Ukraine War के बाद रूसी नागरिकों में अपने राष्ट्रपति के लिए बढ़ा विश्वास! पुतिन की अप्रूवल रेटिंग बढ़कर 81.6 प्रतिशत हुई

The News Air: रूस (Russia) के सरकारी पोलस्टर रशियन पब्लिक ओपिनियन रिसर्च सेंटर (VTsIOM) ने शुक्रवार को एक सर्वे रिपोर्ट जारी की। इसमें बताया गया कि यूक्रेन पर आक्रमण (Ukraine Attack) के बाद से देश के नागरिकों में अपने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के लिए विश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। निष्कर्षों के अनुसार, 24 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से उनकी अप्रूवल रेटिंग (Approval Rating) 67.2 प्रतिशत से बढ़कर 81.6 प्रतिशत हो गई है।

VTsIOM ने कहा कि उसके लेटेस्ट सर्वे में 78.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पुतिन के कामों को सही माना। जबकि सर्वे में 64.3 प्रतिशत लोगों ने पुतिन के यूक्रेन पर हमले के फैसले का विरोध किया है। पहले 24.4 प्रतिशत नागरिकों ने उनके कामों को सही नहीं माना था, लेकिन अब यह संख्या घटकर 12.9 प्रतिशत रह गई है। सर्वे करने वालों ने कहा कि सर्वे के जवाब 28 मार्च से 4 अप्रैल के बीच इकट्ठा किए गए थे।

रॉयटर्स के अनुसार, VTsIOM का वर्तमान सर्वे 30 मार्च को इंडिपेंडेंट लेवाडा सेंटर के सर्वे की तरह ही है। इसमें पुतिन के कामों से समहत होने वाले रूसियों का रेश्यो फरवरी में 71 प्रतिशत से बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया।

2014 में जब रूस ने यूक्रेन से क्रीमिया प्रायद्वीप अपने कब्जा में लिया था, तो रूसी राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग में अच्छी खासी बढ़ोतरी देखी गई थी।

रूस में सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक

रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 फरवरी के बाद से, रूस ने विदेशी मीडिया और सोशल मीडिया तक पहुंच को और कम कर दिया है। इससे पहले यहां सरकारी नीति से हटकर चलने वाले कई मीडिया आउटलेट बंद कर दिए गए थे। पिछले महीने रूस ने फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और गूगल न्यूज सर्विस जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एक्सेस पर भी रोक लगा दी थी।

यूक्रेन पर रूस के इस हमले ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद से, अब तक का सबसे बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है। क्रेमलिन ने इसे एक “विशेष सैन्य अभियान” बताया है। साथ ही कहा कि इसका मकसद अपने पूर्व सोवियत पड़ोसी के वर्तमान शासन को खत्म करना है।

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNHCR के अनुसार, 43 लाख से ज्यादा यूक्रेनियन देश छोड़कर भाग गए हैं। 7.1 मिलियन आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं। भागे हुए शरणार्थियों ने यूक्रेन के पड़ोसी देशों, खासकर पोलैंड में शरण ली है।

अब तक क्या-क्या हुआ?

रूस और यूक्रेन के बीच अब तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक भी युद्ध रोकने का कोई फैसला नहीं हुआ। उनकी पिछली बातचीत के दौरान सबसे बड़ी सफलता यह मिली कि मॉस्को ने यूक्रेनी राजधानी कीव और चेर्निहाइव के आसपास से अपनी सेना को वापस लेने का वादा किया था। यह बातचीत 29 मार्च को तुर्की में आमने-सामने हुई थी।

हालांकि, इसके केवल चार दिन बाद, कीव के उत्तर-पश्चिम में स्थित यूक्रेनी शहर बुचा में कम से कम 20 लोगों के शव और 300 सामूहिक कब्रें मिलीं। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि पीछे हटने वाली रूसी सेना ने आम नागरिकों को मार डाला, लेकिन रूस ने लगातार दावों को खारिज कर दिया, उन्हें “झूठा प्रचार” करार दिया।

इन हत्याओं के बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ (EU) समेत अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने रूस के खिलाफ और भी ज्यादा प्रतिबंध लगा दिए। इससे पहले दिन में, यूरोपीय संघ ने पांचवें चरण के प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसमें रूसी कोयले के आयात पर प्रतिबंध और यूरोपीय बंदरगाहों पर उसके जहाजों को पहुंचने से रोकना शामिल था।

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