी कि झूले का ऑपरेटर और उसका पूरा स्टाफ मौके से गायब हो गया। उन्होंने बच्चों की मदद करने की बजाय टिकट काउंटर छोड़कर भागना बेहतर समझा।
ऊना निवासी राहुल कुमार, जिनका 4 साल का बेटा भी उस झूले पर था, ने बताया: “जैसे ही झूला गिरा, हर तरफ बच्चों की चीखें सुनाई दे रही थीं। मैं और प्रदीप कुमार तुरंत भागे और भारी मलबा हटाने लगे। हमने एक-एक करके 12 से 15 बच्चों को बाहर निकाला।”
अगर गौर करें तो राहुल कुमार और प्रदीप कुमार की सूझबूझ ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। मां-बाप का कलेजा मुंह को आ गया था। थोड़ी भी देरी होती तो छोटे बच्चों का दम घुट सकता था।
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100mm से ज्यादा बारिश ने नहीं, लापरवाही ने किया हादसा
हालांकि इस घटना का संबंध मौसम से नहीं था, लेकिन झूले की खराब क्वालिटी और रखरखाव की कमी जिम्मेदार थी। पीड़ित माता-पिता ने दोषी ठहराया कि यह पूरी तरह से संचालक की लापरवाही थी।
समझने वाली बात है कि ऐसे मेलों में लगने वाले झूलों की सुरक्षा जांच बेहद जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नगर निगम मोटी फीस लेकर इजाजत तो दे देता है, लेकिन सुरक्षा मानकों की जांच नहीं करता।
पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी क्यों की
पीड़ित माता-पिता ने रविवार शाम ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन एक दिन बीत जाने के बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई। यहां ध्यान देने वाली बात है कि माता-पिता ने आरोप लगाया कि पुलिस झूले के मालिक को बचाने की कोशिश कर रही है।
पीड़ितों की मांग है कि ऑपरेटर के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि मेले में लगे सभी झूलों की तकनीकी जांच हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
SP सोलन साईं दत्तात्रेय वर्मा ने कहा कि शिकायत मिली है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। लेकिन सवाल उठता है कि जांच में इतनी देरी क्यों?
सुरक्षा नियमों की पोल खुली
इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल दी है। नगर निगम इन झूलों को चलाने की इजाजत देने के बदले में मोटी फीस तो वसूलता है, लेकिन उसके पास न तो कोई तकनीकी विशेषज्ञ हैं और न ही सुरक्षा जांच के लिए पर्याप्त स्टाफ।
राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन चिंता का विषय है कि अगली बार इतनी किस्मत हो, यह जरूरी नहीं। देखा जाए तो यह एक बड़ी चेतावनी है प्रशासन के लिए।
क्या है शूलिनी मेला
शूलिनी मेला हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का एक प्रसिद्ध वार्षिक आयोजन है। यह कौमी स्तर का मेला है जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं। मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ मनोरंजन के कई साधन होते हैं।
इस साल मेला थोडो ग्राउंड में आयोजित किया गया था। यहां कई तरह के झूले, खेल और दुकानें लगी हुई थीं। लेकिन इस घटना ने पूरे मेले की खुशियों पर पानी फेर दिया।
मुख्य बातें (Key Points)
• सोलन के शूलिनी मेले में मिकी माउस झूला अचानक ढह गया
• करीब 15 बच्चे भारी मलबे के नीचे दब गए थे
• झूले का ऑपरेटर और स्टाफ मौके से फरार हो गया
• दो पिताओं ने सूझबूझ दिखाकर सभी बच्चों को बचाया
• 24 घंटे बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई, माता-पिता ने लगाए गंभीर आरोप













