Illegal Mining Row: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रोपड़ जिले में सतलुज-स्वां नदी के संगम वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन के आरोपों का गंभीर संज्ञान लेते हुए रोपड़ के डिप्टी कमिश्नर को मौके का निरीक्षण करने और विस्तृत हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं।
29 मई को जारी आदेश में अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि कोई गैरकानूनी माइनिंग गतिविधि पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। देखा जाए तो यह आदेश अवैध खनन के खिलाफ एक सख्त कदम है।
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70 साल के बुजुर्ग की याचिका
यह निर्देश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच द्वारा रोपड़ जिले के तख्तगढ़ गांव के 70 वर्षीय निवासी प्रेम दत्त शर्मा की सिविल रिट पिटीशन की सुनवाई के दौरान दिए गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि एक आम नागरिक ने अपने क्षेत्र में हो रही अवैध गतिविधियों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। शर्मा ने अगापुर-आनंदपुर साहिब पुल के आसपास रेत, बजरी, पत्थर और अन्य नदी सामग्री की बड़े पैमाने पर गैरकानूनी निकासी को रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है।
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क्या हैं गंभीर आरोप?
पिटीशन में शर्मा ने आरोप लगाया है कि सतलुज और स्वां नदियों के संगम में और आसपास व्यापक खुदाई गतिविधियां की जा रही हैं। समझने वाली बात यह है कि इसके परिणामस्वरूप गंभीर पर्यावरणीय नुकसान हुआ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कवांवाली बेली नामक एक प्राचीन प्राकृतिक भू-आकृति नष्ट हो गई है, जो दोनों नदियों के बीच एक हाइड्रोलॉजिकल अवरोध के रूप में काम करती थी। यह प्राकृतिक संरचना नदियों के प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी।
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पर्यावरण मंजूरी के बिना खनन
पिटीशनकर्ता का दावा है कि यह माइनिंग गतिविधियां पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत नियामक प्राधिकरणों से आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना की जा रही हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह पर्यावरण कानूनों की सीधी उल्लंघना है और सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यावरण तथा पुल की संरचना के लिए खतरा पैदा करती है। अगर गौर करें तो पुल की नींव कमजोर होने से बड़ा हादसा भी हो सकता है।
स्थानीय लोगों की परेशानी
इसके अलावा शर्मा ने माइनिंग से संबंधित आवाजाही के कारण स्थानीय निवासियों को हो रही परेशानी का भी जिक्र किया। भारी लोड वाले ट्रकों द्वारा गांवों की तंग सड़कों का उपयोग करने से धूल, शोर प्रदूषण और सुरक्षा के खतरे पैदा हो रहे हैं।
और बस यहीं से शुरू होती है आम लोगों की असली मुसीबत। रात-दिन चलने वाले ट्रकों से न तो ठीक से सोया जा रहा है और न ही बच्चे सुरक्षित रूप से बाहर खेल सकते हैं।
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अदालत का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोट किया कि पिटीशनकर्ता द्वारा रिकॉर्ड पर फोटो पेश की गई हैं जो इन आरोपों का समर्थन करती हैं। बेंच ने रोपड़ के डिप्टी कमिश्नर को निरीक्षण करने और हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं।
इससे साफ होता है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से ले रही है। मामले की अगली सुनवाई 8 जून को होगी, जब अदालत जिला प्रशासन द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर विचार करेगी।
क्यों जरूरी है यह मामला?
यह मामला कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह दर्शाता है कि पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। दूसरा, यह साबित करता है कि एक आम नागरिक भी अगर दृढ़ संकल्प हो तो सिस्टम में बदलाव ला सकता है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण, यह अधिकारियों को जवाबदेह बनाने का एक तरीका है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध खनन पाए जाने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
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मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रोपड़ में अवैध खनन पर संज्ञान लिया
• सतलुज-स्वां नदी संगम पर बिना पर्यावरण मंजूरी के खनन का आरोप
• 70 वर्षीय प्रेम दत्त शर्मा की याचिका पर DC को निरीक्षण के आदेश
• कवांवाली बेली नामक प्राकृतिक संरचना नष्ट होने का आरोप, अगली सुनवाई 8 जून













